PCOS (PMOS) जैसी स्थिति होने पर महिला के लिए कंसीव करना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। तमाम ट्रीटमेंट और डाॅक्टर के दिशा-निर्देश का पालन करते हुए जब महिला कंसीव कर लेती है, तो उन्हें अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका शरीर काफी सेंसिटिव होता है और कंसीव करने के बाद भी मिसकैरेज का जोखिम बना रहता है। इस रिस्क को कम करने क लिए आप ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रख सकती हैं और बुरी आदतों को पूरी तरह छोड़ सकती हैं। यहां वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता आपको बता रही हैं कि किन-किन बातों का ध्यान रखा जाना आवश्यक है।
PCOS में गर्भ ठहरने के बाद किन बातों का ध्यान रखें?
What to keep in mind after conceiving with pcos 01 (1)
1. लो ग्लाइसेमिक फूड का सेवन करें
WHO के अनुसार, PCOS एक हार्मोनल संबंधी समस्या है, जो सीधे तौर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जो महिलाएं PCOS के बावजूद कंसीव करने में सफल हुई हैं, उन्हें लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फूड का सेवन अधिक करना चाहिए। इससे शुगर को मैनेज करने में मदद मिलती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
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2. प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह दूर रहें
डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "प्रोसेस्ड फूड भी ब्लड शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ा सकता है। PCOS की महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसी क्रम में उन्हें प्रेग्नेंसी के दौरान प्रोसेस्ड फूड से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए। वैसे भी प्रोसेस्ड फूड में काफी ज्यादा मात्रा में फैट होता है, जो कि शरीर की सूजन को बढ़ा सकता है। विशेषकर, PCOS के साथ-साथ जो महिलाएं जेस्टेशनल डायबिटीज से गुजर रही हैं, उन्हें प्रोसेस्ड फूड का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।"
3. ब्लड प्रेशर चेक करें
what causes blood pressure to go up in the morning 01 (1)
डॉ. शोभा गुप्ता की मानें, तो गर्भावस्था के दौरान PCOS से पीड़ित महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस और वजन अधिक होने के कारण प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर और पेशाब में प्रोटीन आना) का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि PCOS से पीड़ित महिलाओं को अपने शरीर में नजर आ रहे लक्षणों पर गौर करना चाहिए और नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करते रहना चाहिए। ब्लड प्रेशर के कुछ लक्षणों में चेहरे या हाथों पर अचानक सूजन, लगातार तेज सिरदर्द और धुंधला दिखाई देना शामिल हैं।
4. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
डॉ. शोभा गुप्ता आगे बताती हैं, "PCOS में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की सावधानियां बरतनी होती हैं। अगर डाॅक्टर ने आपको शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी है, तो रोजाना फिजिकल एक्टिविटी जरूर करें। इसमें वाॅकिंग, योग आदि शामिल है। इससे न सिर्फ शरीर सक्रिय रहता है, बल्कि ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे शिशु तक ऑक्सीजन सप्लाई बेहतर होती है।"
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5. मिसकैरेज से जुड़ी बातें समझें
Indian Journal of Endocrinology and Metabolism के अनुसार PCOS में मिसकैरेज का जोखिम काफी ज्यादा होता है। ध्यान रखें कि मिसकैरेज एक मेडिकल से जुड़ी एक जटिलता है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि कई बार खराब स्वास्थ्य के कारण मिसकैरेज हो सकता है। यह दुर्घटना किसी के साथ भी घट सकती है। इसलिए, बहुत जरूरी है कि PCOS से ग्रस्त प्रेग्नेंट महिलाएं इस संबंध में जरूरी जानकारी रखें। ध्यान रखें कि पहली तिमाही में मिसकैरेज का रिस्क सबसे ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें इस समयावधि में सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी है और ऐसा कुछ नहीं करना है, जिससे मिसकैरेज का जोखिम बढ़ सके।
6. नियमित रूप से दवा लें
PCOS से पीड़ित प्रेग्नेंट महिलाओं को कई तरह की दवाएं आदि लेनी पड़ती हैं, ताकि शिशु का विकास सही तरह से हो सके। इसलिए, बहुत जरूरी है कि महिलाएं अपनी किसी भी दवा को मिस न करें। डाॅक्टर के दिए दिशा-निर्देश अनुसार समय पर दवा लें। हां, अगर दवा लेने पर किसी भी तरह की शारीरिक समस्या का एहसास हो, तो बेहतर है कि आप तुरंत डाॅक्टर को अपनी समस्या बताएं और किस तरह की परेशानी हो रही है, इसकी सटीक जानकारी दें।
7. नियमित रूप से डाॅक्टर के पास जाएं
PCOS से पीड़ित महिलाओं को नियमित रूप से डाॅक्टर के पास जाना चाहिए, ताकि बच्चे के विकास की सटीक जानकारी मिल सके। इसके अलावा, महिला के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी होना आवश्यक है। वहीं, अगर महिला को किसी भी तरह की अंदरूनी समस्या हो रही है, तो इसका समय पर पता चल जाता है। इसलिए, प्रेग्नेंसी के दौरान महिला को कई बार अल्ट्रासाउंड करवाना होता है और अन्य जरूरी टेस्ट भी करने के लिए कहे जाते हैं।
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निष्कर्ष
PCOS से पीड़ित महिलाओं को कंसीव करने के बाद जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। उन्हें अपनी डाइट, जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों पर पूरी नजर रखनी चाहिए। इसके अलावा, डाॅक्टर जो भी सलाह दें, उन्हें फाॅलो करना चाहिए। ध्यान रखें कि PCOS से ग्रस्त महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी की जर्नी स्वस्थ प्रेग्नेंट महिलाओं की तुलना में अलग हो सकती है। ऐसा नहीं है कि इस दौरान महिला को स्वास्थ्य समस्याएं होना तय है, लेकिन सावधानी बरतना शिशु और मां दोनों के लिए फायदेमंद होता है।
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FAQ
क्या गर्भावस्था के दौरान PCOS में पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज फायदेमंद है?
हां, क्योंकि इससे पेल्विक फ्लोर में रक्त संचार बढ़ता है, गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और ये पीठ के निचले हिस्से के दर्द से भी राहत दिलाते हैं।क्या PCOS होने पर नॉर्मल डिलीवरी संभव है?
हां, PCOS होने के बावजूद नॉर्मल डिलीवरी पूरी तरह संभव है। हालांकि, यह महिला के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अगर वह प्रेग्नेंसी के दौरान फिट है, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर नियंत्रण में रहे, और मां व शिशु दोनों स्वस्थ हों, तो महिला की नॉर्मल डिलीवरी जो सकती है।
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Current Version
Sep 07, 2026 10:33 IST
Modified By : Meera Tagore Sep 07, 2026 10:33 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta
