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Medically Reviewed by Dr Tanima Singhal , Pregnancy Educator & Lactation Consultant

ब्रेस्ट मिल्क सप्लाई बढ़ाने के लिए खाएं ये 5 सीड्स, डॉक्टर से जानें

शिशु के लिए मां का दूध सबसे जरूरी होता है जो न सिर्फ शारीरिक विकास को बढ़ावा देता है बल्कि इम्यूनिटी भी बढ़ाता है। यहां जानिए, ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए सीड्स कौन से खाएं?

शिशु के लिए शुरुआती 6 महीनों में मां का दूध बहुत जरूरी होता है, जिससे उनकी इम्यूनिटी मजबूत होती है और शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होता है। हालांकि, कई महिलाओं को स्तनपान के दौरान कम दूध बनने की समस्या हो सकती है, जिससे शिशु को सही पोषण नहीं मिल पाता। कम दूध बनने की समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे हार्मोनल असंतुलन, सही डाइट की कमी, तनाव, नींद की कमी या शारीरिक कमजोरी। ऐसे में कुछ नेचुरल तरीकों से बेस्ट मिल्क को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। खासतौर पर कुछ सुपर सीड्स (बीज) का सेवन करने से स्तनपान कराने वाली महिलाओं को फायदा मिल सकता है। इस लेख में लखनऊ के मा-सी केयर क्लीनिक की आयुर्वेदिक डॉक्टर और स्तनपान सलाहकार डॉ. तनिमा सिंघल (Dr. Tanima Singhal, Pregnancy educator and Lactation Consultant at Maa-Si Care Clinic, Lucknow) से जानिए, ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए सीड्स कौन से खाएं?

ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए सीड्स - Which Seeds Increase Breast Milk

1. मेथी के बीज – Natural Galactagogue

मेथी के बीज को स्तनपान के लिए एक प्राकृतिक गैलैक्टागॉग माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, मेथी के बीज शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाते हैं, जिससे स्तनपान में मदद मिलती है। यह बीज द्रव संतुलन को बनाए रखते हैं और ब्रेस्ट मिल्क को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा, मेथी के बीज में फाइबर और आयरन भी होते हैं, जो मां के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

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2. सौंफ के बीज – Supports digestion and milk flow

सौंफ के बीज न केवल पाचन के लिए फायदेमंद होते हैं, बल्कि यह दूध के प्रवाह को भी बढ़ाते हैं। आयुर्वेद में सौंफ को ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने वाली औषधि माना गया है। यह मां के शरीर में दूध के उत्पादन को उत्तेजित करता है और शिशु के पेट में भी आरामदायक महसूस कराता है। इसके अलावा, सौंफ में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं।

Which seeds increase breast milk

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3. चिया के बीज – Rich in omega-3 and hydration

चिया के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होते हैं। यह न केवल दूध उत्पादन को बढ़ाते हैं, बल्कि शरीर में हाइड्रेशन भी बनाए रखते हैं, जो स्तनपान में जरूरी होता है। चिया सीड्स को डाइठ में शामिल करने से ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है और शरीर में एनर्जी की कमी नहीं होती, जिससे स्तनपान में मदद मिलती है।

4. तिल के बीज – High in calcium for milk production

तिल के बीज विशेष रूप से कैल्शियम से भरपूर होते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। तिल में प्रोटीन और फास्फोरस भी होता है, जो दूध उत्पादन के लिए मददगार होते हैं। इसके अलावा, तिल के बीज शरीर को गर्म रखते हैं, जो खासकर ठंडे मौसम में फायदेमंद होते हैं। आयुर्वेद में तिल को पाचन और स्तनपान बढ़ाने के लिए आदर्श माना गया है।

5. अलसी के बीज – Balances hormones for better lactation

अलसी के बीज में ओमेगा-3 फैटी एसिड, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोएस्ट्रोजेन्स होते हैं, जो महिलाओं के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखते हैं। यह बीज विशेष रूप से दूध उत्पादन को बढ़ाने में मदद करते हैं और स्तनपान के दौरान महिलाओं को स्वस्थ बनाए रखते हैं। अलसी के बीज शरीर में नमी बनाए रखते हैं, जिससे स्तनपान की प्रक्रिया आसान हो जाती है।

निष्कर्ष

स्तनपान की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए उपरोक्त सभी सीड्स नेचुरल और प्रभावी विकल्प (How to increase breastmilk supply) हैं। हालांकि, किसी भी बीज का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है, खासकर यदि किसी महिला को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या हो। सही डाइट और नियमित एक्सरसाइज के साथ, इन सीड्स का सेवन लाभकारी हो सकता है।

 

 

 

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Akanksha Tiwari

Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 11, 2025 18:59 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Mar 11, 2025 18:59 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Tanima Singhal

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