Placental Abruption: प्लेसेंटल एब्रप्शन एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें गर्भनाल समय से पहले ही गर्भाशय की परत से अलग हो जाता है। गर्भनाल का समय से पहले गर्भाशय से अलग होना कितना घातक हो सकता है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि, यह दुर्लभ मामलों में ही दिखता है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्लेसेंटल एब्रप्शन शिशु के लिए जानलेवा स्थिति है, इसलिए यह समस्या होते ही तुरंत डाॅक्टर के पास जाना चाहिए। अगर आप यह नहीं समझ पा रहे हैं कि प्लेसेंटल एब्रप्शन को मेडिकल इमरजेंसी क्यों कहते हैं, तो इस लेख को जरूर पढ़ें। इस संबंध में विस्तार से जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से बात की।
प्लेसेंटल एब्रप्शन क्यों है मेडिकल इमरजेंसी?

NIH (National Library Of Medicine) के अनुसार प्लेसेंटल एब्रप्शन सिर्फ शिशु के लिए ही नहीं, मां के लिए भी घातक स्थिति है। यहां हम एक-एक कर समझेंगे कि इसे मेडिकल इमरजेंसी क्यों कहा जाता है?
शिशु के लिए
ऑक्सीजन की कमीः जैसे ही डिलीवरी से पहले गर्भनाल गर्भाशय की परत से अलग होती है, तो सबसे पहले शिशु को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है या बहुत कम हो सकता है। इसका अस्थायी रूप से शिशु के दिमाग पर असर पड़ सकता है। ऑक्सीजन शिशु का लाइफलाइन है। इसकी कमी के कारण शिशु की जान तक जा सकती है। साल 2024 में British Journal of Anaesthesia Education के अनुसार, प्लेसेंटल एब्रप्शन मां और बच्चे दोनों के लिए एक जानलेवा स्थिति है, जिसका सटीक अनुमान लगाना काफी कठिन होता है।
समय से पहले जन्मः प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर प्री-टर्म डिलीवरी हो सकती है। दरअसल, गर्भाशय से गर्भनाल का अलग होना ही इस बात का संकेत है कि गर्भ में पल रहे शिशु को अब किसी भी तरह से ऑक्सीजन या पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं। चूंकि, ऐसी स्थिति शिशु के लिए जानलेवा हो सकती है, इसलिए स्थिति बिगड़ने पर बच्चे की समय से पहले डिलीवरी करानी पड़ सकता है।
कमजोर विकासः साल 2025 में जर्नल BMC Pregnancy and Childbirth में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, अगर गर्भनाल गर्भाशय से पूरी तरह अलग न हो और लंबे समय से यह स्थिति बनी रहे, तो गर्भ में शिशु का सही तरह से विकास नहीं हो पाता और डिलीवरी के समय उसका वजन बहुत कम होता है।
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गर्भवती महिला के लिए
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हैवी ब्लीडिंग होनाः प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर गर्भवती महिला को हैवी ब्लीडिंग हो सकती है। यह स्थिति काफी गंभीर है, क्योंकि जब शरीर से बहुत ज्यादा खून बह जाता है, तो मरीज गहरे शॉक में जा सकती है। यह जानलेवा भी हो सकता है।
थक्के जमने की समस्याः डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "प्लेसेंटल एब्रप्शन के कारण शरीर में खून के थक्के बनने और जमने का सिस्टम पूरी तरह बिगड़ सकता है, जिससे अंदरूनी ब्लीडिंग रोकने में बहुत मुश्किल आती है।"
ऑर्गन पर असरः प्लेसेंटल एब्रप्शन इतना घातक है कि यह समस्या होते ही शरीर के कई ऑर्गन अपना काम सही तरह से नहीं कर पाते हैं। दरअसल, बहुत ज्यादा खून बहने के कारण शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे किडनी तक खून नहीं पहुंच पाता है। इससे किडनी या शरीर के अन्य जरूरी अंग फेल हो सकते हैं।
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प्लेसेंटल एब्रप्शन के लक्षण- Placental Abruption Warning Signs
ब्लीडिंग होनाः आमतौर पर पहली तिमाही के बाद डिलीवरी होने तक महिला को ब्लीडिंग नहीं होती है। अगर ऐसा होता है, तो यह किसी न किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर भी महिला को ब्लीडिंग हो सकती है। StatPearls के अनुसार, प्लेसेंटल एब्रप्शन में कभी-कभी खून बिल्कुल भी बाहर नहीं आता, क्योंकि वह अंदर गर्भनाल के पीछे जमा हो जाता है।
- पेट और कमर में दर्द: प्रेग्नेंसी के दौरान अगर किसी भी स्टेज में पेट या कमर में अचानक तथा तीव्र दर्द उठे, तो इसे जरा भी हल्के में न लें। प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर भी इसी तरह दर्द का एहसास होता है।
- गर्भाशय में बदलावः प्लेसेंटल एब्रप्शन में गर्भाशय अचानक बहुत सख्त, कड़क हो जाता है और पेट के ऊपरी हिस्से में हाथ लगाने पर महिला को तीव्र दर्द महसूस हो सकता है।
- लेबर पेन होनाः अगर अचानक लेबर पेन होने लगे, दर्द के दौरान ऐंठन महसूस हो, तो यह भी गंभीर संकेत है। ध्यान रखें कि प्लेसेंटल एब्रप्शन में दर्द रुकता नहीं है। यह दर्द आता-जाता महसूस हो सकता है।
- शिशु को परेशानीः प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर गर्भ में पल रहे शिशु की गतिविधियां भी प्रभावित होने लगती हैं, जैसे पेट में बच्चे की हलचल अचानक बहुत कम हो जाती है और उसकी धड़कन भी असामान्य होने लगती है। American Journal of Perinatology के अनुसार प्लेसेंटल एब्रप्शन के कारण जन्म के बाद के शुरुआती समय के अलावा भी बच्चे में सेरेब्रल पाल्सी जैसी लॉन्ग टर्म न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का जोखिम बना रहता है।
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प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर डाॅक्टर के पास कब जाएं?
जैसा कि इसका जिक्र हमने लेख के शुरू में भी किया था कि प्लेसेंटल एब्रप्शन एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसलिए, प्लेसेंटल एब्रप्शन होते ही तुरंत डाॅक्टर के पास जाना चाहिए। इसके कुछ लक्षणों और संकेतों का जिक्र हमने किया है। इसके अलावा, अगर आप नोटिस करें कि पेट में तीव्र दर्द उठ रहा है, जिसे सहा नहीं जा सकता है, गर्भ में शिशु की मूवमेंट बहुत ज्यादा कम हो गई है, पीठ में दर्द का एहसास हो रहा है, बार-बार संकुचन का एहसास हो रहा है और हैवी ब्लीडिंग हो, तो तुरंत डाॅक्टर के पास जाएं।
निष्कर्ष
प्लेसेंटल एब्रप्शन एक गंभीर और जानलेवा कंडीशन है। इसका साफ-साफ मतलब है कि गर्भाशय से गर्भनाल अलग हो गई है। ऐसे में शिशु तक उसके जीवित रहने के लिए बुनियादी जरूरत यानी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है। इसका मतलब है कि इस स्थिति का पता चलते ही उन्हें जल्द से जल्द अपने करीबी अस्पताल में ले जाएं और वहां उनकी जांच करवाएं। डाॅक्टर जरूरत के अनुसार शिशु की प्री-मैच्योर डिलीवरी कर सकते हैं।
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FAQ
क्या पेट पर चोट लगने से प्लेसेंटल एब्रप्शन हो सकता है?
हां, गर्भावस्था के दौरान एक्सीडेंट या पेट पर चोट लगने के कारण यह समस्या हो सकती है।क्या पहले से सी-सेक्शन होने के कारण प्लेसेंटल एब्रप्शन का खतरा बढ़ जाता है?
विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर गर्भाशय पर किसी भी तरह के पुराने निशान है, तो प्लेसेंटल एब्रप्शन का रिस बढ़ जाता है।क्या प्लेसेंटल एब्रप्शन होने पर नॉर्मल डिलीवरी संभव है?
अगर स्थिति हाथ से निकल गयी है, तो डॉक्टर नॉर्मल डिलीवरी का रिस्क नहीं लेते हैं। ज्यादातर मामलों में तुरंत इमरजेंसी सी-सेक्शन ही किया जाता है।
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Jul 22, 2026 15:04 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 22, 2026 15:04 IST
Modified By : Meera TagoreJul 22, 2026 15:04 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta