जब भी हम दिल की बीमारियों की बात करते हैं, तो रक्त धमनियों के सख्त होने की बात भी कही जाती है। आमतौर पर धमनियों के सख्त होने पर ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कतें आती हैं, जिसकी वजह से हार्ट को ब्लड पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। बहरहाल, सवाल ये है कि आखिर धमनियों का सख्त होने का क्या मतलब होता है? क्या यह किसी समस्या की ओर इशारा करता है? आइए, जानते हैं कि इस संबंध में Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar का क्या कहना है।
धमनियां सख्त होने का क्या मतलब है?
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धमनियों का सख्त होने का मतलब रक्त वाहिकाओं विशेषकर महाधमनी यानी एओर्टा के लचीलेपन में कमी आना है। इस बारे में डॉक्टर बताते हैं कि आमतौर पर रक्त प्रवाह के लिए धमनियों का लचीला होना जरूरी होता है, लेकिन धमनियां सख्त होने पर दिल को अधिक ताकत लगाते हुए ब्लड पंप करना पड़ता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हृदय की मांसपेशियां मोटी हो सकती हैं, जिससे हमारे अंगों को गंभीर नुकसान हो सकता है। साल 2025 में Nature में प्रकाशित जर्नल आर्टिकल के अनुसार, जब रक्त वाहिकाएं, खासकर महाधमनी, अपना लचीलापन खो देती हैं और कठोर हो जाती हैं, तो इसे ही धमनियों का सख्त होना कहा जाता है। ऐसे में दिल को पंप करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जो कि हाई ब्लड प्रेशर, दिल की मांसपेशियों का मोटा होना और किडनी, आंखों व दिमाग जैसे शरीर के मुख्य अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
हृदय स्वास्थ्य के लिए धमनियां सख्त होना क्यों खतरनाक है?
इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर धमनियां सख्त होती हैं, तो इसकी वजह से हार्ट को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके कई नुकसान हो सकते हैं, जैसे-
दिल पर अतिरिक्त दबाव
धमनियां सख्त होने के कारण उनका लचीलापन बहुत कम हो जाता है। इसलिए, जब दिल खून को पंप करता है, तो पूरे शरीर में रक्त का प्रवाह स्मूद तरीके से नहीं हो पाता है। ऐसे में दिल को ब्लड पंप करने के लिए बहुत ज्यादा ताकत लगानी पड़ती है। ऐसे में शरीर में ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिससे शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन और न्यूट्रिएंट्स नहीं पहुंच पाते हैं।
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दिल की मांसपेशियों का मोटा होना
Dr. Deebanshu Gupta बताते हैं, "चूंकि, धमनियां सख्त होने की वजह से दिल को ब्लड पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, इस वजह से दिल की मांसपेशियां मोटी और बड़ी हो जाती हैं। नतीजतन, दिल की काम करने की क्षमता कम हो जाती है और भविष्य में हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।" साल 2024 में Journal Of Korean Medical Science (JKMS) में प्रकाशित मेडिकल रिसर्च पेपर के अनुसार धमनियों का यह कड़ापन हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज (मधुमेह) और मोटापे जैसी बीमारियों के असर को और ज्यादा बढ़ा देता है। ऐसे लोगों में दिल की मांसपेशियां मोटी हो जाती हैं, जिससे दिल की हालत तेजी से बिगड़ती है।
ब्लड फ्लो में बाधा
दिल तभी सही तरह से ब्लड पंप कर पाता है, जब धमनियां स्वस्थ होती हैं और मांसपशियां लचीली होती हैं। विशेषज्ञ समझाते हैं कि धमनियां अपने लचीलेपन के कारण सिकुड़ती और रिलैक्स होती है। अगर धमनियां सख्त हो जाती हैं, तो ब्लड फ्लो के दौरान यह प्रक्रिया बाधित होती है, जिससे दिल की मांसपेशियों को सही मात्रा में खून नहीं मिल पाता है। अगर कोई हार्ट का मरीज है, तो यह स्थिति उनके लिए और भी घातक हो सकती है।
छोटी नसों को नुकसान
धमनियां सख्त होने के कारण खून नसों में बहुत तेज दबाव और झटके के साथ बहता है। साल 2016 में American Heart Association में प्रकाशित एडिटोरियल आर्टिकल के अनुसार, सामान्य तौर पर, बड़ी धमनियां दिल से निकलने वाले खून के झटके (पंपिंग प्रेशर) को सोख लेती हैं और छोटी नसों तक खून को आराम से पहुंचाती हैं, लेकिन धमनियों के सख्त होने के बाद स्थिति बदल जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, जो कि दिमाग, किडनी और खुद दिल की बेहद नाजुक और छोटी नसों को नुकसान पहुंचाता सकता है। ध्यान रखें कि इसकी वजह अंगों का स्वास्थ्य भी बिगड़ता है, जिससे कि उनके फंक्शन पर असर पड़ सकता है, जो कि समग्र स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।
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धमनियां सख्त होने के कारण
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धमनियां सख्त होने के पीछे कई कारण हैं। इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इनके कारण इस प्रकार हैं-
- धमनियां सख्त होने के कारण नसें ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसा कई बार धमनियों के अंदर फैट और प्लाक जमने से होता है, जिससे नसें सख्त होने के साथ-साथ संकुचित हो जाती हैं।
- अगर किसी को लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर है, तो नसों की दीवारों पर दबाव बढ़ता है, जिससे इसकी ताकत और लचीलापन कम होने लगता है।
- मेटाबॉलिक समस्याएं जैसे टाइप 2 डायबिटीज और मोटापा भी धमनियों के कड़ेपन के लिए जिम्मेदार हैं। असल में, इस तरह की स्थिति में शरीर में सूजन आ जाती है, जो कि नसों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाती हैं।
- धमनियों के सख्त होने के पीछे खराब जीवनशैली एक बड़ा कारण है। विशेषकर, जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं होते हैं और अच्छी डाइट फॉलो नहीं करते हैं, उन्हें यह समस्या अधिक होती है।
- कई बार क्राॅनिक स्ट्रेस भी धमनियों को सख्त बना देते हैं। दरअसल, तनाव की वजह से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे नसों में सूजन आ जाती है। बता दें कि नसों के लचीलेपन को बनाए रखने के लिए नाइट्रिक ऑक्साइड की जरूरत होती है, तनाव की वजह से इसके स्तर में कमी आने लगती है। इसके बिना नसें आसानी से फैल नहीं पाती हैं।
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धमनियां सख्त होने के लक्षण
आमतौर धमनियां सख्त होने पर किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते हैं। इसलिए, शुरुआती चरण में इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। जब ब्लड फ्लो बाधित होने लगता है और ब्लड प्रेशर का स्तर बदलते लगता है, तब जाकर इस समस्या की जानकारी मिलना शुरू हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि धमनियों के कारण शरीर के कई मुख्य अंगों पर प्रभाव पड़ता है, जैसे-
- हृदयः सीने में दर्द, जकड़न, सांस लेने में तकलीफ और हृदय का असामान्य तरीके से धड़कना।
- मस्तिष्कः अचानक कमजोरी, सुन्नपन, बोलने में दिक्कत, मुंह से लार टपकना और अचानक नजर कमजोर होना।
- पैरः आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन यह सच है कि धमनियों के सख्त होने पर पैरों पर इसका असर पड़ता है। पैरों में दर्द, अकड़न, जांघों में तकलीफ, चलने-फिरने में दिक्कत आदि समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
धमनियां सख्त होने पर क्या करें?
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धमनियां सख्त होने पर इस स्थिति को नजरअंदाज न करें। जीवनशैली से संबंधित कुछ जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं, जैसे-
- नियमित रूप से एक्सरसाइज करें। हार्ट हेल्थ के लिए एरोबिक ट्रेनिंग। सप्ताह में दो से तीन बार स्ट्रेचिंग वर्कआउट किया जाना अच्छा होता है।
- डाइट में जरूरी बदलाव करें। जंक और प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह दूरी बना लें और एंटीऑक्सीडेंट, ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसी चीजों का सेवन करें। हार्ट के लिए नमक और शुगर भी नुकसानदायक होते हैं।
- धमनियां सख्त हो जाए, तो स्मोकिंग और शराब के सेवन भी बंद कर दें। असल में तंबाकू के सेवन से धमनियों पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे आर्टरी वॉल्स (Walls) अधिक कड़ी हो जाती हैं।
- धमनियां को लचीला बनाने के तनाव के स्तर में कमी करना भी जरूरी होता है। एक्सपर्ट के अनुसार तनाव के कारण कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो नसों को नुकसान पहुंचा सकती है। तनाव कम करने के लिए माइंडफुल एक्टिविटी या मेडिटेशन करें।
- दिल स्वस्थ रहे और धमनियां लचीली बनी रहें, इसके लिए आवश्यक है कि आप रोजाना 7-8 घंटे की गहरी और अच्छी नींद लें। नींद में सेल्स खुद को रिपेयर करते हैं, जो कि हार्ट हेल्थ में भी सुधार के लिए जरूरी है।
निष्कर्ष
धमनियां सख्त होना, हार्ट हेल्थ के लिए बिल्कुल सही नहीं है। हमेशा यही कोशिश होनी चाहिए कि धमनियां लचीली हों। हालांकि, कभी वर्क कल्चर की वजह से या खराब जीवनशैली की वजह से धमनियों पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित हो सकता है, नसों को नुकसान पहुंच सकता है। यह हार्ट के लिए ही नहीं, समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अगर आपको हार्ट से संबंधित कोई भी समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
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FAQ
धमनियों के सख्त होने (Arterial Stiffness) और एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) में क्या अंतर है?
आर्टेरियल स्टिफनेस धमनियों की दीवारों का लचीलापन खो देना है, जो कि अक्सर उम्र बढ़ने या हाई बीपी से होता है, जबकि एथेरोस्क्लेरोसिस एक कंडीशन है, जहां धमनियों के अंदर फैट, कोलेस्ट्रॉल और प्लाक जमा हो जाता है, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है। ये दोनों समस्याएं एक-दूसरे को बढ़ावा देती हैं।क्या नमक का सीधा संबंध धमनियों के सख्त होने से है?
खाने में ज्यादा नमक यानी सोडियम खाने से शरीर में पानी रुकता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जो धमनियों की दीवारों को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा सकती है।
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Jul 15, 2026 19:02 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta