Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

डायबिटीज का इलाज न कराने के क्या नुकसान हो सकते हैं? डॉक्टर से जानें

अगर डायबिटीज का इलाज न किया जाए, तो इससे गंभीर समस्‍याएं हो सकती हैं, जिनमें हृदय रोग, स्ट्रोक, नसों को नुकसान और किडनी फेलियर शामिल हैं और कुछ मामलों में ये जानलेवा भी हो सकता है। 

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स्‍वस्‍थ रहने के ल‍िए शुगर लेवल को कंंट्रोल करना जरूरी है। शुगर लेवल कंट्रोल करने के ल‍िए समय पर इलाज की जरूरत होती है। अगर आपको डायब‍िटीज है और आप समय पर इसका इलाज न कराएं, तो बार-बार पेशाब आना, बहुत ज्‍यादा प्यास लगना, वजन कम होना या बढ़ना, थकान और धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं होती हैं। समय के साथ, भले ही लक्षण हल्के लगें, लेकिन ये लक्षण हार्ट, किडनी, द‍िमाग, आंखों और ब्‍लड वेसल्‍स को अंदरूनी नुकसान पहुंचाते रहते हैं। अगर डायबिटीज का इलाज न किया जाए, तो इससे दिल की बीमारि‍यां, स्ट्रोक, किडनी फेलियर, न्यूरोपैथी जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। डायब‍िटीज का इलाज न होने के खतरों के बारे में जानने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City, Hyderabad से बात की।

डायब‍िटीज का इलाज न होने के खतरे

American Diabetes Association के मुताब‍िक, डायबिटीज के कारण शरीर का लगभग हर हिस्सा प्रभावित हो सकता है ज‍िसमें दिमाग, हार्ट, त्वचा, किडनी, नसें और कान शामिल हैं। डायबिटीज के कारण कुछ मामलों में, जानलेवा समस्‍याएं हो सकती हैं जैसे-

1. हृदय रोग

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि डायब‍िट‍िक लोगों में हृदय रोग (CVD) मृत्यु का प्रमुख कारण है। डायब‍िट‍िक मरीजोंं को कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक, हार्ट फेल‍ियर जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।

2. स्‍ट्रोक

डायब‍िटीज के मरीजों को सामान्‍य लोगों के मुकाबले स्‍ट्रोक होने का खतरा दोगुना होता है। जब दिमाग की नसों में ब्‍लड क्‍लॉट बन जाता है या नसें ब्‍लॉक हो जाती हैं, तो द‍िमाग तक ऑक्‍सीजन नहीं पहुंच पाता और कोश‍िकाएं डैमेज होने लगती हैं और इसे स्‍ट्रोक कहते हैं।

3. क्रॉनिक किडनी डिजीज

डायबिटीज, क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) का सबसे बड़ा कारण है। जेनेटिक्स, शुगर लेवल का कंट्रोल और ब्लड प्रेशर जैसे कारक, क्रॉनिक किडनी डिजीज होने के जोखिम को प्रभावित करते हैं।

4. डायबिटिक कीटोएसिडोसिस

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (Diabetic ketoacidosis) एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर में इंसुलिन की कमी होने पर फैट टूटकर कीटोन (एक तरह का एस‍िड) बनाता है और खून में एसिड बढ़ जाता है। इसमें मरीज को कमजोरी, उल्टी, सांस की समस्‍या और बेहोशी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।

5. अंधापन

डायब‍िटीज का इलाज न कराने पर लंबे समय तक हाई शुगर आंखों की रेटिना की बारीक नसों को नुकसान पहुंचाती है। इससे रेटिना की नसें लीक या ब्लॉक हो जाती हैं। आंख में सूजन और ब्‍लीड‍िंग हो सकती है। धीरे-धीरे रेटिना डैमेज हो जाता है और देखने की क्षमता कम हो जाती है।

6. बहरापन

शुगर लेवल ज्‍यादा रहने से ब्लड वेसल्स डैमेज हो सकती हैं। इससे धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम हो सकती है। American Diabetes Association के मुताब‍िक, प्री-डायबिटीज वाले लोगों में सुनने की क्षमता कम होने की दर, सामान्य लोगों की तुलना में 30 प्रतिशत ज्‍यादा होती है।

7. नर्व डैमेज

न्यूरोपैथी (नसों को नुकसान) से डायबिटीज के कारण होने वाली आम समस्‍या है। ज्यादा शुगर लेवल के कारण ब्लड वेसल्स डैमेज हो सकती हैं ज‍िससे नसों तक ऑक्सीजन और पोषण कम पहुंचता है। ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुल‍ित रखकर इससे बचाव संभव है।

8. पैरों की समस्‍याएं

हाई शुगर लेवल नसों और ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंचाता है। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन खराब होता है और पैरों में घाव या अल्सर हो सकता है। गंभीर मामलों में अंग काटने तक की नौबत आ सकती है।

9. त्‍वचा की समस्‍याएं

डायब‍िटीज का इलाज न करने पर बैक्‍टीर‍ियल और फंगल इंफेक्‍शन, खुजली, घाव धीरे-धीरे भरना, ड्राई स्‍क‍िन, काले धब्‍बे ((Acanthosis Nigricans) जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। अगर समय रहते पता चल जाए, तो त्वचा की ज्‍यादातर समस्याओं से बचना संभव है।

10. ओरल समस्‍याएं

डायब‍िटीज में जिंजिवाइटिस (मसूड़ों की शुरुआती बीमारी) और पीरियोडोंटाइटिस (मसूड़ों की गंभीर बीमारी) दोनों का ज्‍यादा खतरा होता है। रेगुलर चेकअप करवाकर मसूड़ों और ओरल हेल्‍थ की समस्‍याओं के खतरे को कम कर सकते हैं।

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डायब‍िटीज में इमरजेंसी की स्‍थि‍त‍ि कब बनती है?

  • जब शुगर लेवल ज्‍यादा (Hyperglycemia) हो, तो तेज प्यास, बार-बार पेशाब, उल्टी, पेट दर्द
  • सांस तेज होना या बेहोशी की स्‍थ‍ित‍ि हो सकती है।
  • शुगर लेवल कम होने (Hypoglycemia) पर चक्कर, पसीना, कंपकंपी, घबराहट, बेहोशी या दौरा पड़ सकता है।
  • इन दोनों ही स्‍थ‍ित‍ि‍यों में इंतजार न करें और तुरंत डॉक्‍टर के पास जाकर इलाज कराएंं।

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डायब‍िटीज का इलाज न कराने पर मौत हो सकती है?

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि डायबिटीज का सही इलाज और शुगर लेवल को कंट्रोल न किया जाए, तो कुछ स्‍थ‍ित‍ियोंं में यह बीमारी जानलेवा साब‍ित हो सकती है। जैसे-

  • हाई शुगर लेवल के कारण क‍िडनी फेल‍ियर से मरीज की जान जा सकती है।
  • शुगर लेवल असंतुल‍ित होने से हार्ट या स्‍ट्रोक जैसी जानलेवा स्‍थ‍ित‍ि बन सकती है।
  • डायबिटिक कीटोएसिडोसिस एक गंभीर स्‍थ‍िति‍ है जि‍समें कीटोन नामक एस‍िड खून में बढ़ जाता है। यह एक मेड‍िकल इमरजेंसी होती है।
  • दिल का दौरा, स्ट्रोक और अचानक होने वाली हृदय-संबंधी घटनाओं की संभावना बढ़कर जानलेवा स्‍थ‍ित‍ि पैदा कर सकती है।
  • Endocrine Society के मुताब‍िक, डायबिटीज के मरीजों में बहुत ज्‍यादा शुगर लेवल और लो ब्लड शुगर लेवल, दोनों ही स्‍थ‍ित‍ियां जानलेवा साबि‍त हो सकती हैं।

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डायब‍िटीज का इलाज न कराने की जट‍िलताएं

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American Heart Association के मुताब‍िक, डायबिटीज का शरीर पर असर धीरे-धीरे होता है और अक्सर बिना पता चले ही बढ़ता रहता है। समय के साथ, ब्‍लड में ज्‍यादा ग्‍लूकोज होने से कई अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। डायब‍िटीज के कारण कई जट‍िलताएं हो सकती हैं। ये समस्याएं मुख्य रूप से तभी होती हैं, जब डायब‍िटीज का इलाज न किया जाए-

हार्ट और ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान

टाइप 2 डायबिटीज से हार्ट ड‍िजीज, एथेरोस्क्लेरोसिस (नसों में फैट जमने से होने वाला रोग), स्ट्रोक, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और क्रॉनिक किडनी डिजीज जैसी जटिलताएं होने का खतरा बढ़ सकता है।

नसों को नुकसान

ब्‍लड में शुगर का स्‍तर ज्‍यादा होने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है इस स्थिति को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इससे उंगलियों, हाथों, पैरों की उंगलियों और पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट, जलन या तेज दर्द हो सकता है।

किडनी को नुकसान

डायबिटीज किडनी की कार्यक्षमता को इस तरह नुकसान पहुंचा सकती है कि वे ठीक से काम करना बंद कर देती हैं, जिसके लिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। डायलिसिस एक ऐसी प्रक्रिया है जो ब्‍लड से वेस्‍ट प्रोडक्‍ट्स और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकाल देती है।

आंखों को नुकसान

डायबिटीज में असंतुल‍ित शुगर लेवल के कारण आंखों में खून की नसों और लेंस को नुकसान पहुंच सकता है। इससे ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी बीमारियां हो सकती हैं और आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

पैरों को नुकसान

लंबे समय तक हाई शुगर के कारण पैरों की नसों और खून की नसों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इस नुकसान की वजह से पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट, दर्द या महसूस करने की क्षमता खत्म हो सकती है। छोटी-मोटी चोट और फफोलों से अल्सर, इंफेक्‍शन और गंभीर मामलों में पैर काटने की नौबत भी आ सकती है।

त्वचा और मुंह से जुड़ी समस्याएं

डायबिटीज से त्वचा में इंफेक्‍शन, मुंह में इंफेक्‍शन और मसूड़ों की बीमारी होने का खतरा बढ़ सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों को ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा ज्‍यादा होता है। ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी बीमारी है जिससे आपकी हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया

शुगर लेवल कंट्रोल न करने से या डायब‍िटीज का इलाज न कराने से अल्‍जाइमर या ड‍िमेंश‍िया होने का खतरा बढ़ सकता है। 2024 में Diabetes Research And Clinical Practice नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, जिन लोगों को ज्‍यादा उम्र (65 से 75+ साल) में डायबिटीज होती है, उनमें डिमेंशिया का खतरा ज्यादा पाया गया।

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डायब‍िटीज को कंट्रोल करने के ल‍िए कैसी डाइट लें?

  • Mayo Clinic के मुताब‍िक, कार्ब्स का ब्लड शुगर लेवल पर सबसे ज्‍यादा असर होता है ऐसा इसल‍िए होता है क्‍योंक‍ि शरीर कार्ब्स को तोड़कर शुगर में बदल देता है, जिससे ब्लड शुगर का लेवल बढ़ जाता है।
  • रिफाइंड और ज्‍यादा प्रोसेस किए गए कार्ब्स कम खाएं। इनमें सफेद ब्रेड, सफेद चावल, मीठे सीरियल, केक, कुकीज, कैंडी और चिप्स शामिल हैं।
  • लो-फैट और लो-कैलोरी फूड चुनें।
  • पोर्शन साइज कंट्रोल करें।
  • फाइबरयुक्त भोजन की मात्रा बढ़ाएं।
  • अल्कोहल का सेवन न करें।

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डाय‍ब‍िटीज को कैसे मैनेज करें?

  • रोज शुगर लेवल को मॉन‍िटर करें और समय पर दवा लें।
  • स्मोकिंग से बचें, क्योंकि यह डायबिटीज में होने वाली समस्‍याओं का खतरा बढ़ाता है।
  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना जरूरी है।
  • नियमित चेकअप और आंखों की जांच कराते रहें ताकि समय पर बीमारी का इलाज हो सके।
  • डॉक्‍टर की सलाह पर फ्लू शॉट और अन्‍य वैक्‍सीन लगवाएं ताक‍ि डायब‍िटीज में इंफेक्‍शन का खतरा ज्‍यादा न हो।
  • पैरों की खास देखभाल करें क्योंकि घाव और इंफेक्शन जल्दी हो सकते हैं।
  • स्‍ट्रेस को कंट्रोल में रखें क्योंकि यह शुगर लेवल को प्रभावित करता है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि अगर शुगर लेवल ज्‍यादा है, लगातार उल्टी हो रही है, सांस लेने में क्कत हो रही है, भ्रम हो रहा है, सीने में दर्द है, नजर में बदलाव आ रहा है, या ऐसे खुले घाव हैं जो ठीक नहीं हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज से ज्‍यादातर समस्‍याओं को रोका जा सकता है और मरीज की जान बचाई जा सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

Consultant Endocrinologist & Diabetologist Dr. Vidya Tickoo से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है क‍ि डायब‍िटीज का इलाज न कराने पर ह्रदय रोग, स्‍ट्रोक, क्रॉनिक किडनी डिजीज, डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, अंधापन, बहरापन, नर्व डैमेज, पैरों, त्‍वचा और ओरल समस्‍याएं हो सकती हैं। डायब‍िटीज की जट‍िलताओं की बात करें, तो इससे हार्ट, ब्‍लड वेसल्‍स, नसों, क‍िडनी, आंखों, पैरों, त्‍वचा को नुकसान पहुंचता है। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस, अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया का खतरा भी हो सकता है। कुछ मामलों में डायब‍िटीज जानलेवा भी साब‍ित हो सकती है इसल‍िए इसे हेल्‍दी डाइट, एक्‍सरसाइज, दवा की सही डोज जैसे तरीकों से मैनेज करें।

FAQ

  • डायब‍िटीज से हृदय रोग का खतरा क‍िसे होता है?

    डायब‍िटीज के कारण ह्रदय रोग का खतरा उन लोगों में ज्‍यादा देखा जाता है ज‍िनका शुगर लेवल कंट्रोल नहीं रहता है, हाई बीपी के मरीज, हाई कोलेस्‍ट्राॅल, मोटापा और धूम्रपान करने वाले लोग।
  • डायब‍िटीज का इलाज न कराने पर आंखों पर क्‍या असर पड़ता है?

    हाई शुगर रेटिना में मौजूद ब्‍लड वेसल्‍स को नुकसान पहुंचाती है जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी समस्याएं हो सकती हैं और व्‍यक्‍त‍ि अंधेपन का श‍िकार भी हो सकता है।
  • डायब‍िटीज का इलाज न कराने पर व्‍यक्‍त‍ि कोमा में भी जा सकता है?

    शुगर लेवल बहुत ज्‍यादा या बहुत कम होने पर डायबिटिक कोमा की स्‍थ‍ित‍ि हो सकती है। डायब‍िट‍िक कोमा की स्‍थ‍िति‍ में भ्रम, कमजोरी, उल्‍टी, बेहोशी जैसे लक्षण नजर आते हैं।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 24, 2026 13:55 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Apr 24, 2026 13:55 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vidya Tickoo

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