क्या कभी आपने सोचा है कि आपकी उम्र और आपके दिल की उम्र अलग-अलग हो सकती है? जी, हां! यह पूरी तरह सच है। कई बार ऐसा होता है कि हमारी असल उम्र हमारे हार्ट हेल्थ की उम्र से कम होती है यानी हमारा दिल हमारी उम्र के अनुपात में अधिक कमजोर होता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर हमारी असली उम्र और हार्ट एज के बीच अंतर क्यों और किन परिस्थितियों में होता है? आइए, जानते हैं Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar की राय।
हार्ट एज क्या है?
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हार्ट एज यानी दिल की उम्र आपकी हृदय प्रणाली या कार्डियोवास्कुलर सिस्टम की एक अनुमानित उम्र होती है। इससे पता चलता है कि आपका दिल कितना स्वस्थ है। आमतौर पर दिल की बीमारियों से जुड़े आपके जोखिमों के आधार पर ही इसकी उम्र तय होती है। अगर आपके दिल की उम्र आपकी असली उम्र से ज्यादा होती है, तो इसका सीधा सा मतलब है कि दिल का दौरा या स्ट्रोक आने का खतरा काफी ज्यादा होता है।
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हार्ट एज असल उम्र से ज्यादा होने के कारण
हाई ब्लड प्रेशर
अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो उनकी हार्ट एज असल उम्र से अधिक होती है। क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों है? सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट एज काफी ज्यादा बढ़ सकती है। असल में, हाई ब्लड प्रेशर की वजह से हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। ऐसा इसलिए क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट की मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, मसल्स मोटी हो जाती हैं, जिससे हार्ट एज तेजी से बढ़ता है।
स्मोकिंग
जो लोग लगातार स्मोकिंग करते हैं, उनके साथ भी यह समस्या देखने को मिलती है। असल में स्मोकिंग की वजह से ब्लड वेसल्स डैमेज हो जाती हैं, जिससे हार्ट को ब्लड पंप करने में मेहनत अधिक करनी पड़ती है। स्मोकिंग से रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत (Endothelium) डैमेज हो जाती है और उनमें प्लाक (Plaque) जमने लगता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल
यह समस्या भी आपके हार्ट की उम्र को तेजी से बढ़ा सकती है। विशेषकर, जो लोग मोटापे का शिकार हैं, उनमें यह समस्या अधिक होती है। मेयोक्लिनिक के अनुसार बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण यह ब्लड वेसल्स में चिपकने लगता है, जो धीरे-धीरे सख्त हो जाता है, जिन्हें हम प्लाक कहते हैं। इसकी वजह से आर्टरीज भी स्टिफ हो जाती हैं, जिससे हार्ट की मांसपेशियों पर अतिरिक्त प्रेशर बनता है। इस तरह हार्ट पर ब्लड पंप करने का अतिरिक्त दबाव उसे वक्त से पहले बूढ़ा बना रहा होता है।
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डायबिटीज
हमारे देश में लाखों की संख्या में ऐसे मरीज हैं, जिन्हें डायबिटीज है। यह एक ऐसी मेडिकल कंडीशन है, जिसे मैनेज किया जाना बहुत जरूरी होता है। अगर इसको सही तरह से नियंत्रित न किया जाए, तो नसें डैमेज हो सकती हैं। American Diabetes Association के अनुसार, 60 साल की उम्र के अधिक लोगों में हार्ट से संबंधित बीमारियों का जोखिम अधिक होता है। खासकर, जिन्हें डायबिटीज है, उनमें यह रिस्क और बढ़ जाता है।
एक्सरसाइज न करना
विशेषज्ञ बताते हैं कि एक्सरसाइज नहीं करने की वजह से भी कार्डियोवास्कुलर हेल्थ पर नेगेटिव असर पड़ता है। दरअसल, एक्सरसाइज नहीं करने की वजह से हार्ट के पंपिंग चैंबर अकड़ जाते हैं, उनकी इलास्टिसिटी कम हो जाती है, जो कि हार्ट को सही तरह से ब्लड पंप करने से रोकता है। ध्यान रखें कि शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं होने से हार्ट मसल्स कमजोर हो जाती हैं, ब्लड वेसल्स संकुचित हो जाती हैं और शरीर उस शुगर को निकालने में असमर्थ हो जाता है, जो कि टिश्यूज को डैमेज करती हैं।
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हार्ट एज को कैसे मैनेज करें?
- डाइट का पूरा ध्यान रखें। इसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज आदि शामिल करें। इसके अलावा, लीन प्रोटीन जरूर लें।
- CDC के अनुसार सप्ताह भर में 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें। इसमें एरोबिक एक्टिविटी अधिक शामिल करें।
- स्मोकिंग और तंबाकू से पूरी तरह दूर रहें। ये ब्लड वेसल्स को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जो कि हार्ट एज को बढ़ा देते हैं।
- रोजाना अच्छी और गहरी नींद जरूर लें। विशेषज्ञ बताते हैं कि 7 से 9 घंटे की नींद हार्ट रिकवरी के लिए आवश्यक है।
- वजन को संतुलित रखना भी बहुत जरूरी है। अधिक वजन टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ाता है, जो कि सही नहीं है। इससे शरीर की नसें क्षतिग्रस्त होती हैं, जिससे ब्लड फ्लो बाधित होता है।
निष्कर्ष
आपकी असल उम्र और हार्ट एज एक जैसी होनी चाहिए। इनमें असमानता होना सही नहीं है। इसका मतलब है कि आप कोई न कोई ऐसी आदत अपना रहे हैं, जो कि सही नहीं है। इससे सेहत पर बुरा असर पड़ता है। विशेषकर, जो लोग हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें अपनी सेहत का अधिक ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से वर्कआउट और खान-पान की आदतों में सुधार करके हार्ट एज और असल उम्र में सामंजस्य बैठाया जा सकता है।
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FAQ
किस ब्लड टेस्ट या मेडिकल स्कैन के जरिए हार्ट एज का पता लगाया जा सकता है?
CAC CT Scan, लिपिड प्रोफाइल, HS-CRP ब्लड टेस्ट और Framingham Risk Score जैसे क्लिनिकल कैलकुलेटर की मदद से हार्ट एज का पता चलता है।क्या जीवनशैली में बदलाव करके हार्ट एज को रिवर्स किया जा सकता है?
अगर कोई धूम्रपान छोड़ दे, रोजाना एरोबिक एक्सरसाइज करे, वजन कम करे और तनाव पर नियंत्रण कर ले, तो हार्ट आगे को कम किया जा सकता है।
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Jul 20, 2026 18:20 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta