हार्ट हेल्थ का पता लगाने के लिए अक्सर डॉक्टर दो जांच करते हैं पहला है ईसीजी और दूसरा है इको। अक्सर लोग दोनों में कंफ्यूज हो जाते हैं। दोनों के नाम एक जैसे होने के कारण कई लोग इन्हें एक ही समझते हैं जबकि ये दो अलग-अलग जांच है। दिल की धड़कन की गति, रिद्म और इलेक्ट्रिकल गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए ईसीजी टेस्ट किया जाता है। इससे हार्ट में होने वाले बदलाव का पता चलता है। वहीं इको टेस्ट के जरिए डॉक्टर पता लगाते हैं कि हार्ट चेंबर, वाल्स, हार्ट की मांसपेशियां ठीक से काम कर रही हैं या नहीं। इको टेस्ट को हार्ट का अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है। ईसीजी और इको के बीच के अंतर को विस्तार से समझने के लिए हमने Dr. Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
ECG और Echo में क्या अंतर है?
| ECG Test (Electrocardiogram) | ECHO Test (Echocardiography) |
| ईसीजी से दिल की धड़कन की जांच होती है। | हार्ट की कार्यक्षमता का पता लगाने में मदद मिलती है। |
| हार्ट अटैक या अनियमित धड़कन का पता लगाने में उपयोगी है। | हार्ट की पंपिंग क्षमता, वाल्व और हार्ट की मांसपेशियों की जांच के लिए उपयोगी है। |
| शरीर पर इलेक्ट्रोड लगाकर जांच होती है। | इसे हार्ट का अल्ट्रासाउंड भी कहा जाता है। इसमें प्रोब की मदद से जांच की जाती है। |
| कम खर्च होता है। | ईसीजी के मुकाबले ज्यादा महंगी जांच होती है। |
| हार्ट अटैक आने पर ईसीजी से जल्दी जांच हो जाती है। | हार्ट अटैक के नुकसान को समझने के लिए इको टेस्ट बाद में किया जा सकता है। |
- जहां एक तरफ ईसीजी हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है, वहीं इको टेस्ट से हार्ट के काम करने की क्षमता का पता लगाया जाता है।
- अगर दिल की धड़कन तेज है, सीने में दर्द है, तो ईसीजी किया जाता है। अगर सांस फूलना, वाल्व की समस्या, हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं हैं, तो इको टेस्ट किया जाता है।
- ईसीजी में छाती, हाथ और पैरों पर छोटे इलेक्ट्रोड (चिपकने वाले पैच) लगाकर जांच की जाती हैं और इको में छाती पर एक छोटा प्रोब लगाकर अल्ट्रासाउंड से जांच होती है।
- इको टेस्ट यह देखता है कि हार्ट कैसे धड़क रहा है और इको टेस्ट से पता चलता है कि हार्ट कैसे काम कर रहा है?
ECG टेस्ट क्या होता है?

Cardiologist Dr. Rajasekhar ने बताया कि हार्ट हर बीट के साथ इलेक्ट्रिकल इंपल्स बनाता है जिसे इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम या ईसीजी टेस्ट से रिकॉर्ड किया जाता है।ईसीजी टेस्ट में हार्ट से निकलने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नल को नोट किया जाता है।
ECG टेस्ट की जरूरत कब पड़ती है?
- ईसीजी टेस्ट तब किया जाता है जब हार्ट अटैक का संदेह होता है।
- दिल की अनियमित धड़कन का कारण पता लगाने के लिए भी ईसीजी टेस्ट किया जाता है।
- हार्ट की रिद्म में किसी भी गड़बड़ी का पता इस टेस्ट से लगाया जाता है।
Mayo Clinic के मुताबिक, ECG टेस्ट उन मरीजों को करने की सलाह दी जाती है जिन्हें पहले कभी हार्ट अटैक आया हो। जिन मरीजों को सीने में दर्द की शिकायत होती है उन्हें भी ईसीजी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सांस की तकलीफ, थकान और कमजोरी होने पर भी यह जांच की जाती है।
यह भी पढ़ें- हार्ट चेकअप टालना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर से जानें कब और कौन से टेस्ट कराने चाहिए आपको
Echo टेस्ट क्या होता है?

Dr. Rajasekhar ने बताया कि इको टेस्ट में अल्ट्रासाउंड तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इस जांच की मदद से डॉक्टर हार्ट के हिस्सों की जांच करते हैं और काम करने की क्षमता का पता लगाते हैं। इको टेस्ट की मदद से हार्ट के ब्लड पंप करने की क्षमता, हार्ट वाल्स की समस्या का पता चलता है।
Echo टेस्ट की जरूरत कब पड़ती है?
- Echo टेस्ट के जरिए हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्या हो सकती है।
- हार्ट फेलियर की जांच के लिए इस टेस्ट की जरूरत पड़ती है।
- जन्मजात हृदय रोग की जांच के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
- इको टेस्ट की मदद से हार्ट की मांसपेशियों में आई कमजोरी का पता लगाने में मदद मिलती है।
American Heart Association के मुताबिक, Echo टेस्ट की मदद से ब्लड क्लॉट का भी पता लगाया जाता है। कुछ खास इलाज करने पर हार्ट कैसे रिएक्ट करता है? इसे चेक करने के लिए भी इको टेस्ट किया जाता है। अगर हार्ट की वाल्व कमजोर है, तो इको टेस्ट की मदद से उसका पता लगाया जा सकता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इको टेस्ट से पता चलता है कि हार्ट कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है?
यह भी पढ़ें- डायबिटीज रोगियों में हाई शुगर बढ़ा सकता है Sudden Cardiac Death का खतरा, डॉक्टर से जानें बचाव के उपाय
दोनों टेस्ट में मरीज को दर्द नहीं होता
अक्सर तस्वीरों में मरीज देखते हैं कि ईसीजी के लिए कई तार शरीर पर लगाए जाते हैं जिसे देखकर मन में भय उठता है, लेकिन आपको बता दें कि ईसीजी और इको दोनों ही टेस्ट में मरीज को दर्द नहीं होता है। दोनों ही सुरक्षित जांच मानी जाती हैं और इनमें कोई सर्जरी या कट लगाने की जरूरत नहीं होती है। दोनों टेस्ट में एक्स-रे जैसी रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता है।
क्या ECG और Echo दोनों जांच एक साथ होती हैं?
Dr. Rajasekhar ने बताया कि हां, कई मामलों में डॉक्टर दोनों टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। ईसीजी टेस्ट से दिल की धड़कन की जानकारी मिलती है जबकि इको टेस्ट की मदद से हार्ट की कार्यक्षमता का पता लगाया जाता है। 500 से 1000 रूपयों में ईसीजी टेस्ट होता है और इको टेस्ट में 2000 से 4000 रूपए लग सकते हैं।
ईसीजी बेहतर है या इको?
Dr. Rajasekhar ने बताया कि दोनों ही जांच हार्ट की सेहत के लिए जरूरी हैं इसलिए किसी एक को बेहतर नहीं कहा जा सकता। ईसीजी जांच जल्दी हो जाती है। इससे दिल की धड़कन की अनियमितता का कारण पता चलता है। इमरजेंसी में हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए भी ईसीजी किया जाता है ताकि नतीजे जल्दी मिल जाएं और इलाज हो सके। बाद में हार्ट अटैक के असर को समझने के लिए इको टेस्ट भी किया जाता है। इको टेस्ट से हार्ट की बनावट जैसे वाल्व की समस्या या ब्लड पंप करने की क्षमता पता चलती है।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- दिल की धड़कन का अनियमित होना।
- सांस लेने में तकलीफ होना।
- चक्कर आना या बेहोश होना।
- सीने में दर्द होना।
इन लक्षणों के नजर आते ही बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
निष्कर्ष:
दिल की धड़कन की जांच के लिए ईसीजी टेस्ट किया जाता है, जबकि हार्ट के ब्लड पंप करने की क्षमता की जांच के लिए इको टेस्ट किया जाता है। यह दोनों जांच साथ में भी की जाती हैं। दोनों ही जांच में मरीज को दर्द नहीं होता है और न ही रेडिएशन का इस्तेमाल किया जाता है। हार्ट अटैक में पहले ईसीजी किया जाता है, हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि ईसीजी टेस्ट ज्यादा बेहतर है। हार्ट की सेहत के लिए अलग-अलग स्थितियों में दोनों ही जांच की मदद ली जाती है।
FAQ
क्या इको टेस्ट की मदद से हार्ट में ब्लॉकेज का पता चलता है?
इको टेस्ट की मदद से हार्ट ब्लॉकेज का पता नहीं चलता। ब्लॉकेज की जांच के लिए डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह दे सकते हैं।सामान्य ईसीजी के बाद भी इको टेस्ट किया जाता है?
हां, सामान्य ईसीजी के बाद अगर डॉक्टर को हार्ट की बनावट या पंपिंग क्षमता की जांच करनी हो, तो इको टेस्ट भी किया जाता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 04, 2026 18:46 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr V Rajasekhar