Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr V Rajasekhar , Senior Consultant – Interventional Cardiology & Electrophysiology | Certified TAVR Operator | Clinical Director

हार्ट चेकअप टालना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर से जानें कब और कौन से टेस्ट कराने चाहिए आपको

हार्ट ड‍िजीज लक्षण नजर आने पर नहीं ब्‍लक‍ि कई साल पहले ही शरीर में जन्‍म ले लेते हैं। समय पर जांच न कराने से समस्‍या गंभीर हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें कब और कौन सी जांच से हार्ट ड‍िजीज से बचा जा सकता है?

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हार्ट हमारे शरीर के सबसे खास अंगों में से एक है क्‍योंक‍ि ये पूरे शरीर में ऑक्‍सीजन और ब्‍लड की सप्‍लाई करता है। ज‍िस तरह क‍िसी मशीन या कार को समय-समय पर सर्व‍िस कराने की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही हार्ट को भी जांच की जरूरत होती है ताक‍ि पता चले सके क‍ि वो ठीक काम कर रहा है या नहीं? कई बार हार्ट अटैक के लक्षण शरीर में छुपे रहते हैं और अचानक से हार्ट अटैक आ जाता है और व्‍यक्‍त‍ि की मौत हो जाती है। इस गंभीर स्‍थि‍त‍ि से बचने के ल‍िए यह जानना जरूरी है क‍ि कौन से टेस्‍ट हार्ट की बीमार‍ियों के बारे में बताते हैं और हार्ट चेकअप कब कराना चाह‍िए? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City से बात की।

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  • Cardiologist Dr. Rajasekhar ने बताया क‍ि एक स्‍वस्‍थ द‍िखने वाला व्‍यक्‍त‍ि यह क्‍लेम नहीं कर सकता क‍ि उसे हार्ट की बीमारी नहीं होगी क्‍योंक‍ि आजकल का खानपान और लाइफस्‍टाइल में इतनी तेजी से बदलाव आ रहे हैं क‍ि यह अंदाजा लगाना मुश्‍क‍िल है क‍ि क‍िस उम्र में हार्ट की बीमारी होगी या हार्ट अटैक आएगा। अब युवाओं में भी हार्ट डि‍जीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • Dr. Rajasekhar ने बताया क‍ि धमन‍ियों में प्‍लाक जमने की प्रक्र‍िया में कई साल लगते हैं और यह प्रक्र‍िया शरीर में ब‍िना क‍िसी लक्षण के चलती रहती है इसल‍िए लक्षणों के नजर आने का इंतजार नहीं करना चाह‍िए। समय-समय पर जांच को प्राथम‍िकता देना चाह‍िए।

हार्ट हेल्‍थ चेकअप कब कराएं?

उम्र
टेस्‍ट का नाम  क‍ितनी बार कराएं?
20 साल की उम्र से बीपी और शुगर टेस्‍ट हर 2 साल में कम से कम 1 बार
20 साल की उम्र से कोलेस्ट्रॉल लेवल हर 5 साल में कम से कम 1 बार
30–40 साल की उम्र में बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, BMI  हर साल जांच कराएं
प्रीडायबिटीज, थायराइड, मोटापा, हाई BP या हाई शुगर वाले लोग BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल समेत जरूरी जांच डॉक्टर की सलाह से साल में 2 बार या जरूरत के अनुसार
 ध्यान रखें जांच की फ्रीक्वेंसी  
आपकी उम्र, रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति के अनुसार डॉक्टर जांच तय करते हैं
  • 20 साल की उम्र से हर दो साल में कम से कम एक बार ब्‍लड प्रेशर और शुगर की जांच कराएं।
  • 20 साल की उम्र से हर पांच साल में कम से कम एक बार कोलेस्‍ट्रॉल लेवल की जांच कराएं।
  • 30 से 40 की उम्र में हर साल बीपी, शुगर, कोलेस्‍ट्रॉल, बॉडी मास इंडेक्‍स वगैरह की जांच होनी चाह‍िए।
  • अगर आप प्रीडायब‍िट‍िक हैं, थायराइड है, शरीर में मोटापा है, शुगर लेवल या बीपी ज्‍यादा रहता है, तो डॉक्‍टर की सलाह से साल में 2 बार ये टेस्‍ट करा सकते हैं।
  • ध्‍यान रहे क‍ि व्‍यक्‍त‍ि की रिपोर्ट और बीमारी की स्थिति के अनुसार डॉक्टर जांच की फ्रीक्वेंसी तय करते हैं।

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20 साल से कम उम्र में भी रहता है हार्ट डि‍जीज का खतरा

साल 2024 में Journal Of Science And Medicine In Sport में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, 20 साल से कम उम्र में भी हार्ट ड‍िजीज या हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है इसल‍िए समय-समय पर स्‍क्रीन‍िंग जरूरी है। स्‍टडी में ऐसे श्रेणी के लोगों को ज्‍यादा खतरे में बताया जो ख‍िलाड़ी हैं या ज‍िनके पर‍िवार में हार्ट ड‍िजीज का इत‍िहास है। हालांक‍ि, वयस्कों की तुलना में 20 साल से कम उम्र में यह खतरा होने की आशंका कम हो सकती है।

ल‍िप‍िड प्रोफाइल टेस्‍ट से हार्ट हेल्‍थ को समझें

हार्ट को हेल्‍दी रखने के ल‍िए कराएं ये टेस्‍ट   
1. ल‍िप‍िड‍ प्रोफाइल टेस्‍ट  2. बॉडी मास इंडेक्‍स 
3. बीपी और ब्‍लड शुगर टेस्‍ट  4. सीटी कोरोनरी स्‍कैन टेस्‍ट 
  • हार्ट की सेहत कैसी है, इसका पता लगाने के ल‍िए आप डॉक्‍टर की सलाह से कुछ आसान जांच करा सकते हैं। ज्‍यादातर हॉस्‍प‍िटल या लैब में 300 से 500 रूपयों में एक नॉर्मल ब्‍लड टेस्‍ट होता है ज‍िसे ल‍िप‍िड प्रोफाइल टेस्‍ट कहते हैं। इससे हार्ट हेल्‍थ का पता लगाने में मदद म‍िलती है।
  • ल‍िप‍िड प्रोफाइल टेस्‍ट में कोलेस्‍ट्रॉल लेवल 150 से नीचे होना चाह‍िए। अगर कोलेस्‍ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स लेवल 150 के ऊपर है, तो आपको डॉक्‍टर सीटी कोरोनरी स्‍कैन टेस्‍ट ज‍िसे सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी भी कहा जाता है, कराने की सलाह दे सकते हैं।

बीपी और शुगर की जांच भी है जरूरी

  • हार्ट की हेल्‍थ के ल‍िए बीपी और शुगर की जांच कराएं। एक स्‍वस्‍थ व्‍यक्‍त‍ि का बीपी 120/80 mm Hg होना चाह‍िए। साथ ही मोटापा क‍ितना है? इससे भी हार्ट हेल्‍थ के बारे में जानकारी म‍िलती है। साथ ही अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो भी इसकी जानकारी डॉक्‍टर को देना जरूरी है।
  • American Diabetes Association के मुताब‍िक, 35 साल (पूर्व अनुशंसित उम्र 45 साल) से अध‍िक उम्र के सभी लोगों को प्रीडायब‍िटीज की जांच करानी चाह‍िए। अगर जांच में नतीजे नॉर्मल हों, तो हर तीन साल के अंतराल पर दोबारा जांच करानी चाह‍िए।

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सीटी कोरोनरी स्‍कैन टेस्‍ट से हार्ट ब्‍लॉकेज का पता चलता है

  • सीटी कोरोनरी स्‍कैन टेस्‍ट कराने की सलाह डॉक्‍टर तब देते हैं जब कोलेस्‍ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, बीपी, शुगर, मोटापा या धूम्रपान में से दो फैक्‍टर ज्‍यादा एक्‍ट‍िव या बढ़े हुए म‍िलते हैं। इस जांच से पता चलेगा क‍ि हार्ट में क‍ितना ब्‍लॉकेज है?
  • अगर हार्ट में 5 से 10 प्रत‍िशत ब्‍लॉकेज होता है, तो डॉक्‍टर ज्‍यादातर केस में लाइफस्‍टाइल में बदलाव करके हार्ट हेल्‍थ को बेहतर बनाने की सलाह देते हैं।
  • हार्ट ब्‍लॉकेज के ल‍िए उच‍ित कदम नहीं उठाएंगे, तो आगे चलकर हार्ट अटैक आने की संभावना बढ़ सकती है।
  • प्राइवेट हॉस्‍प‍िटल में सीटी कोरोनरी स्‍कैन टेस्‍ट की कीमत नौ से बारह हजार रूपयों के बीच हो सकती है। सरकारी हॉस्‍प‍िटल में इस जांच के ल‍िए तीन से सात हजार रूपए लग सकते हैं।

हार्ट ड‍िजीज से बचने के ल‍िए हफ्ते में 5 द‍िन एक्‍सरसाइज जरूरी

  • Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर मोटापा ज्‍यादा होगा, तो बीपी, शुगर और कोलेस्‍ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। हार्ट ड‍िजीज से बचने के ल‍िए हफ्ते में कम से कम पांच द‍िन 30 म‍िनट हल्‍की या हाई इंटेंस‍िटी वाली एक्‍सरसाइज करें। हार्ट अटैक या हार्ट की सर्जरी होने पर डॉक्‍टर की सलाह से एक्‍सरसाइज करें।
  • डाइट में ताजे फल, सब्‍ज‍ियां, लीन प्रोटीन, बीन्‍स वगैरह को शाम‍िल करें। हार्ट को हेल्‍दी रखने के ल‍िए डैश डाइट फायदेमंद मानी जाती है ज‍िसमें नमक की मात्रा कम करने की सलाह दी जाती है।
  • सैचुरेटेड फैट्स, ट्रांस फैट्स, नमक और शुगर की मात्रा कम रखें।
  • स्‍ट्रेस के कारण बीपी असंतुल‍ित हो सकता है। लंबे समय तक स्‍ट्रेस, शरीर और हार्ट के ल‍िए नुकसादायक साब‍ित हो सकता है इसल‍िए डीप ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज, योग वगैरह की मदद लें।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • चेस्‍ट पेन
  • हाई बीपी
  • सांस लेने में तकलीफ
  • चक्‍कर आना
  • घबराहट होना

इन सभी लक्षणों के नजर आने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

30 से 40 की उम्र में कम से कम एक बार कोलेस्‍ट्रॉल, बीपी, शुगर, बॉडी मास इंडेक्‍स जैसी जांच करानी चाह‍िए। डॉक्‍टर की सलाह पर हर व्‍यक्‍त‍ि को एक आसान का ब्‍लड टेस्‍ट कराना चाह‍िए ज‍िसे ल‍िप‍िड‍ प्रोफाइल टेस्‍ट कहते हैं। अगर इसमें कोलेस्‍ट्रॉल या ट्राइग्लिसराइड्स लेवल 150 से ज्‍यादा आया, तो डॉक्‍टर सीटी कोरोनरी स्‍कैन टेस्‍ट कराने की सलाह देते हैं। इस जांच से हार्ट में ब्‍लॉकेज का पता लगाते हैं। हार्ट में 5 से 10 प्रत‍िशत ब्‍लॉकेज में डॉक्‍टर ज्‍यादातर मामलों में लाइफस्‍टाइल में बदलाव करने की सलाह देते हैं। वहीं अगर पर‍िवार में हार्ट ड‍िजीज का इत‍िहास है या कम उम्र में मोटापा है या प्रीडायब‍िट‍िक हैं, तो 20 साल की उम्र के बाद हर 2 से 5 साल के बीच शुगर टेस्‍ट, कोलेस्‍ट्रॉल टेस्‍ट कराना चाह‍िए।

FAQ

  • ईसीजी टेस्‍ट क्‍यों क‍िया जाता है?

    हार्ट की अन‍ियम‍ित धड़कन का कारण जानने के ल‍िए यह टेस्‍ट होता है। हार्ट में असामान्‍य हलचल का पता इस जांच से चल जाता है।
  • क‍िसी लक्षण के बगैर हेल्‍थ चेकअप क‍िस उम्र से शुरू करें?

    अगर हार्ट का कोई असामान्‍य लक्षण नहीं है, तो 30 साल की उम्र से साल में कम से कम एक बार कोलेस्‍ट्रॉल, बीपी, शुगर जैसे टेस्‍ट कराने चाह‍िए। वहीं 20 साल से अध‍िक उम्र में हर 2 से 5 साल में एक बार ये टेस्‍ट करा सकते हैं। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 03, 2026 15:31 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr V Rajasekhar

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