आज के समय में ज्यादातर लोग स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल करते हैं। इनके कारण लोग अपनी हार्ट रेट पर पहले से ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। कई लोग तो शौक में सोते समय और दिन में अपना हार्ट रेट चेक करते हैं। जिसमें कई बार हार्ट रेट में अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या ऐसा होना नॉर्मल है? ऐसे में आइए गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल (Dr. Vikash Goyal, Associate, Director, Cardiology, Paras Health, Gurugram) से जानें रेस्टिंग हार्ट रेट और स्लीपिंग हार्ट रेट में क्या अंतर है?
रेस्टिंग हार्ट रेट और स्लीपिंग हार्ट में अंतर क्या है?
डॉ. विकास गोयल के अनुसार, "रेस्टिंग हार्ट रेट और स्लीपिंग (सोते समय) हार्ट रेट, दोनों ही कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ (दिल की सेहत) के लिए जरूरी संकेत हैं, लेकिन ये शरीर की अलग-अलग स्थितियों को बताते हैं।"
डॉ. विकास गोयल का कहना है, "रेस्टिंग हार्ट रेट को तब मापा जाता है, जब व्यक्ति जाग रहा हो, पूरी तरह शांत हो और किसी प्रकार की शारीरिक गतिविधि न कर रहा हो। वहीं, स्लीपिंग हार्ट रेट वह होती है, जो नींद के के दौरान रिकॉर्ड किया जाता है। सोते समय शरीर की मेटाबोलिक जरूरतें कम होती हैं। सोते समय हार्ट रेट का कम होना नॉर्मल है, क्योंकि शरीर रिकवरी मोड में होता है और दिल को उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती है।"
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जागते समय हार्ट रेट बढ़ने से क्या होता है?
डॉ. विकास बताते हैं, "अगर व्यक्ति को जागते समय और आराम की स्थिति में, लगातार तेज हार्ट रेट (खासकर 150 बीट्स प्रति मिनट से ज्यादा) महसूस होता है, तो यह चिंता का कारण हो सकती है। ऐसी स्थिति में धड़कन तेज महसूस होने (palpitations) और कुछ मामलों में बेहोशी (syncope) भी आ सकती है।"
डॉ. विकास के अनुसार, "अगर लंबे समय तक हार्ट रेट तेज रहता है, तो इससे दिल की पंपिंग क्षमता कम हो सकती है, जिससे इजेक्शन फ्रैक्शन (EF) में गिरावट आ सकती है। इजेक्शन फ्रैक्शन यह बताता है कि दिल कितनी अच्छी तरह से खून पंप करता है।"
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कम हार्ट रेट से क्या परेशानी होती है?
डॉ. विकास आगे कहते हैं, "जागते हुए नॉर्मल से कम हार्ट रेट भी चिंता का कारण हो सकता है और इससे व्यक्ति को बेहोशी, थकान, एक्सरसाइज करने की क्षमता में कमी और मेहनत करने पर सांस फूलने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।" कई बार नियमित एक्सरसाइज करने वाले लोगों में कम हार्ट रेट नॉर्मल हो सकता है। खुद से ही किसी बीमारी या परेशानी का अंदाजा न लगाएं। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
हार्ट रेट ट्रेंड्स पर रखें नजर
डॉ. विकास के अनुसार, "सिर्फ एक रीडिंग पर निर्भर रहने के बजाय, समय के साथ हार्ट रेट के ट्रेंड्स पर नजर रखना जरूरी है, खासकर स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर्स के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में। नियमित रिकॉर्ड डॉक्टर को भी स्थिति को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।"
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. विकास बताते हैं, "अगर असामान्य हार्ट रेट पैटर्न के साथ चक्कर आना, सीने में दर्द, सांस फूलना, बेहोशी या लगातार धड़कन तेज महसूस होने जैसे लक्षण दिखें, तो सही कारण का पता लगाने और सही इलाज शुरू करने के लिए कार्डियोलॉजिस्ट से तुरंत जांच करवानी चाहिए।"
निष्कर्ष
जागते हुए शांत स्थिति में मापा जाने वाला रेस्टिंग हार्ट रेट और नींद के दौरान का स्लीपिंग हार्ट रेट अलग-अलग स्थितियों के बारे में बताते हैं। सोते समय शरीर की मेटाबोलिक जरूरतें कम होने से हार्ट रेट का गिरना नॉर्मल और सेहत के लिए जरूरी है। हालांकि, जागते समय लगातार अत्यधिक तेज धड़कन (150 bpm से ज्यादा) दिल की पंपिंग क्षमता को कमजोर कर सकती है, जबकि बहुत कम हार्ट रेट से थकान या बेहोशी हो सकती है। स्मार्टवॉच की किसी एक रीडिंग से घबराने के बजाय हार्ट रेट के ट्रेंड्स पर नजर रखें और चक्कर, सीने में दर्द या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। ध्यान रहे, अच्छे स्वास्थ्य के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को फॉलो करें।
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FAQ
हेल्दी हार्ट के लिए क्या करें?
हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नियमित रूप से हेल्दी और पोषक तत्वों से युक्त फल, सब्जियों, साबुत अनाज और ड्राई फ्रूट्स को डाइट में शामिल करें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, स्मोकिंग और अल्कोहल का सेवन करने से बचें, वजन को कंट्रोल करें, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करें।नॉर्मल हार्ट रेट कितना होना चाहिए?
हार्ट रेट की नॉर्मल रेंज 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट के बीच हो सकती हैं।
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Current Version
Jul 08, 2026 21:48 IST
Modified By : Priyanka Sharma Jul 08, 2026 21:48 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Vikash Goyal