Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

वेट लॉस के ल‍िए मेटाबॉल‍िज्‍म कैसे बढ़ाएं? एक्‍सपर्ट से जानें उपाय

वजन और मेटाबॉल‍िज्‍म का गहरा कनेक्‍शन है। अगर शरीर का मेटाबॉल‍िज्‍म धीमा होगा, तो वजन घटाना मुश्‍क‍िल हो सकता है। अगर मेटाबॉल‍िज्‍म तेज होगा, तो व्‍यक्‍त‍ि आसानी से वजन घटा पाएगा। जानते हैं वेट लॉस के ल‍िए मेटाबॉल‍िज्‍म को कैसे बढ़ाएं?

कुछ लोग अक्‍सर यह कहते म‍िल जाते हैं क‍ि वे कुछ भी खा लें, वजन बढ़ता नहीं है। कुछ लोग अध‍िक खाते हैं और फ‍िर भी वे पतले रहते हैं। इसके पीछे उनका अच्‍छा मेटाबॉल‍िज्‍म हो सकता है। वहीं कुछ लोग थोड़ा खाकर भी मोटे हो जाते हैं। ऐसे लोगों का मेटाबॉल‍िज्‍म धीमा हो सकता है। मेटाबॉल‍िज्‍म स्‍लो होगा, तो वजन घटाना मुश्‍क‍िल हो सकता है। चल‍िए जानते हैं वेट लॉस के ल‍िए आख‍िर मेटाबॉल‍िज्‍म को कैसे बढ़ा सकते हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म के अलावा वजन बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे जीन्‍स, हार्मोन, डाइट और लाइफस्टाइल। Mayo Clinic के मुताब‍िक, वजन तब बढ़ता है जब व्‍यक्‍त‍ि कैलोरी बर्न करने से ज्‍यादा कंज्‍यूम कर लेता है। वजन कम करने के लिए या, तो व्‍यक्‍त‍ि को कैलोरी कम करनी होगी या शारीरिक गतिविधि के जरिए ज्‍यादा कैलोरी बर्न करनी होगी।

1. मेटाबॉल‍िज्‍म और वेट कंट्रोल के ल‍िए प्रोटीन जरूरी है

मेटाबॉल‍िज्‍म को बढ़ाना चाहते हैं, तो प्रोटीन को हर मील में शाम‍िल करें। आजकल लोग मात्रा पर गौर करने लगे हैं, लेक‍िन कोश‍िश करें क‍ि हर मील में कोई भी एक प्रोटीन स्रोत शाम‍िल हो। मात्रा से ज्‍यादा अलग-अलग वैरायटी को शाम‍िल करने की कोश‍िश करें। इससे मसल मास बढ़ाने में मदद म‍िलेगी। जब मसल मास बढ़ेगा, तो मेटाबॉल‍िज्‍म भी बढ़ेगा।

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2. छोटे और लो कैलोरी म‍ील्‍स लें

जब भी हम कुछ खाते हैं, तो शरीर को उसे पचाने के ल‍िए पूरी डाइजेशन प्रक्र‍िया को हर बार दोहराना होता है। अगर हैवी मील लेंगे, तो डाइजेशन प्रक्र‍िया लंबी होगी और पाचन तंत्र को आराम नहीं मिल सकेगा। जब पाचन को आराम नहीं म‍िलेगा, तो मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाने में मदद नहीं म‍िलेगी इसल‍िए वेट लॉस करना चाहते हैं, तो अध‍िक मात्रा में खाने के बजाय छोटे मील्‍स प्‍लान करें जो लो कैलोरी हों।

3. हर 45 मि‍नट में 5 म‍िनट का ब्रेक लें

अगर आप पूरे द‍िन बैठकर काम करते हैं, तो वजन तेजी से बढ़ सकता है। इससे बचने के ल‍िए हर 45 म‍िनट में 5 म‍िनट का ब्रेक लें और ब्रेक के दौरान कुछ खाने या आराम करने के बजाय एक्‍सरसाइज जैसे सीढ़ि‍यां चढ़ना, तेज वॉक, जंप‍िंग जैक्‍स, डांस, सूर्य नमस्‍कार वगैरह करें। इस तरह की इंटरवल एक्‍सरसाइज से मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाने में मदद म‍िलेगी। हालांक‍ि, ध्‍यान रखें क‍ि ब्रेक के दौरान एक्‍सरसाइज करने से कुछ ही देर के ल‍िए मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ता है और जब हम दोबारा बैठ जाते हैं, तो यह धीमा हो जाता है। लंबे समय तक मेटाबॉल‍िज्‍म रेट में सुधार करना चाहते हैं, तो कंस‍िस्‍टेंट रहना जरूरी है और रोजाना इस आदत को रूटीन का ह‍िस्‍सा बनाएं।

4. मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाने के ल‍िए हाइड्रेशन का ख्‍याल रखें

कुछ लोग फैट बर्न करने के ल‍िए गुनगुने या गर्म पानी के सेवन को ज्‍यादा असरदार बताते हैं। जबक‍ि पानी ठंडा प‍िएं या गर्म, शरीर के ल‍िए हाइड्रेट रहना जरूरी है। जब शरीर हाइड्रेट रहता है, तो मेटाबॉलि‍ज्‍म को मेनटेन करने में मदद म‍िलती है।

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5. वेट ट्रेन‍िंग और हाई इंटेंस‍िटी वर्कआउट करें

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कई बार लोग यह श‍िकायत करते हैं क‍ि वे रोज वॉक करते हैं, लेक‍िन फ‍िर भी वजन नहीं घटता। दरअसल हमारा ब्रेन बहुत स्‍मार्ट होता है, जब रूटीन की आदत हो जाती है, तो कैलोरी तेजी से बर्न करना बंद कर सकता है। इसल‍िए रोजाना केवल वॉक करके वजन घटाना मुश्‍क‍िल हो सकता है। वॉक या सामान्‍य एक्‍सरसाइज के साथ-साथ रूटीन में वेट ट्रेन‍िंग और हाई इंटेंस‍िटी वर्कआउट को भी शाम‍िल करें। एक घंटा वॉक करके स‍िर्फ 90 से 100 कैलोरी बर्न होती हैं जबक‍ि हाई इंटेस‍िटी वर्कआउट से एक घंटे में करीब 300 से 400 कैलोरी बर्न होती है और मेटाबॉल‍िज्‍म को बढ़ाने में भी मदद म‍िलती है।

6. हार्मोन्‍स को बैलेंस करना जरूरी है

मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाने के ल‍िए शरीर में हार्माेन्‍स का सही बैलेंस होना जरूरी है। एक्‍सपर्ट्स मानते हैं क‍ि नींद में सबसे ज्‍यादा हार्मोन्‍स र‍िलीज होते हैं, लेक‍िन अगर आप नींद पूरी नहीं करेंगे, तो इसका असर मेटाबॉल‍िज्‍म पर पड़ सकता है। जो लोग देर से सोते हैं या कम सोते हैं उनमें हार्मोनल समस्‍याएं हो सकती हैं और वजन घटाना मुश्‍क‍िल हो सकता है। वजन कंट्रोल करने के ल‍िए मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाना जरूरी है और मेटाबॉलि‍ज्‍म बढ़ाने के ल‍िए हार्मोनल हेल्‍थ का बेहतर होना जरूरी है इसल‍िए नींद के घंटे और क्वालिटी बढ़ाने की कोश‍िश करें। हार्मोनल हेल्‍थ के ल‍िए रात को 12 से 3 का समय खासतौर पर अहम होता है। इस दौरान शरीर हार्मोन्‍स र‍िलीज करता है।

न‍िष्‍कर्ष:

वेट लॉस के ल‍िए मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाना चाहते हैं, तो प्रोटीन र‍िच फूड्स को हर मील का ह‍िस्‍सा बनाएं, छोटे और लो कैलोरी मील लें, हर 45 म‍िनट में कम से कम 5 म‍िनट का ब्रेक लें और उस दौरान इंटरवेट एक्‍सरसाइज, वॉक, जंप‍िंग जैक्‍स वगैरह करें। हाइड्रेशन का ख्‍याल रखें, वेट ट्रेन‍िंग और हाई इंटेंस‍िटी वर्कआउट करें, हार्मोन्‍स को बैलेंस रखने के ल‍िए नींद पूरी करें। इन ट‍िप्‍स को आजमाने से मेटाबॉल‍िज्‍म बढ़ाने में मदद म‍िलेगी और शरीर सामान्‍य से अध‍िक कैलोरी बर्न कर सकेगा।

FAQ

  • क्या स्‍ट्रेस मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है?

    लंबे समय तक अगर स्‍ट्रेस नींद, भूख और खाने की आदतों को प्रभावित कर रहा है, तो वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर पड़ सकता है।
  • क्या खाली पेट रहने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है?

    खाली पेट रहने से मेटाबॉलिज्म तेजी से बढ़े, ऐसा जरूरी नहीं है। मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के ल‍िए हेल्‍दी डाइट लेना और एक्‍सरसाइज करना जरूरी है।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 18, 2026 18:38 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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