Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

खट्टी डकारों से बचना है, तो खाने के तुरंत बाद न करें ये गलति‍यां

खट्टी डकार के कारण मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद महसूस होता है। यह तब होता है जब पेट में मौजूद एसिड भोजन नली की तरफ ऊपर आने लगता है। जानें खट्टी डकार से बचने के ल‍िए क‍िन गलत‍ियों से बचना चाह‍िए?

खाना खाने के बाद खट्टी डकारें आना एक आम समस्या है, लेकिन अगर यह बार-बार होने लगे तो यह पाचन तंत्र की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है। खट्टी डकारें तब आती हैं जब पेट में मौजूद एसिड भोजन नली की तरफ ऊपर आने लगता है। इसे एसिड रिफ्लक्स या एसिडिटी से जुड़ी समस्या माना जाता है। कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार ऐसा होने पर सीने में जलन, पेट फूलना, गैस, मुंह का स्वाद खराब होना और नींद खराब होने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। अक्सर हमारी कुछ गलत आदतें इस समस्या को बढ़ा देती हैं, खासतौर पर खाने के तुरंत बाद की जाने वाली गलतियां। अगर आप इन आदतों में सुधार कर लें, तो खट्टी डकारों से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। खट्टी डकार का कारण बनने वाली ऐसी पांच गलत‍ियों के बारे में जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

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1. खाने के तुरंत बाद लेट जाना

खाना खाने के बाद तुरंत बिस्तर पर लेटना खट्टी डकार की सबसे बड़ी वजह है। जब हम लेट जाते हैं, तो पेट का एसिड आसानी से भोजन नली की तरफ आने लगता है। इससे खट्टी डकारें और सीने में जलन बढ़ सकती है। कोशिश करें कि खाने के तुरंत बाद लेटने या बैठने से बचें।

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2. खाने के तुरंत बाद ज्यादा पानी पीना

खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी पीने से भी पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है और खाना ठीक से नहीं पच पाता है। इसकी वजह से गैस, भारीपन और खट्टी डकारें हो सकती हैं। खाने के दौरान थोड़ा-थोड़ा पानी पीना ठीक है, लेकिन तुरंत बाद बहुत ज्‍यादा मात्रा में पानी पीने से बचना चाहिए।

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3. धूम्रपान और कैफीन का सेवन

खाने के तुरंत बाद सिगरेट पीना या ज्यादा चाय-कॉफी लेना भी पाचन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कैफीन और निकोटिन पेट में एसिड बनने की मात्रा बढ़ा सकते हैं। इससे खट्टी डकारें, गैस और सीने में जलन की शिकायत हो सकती है। अगर आपको पहले से एसिडिटी की समस्या रहती है, तो खाने के बाद इन चीजों से परहेज करें।

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4. तुरंत फल या मिठाई खाना

कई लोग खाना खत्म करते ही तुरंत मिठाई या खट्टे फल खा लेते हैं। जरूरत से ज्यादा मीठा या खट्टा खाना पेट में एसिड बढ़ा सकता है। खासकर संतरा, नींबू या बहुत ज्यादा मिठाइयां कुछ लोगों में एसिडिटी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मुख्य भोजन और मिठाई या फल के बीच थोड़ा अंतर रखें।

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5. जल्दी-जल्दी खाना

अगर आप जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं और भोजन ठीक से चबाते नहीं हैं, तो पाचन पर असर पड़ता है। बड़े टुकड़ों में खाना पेट में ज्यादा समय तक रहता है, जिससे गैस और खट्टी डकारों की समस्या बढ़ सकती है। हमेशा आराम से और अच्छी तरह चबाकर खाना खाने की आदत डालें।

न‍िष्‍कर्ष:

खट्टी डकारोंं से बचने के ल‍िए खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें, भोजन के तुरंत बाद ज्‍यादा पानी न पिएं, धूम्रपान और कैफीन से भी परहेज करेंं, तुरंत फल या मिठाई न खाएं और जल्‍दी-जल्‍दी खाने से बचें।

FAQ

  • खट्टी डकार के कारण क्‍या हैं?

    ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और ऑयली खाना पेट में एसिड बढ़ा सकता है। खाने के तुरंत बाद लेटना या जल्दी-जल्दी खाना एसिड रिफ्लक्स का कारण बन सकता है।
  • खट्टी डकार का इलाज क्‍या है?

    हल्का और संतुलित भोजन करें, खाने के बाद तुरंत न लेटें। सौंफ, अदरक और पर्याप्त पानी पाचन सुधारने में मदद कर सकते हैं, लेकिन समस्या बार-बार हो तो डॉक्टर से सलाह लें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    May 14, 2026 21:01 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • May 14, 2026 21:01 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Smita Singh

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