Fri Sep 11, 2026 | 06:54 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

टीनएज लड़कियों में एंडोमेट्रियोसिस की पहचान देर से क्यों होती है? डॉक्टर से जानें वजह

जब लड़कियों को पीरियड्स शुरू होते हैं, तो कई बार उन्हें बहुत तेज दर्द होता है, जिसे पेरेंट्स नॉर्मल समझकर इग्नोर कर देते हैं। ऐसे कई कारण हैं, जिस वजह से टीनएज लड़कियों में एंडोमेट्रियोसिस की पहचान होने में देर हो सकती है। इसलिए पेरेंट्स को लड़कियों के पीरियड्स में हो रहे बदलावों पर नजर रखनी चाहिए।  

आमतौर पर पीरियड्स के दौरान दर्द होना सामान्य ही माना जाता है और इस वजह से जब लड़कियों को पीरियड्स के शुरुआती दिनों में तेज दर्द होता है, तो उसे नॉर्मल पीरियड क्रैम्प्स समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अगर किसी लड़की को पीरियड्स के दौरान बहुत तेज दर्द हो और दर्द की वजह से स्कूल या कॉलेज जाना मुश्किल हो जाए और दवा लेने पर भी दर्द से राहत न मिले, तो यह लक्षण एंडोमेट्रियोसिस के हो सकते हैं। इस बारे में हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट Dr. Shobha Gupta से बात की। उन्होंने बताया कि बहुत से मामलों में किशोरियों में एंडोमेट्रियोसिस की पहचान देर से हो पाती है और इस कारण वे कई सालों तक बिना सही इलाज के दर्द झेलती रहती हैं।

टीनएज लड़कियों में एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में देरी होने की वजह

Dr. Shobha Gupta कहती हैं, “एंडोमेट्रियोसिस में यूटरस में मौजूद एंडोमेट्रियम जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब, आंत, मूत्राशय या पेल्विस के अन्य हिस्सों में पहुंच सकती हैं। हर महीने पीरियड्स के दौरान जब ये कोशिकाएं टूटती हैं, तो सूजन और दर्द जैसी परेशानियां होने लगती हैं। किशोरियों में एंडोमेट्रियोसिस का पता लगने में कई साल लग सकते हैं। इसके पीछे सिर्फ एक नहीं बल्कि कई कारण जिम्मेदार हैं।”

पीरियड्स के दर्द को सामान्य मान लेना

Dr. Shobha Gupta के मुताबिक, “आमतौर पर जब लड़कियों में पीरियड्स के दौरान तेज दर्द होता है, तो पेरेंट्स इसे नॉर्मल दर्द समझकर इग्नोर कर देते हैं। अक्सर महिलाएं जब मेरे पास आती हैं, तो वे बताती हैं कि बचपन में हमें यह कहकर टाल दिया जाता था कि पीरियड्स में तो दर्द होता ही है, तो कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस वजह से इलाज में काफी देरी हो जाती है और लड़कियां कई सालों तक तेज दर्द सहती रहती हैं।”

डॉक्टरों के पहचानने में देरी

Dr. Shobha Gupta ने बताया कि कई बार जब पेरेंट्स टीनएजर लड़की को लेकर डॉक्टर के पास जाते हैं, तो एंडोमेट्रयोसिस की जांच नहीं कराते, क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि यह बीमारी 30 या 40 साल की महिलाओं को होती है। इस वजह से जब किशोरियां तेज दर्द जैसी शिकायत के साथ डॉक्टर के पास जाती हैं, तो पेनकिलर दे दी जाती है। बीमारी की असल वजह तक पहुंचने की कोशिश नहीं की जाती।

endometriosis is diagnosed late in teenage girls

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किशोरियों में एंडोमेट्रयोसिस का अलग दिखाई देना

Dr. Shobha Gupta के अनुसार, “वयस्क महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस के कारण बनने वाले घाव गहरे भूरे या काले रंग के थक्के दिखाई देते हैं, जिससे पहचानना आसान होता है, लेकिन टीनएज लड़कियों में ये घाव कई बार लाल, पारदर्शी या बिना रंग के होते हैं। इस वजह से अल्ट्रासाउंड या एमआरआई में इन्हें पहचानना हमेशा आसान नहीं होता।”

लक्षणों की पहचान करना मुश्किल

एंडोमेट्रियोसिस में पीरियड्स में दर्द ही नहीं होता, बल्कि इसमें महिलाओं को कमर दर्द, कूल्हों में दर्द, मतली या उल्टी, सिरदर्द, कब्ज या दस्त और पेशाब के दौरान दर्द हो सकता है। कई बार इन लक्षणों को गैस या यूरिन से जुड़े इंफेक्शन समझ लिया जाता है। इस वजह से भी बीमारी की पहचान नहीं हो पाती।

शर्म और झिझक होना

Dr. Shobha Gupta ने बताया कि टीनएज में लड़कियां पीरियड्स के दौरान होने वाली ज्यादा ब्लीडिंग या पेशाब के दौरान होने वाले दर्द के बारे में खुलकर बात करने से झिझकती है। हमारे देश में गांव और कस्बों में रहने वाली छोटी उम्र की लड़कियां इस तरह की दिक्कतों को मां के साथ शेयर करने में असहज महसूस करती हैं। इस वजह से भी एंड्रोमेट्रियोसिस की पहचान में देरी हो सकती है।

रिसर्च क्या कहती है?

Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित रिव्यू रिपोर्ट के अनुसार, एंड्रोमेटियोसिस के लक्षण बहुत कम उम्र में शुरू हो जाते हैं। इस स्टडी में पाया गया है कि करीब 70 फीसदी महिलाओं में इसके लक्षण 20 साल की उम्र से पहले शुरू हो चुके थे, जबकि करीब 40 प्रतिशत में 15 साल की उम्र से पहले ही संकेत दिखाई देने लगे थे। वहीं, जिन किशोरियों को लगातार पेल्विक पेन और दर्दनाक पीरियड्स की वजह से लैप्रोस्कोपी करानी पड़ी, उनमें 62 से 75 प्रतिशत मामलों में एंडोमेट्रियोसिस की पुष्टि हुई। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि टीनएज लड़कियों में इस बीमारी की पहचान होने में करीब आठ साल तक की देरी देखी गई। यह आंकड़े दिखाते हैं कि पीरियड्स में होने वाले दर्द को आमतौर पर हल्के में ले लिया जाता है।

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निष्कर्ष

Dr. Shobha Gupta कहती हैं कि अगर किसी टीनएज लड़की को पीरियड्स में बेहताशा दर्द हो और फैमिली हिस्ट्री हो, तो डॉक्टर से चेक जरूर कराना चाहिए, क्योंकि रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, डाइट, बैलेंस्ड डाइट और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर भोजन लेने से इस बीमारी को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है। अगर लंबे समय तक इस बीमारी का इलाज न कराया जाए, तो सूजन की वजह से पेल्विस के अंदर चिपकाव बनने लगते हैं और उन्हें भविष्य में प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां भी आ सकती है।

FAQ

  • क्या एंडोमेट्रियोसिस के कारण टीनएज लड़कियों को पाचन से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं?

    एंडोमेट्रियोसिस के टिश्यूज कई बार गर्भाशय के पीछे मौजूद आंतों पर चिपक जाते हैं। इसके कारण लड़कियों को पीरियड्स के दिनों में भयंकर कब्ज, दस्त, पेट फूलना या मल त्याग करते समय मरोड़ के साथ तेज दर्द हो सकता है। इसे अक्सर लोग खराब खान-पान का नतीजा मान लेते हैं।
  • क्या टीनएज में एंडोमेट्रियोसिस होने से भविष्य में मां बनने में दिक्कत आती है?

    अगर इस बीमारी को सालों तक नजरअंदाज किया जाए, तो अंदरूनी घाव और सूजन के कारण फैलोपियन ट्यूब ब्लॉक हो सकती हैं और अंडाशय डैमेज हो सकते हैं। हालांकि, अगर टीनएज में ही इसकी पहचान कर ली जाए और सही इलाज जैसे हार्मोनल थेरेपी शुरू कर दी जाए, तो भविष्य में बांझपन के खतरे को बहुत हद तक कम किया जा सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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