Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Deebanshu Gupta , Cardiologist

ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट में क्या संबंध है? डॉक्टर से जानें दोनों का अंतर

ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को कई बार लोग एक मान लेते हैं लेकिन दोनों में अंतर है। डॉक्टर से जानें इनके अंतर, सेहत पर इनके असर के बारे में।

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हमारे शरीर का हर अंग एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। अगर कोई एक अंग प्रभावित होता है, तो उसका बुरा असर अन्य अंगों पर भी धीरे-धीरे नजर आने लगता है। खासकर, जब हम हेल्थ की बात करते हैं, तो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर का जिक्र जरूर छिड़ता है। कई लोगों को ये दोनों बीमारियां एक-दूसरे से कनेक्टेड लगती हैं। माना जाता है कि एक समस्या बढ़ेगी, तो दूसरी भी निश्चित रूप से बढ़ेगी। लेकिन मेडिकल फील्ड में यह पूरी तरह सच नहीं है। इस लेख में हम जानेंगे कि ये दोनों एक-दूसरे से कनेक्टेड हैं या नहीं और इनके बीच क्या अंतर है? क्या हैं ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट? इस लेख में दिए गए वैज्ञानिक तथ्यों को  जालंधर स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल में Interventional Cardiologist डॉ. दीबांशु गुप्ता ने खुद रिव्यू किया है।

हार्ट रेट क्या है?

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American Heart Association के अनुसार हार्ट रेट, जिसे हम पल्स या धड़कन भी कहते हैं। हृदय एक मिनट में कितनी बार धड़क रहा है, इसी संख्या को हार्ट रेट कहा जाता है। हृदय धड़कता है, तो वह पूरे शरीर में ब्लड के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई करता है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए सामान्य हार्ट रेट 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट के बीच होती है। हार्ट रेट कई तरह के फैक्टर्स से प्रभावित हो सकती है, जैसे शारीरिक गतिविधि, तनाव, इमोशंस और दवाएं।

ब्लड प्रेशर क्या है?

Cleveland Clinic के अनुसार जब हमारा हृदय धड़कता है, तो वह ब्लड को पंप करके पूरे शरीर की नसों और धमनियों में भेजता है। इस प्रक्रिया के दौरान ब्लड द्वारा धमनियों पर जो दबाव बनाया जाता है, उसे ही ब्लड प्रेशर कहते हैं। इसे मुख्य रूप से दो अंकों में मापा जाता है, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर।

ब्लड प्रेशर की श्रेणियां (Blood Pressure Categories)

स्थिति सिस्टोलिक (ऊपर वाला) डायस्टोलिक (नीचे वाला)
सामान्य (Normal) 120 से कम 80 से कम
बढ़ा हुआ (Elevated) 120 - 129 80 से कम
हाई ब्लड प्रेशर (Stage 1) 130 - 139 80 - 89
हाई ब्लड प्रेशर (Stage 2) 140 या अधिक 90 या अधिक
लो ब्लड प्रेशर (Low BP) 90 से कम 60 से कम

हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर के बीच क्या संबंध है?

Cleveland Clinic से पता चलता है, हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर हृदय स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं, लेकिन ये एक ही तरीके से काम नहीं करते हैं। जब आपका दिल तेजी से धड़कता है, तो रक्त वाहिकाएं आमतौर पर चौड़ी हो जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा ब्लड आसानी से प्रवाहित हो सके। इसी वजह से दिल की धड़कन बढ़ने पर हमेशा ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता। उदाहरण के रूप में समझें। एक्सरसाइज करते हुए हार्ट रेट काफी बढ़ सकता है, लेकिन ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है, जबकि तनाव या डर यानी फाइट तथा फ्लाइट मोड में दोनों एक साथ बढ़ सकते हैं, क्योंकि इस दौरान शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है। इसे आप और सरल शब्दों में समझ सकते हैं कि ब्लड प्रेशर केवल दिल कितनी तेजी से धड़क रहा है, इस बात पर निर्भर नहीं करता है। हर धड़कन में ब्लड कितनी मात्रा में पंप हो रहा है, यह बात भी मायने रखती है।

हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को प्रभावित करने वाले कारक

कारक ब्लड प्रेशर (BP) पर प्रभाव हार्ट रेट (HR) पर प्रभाव
बढ़ती उम्र बढ़ता है (धमनियां सख्त होने से) अक्सर स्थिर या थोड़ी कम होती है
धूम्रपान तुरंत बढ़ता है तुरंत बढ़ जाती है
बीटा-ब्लॉकर्स कम होता है काफी कम हो जाती है
शराब (नियमित) असंतुलित/उच्च होता है अनियमित/तेज हो सकती है

क्या हार्ट रेट बढ़ने पर बीपी बढ़ता है?

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डॉ. दीबांशु गुप्ता कहते हैं, "हार्ट रेट बढ़ने पर हमेशा बीपी बढ़े, यह जरूरी नहीं है। जैसे जब आप व्यायाम करते हैं, तो आपकी हार्ट रेट दोगुनी हो सकती है, लेकिन इसका असर ब्लड प्रेशर पर नहीं पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि व्यायाम के दौरान ब्लड वेसल्स चौड़ी हो जाती हैं, जिससे ब्लड फ्लो आसान हो जाता है।" 2013 में Curr Hypertens Rep में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, हार्ट रेट और बीपी, दोनों से स्वास्थ्य स्थिति का पता चलता है।  यदि पल्स रेट अक्सर बढ़ी रहती है लेकिन बीपी सामान्य है या बीपी बढ़ा हुआ है और पल्स सामान्य है, तो दोनों ही कंडीशंस में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये शरीर के अलग-अलग रोगों (जैसे एनीमिया, थायराइड या हाइपरटेंशन) की ओर इशारा कर सकते हैं।’

बीपी और हार्ट रेट: विभिन्न स्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया

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एक्सरसाइज में

American Heart Association के अनुसार हम कई बार हाई इंटेंस वर्कआउट करते हैं, जिसमें मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस स्थिति में दिल की धड़कन तेज हो जाती है। ऐसे में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन स्वस्थ व्यक्ति में डायस्टोलिक प्रेशर स्थिर रहता है या थोड़ा-सा कम हो जाता है। हालांकि एक्सरसाइज के बाद हार्ट रेट तुरंत सामान्य नहीं होता है, लेकिन जो लोग नियमित रूप से वर्कआउट करते हैं, उनका हार्ट अधिक कुशल होता है और उनकी हार्ट रेट तेजी से सामान्य हो जाता है। 

तनाव और चिंता में

डॉ. दीबांशु गुप्ता के अनुसार, "तनाव की स्थिति में शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है। ऐसे में एड्रेनालिन हार्मोन रिलीज होता है, जो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों को एक साथ बढ़ा देता है। जब कोई लंबे समय तक तनाव में रहता है, तो यह हाइपरटेंशन का कारण बन सकता है।" 2011 में Clinical and Experimental Hypertension में प्रकाशित एक शोध, कॉलेज के छात्रों पर परीक्षा के दौरान बढ़ते तनाव और उसके दिल पर पड़ने वाले असर को समझने के लिए किया गया है। इससे पता चलता है कि परीक्षा का समय छात्रों के दिल की धड़कन और बीपी को बढ़ा देता है, और इसमें घबराहट या मानसिक तनाव (Anxiety) सबसे बड़ा कारण बनकर उभरता है। इससे यह भी समझ आता है कि तनाव और चिंता की वजह से दिल की धड़कन और बीपी बढ़ सकते हैं।

डिहाइड्रेशन में

डॉ. दीबांशु गुप्ता के मुताबिक शरीर में पानी की कमी के कारण कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं। इसका असर हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों पर पड़ता है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है। इसे संतुलित करने के लिए दिल तेजी से धड़कने लगता है। इस कंडीशन में ब्लड प्रेशर का स्तर गिर सकता है।

हार्ट हेल्थ को प्रभावित करने वाले कारक

ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट का आपसी तालमेल बहुत गहरा है। इन्हें कई तरह के कारक प्रभावित करते हैं, जैसे-

उम्र

निश्चित तौर पर उम्र बढ़ने के साथ शरीर की धमनियां सख्त होती चली जाती हैं, क्योंकि वे अपना लचीलापन खो देती हैं। इस स्थिति में, भले ही आपकी हार्ट रेट सामान्य रहे, लेकिन सख्त धमनियों के कारण ब्लड फ्लो बाधित होता है। ऐसे में बीपी बढ़ जाता है।

धूम्रपान-शराब की लत

डॉ. दीबांशु गुप्ता बताते हैं, “अगर कोई व्यक्ति लगातार धूम्रपान या शराब की लत का शिकार है, तो उन्हें बीपी और हार्ट संबंधी समस्या होने की आशंका अधिक होती है। सिगरेट में निकोटिन होता है, जो ब्लड वेसल्स को तुरंत सिकोड़ देता है, जिससे बीपी और हार्ट रेट दोनों अचानक बढ़ जाते हैं। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव बनता है। वहीं, शराब की बात करें, तो यह हृदय की मांसपेशियों को कमजोर कर देती है। इस स्थिति को कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है। इससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह बिगड़ सकता है।”

दवाओं का प्रभाव

अगर कोई पहले से ही हाई बीपी या हृदय संबंधी समस्याओं की दवा ले रहा है, तो उनकी पल्स रिपोर्ट सामान्य से अलग हो सकती है। डॉ. दीबांशु गुप्ता समझाते हैं, "बीटा-ब्लॉकर्स जैसी दवाएं हृदय की गति को जानबूझकर धीमा रखती हैं। ऐसी स्थिति में, हैवी वर्कआउट के बावजूद हार्ट रेट बढ़ता नहीं है।"

बीपी और हार्ट रेट का संतुलन बिगड़ने पर क्या होता है?

डॉ. दीबांशु गुप्ता बताते हैं, जब बीपी और हार्ट रेट का आपसी संतुलन बिगड़ता है, तो इसकी वजह से कई गंभीर बीमारियां होने लगती हैं, जैसे-

हाइपरटेंशन

अगर धमनियों पर लगातार रक्त का दबाव बना रहता है, तो ऐसे में धमनियां सख्त और संकीर्ण हो जाती हैं। ऐसे में शरीर तक पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंच पाता है। यह हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन का कारण बन सकता है, जिससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। 

अचानक चक्कर आना या बेहोशी

डॉ. दीबांशु गुप्ता की मानें तो हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर का मुख्य काम पूरे शरीर में ब्लड पहुंचाना है। खासकर, ब्रेन में ब्लड फ्लो बनाए रखना है। अगर किसी वजह से बीपी बहुत कम हो जाता है और हार्ट रेट उसे संभालने के लिए पर्याप्त न बढ़े, तो ब्रेन तक ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने लगती है, जिसकी वजह से व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं। ऐसे में व्यक्ति की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है और अचानक बेहोशी छा जाती है।

अंगों की कार्यक्षमता में कमी

जब बीपी और हार्ट रेट के बीच संतुलन गड़बड़ा जाता है, तो इस स्थिति में शरीर के कई अंगों पर दबाव पड़ता है। जैसे कम बीपी से किडनी फिल्टरेशन धीमा हो जाता है, जिससे विषैले पदार्थ शरीर में जमा होने लगते हैं। वहीं, हार्ट रेट तेज हो, लेकिन बीपी असंतुलित है, तो फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है। American Heart Association से पता चलता है कि ब्लड प्रेशर बढ़ने से हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर भी हो सकता है।

शॉक लगना

अगर किसी वजह से बीपी खतरनाक रूप से गिर जाता है और हृदय गति उसे पंप करके रिकवर न कर पाए, तो शरीर हाइपोवॉलेमिक या कार्डियोजेनिक शॉक में जा सकता है। यह एक तरह की मेडिकल कंडीशन है।

बीपी और हार्ट रेट का संतुलन बिगड़ने का कारण और परिणाम

बीमारी मुख्य कारण परिणाम
स्ट्रोक धमनियों का फटना या थक्का जमना मस्तिष्क की कोशिकाओं का मरना
हार्ट अटैक हृदय की नसों में रुकावट दिल की मांसपेशियों का काम बंद करना
किडनी फेलियर सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं का डैमेज शरीर में टॉक्सिन (जहर) का बढ़ना

हार्ट हेल्थ में सुधार कैसे करें?

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हार्ट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए बीपी और हार्ट रेट दोनों का संतुलन जरूरी है। इनमें सुधार के लिए Harvard Health Publishing में दिए गए टिप्स को फॉलो कर सकते हैं-

  • कार्डियो एक्सरसाइज करेंः दौड़ना, तैरना या साइकिलिंग करने से हृदय की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, जिससे दिल को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है।
  • सही डाइट लेंः फल, सब्जियां और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन करें। इसके अलावा, डाइट में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बनाए रखें। अधिक नमक (सोडियम) शरीर में पानी को रोकता है, जिससे खून का वॉल्यूम बढ़ता है और धमनियों पर दबाव बढ़ जाता है। पोटेशियम की मात्रा बढ़ाने के लिए केला, पालक और शकरकंद जैसे खाद्य पदार्थ शामिल करें।
  • नींद की गुणवत्ताः 7-8 घंटे की गहरी नींद हार्ट रेट के लिए बहुत जरूरी होती है। इससे हार्ट रेट नेचुरल तरीके से धीमी और स्थिर होती है।

हार्ट हेल्थ: मिथक बनाम तथ्य

विषय मिथक फैक्ट्स
BP और पल्स का संबंध यदि पल्स रेट सामान्य है, तो ब्लड प्रेशर भी सामान्य ही होगा। आपको गंभीर हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है जबकि आपकी पल्स रेट बिल्कुल सामान्य हो। दोनों का कार्य अलग है, इसलिए दोनों को अलग-अलग मापना जरूरी है।
तेज धड़कन (Heart Rate) तेजी से धड़कता दिल हमेशा किसी गंभीर खतरे या बीमारी की घंटी है। उत्साह, डर, तनाव या व्यायाम के कारण दिल का तेज धड़कना एक सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है। यह हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता।
बीमारी का संकेत केवल बुजुर्गों को ही अपने BP और हार्ट रेट की चिंता करनी चाहिए। आजकल की जीवनशैली के कारण युवाओं में भी असंतुलन देखा जा रहा है। नियमित जांच हर उम्र के लिए जरूरी है।

बीपी और हार्ट रेट का संतुलन बिगड़ने पर कब जाएं डॉक्टर के पास

ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट का संतुलन बिगड़ने का मतलब है कि हृदय शरीर की जरूरतों को सही तरह से पूरा नहीं कर पा रहा है। हालांकि, तनाव या थकान के कारण इनमें मामूली उतार-चढ़ाव होना सामान्य है, लेकिन कुछ स्थितियां मेडिकल इमरजेंसी हो सकती हैं, जैसे-

  • सीने में दर्द या भारीपन हो जो कि हाथ, गर्दन या जबड़े तक फैल रहा हो।
  • अचानक सांस फूलने लगे और  बैठे रहने या थोड़ा चलने पर भी सांस लेने में तकलीफ हो।
  • अचानक सिर घूमने लगे और आंखों के सामने अंधेरा छा जाए।
  • बिना कोई फिजिकल एक्टिविटी के पसीना आने लगे।
  • अगर आपका बीपी 180/120 mmHg या इससे अधिक हो जाए।
  • अचानक बीपी 90/60 mmHg से नीचे गिर जाए।
  • अगर बीपी हाई हो और साथ में धड़कन भी बहुत तेज हो।

निष्कर्ष

ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट हमारी ओवर ऑल हेल्थ के लिए बहुत जरूरी पहलू हैं। हार्ट रेट से हार्ट की गति के बारे में जानकारी मिलती है, जबकि ब्लड प्रेशर रक्त के दबाव के बारे में बताता है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए दोनों के बीच संतुलन होना जरूरी है। कई बार हमारी खराब जीवनशैली या बढ़ता तनाव इन दोनों का आपसी संतुलन बिगाड़ देता है। इसके लिए, जरूरी है कि व्यक्ति नियमित रूप से अपनी जांच करवाएं। अगर हार्ट रेट या ब्लड प्रेशर में सामान्य सा बदलाव भी महसूस करें, तो तुरंत हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर एक ही चीज हैं?

    नहीं। ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं। हार्ट रेट यह बताता है कि आपका दिल 1 मिनट में कितनी बार धड़कता है, जबकि ब्लड प्रेशर से पता चलता है कि रक्त धमनियों की दीवारों पर कितना दबाव डाल रहा है।
  • क्या पल्स रेट सामान्य होने पर भी बीपी हाई हो सकता है?

    हां, पल्स सामान्य होते हुए भी ब्लड प्रेशर खतरनाक रूप से बढ़ सकता है। इसीलिए बीपी को साइलेंट किलर कहा जाता है।
  • एक्सरसाइज के दौरान हार्ट रेट क्यों बढ़ती है?

    एक्सरसाइज के दौरान मांसपेशियों को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसकी आपूर्ति के लिए दिल को तेजी से पंप करना पड़ता है। स्वस्थ व्यक्ति का इस दौरान बीपी नहीं बढ़ता है।
  • डिहाइड्रेशन बीपी या हार्ट रेट पर क्या असर पड़ता है?

    डिहाइड्रेशन के कारण बॉडी में पानी की कमी हो जाती है। पानी ब्लड वॉल्यूम के जरूरी होता है। इसलिए, जब बॉडी डिहाइड्रेट होती है, तो शरीर में ब्लड वॉल्यूम कम हो जाता है, जिससे बीपी गिर जाता है। इस कमी को पूरा करने के लिए दिल को तेजी से धड़कना पड़ता है, जिससे हार्ट रेट बढ़ने लगता है।
  • पल्स प्रेशर क्या है?

    ऊपरी बीपी (सिस्टोलिक) और निचले बीपी (डायस्टोलिक) के बीच के अंतर को पल्स प्रेशर कहा जाता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 25, 2026 17:25 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Apr 25, 2026 17:25 IST

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  • Apr 25, 2026 17:25 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta

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