आमतौर पर अनियमित पीरियड्स होने को हम महिलाओं की प्रजनन क्षमता और हार्मोनल इंबैलेंस से जोड़कर देखते हैं। इसका मतलब है कि महिलाओं को पीसीओएस या एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या है, जिसमें ओवरीज प्रभावित होती हैं, जिसकी वजह से भविष्य में उन्हें कंसीव करने में दिक्कतें आती हैं। बहरहाल, क्या कभी आपने सोचा है कि अनियमित पीरियड्स का संबंध हार्ट संबंधी बीमारियों से भी हो सकता है? माना जाता है कि अनियमित पीरियड्स का हार्ट हेल्थ पर गहरा असर पड़ता है। आइए, वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट डॉ. शोभा गुप्ता से जानते हैं कि इसका आपस में क्या कनेक्शन है?
क्या अनियमित पीरियड्स का हार्ट की बीमारी से कोई संबंध है?
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यह पूरी तरह सच है कि अनियमित पीरियड्स का हार्ट हेल्थ से गहरा संबंध है। इस संबंध में साल 2023 में Journal Of The American Heart Association में प्रकाशित एक शोध के अनुसार जिन महिलाओं में पीरियड साइकिल 35 दिन या उससे अधिक है या फिर बहुत छोटी यानी 21 दिन से भी कम, उनमें हृदय रोगों और एट्रियल फाइब्रिलेशन (एक प्रकार की हृदय अतालता) का खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेष रूप से, जिन महिलाओं का पीरियड साइकिल छोटा होता है, उनमें कोरोनरी हार्ट डिजीज का जोखिम अधिक होता है।" हालांकि, शोध में यह भी बताया गया है कि इस संबंध में और भी रिसर्च की जरूरत है, लेकिन यह स्पष्ट होता है कि जिन महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हैं, उन्हें हार्ट की बीमारी का खतरा होता है। इसलिए, उन्हें अपने हेल्थ को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। हालांकि यहां ये बताया जाना भी जरूरी है कि अनियमित पीरियड्स सीधे दिल की बीमारी का कारण नहीं बनते हैं, बल्कि ये एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी, पीसीओएस (PCOS), मेटाबोलिक सिंड्रोम और क्रोनिक इन्फ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन) के माध्यम से जोखिम बढ़ाते हैं।
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अनियमित पीरियड्स कैसे बढ़ाते हैं हार्ट की बीमारी का खतरा?
जैसा कि यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है कि अनियमित पीरियड्स हार्मोनल अंसतुलन का संकेत हो सकता है, जैसे पीसीओएस (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) या थायराइड की बीमारी। हार्मोनल परिवर्तन होने पर कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-
इंसुलिन रेजिस्टेंस
पीरियड्स अनियमित होने पर बाॅडी सेल्स इंसुलिन के प्रति सही तरह से प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, जिसे हम इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं। इंसुलिन का काम खून से शुगर को सेल्स तक पहुंचाना होता है, लेकिन जब ऐसा नहीं होता है, तो ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने लगता है। इससे आगे चलकर टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
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अंदरूनी हिस्सों में सूजन
हार्मोनल असंतुलन के कारण शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन होने लगती है। इससे ब्लड वेसल्स को नुकसान होने लगता है, जो कि ब्लड फ्लो को बाधित करती है। इसके साथ ही, यह स्थिति लीवर को ज्यादा मात्रा में लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बनाने के लिए उकसाती है। ध्यान रखें कि जब शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल घटता है, तो यह दिल की बीमारियों और नसों के ब्लॉक होने के खतरे को बढ़ा देता है।
हाइपरटेंशन
चूंकि, यह स्पष्ट हो चुका है कि अनियमित पीरियड्स के कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस और अंदरूनी सूजन बढ़ने लगती है। इसका सीधा-सीधा असर ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। दरअसल, जब ब्लड वेसल्स में सूजन होती है और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, तो खून की नलिकाएं सख्त और संकुचित हो जाती हैं। ऐसे में दिल को ब्लड पंप करने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इसी दबाव को हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, जो लंबे समय में स्ट्रोक (लकवा) या हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
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निष्कर्ष
अनियमित पीरियड्स का हार्ट हेल्थ से गहरा कनेक्शन है। असल में कई हार्मोनल गड़बड़ियों के कारण अनियमित पीरियड्स होते हैं, जिसका असर शरीर के कई अन्य हिस्सों पर पड़ता है। ऐसे में इंसुलिन रेजिस्टेंस, शरीर में अंदरूनी सूजन होना और कई अन्य परेशानियों का जन्म लेने लगती हैं। ये तमाम चीजें हार्ट हेल्थ को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए, अगर महिलाओं को पीरियड्स अनियमित हो रहे हैं, तो उन्हें इस स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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FAQ
कितने दिनों से छोटे या बड़े पीरियड साइकिल को खतरनाक माना जाता है?
यदि पीरियड साइकिल 21 दिन से छोटी या 35 दिन से लंबी हो, तो इस अनियमितता को खतरनाक माना जाता है।अनियमित पीरियड्स होने पर दिल को स्वस्थ कैसे रखें?
अगर अनियमित पीरियड्स हैं, तो तुरंत गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर हार्मोनल जांच कराएं। इसके अलावा, अपनी डाइट में बदलाव करें, नियमित एक्सरसाइज करें और वजन को नियंत्रित रखें।
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Jun 30, 2026 09:44 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 30, 2026 09:44 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta