महिलाएं परिवार के हर सदस्य की सेहत का पूरा ध्यान रखती हैं, लेकिन जब बात उनकी अपने स्वास्थ्य की आती है, तो उसे वे पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। उन्हें अपने शरीर में नजर आ रहे हर छोटे-बड़े संकेतों पर गौर करना चाहिए। विशेषकर, शरीर में किसी भी तरह के पोषक तत्व की कमी की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। इससे उनका शरीर कमजोर हो सकता है और संक्रमण से लड़ने की उनकी क्षमता घट सकती है। इस लेख में हम Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से जानेंगे कि महिलाओं के लिए फाइबर कितना जरूरी है और इसकी कमी होने पर शरीर में कैसे संकेत नजर आ सकते हैं।
महिलाओं के लिए फाइबर क्यों जरूरी है?
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वैसे तो फाइबर हर व्यक्ति के लिए जरूरी है। खासकर, महिलाओं की बात करें, उनके लिए फाइबर और भी जरूरी हो जाता है, क्योंकि यह सिर्फ पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के लिए आवश्यक नहीं है। इसके साथ-साथ उनके हार्मोनल हेल्थ और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं के शरीर में हर उम्र में अलग-अलग तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। कभी पीरियड्स के कारण तो कभी प्रेग्नेंसी की वजह से। ऐसे में फाइबर की सही मात्रा उनके स्वास्थ्य में सुधार करती है और पीरियड्स को नियमित बनाए रखने में मदद करती है और ब्लड शुगर को भी संतुलित रखती है।
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महिलाओं में फाइबर की कमी के संकेत
1. कब्ज की समस्याः फाइबर की कमी से शरीर में नजर आने वाला सबसे सामान्य संकेत है, कब्ज की समस्या। फाइबर का सेवन करने से मल त्याग ने की प्रक्रिया आसान होती है, जिससे पेट साफ रहता है और पाचन संबंधी कोई समस्या नहीं होती है।
2. बार-बार भूख लगनाः आमतौर पर फाइबर धीरे डाइजेस्ट होता है। अगर शरीर में फाइबर की कमी होने लगे, तो महिला को बार-बार भूख लग सकती है। दरअसल, जब फाइबर शरीर में कम होने लगता है, तो पेट तेजी से खाली हो जाता है, जिस वजह से बार-बार खाने की चाह बढ़ जाती है।
3. एनर्जी में कमीः शायद ही कोई महिला यह सोचती हो कि फाइबर की कमी की वजह से उनके शरीर में एनर्जी का स्तर कम हो सकता है। इस संबंध में एक्सपर्ट बताते हैं कि फाइबर की कमी होने से शरीर में शुगर का अवशोषण बहुत तेज हो जाता है। याद रखें कि फाइबर के बिना खून में शुगरबहुत तेजी से घुलेगा, जिससे ब्लड शुगर का स्तर बार-बार बदलता रहता है।
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4. पेट फूलनाः शरीर में फाइबर की कमी होने से आंत में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे पेट में बहुत ज्यादा गैस बनने लगती है और ब्लोटिंग का एहसास होता है। इससे महिला को असहजता भी महसूस होती है।
5. मूड स्विंग होनाः पेट के बैक्टीरिया एस्ट्रोजन हार्मोन को पचाने और उसे शरीर से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए, जब महिलाएं डाइट में कम फाइबर लेती हैं, तो इससे बैक्टीरिया पर असर पड़ता है। इसका सीधा-सीधा असर हार्मोन पर नजर आता है, जिससे महिलाएं मूड स्विंग झेलती हैं। हालांकि, फाइबर का मूड स्विंग से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
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निष्कर्ष
महिलाओं की डाइट में फाइबर की कमी नहीं होनी चाहिए। यह उनमें एनर्जी के स्तर को बनाए रखता है, आंत के बैक्टीरिया को संतुलित रखता है और पाचन संबंधी समस्याओं को भी कम करता है। जब पेट साफ रहता है तथा आंतों के बैक्टीरिया संतुलित रहते हैं, तो इससे मूड स्विंग होने की समस्या भी नहीं होती है। इसलिए, बहुत जरूरी है कि महिलाएं पर्याप्त मात्रा में फाइबर का सेवन करें। आपको एक दिन में कितना फाइबर लेना है, इस संबंध में एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर होता है।
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FAQ
महिला को रोजाना कितने ग्राम फाइबर लेना चाहिए?
एक वयस्क महिला को रोजाना लगभग 21 से 25 ग्राम फाइबर का सेवन करना चाहिए। यह स्वस्थ पाचन और हार्मोनल संतुलन के लिए जरूरी है।क्या फाइबर की कमी से महिलाओं का वजन बढ़ सकता है?
हां, फाइबर की कमी से पेट जल्दी खाली हो जाता है जिससे बार-बार भूख लगती है। ऐसे में महिलाएं अनजाने में ओवर-ईटिंग कर बैठती हैं, जिससे वजन बढ़ने लगता है।डाइट में फाइबर की मात्रा बढ़ाने के सबसे आसान तरीका क्या है?
फल जैसे सेब, नाशपाती और ओट्स, चिया सीड्स, दालें, ब्रोकली आदि चीजें फाइबर का सबसे अच्छा स्रोत हैं।
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Jun 29, 2026 20:56 IST
Modified By : Meera Tagore Jun 29, 2026 20:56 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dt Divya Gandhi