Wed Oct 7, 2026 | 12:13 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

क्या शुरुआती 'Heart Disease' को आयुर्वेद से रिवर्स किया जा सकता है? आयुर्वेदाचार्य से जानें

आजकल हार्ट डिजीज सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि 30-40 साल के युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में कई लोगों का सवाल होता है कि क्या शुरुआती 'Heart Disease' को आयुर्वेद से रिवर्स किया जा सकता है?
क्या शुरुआती 'Heart Disease' को आयुर्वेद से रिवर्स किया जा सकता है? आयुर्वेदाचार्य से जानेंक्या शुरुआती 'Heart Disease' को आयुर्वेद से रिवर्स किया जा सकता है? आयुर्वेदाचार्य से जानें

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल की बीमारी अब किसी एक उम्र तक सीमित नहीं रही। कभी 60 साल के बाद होने वाली समस्या मानी जाने वाली हार्ट डिजीज अब 30-35 साल के युवाओं में भी तेजी से देखी जा रही है। अचानक सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, हल्का-सा सीने में दबाव महसूस होना या बिना वजह थकान लगना, ये संकेत अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही छोटे-छोटे लक्षण आगे चलकर बड़ी दिल की समस्या का रूप ले सकती हैं। ऐसे में लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठता है कि क्या शुरुआती हार्ट डिजीज को बिना सर्जरी और बिना भारी दवाओं के नेचुरल तरीके से ठीक किया जा सकता है? क्या नसों में जमी ब्लॉकेज को कम किया जा सकता है? क्या दिल की पंपिंग क्षमता दोबारा बेहतर हो सकती है? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से बात की-

क्या शुरुआती हार्ट डिजीज को आयुर्वेद से रिवर्स किया जा सकता है?

आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, इमरजेंसी स्थितियों को छोड़कर आयुर्वेद में लगभग हर कंडीशन को मैनेज करने की क्षमता है, जिसमें हृदय से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं। LVEF (Left Ventricular Ejection Fraction) दिल की पंपिंग क्षमता को दर्शाता है। जब LVEF कम हो जाता है, तो इसका मतलब है कि दिल शरीर में पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं पंप कर पा रहा है। इस स्थिति को भी आयुर्वेद से सही किया जा सकता है।

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डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि यदि दिल की नसों में 70-80 प्रतिशत तक ब्लॉकेज है, तो आयुर्वेदिक उपचार, सही आहार और जीवनशैली में बदलाव के जरिए इसे काफी हद तक रिवर्स किया जा सकता है। हालांकि, यदि ब्लॉकेज 95 प्रतिशत से अधिक हो, तो यह इमरजेंसी स्थिति होती है और तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करना जरूरी है।

अगर किसी व्यक्ति को सीढ़ियां चढ़ते समय सांस चढ़ने लगे, सीने में भारीपन महसूस हो या ब्लड वेसल्स में हार्डनिंग (Atherosclerosis) हो गई हो, तो ये शुरुआती हार्ट डिजीज के संकेत हो सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में आम (टॉक्सिन) इकट्ठा हो जाता है और कफ दोष बढ़ जाता है, तो यह नसों में जमाव का कारण बनता है। ऐसे में पंचकर्म, औषधियों और डाइट कंट्रोल के माध्यम से नसों की सफाई और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाया जा सकता है।

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Can Ayurveda reverse early heart diseaseCan Ayurveda reverse early heart disease

क्या कहती है केस रिपोर्ट

NIH की एक केस रिपोर्ट के अनुसार, आयुर्वेदिक प्रबंधन से वॉल्वुलर हृदय रोग (valvular heart disease) जैसे गंभीर स्थितियों में भी मरीज की स्थिति में सुधार हुआ। लगभग 11 महीने के उपचार के बाद माइट्रल वाल्व का क्षेत्रफल 1.3 से 3.52 वर्ग सेंटीमीटर तक बढ़ गया, जो एक पॉजिटिव बदलाव माना गया। इससे संकेत मिलता है कि आयुर्वेद में हृदय रोग यानी हार्ट डिजीज के प्राकृतिक उपचार की संभावनाएं मौजूद हैं और इसे आगे बड़े वैज्ञानिक शोध यानी मेडिकल रिसर्च की जरूरत है।

डॉक्टर की सलाह

डॉक्टर श्रेय शर्मा का कहना है कि सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि सही दिनचर्या से भी हार्ट डिजीज को मैनेज किया जा सकता है। आयुर्वेद में दिनचर्या और ऋतुचर्या का विशेष महत्व है, तली-भुनी चीजों से परहेज, नियमित एक्सरसाइज, योग और प्राणायाम दिल को मजबूत बनाने में मददगार हो सकते हैं।

निष्कर्ष

डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, यदि हार्ट डिजीज शुरुआती अवस्था में है और ब्लॉकेज 70-80 प्रतिशत तक है, तो सही आयुर्वेदिक उपचार, आहार, योग और नियमित मॉनिटरिंग से स्थिति में सुधार संभव है लेकिन गंभीर ब्लॉकेज या इमरजेंसी स्थिति में देरी करना खतरनाक हो सकता है।

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FAQ

  • हार्ट डिजीज के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

    सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, जल्दी थकान, चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना और पैरों में सूजन इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। 
  • दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

    रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करें, हरी सब्जियां और फल खाएं, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करें, तनाव कम रखें, पर्याप्त नींद लें और नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
  • क्या हार्ट डिजीज को रिवर्स किया जा सकता है?

    अगर बीमारी शुरुआती चरण में है, तो जीवनशैली में बदलाव, संतुलित आहार, नियमित एक्सरसाइज, वजन कंट्रोल और डॉक्टर की सलाह से दवाओं के माध्यम से स्थिति में सुधार संभव है।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 25, 2026 19:55 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Feb 25, 2026 19:55 IST

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