अनहेल्दी खान-पान, लाइफस्टाइल से जुड़ी अस्वस्थ आदतों के कारण लोगों का यूरिक एसिड बढ़ने का रिस्क हो सकता है। आमतौर पर लोग इसे बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन बढ़ा हुआ यूरिक एसिड सिर्फ एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई बीमारियां होने का संकेत हो सकता है। अगर शरीर में यूरिक एसिड बढ़ा हो, तो इसके छोटे-छोटे क्रिस्टल जोड़ों, किडनी और टिश्यू में जमा होकर दर्द, सूजन और किडनी में स्टोन जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं। इसलिए यूरिक एसिड को बेहतर तरीके से समझना जरूरी है, क्योंकि यह केमिकल हर किसी के शरीर में बनता है, लेकिन अगर इसकी मात्रा ज्यादा हो जाए या शरीर इसे बाहर न निकाल पाए, तो यह कई तरह की परेशानियां दे सकता है। इस बारे में जानने के लिए Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की।
वह मानते हैं कि अगर हाई यूरिक एसिड की समय पर पहचान हो जाए, तो कई बीमारियों के रिस्क को काफी हद तक कम किया जा सकता है और इसे दवाइयों व लाइफस्टाइल में बदलाव करके नियंत्रित भी किया जा सकता है।
यूरिक एसिड क्या होता है?
Cleveland Clinic के अनुसार, यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला वेस्ट प्रोडक्ट है, जो खाने-पीने में मौजूद प्यूरीन केमिकल के टूटने से बनता है। आमतौर पर यूरिक एसिड ब्लड में घुलकर किडनी से होता हुआ पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है। अगर शरीर में यूरिक एसिड पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाता या उसकी मात्रा बढ़ जाती है, तो इस कंडीशन को हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है। इस स्थिति में यूरिक एसिड नुकीले क्रिस्टल्स के रूप में शरीर में जमा होने लगता है। कई बार ये क्रिस्टल्स किडनी में जमा होकर पथरी का रूप भी ले सकते हैं।
Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “हर व्यक्ति में हाई यूरिक एसिड के लक्षण दिखाई दें, ऐसा भी जरूरी नहीं होता। मैंने कई मामलों में देखा है कि यूरिक एसिड बढ़ा होने पर भी कुछ लोगों को कोई परेशानी नहीं होती, जबकि कुछ लोगों को अचानक गठिया या किडनी में स्टोन हो सकता है।”
शरीर में यूरिक एसिड क्या करता है?
Journal of Advanced Research के अनुसार, यूरिक एसिड मुख्य रूप से लिवर, आंतों और मांसपेशियों में बनता है और आमतौर पर जानवरों में यूरिकेस एंजाइम यूरिक एसिड को आसानी से घुलने वाला पदार्थ बना देता है, लेकिन बंदरों और इंसानों में यह एंजाइम नहीं होता। इसलिए करीब 70 फीसदी यूरिक एसिड किडनी के जरिए शरीर से बाहर निकल जाता है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि यूरिक एसिड का सिर्फ नुकसान ही होता है, लेकिन यूरिक एसिड की शरीर में अहम भूमिका होती है।
- ब्लड प्लाज्मा में 50 फीसदी से ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट क्षमता यूरिक एसिड की वजह से होती है और यह शरीर के फ्री-रेडिकल्स को खत्म करता है।
- यूरिक एसिड शरीर के इम्यून सिस्टम को एक्टिव रखता है और संक्रमणों से लड़ने में मदद करता है।
- अगर शरीर में यूरिक एसिड कम होता है, तो उन लोगों में मल्टीपल स्केलेरोसिस, पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है।
- यह आंतों और ब्लड में मौजूद परजीवी जैसे शिस्टोसोमियासिस के खिलाफ शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।
यूरिक एसिड का सामान्य स्तर क्या है?
Arthritis Foundation के मुताबिक, पुरुषों में सामान्य यूरिक एसिड 3.4 से 7.0 mg/dL रेंज में होता है और महिलाओं में 2.4 से 6.0 mg/dL होता है। अगर इसकी रेंज ज्यादा या कम होती है, तो यूरिक एसिड शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “अगर रिपोर्ट में यूरिक एसिड ज्यादा आता है या फिर 8 या 9 mg/dL होता है, लेकिन इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, तो मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, किडनी की कंडीशन और अन्य चेकअप कराए जाते हैं, ताकि सही कारणों का पता लगाया जा सके।”
यूरिक एसिड बढ़ने के कारण
Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि यूरिक एसिड बढ़ने के कई कारण हो सकते हैं।
- कई फूड्स जैसे रेड मीट, ऑर्गन मीट, सीफूड, डिब्बाबंद जूस या मीठे स्नैक्स और शराब के कारण यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
- इम्यूनोसप्रेसेन्ट, बीपी या सूजन की दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी यूरिक एसिड को बढ़ा सकते हैं।
- जो लोग मोटापे से ग्रस्त होते हैं, उन्हें यूरिक एसिड पर ध्यान रखना चाहिए।
- फैमिली हिस्ट्री होना
- जिन लोगों को हाइपोथायरायडिज्म की समस्या होती है, उनमें यूरिक एसिड बढ़ने का रिस्क काफी ज्यादा होता है।
- डिहाइड्रेशन के कारण पेशाब के जरिए यूरिक एसिड शरीर से बाहर नहीं निकल पाता।
- अगर किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो भी यूरिक एसिड बढ़ सकता है।
यूरिक एसिड बढ़ने के लक्षण
Cleveland Clinic में बताया गया है कि यूरिक एसिड बढ़ने पर मरीज को ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
- जोड़ों में गाउट अटैक
- असहनीय तेज दर्द
- जोड़ों का लाल होना
- अकड़न
- सूजन
- जोड़ों में गर्मी महसूस होना
- किडनी में स्टोन होना
- पीठ के निचले हिस्से में दर्द
- मतली या उल्टी
- बुखार आना
- पेशाब में ब्लड आना
- पेशाब करते समय दर्द होना
- बार-बार पेशाब करने की इच्छा होना
- बदबूदार पेशाब आना
यूरिक एसिड कम होने के कारण
Science Direct में प्रकाशित जर्नल के अनुसार, जब यूरिक एसिड सामान्य स्तर से कम होने लगता है, तो इस कंडीशन को हाइपोयूरिसीमिया कहा जाता है। यह स्थिति बहुत कम लोगों में देखने को मिलती है। इसके कई कारण हो सकते हैं।
- ब्लड में प्रोटीन, लिपिड या ट्राइग्लिसराइड्स का बहुत ज्यादा बढ़ जाना
- गंभीर डायबिटीज या डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (Diabetic Ketoacidosis) में ग्लूकोज या मैनिटॉल का बढ़ना
- बच्चों में खासतौर पर उल्टी, दस्त या बहुत ज्यादा पसीना आना
- किडनी से जुड़ी दवाएं, सेरेब्रल साल्ट-वेस्टिंग सिंड्रोम या एडिसन बीमारी का होना
- हार्ट फेलियर, लिवर सिरोसिस या नेफ्रोटिक सिंड्रोम होना
इस जर्नल के अनुसार, यूरिक एसिड कम होने के लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लोगों को दिमाग में सूजन के कारण सिरदर्द, उल्टी, दौरे पड़ना या कोमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
Dr. Vineet Malhotra बताते हैं कि लो यूरिक एसिड होने का रिस्क डायबिटीज, लिवर की बीमारियों के मरीज, कम प्रोटीन या लो प्यूरीन डाइट लेने वाले लोगों में ज्यादा हो सकता है।
यूरिक एसिड का असर किन अंगों पर पड़ता है?
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, "हाई यूरिक एसिड का असर पूरे शरीर पर पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर लोगों के पैर, टखनों, कलाई में सूजन, किडनी, हार्ट, डाइजेशन सिस्टम पर देखने को मिलता है साथ ही इससे डायबिटीज जैसी समस्या भी हो सकती है।”
जोड़ों पर असर
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, "ब्लड में यूरिक एसिड बढ़ने पर जोड़ों में यूरेट क्रिस्टल बनने लगते हैं। ये क्रिस्टल जोड़ों में अचानक से तेज दर्द और सूजन बढ़ा देते हैं और अगर इसका समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह दर्द और सूजन कई दिनों से लेकर हफ्तों तक रह सकता है। आमतौर पर लोगों को सबसे ज्यादा कंफ्यूजन इस बात से होती है कि जोड़ों का दर्द, गठिया का है या फिर यूरिक एसिड से हुआ है। गाउट अटैक में जोड़ों का दर्द अचानक तेजी से बढ़ता है और जोड़ लाल हो जाते हैं और उसमें से गर्माहट जैसा महसूस होता है, जबकि गठिया का दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और इसमें जोड़ों पर लालिमा नहीं आती। अगर यूरिक एसिड का इलाज न किया जाए, तो जोड़ों में गांठें बनने लगती हैं, जिससे भविष्य में गंभीर आर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।”
किडनी पर असर
Nature में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, किडनी की बीमारी का कारण यूरिक एसिड भी हो सकता है। इस स्टडी में कोरियाई आबादी पर यूरिक एसिड के लेवल और किडनी के फंक्शन के बीच के कनेक्शन को समझने की कोशिश की गई है। इसमें 11,042 लोगों पर रिसर्च की गई, तो पाया गया कि जिन लोगों में यूरिक एसिड का स्तर जितना ज्यादा था, किडनी के सही तरीके से काम करने की क्षमता उतनी ही कम थी। पुरुषों में हाइपरयूरिसीमिया वाले ग्रुप में किडनी के फंक्शन घटने का रिस्क 5.55 गुना ज्यादा पाया गया, वहीं महिलाओं में हाइपरयूरिसीमिया वाले ग्रुप में किडनी के फंक्शन घटने का रिस्क 7.52 गुना ज्यादा था।
Kidney International Reports के अनुसार, जिन लोगों को क्रोनिक किडनी की समस्या है, उनमें हाइपरयूरिसीमिया करीब 60% रोगियों में पाया गया है। Dr. Vineet Malhotra ने कहा, “यूरिक एसिड बढ़ने पर किडनी में पथरी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, क्योंकि किडनी ही यूरिक एसिड को बाहर निकालने का काम करती है। जब किडनी यूरिक एसिड को बाहर निकालने में सक्षम नहीं होती या फिर शरीर में यूरिक एसिड बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो किडनी में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स बनने लगते हैं, जिसे किडनी में पथरी होना कहा जाता है।”
हार्ट पर असर
Journal of the American Heart Association में प्रकाशित रिसर्च में बताया गया है कि एट्रियल फाइब्रिलेशन (AFib) की ग्रोथ में यूरिक एसिड महत्वपूर्ण होता है। AFib हार्ट बीट सही न होने की कंडीशन है, जो खून के थक्के, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और हार्ट से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इस स्टडी में हाई यूरिक एसिड वाले लोगों में AFib होने का रिस्क 45% ज्यादा पाया गया। हाल ही में हुए अध्ययनों में हाई यूरिक एसिड को हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों से जोड़ा गया है।
पेट पर असर
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, "यूरिक एसिड को बाहर निकालने के लिए शरीर सिर्फ किडनी और आंतों पर ही निर्भर है। इसमें से करीब दो तिहाई हिस्सा किडनी निकालती है और एक तिहाई हिस्से को आंतों के जरिए बाहर निकाला जाता है। जब यूरिक एसिड बढ़ जाता है, तो इसका असर आंतों पर पड़ता है और इससे पेट की बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है।”
यूरिक एसिड का फैटी लिवर से कनेक्शन
Dr. Vineet Malhotra ने कहा, "यूरिक एसिड बढ़ने पर शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो लिवर में सूजन का कारण बन सकता है। यूरिक एसिड लिवर में फैट बनने का प्रोसेस तेज कर देता है, जिससे इंसुलिन का असर कम होने लगता है और फैटी लिवर की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए हाई यूरिक एसिड का कनेक्शन फैटी लिवर से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए अगर किसी को हाई यूरिक एसिड की समस्या है, तो उसे लिवर का चेकअप कराते रहना चाहिए और फैटी लिवर होने पर यूरिक एसिड हाई हो सकता है।"
यूरिक एसिड का मेटाबोलिक सिंड्रोम कनेक्शन
Scientific Reports के अनुसार, दुनिया भर में वयस्कों की लगभग 20% से 30% आबादी मेटाबोलिक सिंड्रोम से प्रभावित है। इसका कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और क्रोनिक व हल्की सूजन हो सकती है। इस रिसर्च के मुताबिक, हाई यूरिक एसिड नाइट्रिक ऑक्साइड को कम करके सूजन और वैस्कुलर एंडोथेलियल डिस्फंक्शन बढ़ा सकता है। वैस्कुलर एंडोथेलियल डिस्फंक्शन में ब्लड वेसल्स की अंदरूनी परत में खराबी आने लगती है। इस वजह से यूरिक एसिड को मेटाबोलिक सिंड्रोम माना जा सकता है।
यूरिक एसिड की जांच कैसे की जाती है?
Dr. Vineet Malhotra ने बताया है कि यूरिक एसिड को मापने के लिए ब्लड या यूरिन टेस्ट ही काफी होता है।
- ब्लड टेस्ट - इसमें ब्लड का सैंपल लेकर लैब में सीरम यूरिक एसिड की जांच की जाती है।
- यूरिन टेस्ट - इसमें मरीज को 24 घंटे के दौरान सारा पेशाब इकट्ठा करके देना होता है। इसमें पूरे 24 घंटे का पेशाब एक कंटेनर में देना होता है और इस यूरिन कंटेनर को ठंडी जगह पर रखना होता है। इसे 24 घंटे का यूरिन सैंपल टेस्ट कहा जाता है। इसके बाद इसे लैब में टेस्ट के लिए भेज दिया जाता है।
- जॉइंट फ्लूड टेस्ट - अगर किसी मरीज को जोड़ों में दर्द या सूजन की शिकायत होती है, तो जोड़ में सुई डालकर थोड़ा सा फ्लूड निकाल लिया जाता है। इस फ्लूड को माइक्रोस्कोप के नीचे रखा जाता है और फ्लूड में यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स को चेक किया जाता है।
हाई यूरिक एसिड का इलाज
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “आमतौर पर हाई यूरिक एसिड वाले मरीजों को लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव की सलाह दी जाती है। दवाएं देने से पहले मरीज की हेल्थ हिस्ट्री, कंडीशन और यूरिक एसिड कितना नुकसान पहुंचा रहा है, इन सभी बातों का ध्यान रखा जाता है। आमतौर पर लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूरिक एसिड की समस्या को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है, तो इसका जवाब है कि इसे सही खानपान से मैनेज किया जा सकता है। शरीर में यूरिक एसिड की सामान्य मात्रा होना बहुत जरूरी है, इसलिए यूरिक एसिड को पूरी तरह से शरीर से खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करना जरूरी है।”
हाई यूरिक एसिड को कम करने के लिए डाइट में बदलाव
Dietitian & Nutritionist Archna Jain ने बताया कि यूरिक एसिड को मैनेज करने के लिए डाइट में बदलाव करना बहुत जरूरी है। इसमें सबसे जरूरी है कि तरल पदार्थों पर ध्यान दें।
नींबू पानी
International Journal of Rheumatic Diseases में प्रकाशित रिसर्च में 90 मरीजों को करीब 6 हफ्ते के लिए सुबह नींबू पानी दिया गया। स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों ने नींबू पानी पिया, उनमें किडनी फंक्शन में सुधार देखा गया। इसके साथ ही हाइपरयूरिसीमिया वाले मरीजों के लिए यह काफी फायदेमंद रहा है।
नीम का अर्क
Biochemistry and Biophysics Reports के मुताबिक, नीम में फिनोल और फ्लेवोनॉयड जैसे नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो लिपिड और मेटाबोलिक से जुड़ी बीमारियों को कम करने में मदद करते हैं। नीम का अर्क यूरिक एसिड के लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है।
नारियल पानी
BioMed Research International में प्रकाशित स्टडी में नारियल पानी का यूरिक एसिड पर असर देखने की कोशिश की गई। इसमें बताया गया कि नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन, मिनरल्स, साइटोकिन्स और प्रोटीन होते हैं। इस अध्ययन को चूहों पर किया गया था, जिसमें पाया गया कि नारियल पानी से किडनी के टिश्यू में जमने वाले क्रिस्टल्स को रोकने में मदद मिली है और पेशाब में क्रिस्टल्स की संख्या भी कम हुई है।
धनिया पानी
Journal of Agriculture and Food Chemistry में प्रकाशित जर्नल के अनुसार, धनिए के फायदों को चेक करने के लिए चूहों पर रिसर्च की गई। इसमें पाया गया कि धनिया देने से शरीर में सोडियम का लेवल कम हुआ और यूरिक एसिड के लेवल को कम करने में सफलता मिली। इसके अलावा, ग्लूकोज और लिपिड प्रोफाइल में भी सुधार देखा गया है।
पानी कितना पीना चाहिए?
Nutrients जर्नल में बताया गया है कि 70 फीसदी यूरिक एसिड पेशाब के जरिए बाहर निकलता है और बाकी के यूरिक एसिड को आंतों के जरिए मल से बाहर निकाला जाता है। अगर शरीर में पानी की कमी होगी, तो यूरिक एसिड को पेशाब के जरिए बाहर निकालना मुश्किल हो जाएगा और वह किडनी में ही जमा होने लगेगा। इसलिए The European Food Safety Authority रोजाना पुरुषों को 2.3 लीटर और महिलाओं को 2 लीटर पानी पीने की सलाह देता है।
हाई यूरिक एसिड में क्या खाना चाहिए?
सर्वोदय अस्पताल की सीनियर डाइटिशियन ऋतिका शर्मा ने कहा, "कोई भी फूड पूरी तरह से प्यूरीन फ्री नहीं होता, इसलिए हाई यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए मरीज को कुछ फूड्स अपनी डाइट में लेने चाहिए, तो कुछ फूड्स से परहेज करना चाहिए।"
- दालें - यूरिक एसिड बढ़ने पर दाल को उबालकर उसका झाग निकालकर लेना बेहतर होता है। इसमें मूंग दाल और मसूर दाल ली जा सकती है।
- डेयरी प्रोडक्ट्स -Arthritis Foundation के मुताबिक, हाई यूरिक एसिड के मरीजों के लिए लो फैट डेयरी प्रोडक्ट्स लेना फायदेमंद हो सकता है।
- फल - Rhitika Sharma हाई यूरिक एसिड के मरीजों को सेब, विटामिन सी से युक्त फल जैसे अमरूद, मौसंबी, संतरा, नाशपाती, केला खाने की सलाह देती हैं।
- सब्जियां - Rhitika Sharma ने बताया कि यूरिक एसिड बढ़ने पर टमाटर, खीरा, आलू, मक्का, हरी पत्तेदार सब्जियां, शिमला मिर्च और गाजर खाई जा सकती हैं।
हाई यूरिक एसिड में क्या नहीं खाना चाहिए?
Senior Dietitian Rhitika Sharma का मानना है कि जिन चीजों में प्यूरिन की मात्रा ज्यादा होती है, उन्हें खाने से परहेज करना चाहिए। इसमें दालों में सफेद चना, चना दाल, उड़द, अरहर, राजमा, मटर और सोयाबीन को सीमित मात्रा में लेना चाहिए। इसके अलावा, सब्जियों में मशरूम, पालक, बंदगोभी, मटर और शतावरी से परहेज करना चाहिए। अगर फलों की बात करें, तो आम, तरबूज, ब्लैकबेरीज, अंगूर और आडू कम से कम लेने चाहिए। इसके अलावा, यूरिक एसिड को मैनेज करने के लिए कुछ सप्लीमेंट लेने और कुछ से परहेज करने की सलाह भी दी जाती है।
क्या केवल नॉनवेज खाने से ही यूरिक एसिड बढ़ता है?
Nutrients के अनुसार, हाई यूरिक एसिड में ऑर्गन मीट, रेड मीट जैसे मटन और बीफ बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। वहीं चिकन ब्रेस्ट को सीमित मात्रा में लिया जा सकता है। मछली जैसे टूना और झींगा में प्यूरीन काफी मात्रा में पाया जाता है, इसलिए इसे बहुत कम मात्रा में या बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। वहीं अंडे खाना सुरक्षित विकल्प है।
क्या शराब का असर यूरिक एसिड पर पड़ता है?
Metabolism Clinical and Experimental के मुताबिक, जब शरीर में अल्कोहल बढ़ता है, तो यह तेजी से लैक्टेट में बदल जाता है। बढ़ा हुआ लैक्टेट किडनी की नलियों में यूरिक एसिड को निकलने से रोकता है। इससे यूरिक एसिड खून में जमा होने लगता है। इसलिए एक्सपर्ट्स यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखने के लिए शराब से परहेज करने की सलाह देते हैं।
कब डॉक्टर से मिलें?
Dr. Vineet Malhotra लोगों को सलाह देते हैं कि इन कंडीशंस में डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
- पैर के अंगूठे में अचानक तेज दर्द और सूजन
- बार-बार गाउट अटैक होना
- यूरिक एसिड लगातार बढ़ा रहना
- किडनी स्टोन की शिकायत
- पेशाब में खून आना
- जोड़ों में बार-बार सूजन
- तेज बुखार के साथ जोड़ों में दर्द
निष्कर्ष
शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होने पर शरीर के कई अंगों जैसे किडनी, हार्ट, पेट, जोड़ों और लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए यूरिक एसिड की मात्रा सामान्य रखना बहुत जरूरी है। यूरिक एसिड को कंट्रोल डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके किया जा सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर मरीज की मेडिकल कंडीशन को देखते हुए दवा की सलाह भी दे सकते हैं, लेकिन इसके साथ यह भी सलाह दी जाती है कि मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए। इसके अलावा, अगर किसी को किडनी स्टोन और जोड़ों में दर्द जैसी दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
