हाई यूरिक एसिड के कारण कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं, जैसे जोड़ों में दर्द, किडनी पर असर, किडनी स्टोन, हार्ट संबंधी बीमारियां आदि। क्या आप जानते हैं कि हाई यूरिक एसिड का मेटाबॉलिक सिंड्रोम से संबंध हो सकता है, जो कई अन्य गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती हैं, जैसे हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज। असल में यूरिक एसिड और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच गहरा संबंध है। इस लेख में VNA अस्पताल में Principal Consultant, Urology, Sexology, Andrology डॉ. विनीत मल्होत्रा से हम इन्हीं दोनों के बीच के संबंध को गहराई से समझेंगे और जानेंगे कि यूरिक एसिड में मेटाबॉलिक सिंड्रोम किन-किन बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम क्या है?
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National Heart, Lung, and Blood Instituteके अनुसार मेटाबॉलिक सिंड्रोम (जिसे इंसुलिन रेजिस्टेंस सिंड्रोम भी कहा जाता है) उन खराब कंडीशंस का एक ग्रुप है, जो दिल की बीमारी, स्ट्रोक और शुगर जैसी बीमारियों के खतरे को बढ़ा देती है। इनमें मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर, हाई ब्लड ट्राइग्लिसराइड और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होना शामिल हैं। बहरहाल, सवाल यह है कि यूरिक एसिड और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच क्या संबंध है? यूरिक एसिड का बढ़ना मेटाबॉलिक सिंड्रोम की जड़ हो सकता है। असल में, यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने पर शरीर के अंदरूनी हिस्सों में सूजन होने लगती है, जिससे कोशिकाओं को नुकसान होने लगता है। ऐसे में शरीर में इंसुलिन सही से काम नहीं कर पाता, जिससे फैटी लिवर, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं होने लगती हैं। डॉ. विनीत मल्होत्रा यह भी समझाते हैं कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम की बीमारी पूरी तरह सामने आने से पहले ही खून में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ना शुरू हो जाता है।
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यूरिक एसिड और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के बीच क्या संबंध है?
2016 में European Journal of Internal Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार जिन लोगों में यूरिक एसिड का स्तर ज्यादा होता है, उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम का रिस्क भी काफी ज्यादा होता है। इसे विस्तार से समझते हैं-
- इंसुलिन रेजिस्टेंसः जैसे-जैसे यूरिक एसिड बढ़ता है, शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ जाती है, जो कि भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम को बढ़ा देता है।
- हाइपरटेंशनः यूरिक एसिड की वजह से ब्लड वेसल्स में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ने लगता है, जिसकी वजह से ब्लड वेसल्स सही तरह से काम नहीं करती हैं यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ने लगती है।
- मोटापा बढ़नाः जब कोई फ्रुक्टोज (फलों, सब्जियों और शहद में पाया जाने वाला सिंपल शुगर) का सेवन अधिक मात्रा में करता है, तो इसकी वजह से भी यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है। निश्चित रूप से हाई यूरिक एसिड बढ़ने से पेट में चर्बी और लिवर में फैट जमने का खतरा बढ़ जाता है।
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यूरिक एसिड का सामान्य स्तर
शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा लिंग के आधार पर अलग अलग होता है-
| श्रेणी | सामान्य स्तर |
| पुरुष | 3.4 से 7.0 mg/dL |
| महिलाएं | 2.4 से 6.0 mg/dL |
| बच्चे | 2.0 से 5.5 mg/dL |
हाई यूरिक एसिड का स्तर
जब ब्लड में यूरिक एसिड का स्तर सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है, तो इसे हाइपरयूरिसीमिया कहते हैं, इसकी रेंज-- पुरुषों में: 7.0 mg/dL से अधिक।
- महिलाओं में: 6.0 mg/dL से अधिक।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हाई यूरिक एसिड का सबसे अधिक खतरा किसको है?
मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हाई यूरिक एसिड का खतरा कई लोगों को हो सकता है, जैसे-- मोटापाः 2013 में Journal of Biological Chemistry में प्रकाशित स्टडी के अनुसार पेट की अंदरूनी चर्बी (Visceral Fat) आपके शरीर के मेटाबॉलिज्म को बिगाड़कर यूरिक एसिड के स्तर को सीधे प्रभावित करती है। जब अंगों के आसपास चर्बी जमा हो जाती है, तो शरीर में प्यूरीन के टूटने और यूरिक एसिड बनने की प्रक्रिया में बाधा डालती है। इसके अलावा, जिन लोगों के पेट के आसपास बहुत ज्यादा चर्बी जमा होती है, उनमें अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा ज्यादा होता है, जो किडनी फंक्शन प्रभावित करता है और यूरिक एसिड को निकलने से रोकता है। नतीजतन, यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है।
- फ्रुक्टोज युक्त डाइट लेने परः जैसा कि हमने कुछ देर पहले भी बताया है कि जो लोग फ्रुक्टोज युक्त आहार का सेवन करते हैं, उनमें भी हाई यूरिक एसिड का खतरा बना रहता है। यही नहीं, जो लोग कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेट बंद जूस और बहुत अधिक मीठा खाते हैं, उनके लिवर में मेटाबॉलिज्म के दौरान यूरिक एसिड का उत्पादन तेजी से बढ़ता है।
- फिजिकली एक्टिव न होनाः 2019 में Vascular Health and Risk Management में प्रकाशित कोरियाई वयस्कों पर हुई इस रिसर्च का कहना है कि अगर आप यूरिक एसिड की समस्या (हाइपरयूरिसीमिया) और उससे होने वाली बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो सिर्फ एक्सरसाइज करना काफी नहीं है। आप कितने लंबे समय तक बैठते हैं, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हालांकि, फिट और हेल्दी रहने के लिए बहुत जरूरी है कि हर व्यक्ति फिजिकली एक्टिव रहे। एक्सरसाइज न करने या फिजिकली एक्टिव न होने की वजह से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे फैट बर्न नहीं हो पाता है और यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने लगता है।
- शराब का सेवन करनाः 2005 में Clinica Chimica Acta में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार शराब का सेवन करने से भी यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शराब का सेवन करने से शरीर डिहाइड्रेट होने लगता है, जिससे मेटाबॉलिक सिंड्रोम के लक्षणों और गंभीर हो जाते हैं।
- टाइप-2 डायबिटीज और प्री-डायबिटीजः डॉ. विनीत मल्होत्रा का कहना है कि इंसुलिन और यूरिक एसिड का आपस में गहरा कनेक्शन है। जब भी शरीर में इंसुलिन का स्तर बिगड़ता है, तो यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यही कारण है कि टाइप-2 डायबिटीज और प्री-डायबिटीज में भी हाई यूरिक एसिड की समस्या हो सकती है।
- आनुवंशिक कारकः इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगर किसी के परिवार में पहले से गाउट, ब्लड शुगर, हार्ट संबंधी बीमारी है, तो उनमें मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने की संभावना बढ़ जाती है।
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मेटाबॉलिक सिंड्रोम के साथ यूरिक एसिड को कैसे मैनेज करें?
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- डाइट में करें बदलावः मेटाबॉलिक सिंड्रोम से पीड़ित लोगों को यूरिक एसिड के स्तर को मैनेज करना है, तो डाइट में जरूरी बदलाव आवश्यक तौर पर करें। इसका मतलब है कि डाइट में फ्रुक्टोज युक्त चीजों का सेवन कम करें और प्यूरिन युक्त आहार को डाइट से बाहर निकालें।
- डॉक्टर से संपर्क करेंः कई बार मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हाई यूरिक एसिड को मैनेज करना संभव नहीं हो पाता है। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि आप डॉक्टर से मिलें और अपना प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाएं। इससे मेटाबॉलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं और हाई यूरिक एसिड को मैनेज करने में मदद मिलती है।
- वजन संतुलित रखेंः मेटाबॉलिक सिंड्रोम और हाई यूरिक एसिड जैसी समस्याओं से बचना है, तो बेहतर है कि आप वजन को संतुलित बनाए रखने की कोशिश करें। इसके लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें। इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है और यूरिक एसिड के स्तर में कमी आती है।
- खुद को हाइड्रेट रखेंः डॉ. विनीत मल्होत्रा की मानें, तो एक दिन में दो से ढाई लीटर पानी जरूरी होता है। इससे बॉडी हाइड्रेटेड रहती है, जो कि किडनी फंक्शन में सुधार करता है। इससे यूरिक एसिड भी बॉडी से बाहर निकल जाते हैं।
डॉक्टर के पास कब जाएं?

निष्कर्ष
मेटाबॉलिक सिंड्रोम और यूरिक एसिड दोनों ही आज की जीवनशैली से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं। इनका आपस में गहरा संबंध है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अच्छी जीवनशैली यानी पर्याप्त नींद लेना, अच्छी डाइट फॉलो करना और नियमित रूप से एक्सरसाइज करके आप इन समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। इसके साथ-साथ जरूरी है कि आप नियमित जांच भी करवाते रहें, जिससे किसी भी तरह की परेशानी के जोखिम का शुरू में ही पता चल जाता है।All Image Credit: Freepik
FAQ
यूरिक एसिड बढ़ने से शरीर में क्या परेशानी होती है?
यूरिक एसिड बढ़ने से कई परेशानियां हो सकती हैं, जैसे जोड़ों में असहनीय दर्द, सूजन (गाउट/गठिया), पैरों-एड़ियों में जलन, किडनी स्टोन की समस्या आदि।क्या यूरिक एसिड बढ़ने से बीपी बढ़ता है?
यूरिक एसिड बढ़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। असल में हाई यूरिक एसिड ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाकर उसमें सूजन पैदा करती है और किडनी फंक्शन को भी प्रभावित करती है। इस तरह, ब्लड प्रेशर की समस्या ट्रिगर हो सकती है।मेटाबॉलिक सिंड्रोम का इलाज क्या है?
मेटाबॉलिक सिंड्रोम के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना जरूरी है। हां, आप चाहें, तो इसे घर में रहकर मैनेज कर सकते हैं। इसके लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, वजन कम रखें, संतुलित आहार लें और रोजाना एक्सरसाइज करें।इंसुलिन की कमी से कौन सा रोग होता है?
इंसुलिन की कमी की वजह से डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है।कौन सी चीज खाने से इंसुलिन सेंसिटिविटी की समस्या बढ़ सकती है?
हाई प्रोसेस्ड फूड, कार्ब्स और सैचुरेटेड फैट का सेवन करना सही नहीं है। ध्यान रखें, खराब खानपान से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होती है।
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Apr 25, 2026 16:22 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 25, 2026 16:22 IST
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Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra