पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome - PMOS) महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है और इस वजह से महिलाओं को अनियमित पीरियड्स से लेकर प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है। Lancet के अनुसार, इससे पहले PMOS को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के नाम से जाना जाता था।WHO के अनुसार, दुनियाभर में PMOS से ग्रसित 70 फीसदी महिलाओं को यह भी नहीं पता कि उन्हें PMOS की बीमारी है और इस वजह से महिलाओं को बांझपन, रेगुलर पीरियड्स न होने, वजन बढ़ने और चेहरे या शरीर पर बाल या मुहांसे होने जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं। इस पेज पर आपको PMOS से जुड़े हर पहलू की जानकारी दी जा रही है।
PMOS क्या है?
NCBI की रिपोर्ट के अनुसार, स्टीन और लेवेंथल ने साल 1935 में पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS ) के बारे में बताया था। यह दुनिया भर में प्रोडेक्टिव उम्र की महिलाओं में होने वाली सबसे आम हार्मोनल बीमारी है। PMOS में ओवरी में एंड्रोजन हार्मोन का लेवल बहुत ज्यादा होने से अंडे पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते। एंड्रोजन हार्मोन पुरुषों में ज्यादा पाया जाता है। PMOS में अल्ट्रासाउंड में ओवरी में कई छोटी-छोटी गांठें या सिस्ट दिखाई देते हैं। इसकी वजह से महिलाओं को कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं।
PMOS के लक्षण
आमतौर पर PMOS के शुरुआती लक्षण बहुत ही हल्के होते हैं, जिन्हें महिलाएं इग्नोर कर देती हैं। महिलाओं को इन लक्षणों पर खास नजर रखनी चाहिए।
Cleveland Clinic के मुताबिक, PMOS होने पर इसके लक्षणों की पहचान करना जरूरी है।
- इस बीमारी में पीरियड्स असामान्य हो जाते हैं, जैसे पीरियड न आना या फिर बहुत देर से आना
- पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होना
- चेहरे, छाती और पेट पर बहुत ज्यादा बाल उगना
- चेहरे पर मुंहासे आना और कई मामलों में ये मुंहासे उम्र बढ़ने के साथ कम नहीं होते।
- PMOS से पीड़ित 40 से 80% महिलाएं मोटापे से ग्रस्त होती हैं।
- खासतौर पर गर्दन, जांघों के बीच और ब्रेस्ट के नीचे स्किन पर काले धब्बे पड़ जाते हैं।
- कुछ महिलाओं की स्किन पर छोटे दाने या गांठें उभर आती है।
- PMOS में महिलाओं के सिर के बाल झड़ सकते हैं।
- PMOS के कारण महिलाओं को प्रेग्नेंसी में दिक्कत हो सकती है।
PMOS के कारण
Mayo Clinic के अनुसार, PMOS होने के कई कारण हो सकते हैं। गुरुग्राम के क्लाउडनाइन हॉस्पिटल के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन ने बताया, "PMOS खराब लाइफस्टाइल, स्ट्रेस, हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और फैमिली हिस्ट्री के कारण हो सकता है।“
- इंसुलिन रेजिस्टेंस - इंसुलिन हार्मोन पैंक्रियास बनाता है, जो शरीर के सेल्स को एनर्जी के लिए ग्लूकोज इस्तेमाल करने देता है। PMOS होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिस वजह से शरीर में बहुत ज्यादा इंसुलिन बनने लगता है। जब शरीर में ज्यादा इंसुलिन बनता है, तो पुरुष हार्मोन एंड्रोजन बढ़ जाता है और ओव्यूलेशन में दिक्कत होने लगती हैं।
- शरीर में सूजन होना - PMOS से पीड़ित महिलाओं को लंबे समय तक शरीर में लो ग्रेड इंफलेमेंशन (low grade inflammation) होता है। इससे ओवरी में एंड्रोजन एक्टिव होने लगता है, जो हार्ट और ब्लड वेसेल्स से जुड़ी बीमारियों का रिस्क बढ़ा सकता है।
- फैमिली हिस्ट्री - अगर परिवार में मां या बहन को PMOS की समस्या है, तो इस कंडीशन में फैमिली की अन्य महिलाओं को भी PMOS की समस्या हो सकती है।
- मोटापा और लाइफस्टाइल - कई महिलाओं की खराब डाइट और लाइफस्टाइल के कारण मोटापा बढ़ने लगता है और इस वजह से PMOS की समस्या हो सकती है।
PMOS से होने वाली समस्याएं
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, PMOS होने से महिलाओं को न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक और सामाजिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।
- प्रेग्नेंसी के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज या हाई बीपी की समस्या होना
- पेट के आसपास फैट बढ़ना
- इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण टाइप 2 डायबिटीज होना
- हाइपरटेंशन की समस्या होना
- ब्लड में फैट का लेवल बढ़ने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
- हार्ट से जुड़ी बीमारियां
- स्लीप एपनिया की दिक्कत होना
- लिवर में सूजन या फैटी लिवर की समस्या होना
- गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) की असामान्य बढ़ने से एंड्रोमेट्रियल कैंसर या हाइपरप्लासिया होना
PMOS का महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर असर
NIH में प्रकाशित पबमेड की रिपोर्ट के अनुसार, PMOS से पीड़ित महिलाओं को डिप्रेशन होने का रिस्क आम महिलाओं की तुलना में 50% ज्यादा होता है। इस स्टडी में कहा गया है कि अगर महिला को पता भी नहीं चलता कि उसे PMOS है, तो भी डिप्रेशन का रिस्क बराबर ही रहता है। इस स्टडी से पता चलता है कि डिप्रेशन होने का कारण हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। WHO की रिपोर्ट में बताया गया है कि PMOS से ग्रस्त महिलाओं को बांझपन, मोटापा और अनचाहे बालों के कारण समाज में शर्मिंदगी महसूस होती है। इस वजह से भी उनमें एंग्जाइटी और डिप्रेशन का रिस्क बढ़ सकता है। इसे मैनेज करने के लिए मेडिटेशन और योगा किया जा सकता है।
PMOS का कैसे पता चल सकता है?
NHS की रिपोर्ट के मुताबिक, PMOS से ग्रस्त महिलाओं को लक्षणों की पहचान करने के बाद डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिए। डॉक्टर मरीज के लक्षणों को समझकर कुछ टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।
- हार्मोन टेस्ट के जरिए यह पता किया जाता है कि हार्मोन के ज्यादा बनने का कारण PMOS है या फिर कोई अन्य समस्या है।
- अल्ट्रासाउंड स्कैन के जरिए ओवरी में फॉलिकल्स को चेक किया जाता है। फॉलिकल्स ओवरी में तरल पदार्थ से भरी थैलियां होती हैं, जिसमें अंडों की ग्रोथ होती है।
- ब्लड टेस्ट के जरिए हार्मोन, शुगर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर जांचा जाता है।
- अगर डॉक्टर PMOS डायग्नोज करते हैं, तो मरीज को उम्र और वजन के अनुसार ब्लड प्रेशर का चेकअप और डायबिटीज की स्क्रीनिंग की सलाह दी जा सकती है। PMOS डायग्नोज होने के बाद डॉक्टर महिला की कंडीशन को देखते हुए इलाज रिकमेंड करते हैं।
PMOS का देरी से पता चलने के कारण
आमतौर पर महिलाओं को PMOS की पहचान करने में देरी हो सकती है और इस बात की पुष्टि WHO की रिपोर्ट करती है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70 फीसदी महिलाओं को पता ही नहीं होता कि उन्हें PMOS की बीमारी है। ये आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं में PMOS को लेकर जागरूकता की कमी है। महिलाएं आमतौर पर अनियमित पीरियड्स को इग्नोर कर देती हैं। महिलाएं लक्षणों की पहचान नहीं कर पातीं क्योंकि वे चेहरे पर आने वाले बालों और मुंहासों, बाल झड़ने और वजन बढ़ने को बीमारी की बजाय सुंदरता के पैमाने पर जोड़कर देखने लगती हैं। भारत के परिपेक्ष में बात करें, तो शहरों में रहने वाली महिलाओं के लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव आने के कारण हार्मोनल बदलाव आ सकते हैं।
PMOS का इलाज क्या है?
NHS की इसी रिपोर्ट के अनुसार, PMOS का इलाज मरीज की कंडीशन को देखते हुए किया जाता है। PMOS का आमतौर पर इलाज डाइट में बदलाव, लाइफस्टाइल में सुधार, दवाओं और सर्जरी के जरिए किया जाता है। अगर कोई महिला PMOS की समस्या के चलते प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही है, तो उन्हें IVF की सलाह दी जाती है।
PMOS में डाइट कैसी होनी चाहिए?
PMOS को काफी हद तक डाइट के जरिए मैनेज किया जाता है। महिलाओं को बैलेंस्ड डाइट जिसमें प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और हेल्दी फैट हों, खाने की सलाह दी जाती है। महिलाओं को मौसमी फल-सब्जियां लेना चाहिए और लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली डाइट फायदेमंद हो सकती है। फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की सीनियर डाइटिशियन ऋतिका शर्मा ने कहा, "PMOS से पीड़ित महिलाओं को डाइट में प्रोटीन, अलसी का तेल, टमाटर, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक और गाजर शामिल करना चाहिए। साबुत अनाज और ब्राउन राइस भी फायदेमंद होता है। सीड्स, अखरोट और बादाम भी खाए जा सकते हैं।" जिन महिलाओं को मोटापे की समस्या ज्यादा होती है, उन्हें उनकी कंडीशन को देखते हुए डाइट प्लान दिया जाता है। इसके अलावा, डाइट से फ्राइड फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, मैदे से बनी चीजें और सोडे वाले ड्रिंक्स लेने से परहेज करना चाहिए।
PMOS में लाइफस्टाइल कैसा होना चाहिए?
PMOS में वजन कम करने और हार्मोन्स को बैलेंस करने के लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा वॉक करनी चाहिए। साइक्लिंग, तैराकी या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के जरिए इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम किया जा सकता है। PMOS से पीड़ित महिलाओं को अपनी नींद पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए और स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए प्राणायाम, योग और मेडिटेशन करना चाहिए। देर रात तक मोबाइल और स्क्रीन टाइम कम करना चाहिए।
PMOS में दवाइयां लेना
डॉक्टर PMOS के कारण होने वाले अनियमित पीरियड्स को मैनेज करने के लिए बर्थ कंट्रोल पिल्स या IUD की सलाह दी जा सकती है। ये दवाइयां उन महिलाओं को दी जाती हैं, जिन्हें प्रेग्नेंसी प्लान नहीं करनी। कई मामलों में डायबिटीज मैनेज करने के लिए मेटफॉर्मिन जैसी दवा भी दी जा सकती है। जिन महिलाओं को चेहरे पर बालों की समस्या होती है, उन्हें एंड्रोजन हार्मोन लेवल कम करने की दवाइयां दी जाती है। जिन महिलाओं को PMOS की समस्या है और वे प्रेग्नेंट होना चाहती हैं, तो उन्हें ओव्यूलेशन के इंजेक्शन या दवाइयां दी जा सकती है। PMOS में महिलाओं के हार्मोन संतुलन करने की कोशिश की जाती है।
PMOS में सर्जरी
PMOS के कुछ मामलों में ओव्यूलेशन को बेहतर बनाने के लिए लैप्रोस्कोपिक ओवेरियन ड्रिलिंग प्रोसेस किया जा सकता है। इस सर्जरी में ओवरी में मौजूद एंड्रोजन हार्मोन बनाने वाले टिश्यू को हटा दिया जाता है, ताकि ओवरी नॉर्मल काम करने लगे।
PMOS में आम पूछे जाने वाले सवाल
PMOS से जुड़े कई सवाल महिलाएं जानना चाहती हैं, लेकिन कई बार डॉक्टर से पूछने में हिचकती हैं।
क्या PMOS वाली महिलाएं दोबारा मां बन सकती हैं?
हालांकि पहली प्रेग्नेंसी सफल होने के बाद दोबारा मां बन सकती हैं, लेकिन कई बार महिलाओं की पहली डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण कई महिलाओं को दिक्कत आ सकती है। इस मामले में महिलाओं को अपना वजन करीब 5 फीसदी तक कम करना चाहिए ताकि ओव्यूलेशन सही हो सके। पीरियड की साइकिल का ध्यान रखें और रोजाना कम से कम 30 मिनट तक वॉक करें।
क्या मेनोपॉज के बाद PMOS का असर रह सकता है?
मेनोपॉज के बाद भी हार्मोन्स में बदलाव हो सकते हैं और आमतौर पर PMOS के लक्षण चले जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में PMOS का प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है।
PMOS और PCOD में क्या फर्क है?
PMOS और PCOD में फर्क है। PCOD में ओवरी में बहुत सारे अविकसित अंडे बन जाते हैं, जो बाद में सिस्ट का रूप ले लेते हैं। यह बीमारी हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी हुई है, जबकि PMOS ज्यादा गंभीर मेटाबॉलिक और एंडोक्राइन बीमारी है, जिसमें सिस्ट के साथ-साथ गंभीर हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक समस्याएं जैसे इंसुलिन रेजिस्टेंस भी शामिल होती हैं।
क्या PMOS में मुझे जीवनभर दवाइयां लेनी पड़ेगी?
यह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। कई मामलों में महिलाएं डाइट और लाइफस्टाइल के जरिए PMOS के लक्षणों को कंट्रोल कर लेती हैं। ऐसे मरीजों को लंबे समय तक दवाओं की जरूरत नहीं पड़ती। डॉक्टर चेकअप करके और मरीज की मेडिकल कंडीशन देखकर ही दवाई रिकमेंड करते हैं।
पीसीओएस में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का क्या रोल है?
PMOS में एनोव्यूलेशन (अंडे का रिलीज न होना) के कारण प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है और एस्ट्रोजन अनियंत्रित हो जाता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं को नियमित रूप से पीरियड्स नहीं होते हैं, गर्भाशय की परत मोटी हो जाती है और उनके शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) बढ़ने लगते हैं।
PMOS में सेक्स लाइफ पर क्या असर पड़ता है?
Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता ने कहा, "हार्मोन असंतुलन के कारण लिबिडो की कमी रहती है और PMOS से पीड़ित महिलाओं में मोटापा, मुहांसे और एंड्रोजेनिक एलोपेसिया देखने को मिलता है, जो उनके आत्मविश्वास को कम कर देता है। इस वजह से सेक्शुअल लाइफ पर असर पड़ सकता है।"
क्या PMOS का परमानेंट इलाज है?
PMOS का परमानेंट इलाज नहीं होता, लेकिन इसे मैनेज किया जा सकता है। दवाइयों और लाइफस्टाइल में बदलाव करके PMOS को मैनेज करना आसान है। कुछ मामलों में मरीजों को दवाइयां देकर PMOS के लक्षणों को मैनेज करने की कोशिश की जाती है।
PMOS में BMI कितना होना चाहिए?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित जर्नल के अनुसार, पीसीओएस के लिए कोई विशेष बीएमआई (BMI) रेंज सुनिश्चित नहीं की गई है। एनसीबीआई की यही रिपोर्ट कहती है कि ‘PMOS को मैनेज करने के लिए बीएमआई पर ध्यान दिया जा सकता है। इसके तहत पीसीओएस को लीन और ओबीज श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें मानक बीएमआई 18.5-22.9 kg/m² और 23-24.9 kg/m² को सामान्य वजन के रूप में परिभाषित किया गया है। लीन और अधिक वजन वाले PMOS के बीच अंतर करने के लिए 23 kg/m² की सीमा का उपयोग कर सकते हैं।
निष्कर्ष
PMOS से पीड़ित महिलाओं को हार्मोनल बैलेंस के लिए अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर नजर रखनी चाहिए। अगर किसी महिला का वजन तेजी से बढ़ रहा हो, पीरियड्स अनियमित हो और चेहरे पर मुहांसे या बैचेनी महसूस हो, तो इन लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए, बल्कि समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। दवाओं की मदद से PMOS की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है।
