पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में ओवरीज के कार्य को प्रभावित करने वाली एक गंभीर बीमारी है। इसमें ओवरीज में काफी सारे सिस्ट हो जाते हैं, जिससे ओवरीज का साइज बड़ा हो जाता है। इस कारण से PCOS में अनियमित पीरियड्स की समस्या होती है क्योंकि ओवरीज नियमित रूप से एग रिलीज नहीं कर पाती हैं। PCOS का पता चलने पर आपको अपने डॉक्टर से कुछ सवालों का जवाब जरूर पूछना चाहिए। इससे न सिर्फ आपको बीमारी को समझने, बल्कि इसे कंट्रोल करने में भी मदद मिलेगी। PCOS से संबंधित जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow) से बात की।
1. कैसे पता चलेगा कि मुझे PCOS है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) के मुताबिक, PCOS के लक्षण हर मरीज में अलग हो सकते हैं। मरीज के लक्षण समय के साथ बदल भी सकते हैं। संभावित लक्षणों में ये शामिल हैं-
- अनियमित माहवारी
- लंबी और हैवी ब्लीडिंग
- पीरियड्स में तेज दर्द होना
- चेहरे या शरीर पर अधिक बाल
- गंजापन या बालों का पतला होना
- मुंहासे या ऑयली स्किन
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2. PCOS की पुष्टि के लिए कौन से डॉक्टर के पास जाएं?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि PCOS में स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) के पास जा सकते हैं जो अनियमित पीरियड्स या गर्भाधारण में समस्या के लिए इलाज बताएंगे और हार्मोनल असंतुलन, इंसुलिन प्रतिरोध जैसी समस्याओं के लिए एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (Endocrinologist) की सलाह ले सकते हैं।
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3. PCOS की पुष्टि के लिए डॉक्टर कौन सी जांच करते हैं?

PCOS में एंड्रोजन लेवल चेक करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर अल्ट्रासाउंड भी कराया जा सकता है। PCOS के साथ शुगर टेस्ट भी किया जा सकता है ताकि इंसुलिन रेजिस्टेंस को चेक किया जा सके।
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4. अगर PCOS का इलाज न कराएं तो क्या होगा?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि PCOS का इलाज नहीं कराएंगे, तो कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के होने का खतरा बढ़ जाता है, जिनमें शामिल हैं-
- गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर
- वजन बढ़ना, खासकर पेट के आस-पास
- टाइप 2 डायबिटीज
- हाइपरटेंशन
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- हृदय रोग
- मोटापा
- स्लीप एपनिया
- मेटाबॉलिक स्टीटोहेपेटाइटिस
- PCOS जीवन की गुणवत्ता पर काफी हद तक बुरा असर डाल सकता है और पीड़ित महिला में एंग्जाइटी जैसी मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं।
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5. PCOS का इलाज कैसे किया जाता है?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि PCOS का कोई तय इलाज नहीं है, लेकिन सही कदम उठाकर इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। PCOS के लक्षणों को मैनेज करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव, हेल्दी ईटिंग हैबिट्स और फिजिकल एक्टिविटी जरूरी मानी जाती है। अनियमित पीरियड्स की समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन करने की सलाह भी दे सकते हैं। PCOS में इंफर्टिलिटी का इलाज करने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव, दवाएं और ओव्यूलेशन इंडक्शन की मदद ली जाती है।
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6. PCOS में क्या खाना चाहिए?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि-
- PCOS में लो-ग्लाइसेमिक फूड्स, फाइबर रिच फूड्स, होल ग्रेन्स, प्रोटीन फूड्स और हेल्दी फैट्स का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।
- PCOS में डैश डाइट और लो-ग्लाइसेमिक डाइट लेना फायदेमंद होता है क्योंकि इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है, एंड्रोजन हार्मोन का स्तर कंट्रोल होता है और अनियमित पीरियड्स की समस्या भी ठीक होती है। 2025 में MDPI Journal की एक रिव्यू स्टडी के मुताबिक, PCOS मैनेजमेंट के लिए डैश डाइट और लो-ग्लाइसेमिक डाइट असरदार मानी जाती है।
- 2023 में BMC Endocrine Disorders में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, PCOS में महिलाओं को हेल्दी डाइट का सेवन करना चाहिए। PCOS में पांच से दस प्रतिशत वेट लॉस करना फायदेमंद होता है। इससे इंसुलिन, कोलेस्ट्रॉल, हार्मोन्स के संतुलन में सुधार आता है।
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7. PCOS में क्या नहीं खाना चाहिए?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि-
- PCOS में रिफाइंड कार्ब्स जैसे मैदा या सफेद ब्रेड के सेवन को सीमित करना फायदेमंद हो सकता है।
- इसके अलावा शुगरी फूड्स, प्रोसेस्ड फूड्स, ज्यादा सैचुरेटेड फैट का सेवन करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, जो कि PCOS का एक मुख्य कारण माना जाता है। ऐसे में इन चीजों के सेवन से बचकर PCOS को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
Johns Hopkins Medicine के मुताबिक, कुछ ऐसे फूड्स हैं जो PCOS में शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं जैसे- फ्राइड फूड्स, रेड मीट, प्रोसेस्ड स्नैक्स, सोडा, स्पोर्ट ड्रिंक्स, अल्कोहलिक ड्रिंक्स, रिफाइंड आटा, सफेद ब्रेड, पास्ता वगैरह। PCOS में इनका सेवन सीमित करके लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
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8. दवाओं के बगैर PCOS का इलाज हो सकता है?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि PCOS एक हार्मोनल समस्या है और इसके लक्षण हर मरीज में अलग हो सकते हैं इसलिए जांच के आधार पर पता चलता है कि दवा की जरूरत है या नहीं। हार्मोन्स को बैलेंस करने के लिए अक्सर दवाएं दी जाती हैं और उसके साथ हेल्दी लाइफस्टाइल अहम भूमिका निभाती है। PCOS के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए हार्मोन्स का संतुलन जरूरी है और हार्मोन्स के संतुलन के लिए दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि दवाओं के बगैर PCOS का इलाज हो सकता है।
साल 2020 में Scientific Reports में प्रकाशित हुए एक मेटा रिव्यू के मुताबिक, PCOS का इलाज दवा और लाइफस्टाइल के साथ किया जा सकता है, इससे लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। डायबिटीज, थायराइड या अन्य बीमारी के मामले में डॉक्टर मरीज की उम्र और कंडीशन के मुताबिक डोज तैयार करते हैं।
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9. PCOS किस उम्र में होता है?
PCOS प्रजनन आयु में ज्यादा कॉमन होता है, इसकी कोई तय उम्र नहीं है, लेकिन यह 15 से 44 वर्ष की महिलाओं में सबसे ज्यादा देखा जाता है। PCOS का निदान सही समय पर होगा, तो लक्षणों को आसानी से कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।
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10. क्या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण PCOS हो सकता है?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि 30 के बाद इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण ही ज्यादातर महिलाओं में PCOS के लक्षण देखे जाते हैं। National Health Service, UK के मुताबिक, इंसुलिन हार्मोन को पैंक्रियाज बनाते हैं, ताकि ब्लड में शुगर को कंट्रोल किया जा सके। जब शरीर के टिशूज इंसुलिन के असर के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या होती है। इंसुलिन का स्तर ज्यादा होने से ओवरीज में टेस्टोस्टेरोन ज्यादा बनने लगता है। इससे फॉलिकल्स के विकास में रुकावट आती है और ओव्यूलेशन नहीं हो पाता है और PCOS का खतरा बढ़ सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण वजन भी बढ़ सकता है जिससे PCOS की संभावना बढ़ती है।
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डॉक्टर से सलाह कब लें?
Dr. Smriti Agrawal ने बताया कि-
- PCOS में डॉक्टर अनियमित पीरियड्स और एंड्रोजन लेवल को चेक करते हैं। हाई एंड्रोजन लेवल (High Androgen Level), PCOS का लक्षण माना जाता है। एंड्रोजन लेवल हाई होने पर चेहरे और बॉडी पर अनचाहे बाल नजर आते हैं, हेयर लॉस हो सकता है, एक्ने या ऑयली स्किन जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। इन लक्षणों के नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- टेस्टोस्टेरोन लेवल हाई है, तो भी डॉक्टर से सलाह लें।
- अनियमित पीरियड्स की स्थिति लंबे समय तक रहती है, तो यह चिंता की बात है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।
निष्कर्ष:
Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal से हुई बातचीत के आधार पर हमने समझा कि PCOS एक हार्मोनल समस्या है, जिसके लक्षण नजर आने पर डॉक्टर ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, शुगर जांच के आधार पर तय करते हैं कि मरीज को PCOS है या नहीं? इसके बाद दवाओं, गर्भनिरोधक गोलियां और हेल्दी लाइफस्टाइल जैसे उपाय अपनाकर इलाज किया जाता है। PCOS के कारण इंफर्टिलिटी होती है, तो उसके इलाज के लिए डॉक्टर ओव्यूलेशन इंडक्शन की मदद ले सकते हैं। WHO और अन्य स्टडीज के जरिए हमने समझा कि PCOS के निदान के लिए जांच और सही समय पर इलाज लेने की जरूरत है ताकि इसे समय रहते कंट्रोल किया जा सके। PCOS के इलाज में देरी करने से टाइप 2 डायबिटीज, ह्रदय रोग, हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है।
FAQ
PCOS के कारण क्या हैं?
खराब जीवनशैली, मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन PCOS के मुख्य कारण माने जाते हैं।PCOS से बचने के लिए क्या करें?
PCOS से बचने के लिए शुगर लेवल और वजन को कंट्रोल करें, हेल्दी डाइट लें, नियमित एक्सरसाइज करें, पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें।PCOS में क्या समस्याएं होती हैं?
PCOS में अनियमित पीरियड्स, अनचाहे बाल, एक्ने, वेट गेन, हेयर फॉल, त्वचा का काला पड़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। PCOS के कारण कुछ महिलाओं को गर्भधारण में भी समस्या हो सकती है। हार्मोनल उतार-चढ़ाव के चलते PCOS में मूड स्विंग्स की समस्या भी हो सकती है।PCOS के साथ गर्भधारण कर सकते हैं?
PCOS में गर्भधारण किया जा सकता है, लेकिन PCOS के साथ प्रेग्नेंसी प्लान करने पर शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं इसलिए लगातार मॉनिटरिंग जरूरी है।क्या PCOS जेनेटिक होता है?
हां, यह जेनेटिक हो सकता है। अगर परिवार में किसी को PCOS है, तो इसकी संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि हर केस में यह समस्या जेनेटिक्स के कारण हो ऐसा जरूरी नहीं है।
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Apr 09, 2026 14:10 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 09, 2026 14:10 IST
Modified By : Yashaswi MathurApr 09, 2026 14:10 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal