Fri Sep 11, 2026 | 09:24 PM IST

किडनी स्टोन

किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी किडनी में मिनरल्स, एसिड और सॉल्ट्स जमा होने पर बनने लगती है। मेडिकल भाषा में इसे रीनल कैलकुली (Renal Calculi) या नेफ्रोलिथियासिस (Nephrolithiasis) भी कहा जाता है। कई मामलों में तो किडनी स्टोन बिना किसी लक्षण के पेशाब के रास्ते खुद ही आसानी से बाहर निकल जाता है, लेकिन अगर पथरी बड़ी हो जाती है, तो यह पेशाब की नली में फंस सकती है। ऐसे में यह पेशाब के रास्ते को रोक देती है, जिससे किडनी में सूजन आने का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए किडनी स्टोन के लक्षणों, कारणों, इलाज और बचाव के तरीकों को जानना बहुत जरूरी है। इस बारे में हमने Dr. Vineet Malhotra, Senior Consultant in Urology & Andrology, VNA Hospital, Delhi से बात की।

किडनी स्टोन क्या है?

National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, किडनी स्टोन सख्त टुकड़े होते हैं, जो दोनों किडनी में तब बनते हैं, जब पेशाब में कुछ खास मिनरल्स का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है। पथरी का आकार और रूप, दोनों अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार पथरी का आकार रेत के दाने जितना छोटा या मटर के दाने जितना बड़ा भी हो सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में पथरी का आकार गोल्फ की गेंद जितना बड़ा भी देखा गया है। आमतौर पर किडनी स्टोन का रंग पीला या भूरा होता है। कई मामलों में किडनी स्टोन कई सालों तक किडनी में रह सकता है। वहीं कई मामलों में इसके लक्षण परेशानी पैदा कर सकते हैं।

किडनी स्टोन कितने तरह के होते हैं?

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “आमतौर पर किडनी स्टोन को उसके केमिकल कंपोजिशन के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा जाता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को बार-बार किडनी स्टोन बनता है, तो उसे किडनी स्टोन के प्रकार का पता लगाना चाहिए, ताकि इसके रिस्क को कम करने में मदद मिल सके।”

  • कैल्शियम स्टोन - यह सबसे आम तरह का किडनी स्टोन है, जिसमें कैल्शियम ऑक्सालेट या कैल्शियम फॉस्टफेट से बन सकता है।
  • यूरिक एसिड स्टोन - शरीर या पेशाब में जब यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है, तो इस तरह की पथरी बन सकती है।
  • स्ट्रूवाइट स्टोन - यह अक्सर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) से जुड़ा हो सकता है।
  • सिस्टीन स्टोन - यह काफी दुर्लभ किडनी स्टोन होता है, जो जेनेटिक कंडीशन या जन्मजात समस्या सिस्टिन्यूरिया की वजह से हो सकता है।

किडनी स्टोन बनने के आम कारण

Cleveland Clinic के मुताबिक, किडनी स्टोन बनने के ये कारण हो सकते हैं।

  • कम पानी पीने के कारण पेशाब गाढ़ा हो सकता है, जिससे मिनरल्स क्रिस्टल में बदलने लगते हैं।
  • बहुत ज्यादा मात्रा में मांस, मछली या अधिक मात्रा में प्रोटीन वाले फूड्स खाने से किडनी स्टोन का खतरा हो सकता है।
  • खाने में बहुत ज्यादा नमक या चीनी लेने से किडनी स्टोन होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • विटामिन C के सप्लीमेंट्स का बहुत ज्यादा सेवन किडनी स्टोन बनने का कारण बन सकता है।
  • अगर परिवार में पहले से किडनी स्टोन की हिस्ट्री है।
  • यूरिनरी ट्रैक्ट में किसी तरह की रुकावट होना।
  • गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी या आंतों की अन्य कोई सर्जरी हुई हो।
  • मूत्रवर्धक दवाएं, कैल्शियम एंटासिड या दौरे को रोकने वाली दवाएं किडनी स्टोन का रिस्क बढ़ा सकती हैं।
  • यूरिक एसिड बढ़ना, बार-बार UTI होना या मेटाबोलिक बीमारी होना।

किडनी स्टोन के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि यह जरूरी नहीं है कि सभी मरीजों में किडनी स्टोन के लक्षण दिखाई दें। कई बार बहुत छोटी पथरी यूरिनरी ट्रैक्ट से खुद ही बाहर निकल जाती है और उन मरीजों को किसी तरह के लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन अगर स्टोन पेशाब को किडनी से ब्लैडर तक ले जाने वाली नली (यूरेटर) में फंस जाए, तो ये लक्षण महसूस हो सकते हैं।

  • कमर या पीठ के एक तरफ तेज दर्द
  • पेट के निचले हिस्से या ग्रोइन तक दर्द जाना
  • दर्द का अचानक शुरू होना या लहरों में आना (कुछ समय तेज, फिर कम होना और दोबारा तेज होना)
  • पेशाब करते समय जलन या दर्द
  • बार-बार पेशाब की इच्छा
  • पेशाब में गुलाबी, लाल या भूरा रंग दिखाई देना
  • पेशाब का झाग या बदबूदार होना
  • जी मिचलाना या उल्टी होना
  • पेशाब बहुत कम आना या पेशाब करने में परेशानी
  • बुखार या ठंड लगना

किडनी स्टोन होने की मेडिकल कंडीशन

NIDDK के मुताबिक, जो लोग इन मेडिकल समस्याओं से जूझ रहे हैं, उन्हें किडनी स्टोन होने का खतरा ज्यादा हो सकता है।

  • आंतों में लंबे समय से सूजन या बीमारी होना।
  • सिस्टिक किडनी डिजीज होने पर किडनी में सिस्ट बनने लगते हैं।
  • सिस्टिनुरिया आनुवांशिक बीमारी होने पर पेशाब में सिस्टिन एमिनो एसिड ज्यादा बनने लगता है।
  • जिन लोगों की आंत या पेट की सर्जरी हुई है।
  • जोड़ों में बहुत ज्यादा यूरिक एसिड जमा होने से सूजन होने लगती है। इसलिए गाउट के रोगियों को किडनी स्टोन का खतरा रहता है।
  • हाइपरकैल्सीयूरिया जन्मजात बीमारी है, जिसमें मरीज के पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है।
  • हाइपरपैराथायराइडिज्म बीमारी में पैराथायराइड ग्रंथियां अधिक मात्रा में हार्मोन बनाने लगती हैं, जिससे ब्लड में कैल्शियम बढ़ने लगता है।
  • मोटापे से ग्रस्त लोगों को किडनी स्टोन का खतरा रहता है।
  • रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस से जूझ रहे लोगों की किडनी पेशाब के जरिए पर्याप्त एसिड बाहर नहीं निकाल पाती।

किडनी स्टोन की जांच कैसे होती है?

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि कई बार लक्षणों के आधार पर किडनी स्टोन होना कंफर्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए मरीज को कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है।

टेस्ट का नाम

क्या काम करता है?

यूरिन टेस्ट

पेशाब में खून, UTI जैसे इंफेक्शन, पथरी बनाने वाले क्रिस्टल या अन्य असामान्य समस्याओं का पता लगाने में मदद करना 

ब्लड टेस्ट

किडनी के फंक्शन, यूरिक एसिड, कैल्शियम और अन्य मिनरल्स के स्तर की जानकारी देना 

अल्ट्रासाउंड 

किडनी स्टोन और पेशाब की नली में रुकावट का पता लगाने के लिए करना 

सीटी स्कैन

खास मामलों में पथरी का सटीक आकार, स्थिति और रुकावट की गंभीरता को ज्यादा स्पष्ट तरीके से देखने में मदद करना

किडनी स्टोन का साइज कितना महत्वपूर्ण है?

Dr. Vineet Malhotra ने बताया कि आमतौर पर लोग मानते हैं कि 2 mm या 4 mm की पथरी का साइज अपने आप निकल जाता है, लेकिन पथरी के साइज से यह तय नहीं होता कि यह खुद निकल जाएगी। स्टोन के साइज, उसकी जगह, यूरिनरी ट्रैक्ट में उसके फंसने की स्थिति और पेशाब के फ्लो पर निर्भर करता है।

आमतौर पर छोटे साइज की पथरी अपने आप यूरिनरी ट्रैक्ट से निकल सकती है, वहीं बड़ी पथरी के यूरेटर में फंसने का रिस्क हो सकता है। अगर मरीज को किडनी स्टोन के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो जांच के बाद दवाओं या सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।

किडनी स्टोन का इलाज कैसे होता है?

Cleveland Clinic के मुताबिक, किडनी स्टोन को निकालने के लिए कुछ दवाएं दी जा सकती हैं या सर्जरी की मदद ली जा सकती है।

दवाएं

  • पथरी निकालने के लिए कुछ ऐसी दवाएं दी जा सकती हैं, जो यूरेटर को आराम दे सकें, ताकि स्टोन आसानी से बाहर निकल जाए।
  • पथरी का दर्द बहुत तेज होता है। ऐसे में डॉक्टर मरीज को पेनकिलर दवा दे सकते हैं, लेकिन मरीज खुद से किसी भी तरह की पेनकिलर दवा न लें।
  • किडनी स्टोन में मरीज को उल्टी या मतली हो सकती है। इसे कम करने के लिए डॉक्टर इससे जुड़ी दवा दे सकते हैं।

सर्जरी

  • शॉकवेव लिथोट्रिप्सी - इसमें शरीर के बाहर से शॉक वेव का इस्तेमाल करके पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है, जो पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते हैं।
  • यूरेटेरोस्कोपी - मूत्र मार्ग के जरिए एक पतला स्कोप डालकर पथरी को देखा जाता है और खास डिवाइस से तोड़कर उन स्टोन्स को बाहर निकाला जाता है।
  • परक्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटोमी (PCNL) - पीठ पर एक छोटा-सा चीरा लगाकर सीधे किडनी में ट्यूब डाली जाती है और अल्ट्रासाउंड प्रोब से बड़ी पथरी को तोड़कर निकाला जाता है।
  • लैप्रोस्कोपिक या ओपन सर्जरी - बहुत बड़ी या जटिल पथरी के मामलों में छोटा चीरा या दुर्लभ मामलों में ओपन सर्जरी करके पथरी निकाली जाती है।

किडनी स्टोन होने पर किन चीजों से परहेज करें?

NIDDK के अनुसार, जिन लोगों को एक बार किडनी स्टोन हो जाए, तो उन्हें दोबारा किडनी स्टोन से बचाव के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने चाहिए। सबसे जरूरी है कि नमक पर ध्यान दें। खासतौर पर बेकिंग सोडा, अजीनोमोटो, सोडियम नाइट्रेट, पैकेज्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड और अचार से बचें।

कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन

  • ऐसे मरीजों को पालक, मेवे, मूंगफली, गेहूं का चोकर खाने से बचना चाहिए।
  • मीट, अंडा और डेयरी प्रोडक्ट्स सीमित करें।

कैल्शियम फॉस्फेट स्टोन

  • डिब्बाबंद और फास्ट फूड से बचें।
  • लाल मीट, चिकन, मछली और अंडे जैसे एनिमल प्रोटीन लेने से परहेज करें।

यूरिक एसिड स्टोन

एनिमल प्रोटीन जैसे ऑर्गन मीट, सीफूड और रेड मीट से परहेज करें।

सिस्टिन स्टोन

किसी तरह के तरल पदार्थों को लेने से बचें।

किडनी स्टोन होने के बाद किन चीजों को लिया जा सकता है?

NIDDK के अनुसार, किडनी स्टोन के मरीज इन चीजों को खा सकते हैं और साथ ही पानी की मात्रा पर भी ध्यान रखना जरूरी है। 

कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन

  • ऐसे मरीज मूंगफली को छोड़कर अन्य दालें, बींस, राजमा और छोले खा सकते हैं।
  • कैल्शियम फोर्टीफाइड जूस या अनाज को छोड़कर अन्य कैल्शियम के फूड्स लें।

कैल्शियम फॉस्फेट स्टोन

ऐसे मरीज बींस, दालें, सोया मिल्क, टोफू, बादाम, काजू और सूरजमुखी के बीज ले सकते हैं।

यूरिक एसिड स्टोन

इस तरह के किडनी स्टोन वाले मरीजों को अपने वजन पर ध्यान रखना चाहिए। अगर किसी का वजन ज्यादा है, तो उसे कम करने की कोशिश करें।

सिस्टिन स्टोन

मरीजों को दिनभर में अपने पानी के इनटेक पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए एक ही मात्रा सही नहीं होती। मौसम, फिजिकल एक्टिविटी, शरीर में फ्लूड लॉस और अन्य मेडिकल कंडीशंस के अनुसार जरूरत बदल सकती है।

डॉक्टर से पूछे जाने वाले सवाल

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि लोग अक्सर किडनी स्टोन से जुड़े ऐसे सवाल करते हैं, जो मिथकों पर आधारित होते हैं।

क्या दूध और कैल्शियम से किडनी स्टोन होता है?

जवाब - किडनी स्टोन होने पर कैल्शियम पूरी तरह से बंद कर देना सही नहीं है। ऐसा हर मरीज के लिए जरूरी नहीं है। इसलिए दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स की पूरी जानकारी डॉक्टर से लें।

क्या नींबू पानी किडनी स्टोन को निकाल देता है?

जवाब - नींबू खट्टा होता है, जो कुछ परिस्थितियों में क्रिस्टल्स बनने या उनके स्टोन में बदलने की प्रक्रिया को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नींबू पानी हर बनी हुई किडनी स्टोन को तोड़कर बाहर निकाल देगा।

किडनी स्टोन दोबारा क्यों बनता है?

जवाब - एक बार स्टोन निकाले जाने के बाद अगर मरीज उसके बनने की वजह को दूर नहीं करता, तो भविष्य में दोबारा पथरी बन सकती है। इसमें पानी कम पीना, ज्यादा नमक खाना, डाइट से जुड़ी समस्याएं, फैमिली हिस्ट्री जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

किडनी स्टोन और UTI में क्या अंतर है?

जवाब - हालांकि, दोनों बीमारियों में पेशाब करते समय जलन, पेशाब में बदलाव और दर्द हो सकता है, लेकिन दोनों के होने का कारण और इलाज अलग-अलग होता है। किडनी स्टोन में पीठ के निचले हिस्से में तेज दर्द और पेशाब में ब्लड आ सकता है। वहीं UTI में पेशाब में जलन, बार-बार जाने की इच्छा होना, पेशाब में झाग आ सकता है या पेशाब बदबूदार हो सकता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दोनों समस्याएं एक साथ हो सकती हैं। इसलिए डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।

क्या किडनी स्टोन से किडनी डैमेज हो सकती है?

जवाब - हर किडनी स्टोन की वजह से किडनी डैमेज नहीं होती। अगर स्टोन के कारण पेशाब में रुकावट होती है और इंफेक्शन बढ़ने लगता है और इसका समय पर इलाज नहीं होता, तो किडनी डैमेज होने का रिस्क बढ़ सकता है।

डॉक्टर से मिलना कब जरूरी है?

Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि अगर मरीज को ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

  • बहुत तेज या असहनीय दर्द हो।
  • दर्द के साथ बुखार या ठंड लग रही हो।
  • पेशाब बहुत कम हो रहा हो या बंद हो गया हो।
  • लगातार उल्टी हो रही है।
  • पेशाब में खून आ रहा हो।
  • पहले से किडनी से जुड़ी समस्या हो।

निष्कर्ष
किडनी स्टोन के लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएं ताकि उसका समय पर इलाज हो सके। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किडनी स्टोन का इलाज हर मरीज में एक जैसा नहीं होता। स्टोन का साइज, लोकेशन, टाइप और मरीज की हेल्थ कंडीशन को देखते हुए इलाज तय होता है। इसके अलावा, स्टोन निकलने के बाद मरीज को अपनी डाइट और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना चाहिए, ताकि इसके दोबारा बनने का रिस्क कम हो सके।

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