Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Archana Jain , Nutritionist

चना सत्तू या जौ सत्तू: किडनी के मरीजों के लिए कौन सा है ज्यादा फायदेमंद?

किडनी के मरीजों को अपने खानपान का खास ख्याल रखना होता है, चना सत्तू और जौ सत्तू दोनों के पोषण गुण अलग हैं। यहां जानेंगे कि किडनी रोगियों के लिए कौन सा सत्तू ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद हो सकता है।

गर्मी के मौसम में सत्तू का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ दिनभर एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है। भारत के कई हिस्सों में लोग चना सत्तू और जौ सत्तू का सेवन शरबत या अन्य तरीकों से करते हैं लेकिन जब बात किडनी के मरीजों की आती है, तो किसी भी फूड का चुनाव सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा सावधानी के साथ करना पड़ता है। किडनी फंक्शन प्रभावित होने पर खानपान में छोटी सी लापरवाही भी कई समस्याओं को बढ़ा सकती है। कई किडनी मरीज अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि चना सत्तू और जौ सत्तू में से कौन-सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से बात की-

किडनी के मरीजों के लिए चना सत्तू या जौ सत्तू?

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि किडनी की बीमारी में प्रोटीन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और सोडियम की मात्रा पर खास ध्यान देना पड़ता है। मरीज की किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है, इसके आधार पर डाइट तय की जाती है। इसलिए कोई भी चीज खाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है। सत्तू भले ही पौष्टिक हो, लेकिन उसकी मात्रा और प्रकार मरीज की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

1. चना सत्तू

डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि चना सत्तू प्रोटीन, फाइबर के साथ कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा सोर्स माना जाता है। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और शरीर को एनर्जी भी देता है। जिन किडनी मरीजों को लो-प्रोटीन डाइट की सलाह दी गई है, उन्हें इससे परहेज करना चाहिए या इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

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2. जौ सत्तू

डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, कई किडनी मरीजों के लिए जौ सत्तू बेहतर विकल्प हो सकता है। जौ में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है और यह पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही इसमें चने की तुलना में प्रोटीन कम होता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त भार पड़ने की संभावना कम हो सकती है।

chana sattu vs jau sattu

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डाइटिशियन की सलाह

डाइटिशियन अर्चना जैन का कहना है कि किडनी डिजीज एक जैसी स्थिति नहीं होती। कुछ मरीज डायलिसिस पर होते हैं, जबकि कुछ शुरुआती स्टेज में होते हैं। ऐसे में हर मरीज के शरीर की जरूरतें अलग होती हैं। यदि किसी मरीज को पोटैशियम, फॉस्फोरस या लिक्विड की मात्रा कंट्रोल रखने की सलाह दी गई है तो उसे सत्तू का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

किडनी के मरीजों के लिए चना सत्तू और जौ सत्तू में से कौन बेहतर है, इसका जवाब मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर जौ सत्तू कम प्रोटीन होने के कारण कई मरीजों के लिए बेहतर विकल्प माना जा सकता है, जबकि चना सत्तू का सेवन सीमित मात्रा में और एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार करना चाहिए। किसी भी फूड को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर और डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।

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FAQ

  • क्या चना सत्तू में ज्यादा प्रोटीन होता है?

    चना सत्तू प्रोटीन का अच्छा सोर्स है, इसलिए किडनी मरीजों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।
  • जौ सत्तू के क्या फायदे हैं?

    जौ सत्तू पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ठंडक देने और हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है।
  • क्या सत्तू में पोटैशियम होता है?

    सत्तू में कुछ मात्रा में पोटैशियम होता है। जिन मरीजों को पोटैशियम कंट्रोल रखने की सलाह दी गई है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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