गर्मी के मौसम में सत्तू का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ दिनभर एनर्जी बनाए रखने में भी मदद करता है। भारत के कई हिस्सों में लोग चना सत्तू और जौ सत्तू का सेवन शरबत या अन्य तरीकों से करते हैं लेकिन जब बात किडनी के मरीजों की आती है, तो किसी भी फूड का चुनाव सामान्य लोगों की तुलना में ज्यादा सावधानी के साथ करना पड़ता है। किडनी फंक्शन प्रभावित होने पर खानपान में छोटी सी लापरवाही भी कई समस्याओं को बढ़ा सकती है। कई किडनी मरीज अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि चना सत्तू और जौ सत्तू में से कौन-सा विकल्प ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, जयपुर स्थित Angelcare-A Nutrition and Wellness Center की निदेशक, डाइटिशियन एवं न्यूट्रिशनिस्ट अर्चना जैन से बात की-
किडनी के मरीजों के लिए चना सत्तू या जौ सत्तू?
डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि किडनी की बीमारी में प्रोटीन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और सोडियम की मात्रा पर खास ध्यान देना पड़ता है। मरीज की किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है, इसके आधार पर डाइट तय की जाती है। इसलिए कोई भी चीज खाने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना जरूरी है। सत्तू भले ही पौष्टिक हो, लेकिन उसकी मात्रा और प्रकार मरीज की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।
1. चना सत्तू
डाइटिशियन अर्चना जैन बताती हैं कि चना सत्तू प्रोटीन, फाइबर के साथ कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा सोर्स माना जाता है। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और शरीर को एनर्जी भी देता है। जिन किडनी मरीजों को लो-प्रोटीन डाइट की सलाह दी गई है, उन्हें इससे परहेज करना चाहिए या इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें: पैरों के तलवों में जलन: क्या यह डायबिटीज है या किडनी की बीमारी? जानें असली कारण
2. जौ सत्तू
डाइटिशियन अर्चना जैन के अनुसार, कई किडनी मरीजों के लिए जौ सत्तू बेहतर विकल्प हो सकता है। जौ में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है और यह पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही इसमें चने की तुलना में प्रोटीन कम होता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त भार पड़ने की संभावना कम हो सकती है।

इसे भी पढ़ें: पैरों में सूजन और दिनभर थकान कहीं किडनी की बीमारी तो नहीं? डॉक्टर से समझें कनेक्शन
डाइटिशियन की सलाह
डाइटिशियन अर्चना जैन का कहना है कि किडनी डिजीज एक जैसी स्थिति नहीं होती। कुछ मरीज डायलिसिस पर होते हैं, जबकि कुछ शुरुआती स्टेज में होते हैं। ऐसे में हर मरीज के शरीर की जरूरतें अलग होती हैं। यदि किसी मरीज को पोटैशियम, फॉस्फोरस या लिक्विड की मात्रा कंट्रोल रखने की सलाह दी गई है तो उसे सत्तू का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
किडनी के मरीजों के लिए चना सत्तू और जौ सत्तू में से कौन बेहतर है, इसका जवाब मरीज की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर जौ सत्तू कम प्रोटीन होने के कारण कई मरीजों के लिए बेहतर विकल्प माना जा सकता है, जबकि चना सत्तू का सेवन सीमित मात्रा में और एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार करना चाहिए। किसी भी फूड को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर और डाइटिशियन की सलाह जरूर लें।
All Image Credit- magnific
FAQ
क्या चना सत्तू में ज्यादा प्रोटीन होता है?
चना सत्तू प्रोटीन का अच्छा सोर्स है, इसलिए किडनी मरीजों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।जौ सत्तू के क्या फायदे हैं?
जौ सत्तू पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ठंडक देने और हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है।क्या सत्तू में पोटैशियम होता है?
सत्तू में कुछ मात्रा में पोटैशियम होता है। जिन मरीजों को पोटैशियम कंट्रोल रखने की सलाह दी गई है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jun 02, 2026 17:01 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Jun 02, 2026 17:01 IST
Modified By : Akanksha TiwariJun 02, 2026 17:01 IST
Modified By : Akanksha TiwariJun 02, 2026 17:01 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Archana Jain