Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Rajasekara C Madarasu , Senior Consultant Nephrologist | Clinical Director & Head of Department - Nephrology & Transplant Services

हार्ट, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियों का इलाज एक-साथ क्यों होना चाहिए? डॉक्टर से जानें वजह

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने हाल ही में नई गाइडलाइन्‍स जारी की हैं ज‍िसके मुताब‍िक हार्ट, क‍िडनी और मेटाबॉल‍िक बीमारि‍यों को अलग-अलग समझने के बजाय इलाज एक साथ क‍िया जाना चाह‍िए।

कई बार लोगोंं को क‍िडनी, हार्ट और मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं एक साथ होती हैं। ज्‍यादा वजन होना, हाई बीपी होना, कोलेस्‍ट्रॉल लेवल असामान्‍य होना, ब्‍लड शुगर लेवल ज्‍यादा होना जैसी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं अलग-अलग नहीं होतींं, यह कहना है अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का ज‍िसने हाल ही में पब्‍ल‍िश गाइडलाइन्‍स में बताया क‍ि इन सभी का आपस में कनेक्‍शन है इसल‍िए इनका इलाज एक साथ क‍िया जाना चाह‍िए। एक्‍सपर्ट्स के मुताब‍िक अगर लगातार थकान, ब‍िना कारण वजन बढ़ना, सांस फूलना, हाई बीपी या असामान्‍य शुगर लेवल हो, तो इसे हल्‍के में नहींं लेना चाह‍िए। हार्ट, किडनी और मेटाबॉलिक बीमारियों का इलाज एक साथ क‍िए जाने के पीछे छुपे कारणों को समझने के ल‍िए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Senior Consultant Nephrologist, Clinical Director & HOD Of Nephrology And Transplant Services At Yashoda Hospitals, Hitec City से बात की।

कार्डियोवैस्कुलर किडनी मेटाबॉलिक सिंड्रोम के 4 स्‍टेज

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अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन, अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी, अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी ने मिलकर कार्डियोवैस्कुलर किडनी मेटाबॉलिक सिंड्रोम (Cardiovascular Kidney Metabolic Or CKM Syndrome) के लिए पहला ऑफिशियल क्लिनिकल प्रैक्टिस फ्रेमवर्क पब्लिश किया है। गाइडलाइन्‍स में CKM सिंड्रोम को चार स्‍टेज में बांंटा है-

  • पहली स्‍टेज में मोटापा, प्री डायब‍िटीज के लक्षण नजर आ सकते हैं।
  • दूसरी स्‍टेज में हाई बीपी, क्रॉन‍िक क‍िडनी रोग, टाइप 2 डायब‍िटीज, हाई ट्राइग्‍लि‍सराइड्स जैसी समस्‍याओं का खतरा बढ़ सकता है।
  • तीसरी स्‍टेज में ह्रदय रोग या हार्ट फेलि‍यर के शुरुआती लक्षण नजर आ सकते हैं।
  • चौथी स्‍टेज में स्‍ट्रोक, क‍िडनी फेल‍ियर, कोरोनरी आर्टरीज ड‍िजीज का खतरा हो सकता है।

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हार्ट, किडनी, मेटाबॉलिक बीमारियों का साथ इलाज होने से खतरा टलता है

Nephrologist, Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu ने बताया क‍ि हार्ट, क‍िडनी और मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ से संंबंध‍ित समस्‍याएंं एक साथ जुड़ी होती हैं और ये एक-दूसरे को गंभीर बना सकती हैं इसल‍िए डॉक्‍टर सुुझाव देते हैं क‍ि इनका इलाज एक साथ क‍िया जाना चाह‍िए। जब हार्ट और क‍िडनी जैसे अंंगों की बीमार‍ियोंं का इलाज एक साथ होता है, तो सेहत के ल‍िए क‍िसी भी खतरे का पता जल्‍दी चल सकता है और मेड‍िकल इमरजेंसी से बचा सकता है।

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क्रॉन‍िक बीमार‍ियों से हार्ट और क‍िडनी हो जाती हैं बीमार

जब व्‍यक्‍त‍ि डायब‍िटीज, मोटापा, हाई बीपी या पुरानी क‍िडनी की बीमारी का श‍िकार होता है, तो हार्ट और खून की धमन‍ियों पर ज्‍यादा दबाव पड़ता है और हार्ट फेल‍ियर की आशंका बढ़ सकती है और क‍िडनी में ब्‍लड फ्लो कम हो सकता है। इससे क‍िडनी को नुकसान पहुंंचता है इसल‍िए डॉक्‍टर सलाह देते हैं क‍ि इन अंंगों से संबंध‍ित समस्‍याओं को एक साथ ट्रीट क‍िया जाए।

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CKM सिंड्रोम से बचने के ल‍िए क्‍या करें?

कार्डियोवैस्कुलर किडनी मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम के लक्षण अचानक नहींं बढ़ते, ज्‍यादातर मामलों में इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। हेल्‍दी डाइट, रेगुलर एक्‍सरसाइज, वेट मैनेजमेंट, नींद पूरी करने जैसे आदतों की मदद से आप स्‍वस्‍थ रह सकते हैं और CKM सिंड्रोम से बच सकते हैं। इसके साथ ही बचाव के ल‍िए बीपी, ब्‍लड शुगर लेवल और कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करना जरूरी है।

न‍िष्‍कर्ष:

कार्डियोवैस्कुलर किडनी मेटाबॉलिक (CKM) सिंड्रोम के लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं इसल‍िए हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के साथ इसे मैनेज क‍िया जा सकता है। हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने गाइडलाइन्‍स जारी क‍ी हैं ज‍िसमें बताया गया है हार्ट, क‍िडनी और मेटाबॉल‍िक बीमार‍ियों का इलाज एक साथ क‍िया जाना चाह‍िए।

FAQ

  • हार्ट की बीमार‍ियों के लक्षण क्‍या हैं?

    हार्ट की बीमार‍ी होने पर हार्टबर्न, जी म‍िचलाना, अन‍ियम‍ित द‍िल की धड़कन, सीने में दर्द या जकड़न जैसे लक्षण नजर आते हैं।
  • मेटाबॉल‍िक स‍िंड्रोम के लक्षण क्‍या हैं?

    मोटापा, पेट की चर्बी ज्‍यादा होना, हाई बीपी की समस्‍या होना, हाई शुगर लेवल, हाई ट्राइग्लिसराइड्स मेटाबॉल‍िक स‍िंड्रोम के लक्षण हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 29, 2026 11:24 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 29, 2026 11:24 IST

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    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu

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