Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

छाछ पीने से सिर्फ ठंडक नहीं, मेटाबॉलिक हेल्थ को भी म‍िलते हैं फायदे, जानें कैसे?

गर्म द‍िनों में ठंंडी-ठंंडी छाछ पीकर राहत म‍िल जाती है। छाछ पीने से गर्मी से, तो राहत मिलती ही है साथ ही यह शरीर के ल‍िए भी फायदेमंंद होती है। जानें मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ के ल‍िए छाछ क्‍यों फायदेमंंद है?

छाछ एक पारंपर‍िक ड्र‍िंक है ज‍िसमें प्रोबायोट‍िक्‍स, प्रोटीन, व‍िटाम‍िन्‍स, म‍िनरल्‍स वगैरह पाए जाते हैं। छाछ का सेवन करने से गट हेल्‍थ को सपोर्ट म‍िलता है और ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। दही को फेंटकर बनने वाली छाछ केवल एक ड्र‍िंक नहीं बल्‍क‍ि टॉन‍िक है ज‍िसे अक्‍सर मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद बताया जाता है। मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ का मतलब है आपका शरीर एनर्जी को कैसे प्रोसेस कर रहा है और ब्‍लड शुगर, कोलेस्‍ट्रॉल, बीपी, वजन को कैसे बैलेंस कर रहा है? अगर मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ खराब होगी, तो शरीर मोटापा, टाइप 2 डायब‍िटीज जैसी समस्‍याओंं का श‍िकार हो सकता है। जानें छाछ का सेवन करने से मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ कैसे बेहतर हो सकती है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow से बात की।

छाछ से पाचन, मेटाबॉल‍िज्‍म सुधरता है और सूजन घटती है

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छाछ प्रोबायोट‍िक्‍स काक स्रोत है और प्रोबायोट‍िस्‍क गट में गुड बैक्‍टीर‍िया को बढ़ावा देता है। गुड बैक्‍टीर‍िया से मेटाबॉल‍िज्‍म बेहतर होता है, डाइजेशन इंप्रूव होता है और शरीर की सूजन कम होती है। प्रोबायोट‍िक्‍स से इंंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है और ब्‍लड शुगर लेवल बेहतर होता है।

साल 2016 में International Journal Of Scientific Research And Management नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, छाछ का सेवन करने से पाचन बेहतर होता है और पोषक तत्‍वोंं के एब्‍जॉर्ब होने की प्रक्र‍िया भी बेहतर होती है ज‍िससे मेटाबॉल‍िज्‍म सही ढंग से काम करता है।

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पाचन और मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद है छाछ

  • छाछ में पोटैश‍ियम होता है ज‍िससे ब्‍लड प्रेशर कंट्रोल करने में मदद मि‍लती है।
  • बीपी कंट्रोल करने से हार्ड ड‍िजीज का खतरा कम होता है।
  • यह एक प्रोबायोट‍िक ड्र‍िंक है ज‍िससे मोटापा और टाइप 2 डायबि‍टीज का खतरा कम हो सकता है।
  • छाछ में प्राेबायोट‍िक्‍स और एंटीऑक्‍सीडेंट्स होते हैं ज‍िससे इम्‍यून फंक्‍शन को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।
  • प्रोबायोट‍िक ड्र‍िंक का सेवन करने से ब्‍लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद मि‍लती है।

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छाछ लो कैलोरी है, इससे वजन कंट्रोल होता है

छाछ एक लो कैलोरी ड्र‍िंक है। इसमें कैल्‍श‍ियम, पोटैश‍ियम, व‍िटाम‍िन बी12 जैसे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं। छाछ का सेवन करने से वजन कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। जब वजन कंट्रोल होता है, तो मेटाबॉल‍िक ड‍िसऑर्डर से बचने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

क‍िसी एक अकेले फूड की मदद से मेटाबॉल‍िक हेल्‍थ नहीं सुधरती। इसके ल‍िए हेल्‍दी डाइट के साथ एक्‍ट‍िव लाइफस्‍टाइल को फॉलो करना भी जरूरी है।

FAQ

  • स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म के लक्षण क्‍या हैं?

    हमेशा थकान होना, शरीर में एनर्जी की कमी, वजन बढ़ना, कब्‍ज वगैरह स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म के संकेत हो सकते हैं।
  • स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म को कैसे सुधारें?

    रोजाना 25 से 30 म‍िनट एक्‍सरसाइज करें, वॉक करें, स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग करें, प्रोटीन लें, पर्याप्‍त नींद लें ताक‍ि स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म को बढ़ाने में मदद म‍िले।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Jun 17, 2026 09:58 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 17, 2026 09:58 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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