टॉन्सिल स्टोन्स (Tonsil Stones) और टॉन्सिलाइटिस (Tonsillitis) दोनों ही गले से जुड़ी एक गंभीर समस्या है, जो टॉन्सिल को प्रभावित करती हैं। हालांकि, इनके होने के कारण और लक्षण एक दूसरे से काफी अलग-अलग होते हैं। टॉन्सिल स्टोन्स तब बनते हैं जब खाने के कण, लार और बैक्टीरिया टॉन्सिल की दरारों में जमा होकर छोटे और सख्त सफेद या पीले स्टोन्स का रूप ले लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, टॉन्सिलाइटिस टॉन्सिल में होने वाला एक तरह का इंफेक्शन और सूजन है, जो मुख्य रूप से बैक्टीरिया और वायरस के फैलने से होता है। इन दोनों के बीच के अंतर को समझना इनके इलाज के लिए बहुत जरूरी है। इसलिए, आइए इस लेख में Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj, Consultant, MedFirst ENT Centre, New Delhi से जानते हैं कि टॉन्सिल स्टोन्स और टॉन्सिलाइटिस में क्या अंतर है?
टॉन्सिल स्टोन और टॉन्सिलिटिस में अंतर
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के अनुसार, टॉन्सिल स्टोन और टॉन्सिलिटिस दोनों ही समस्याएं गले के पिछले हिस्से में असुविधा का कारण बन सकती हैं, लेकिन ये दोनों ही अलग-अलग स्थितियां हैं। इन दोनों स्थितियों को एक जैसा समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। टॉन्सिल स्टोन छोटे, आमतौर पर सफेद या पीले रंग के जमाव होते हैं, जो टॉन्सिल की नेचुरल दरारों के अंदर बनते हैं। टॉन्सिल स्टोन तब होते हैं जब भोजन के टुकड़े, बलगम, डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया फंस जाते हैं और धीरे-धीरे सख्त हो जाते हैं। दूसरी ओर, टॉन्सिलिटिस, टॉन्सिल में सूजन है, जो आमतौर पर वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होती है।
| अंतर | टॉन्सिल स्टोन | टॉन्सिलिटिस |
| कारण | ये स्टोन, टॉन्सिल की दरारों में खाने के टुकड़ें, बलगम, डेड स्किन और बैक्टीरिया के के कण, बलगम, डेड स्किन और बैक्टीरिया के फंसकर सख्त होने के कारण बनते हैं। | यह टॉन्सिल में होने वाली सूजन है, जो मुख्य रूप से वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होती है। |
| लक्षण | मुंह से बदबू |
गले में तेज दर्द |
| क्या यह संक्रामक है? | नहीं, यह आमतौर पर संक्रामक नहीं होता है और एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता है। | हां, यह संक्रामक हो सकता है। अगर यह वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण हुआ है। |
| इलाज और बचाव | मुंह की अच्छी साफ-सफाई |
डॉक्टर की सलाह से आराम |
टॉन्सिल स्टोन के लक्षण
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के अनुसार, टॉन्सिल स्टोन होने पर सबसे पहले मुंह से लगातार बदबू आती है जो ब्रश करने पर भी दूर नहीं होती और मुंह का स्वाद बिगड़ जाता है। टॉन्सिल पर छोटे सफेद या पीले दाने दिखने लगते हैं, जिससे गले में कुछ अटका हुआ सा महसूस होता है और खाना या पानी निगलते समय हल्की जलन और दर्द होता है। कई बार गले की नसें जुड़ी होने के कारण यह दर्द कान तक भी पहुंच सकता है। हालांकि, छोटे टॉन्सिल स्टोन बिना किसी गंभीर लक्षण या बुखार आए अपने आप निकल जाते हैं।
साल 2014 में International Scholarly Research Notices में प्रकाशित एक क्लिनिकल स्टडी के अनुसार टॉन्सिल अक्सर क्रोनिक टॉन्सिलाइटिस से जुड़े होते हैं और इनके कारण सांसों की बदबू, गले में बाहरी चीज महसूस होना और निगलने में मुश्किल जैसे लक्षण हो सकते हैं। सांस की बदबू का कारण इनमें मौजूद बैक्टीरिया द्वारा प्रोड्यूस सल्फर कंपाउंड को माना गया है।
टॉन्सिलिटिस के लक्षण
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj बताते हैं कि टॉन्सिलिटिस होने पर गले में तेज दर्द होता है और टॉन्सिल लाल होकर सूज जाते हैं। इस समस्या के कारण खाना या पानी निगलना काफी मुश्किल हो जाता है। इसके साथ ही, मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में थकान और गर्दन की गिल्टियों में सूजन और दर्द का एहसास होता है। टॉन्सिलिटिस होने पर टॉन्सिल पर सफेद धब्बे या मवाद की परत भी जम सकती है, जिसके कारण लोग अक्सर इसे टॉन्सिल स्टोन समझ लेते हैं। हालांकि, डॉक्टर ही सभी लक्षणों को देखकर इसका सही इलाज बता सकते हैं।
StatPearls मेडिकल रिसोर्स के अनुसार, टॉन्सिलाइटिस पैलेटाइन टॉन्सिल की एक नॉर्मल सूजन है, जो मुख्य रूप से वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होती है। इस स्थिति के कारण गले में गंभीर खराश, बुखार, निगलने में होने वाला दर्द और टॉन्सिल का लाल होना या उन पर सफेद या पीली परत का दिखाई देना शामिल है।
क्या ये संक्रामक हैं?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के अनुसार, टॉन्सिल स्टोन खुद आमतौर पर संक्रामक नहीं माने जाते हैं। हालांकि, गले से जुड़ी समस्याओं का कारण बनने वाले बैक्टीरिया या इंफेक्शन कभी-कभी फैल सकते हैं। टॉन्सिलिटिस तब संक्रामक हो सकता है, जब यह एक फैलने वाले वायरल या बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है। हाथों की अच्छी साफ-सफाई, बर्तनों को शेयर करने से बचना और खांसते या छींकते समय मुंह ढकने से इसके फैलने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

टॉन्सिल स्टोन को कैसे मैनेज करें?
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj के मुताबिक टॉन्सिल स्टोन को मैनेज करने में ओरल हेल्थ की साफ-सफाई, दांतों और जीभ को रेगुलर साफ करना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और गुनगुने नमक के पानी से धीरे-धीरे गरारे करना शामिल है। लोगों को टॉन्सिल स्टोन हटाने के लिए जबरदस्ती अस्वच्छ उंगलियों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे टॉन्सिल डैमेज हो सकती है और ब्लीडिंग या इंफेक्शन हो सकता है। लगातार, बड़े या बार-बार होने वाले स्टोन की सही जांच के लिए ईएनटी स्पेशलिस्ट से कंसल्ट कर सकते हैं।
टॉन्सिलिटिस का इलाज
Dr. (Major) Rajesh Bhardwaj ने बताया कि टॉन्सिलिटिस का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। वायरल टॉन्सिलिटिस में आमतौर पर आराम करना, लिक्विड डाइट लेना और लक्षणों से राहत पाने वाली दवाएं डॉक्टर की सलाह पर लेना फायदेमंद हो सकता है। एंटीबायोटिक्स सिर्फ तभी फायदेमंद होते हैं, जब बैक्टीरियल इंफेक्शन का निदान किया जाता है और उन्हें ठीक वैसे ही लिया जाना चाहिए जैसे डॉक्टर बताते हैं। बार-बार या गंभीर टॉक्सिलिटिस होने पर ENT से कंसल्ट करना जरूरी है।
डॉक्टर से कब मिलें?
टॉन्सिलिटिस और टॉन्सिल स्टोन दोनों ही समस्याएं गंभीर हो सकती हैं, अगर आप समय पर इसके लक्षणों को पहचानकर सही इलाज न लें। इसलिए, अगर सांस लेने में मुश्किल, पानी निगलने में असुविधा, लार टपकना, गले में एक तरफ गंभीर सूजन होना, दबी हुई आवाज, मुंह खोलने में मुश्किल होना या डिहाइड्रेशन की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है। टॉन्सिल स्टोन के नॉर्मल लक्षणों के साथ ये संकेत इस स्थिति के गंभीर होने का संकेत हो सकते हैं।
निष्कर्ष
टॉन्सिल स्टोन्स सिर्फ बैक्टीरिया और गंदगी जमा होने के कारण होने वाली समस्या हैं और ये संक्रामक नहीं होते हैं। जबकि टॉन्सिलाइटिस एक गंभीर इंफेक्शन है, जो दूसरों में भी फैल सकता है। अगर गले में तेज दर्द या बुखार हो, तो इस स्थिति में तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है।
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FAQ
टॉन्सिल स्टोन का इलाज कैसे किया जाता है?
टॉन्सिल स्टोन का इलाज ज्यादातर घरेलू उपायों और अच्छी ओरल हाइजीन से किया जा सकता है। हल्के मामलों में गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करने से मदद मिल सकती है।क्या टॉन्सिल स्टोन खतरनाक होते हैं?
आमतौर पर टॉन्सिल स्टोन खतरनाक या हानिकारक नहीं होते हैं। ये टॉन्सिल्स में जमा हुए फूड के टुकड़ों, डेड स्किन सेल्स और बैक्टीरिया के सख्त होने से बनते हैं।
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Jul 22, 2026 15:07 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Jul 22, 2026 15:07 IST
Modified By : Katyayani TiwariJul 22, 2026 15:07 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Major Rajesh Bhardwaj