Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

पोर्टल हाइपरटेंशन (Portal Hypertension) क्‍या है? डॉक्‍टर से जानें लक्षण, कारण और इलाज

ल‍िवर में ब्‍लड सप्‍लाई करने वाली पोर्ट‍ल वेन का प्रेशर बढ़ जाने की स्‍थ‍िति‍ को पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन कहा जाता है। प्रेशर बढ़ जाने से ब्‍लड फ्लो के रास्‍ते अलग हो जाते हैं ज‍िससे ब्‍लीड‍िंग हो सकती है।

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ज‍िस तरह हार्ट के पंप करने पर जो ज्‍यादा प्रेशर बनता है वह हाई ब्‍लड प्रेशर कहलाता है उसी तरह ल‍िवर में प्रेशर बढ़ने की स्‍थ‍िति‍ को पोर्टल हाइपरटेंशन कहते हैं। यह प्रेशर पोर्टल नसों में बनता है। यह ल‍िवर से संबंध‍ित समस्‍या है जो अक्‍सर ल‍िवर स‍िरोस‍िस के कारण होती है। कुछ मामलों में पोर्टल हाइपरटेंशन की स्‍थ‍िति‍ ब‍िना स‍िरोस‍िस के भी हो सकती है। समय पर पहचान करके इसे ठीक क‍िया जा सकता है। पोर्टल हाइपरटेंशन के लक्षण, कारण, इलाज और अन्‍य जरूरी सवालों के जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist & Advanced Therapeutic Endoscopist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

पोर्टल हाइपरटेंशन क्‍या होता है?

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ल‍िवर में प्रेशर बढ़ने की समस्‍या को पोर्टल हाइपरटेंशन (Portal Hypertension) कहा जाता है। ल‍िवर में ब्‍लड प्रेशर, पोर्ट‍ल वेन का प्रेशर बढ़ने के कारण होता है। पोर्टल वेन का नॉर्मल प्रेशर 5 से 10 mmHg माना जाता है। अगर प्रेशर इससे ज्‍यादा है, तो पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन हो सकता है। पोर्टल हाइपरटेंशन का मुख्‍य कारण ल‍िवर स‍िरोस‍िस माना जाता है।

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पोर्टल वेन क्‍या होती है?

पोर्टल वेन एक मुख्‍य वेन होती है जो ल‍िवर में ब्‍लड सप्‍लाई का काम करती है। ल‍िवर में करीब 70 से 80 प्रत‍िशत ब्‍लड पोर्ट‍ल वेन के जर‍िए आता है। पोर्टल वेन का काम है पेट, आंत और स्प्लीन से ब्‍लड लेकर ल‍िवर को सौंपना। फ‍िर ल‍िवर हार्ट के पास ब्‍लड भेजना है ताक‍ि उसे बॉडी सर्कुलेशन में इस्‍तेमाल क‍िया जा सके।

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नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन क्‍या होता है?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि इस स्‍थ‍िति‍ में ल‍िवर पर दबाव होता है, लेक‍िन ल‍िवर फंक्‍शन अक्‍सर ठीक द‍िखता है। ऐसा पोर्ट‍ल वेन पर प्रेशर बढ़ने के कारण होता है। नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन (Non-Cirrhotic Portal Hypertension) में अक्‍सर पेट में पानी भर जाने का लक्षण नहीं देखा जाता है। नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन होने पर खून की उल्‍टी हो सकती है। 2014 में Journal of Hepatology में प्रकाश‍ित एक र‍िव्‍यू आर्ट‍िकल के मुताब‍िक, नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन में ल‍िवर की स्‍थि‍त‍ि स‍िरोस‍िस के मुकाबले बेहतर होती है क्‍योंक‍ि इसमें ल‍िवर डैमेज का खतरा कम होता है।

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पोर्टल हाइपरटेंशन और नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन के बीच अंतर

पोर्टल हाइपरटेंशन ज्‍यादातर ल‍िवर स‍िरोस‍िस के कारण होता है जबक‍ि नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन में पोर्टल वेन थ्रोम्बोसिस या इंंफेक्‍शन जैसे कारण होते हैं। स‍िरोस‍िस की कंंडीशन में ल‍िवर डैमेज हो सकता है या फाइब्रोस‍िस हो सकता है जबक‍ि नॉन स‍िरोट‍िक में ल‍िवर की संंरचना काफी हद तक सामान्‍य रहती है।

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पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन के प्रकार

  • ल‍िवर से जुड़ने से पहले अगर पेट, आंत या स्प्लीन के रास्‍ते वेन में कोई समस्‍या है, तो यह स्‍थ‍ित‍ि प्री हेपेटिक कहलाती है।
  • अगर ल‍िवर के अंदर कोई समस्‍या है ज‍िसके कारण पोर्टल वेन का प्रेशर बढ़ रहा है, तो उसे हेपेटिक कहा जाता है।
  • अगर लि‍वर के बाहर न‍िकलने वाली नसों में ब्‍लड सर्कुलेशन से संबंध‍ित वेन में प्रेशर बढ़ने की स्‍थ‍ित‍ि को पोस्‍ट हेपेटिक कहा जाता है।

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पोर्टल सर्कुलेशन क्‍या होता है?

  • पाचन अंगों से लिवर तक खून ले जाने वाले सिस्टम को पोर्टल सर्कुलेशन कहते हैं।
  • इसमें पाचन अंंग जैसे आंत, पेट से आया ब्‍लड हार्ट में जाने से पहले ल‍िवर में जाता है।

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पोर्टल हाइपरटेंशन में क‍िस डॉक्‍टर के पास जाएं?

पोर्टल हाइपरटेंशन (Portal Hypertension) एक गंभीर स्थिति है, जो आमतौर पर लिवर से जुड़ी होती है। इसके इलाज के ल‍िए गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist) के पास जाएं। ल‍िवर से संबंध‍ित मामले में हेपेटोलॉजिस्ट (Hepatologist) से संंपर्क कर सकते हैं।

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पोर्टल हाइपरटेंशन के लक्षण

  • पेट में सूजन होना
  • भोजन की नली या पेट की नसों का फूल जाना
  • इंटरनल ब्‍लीड‍िंग
  • थकान होना
  • आसानी से नील पड़ जाना
  • पीलिया
  • त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसी ब्‍लड वेसल्‍स नजर आना

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पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण

  • ल‍िवर स‍िरोस‍िस पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन का सबसे मुख्‍य कारण माना जाता है। ऑनलाइन मेडिकल रिसोर्स Statpearls में प्रकाशित शीर्षक Portal Hypertension में बताया गया है क‍ि पोर्टल हाइपरटेंशन का सबसे आम कारण लिवर सिरोसिस है। सिरोसिस में लिवर में फाइब्रोस‍िस बन जाता है, जिससे ब्‍लड फ्लो में रुकावट आती है और पोर्टल वेन में प्रेशर बढ़ जाता है।
  • अल्‍कोहल का सेवन करना
  • हेपेटाइटिस या फैटी लिवर रोग के कारण होने वाला लिवर सिरोसिस
  • पोर्टल नस में रक्त के थक्के (थ्रोम्बोसिस) जमना
  • जन्मजात दुर्लभ समस्याएं
  • शिस्टोसोमियासिस (Schistosomiasis) जैसा परजीवी कीड़ों से होने वाला इंंफेक्‍शन

पोर्टल हाइपरटेंशन की जांच कैसे होती है?

  • डॉप्‍लर के साथ अल्ट्रासाउंड (Doppler Ultrasound)
  • सीटी स्‍कैन या MRI
  • नसोंं की जांच के ल‍िए एंडोस्‍कोपी
  • ल‍िवर की जांच के ल‍िए ब्‍लड टेस्‍ट

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पोर्टल हाइपरटेंशन को मैनेज कैसे करें?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि पोर्टल हाइपरटेंशन का मुख्‍य उद्देश्‍य ब्‍लीड‍िंग को रोकने के ल‍िए दवाओं का इस्‍तेमाल है ज‍िससे पोर्टल प्रेशर को कम क‍िया जाता है। इंफेक्‍शन के ल‍िए एंंटीबायोट‍िक्‍स का इस्‍तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कारणों का पता लगाकर इलाज क‍िया जाता है और एंडोस्‍कोपी की मदद से बीमारी पर नजर रखी जाती है।

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पोर्टल हाइपरटेंशन के खतरे

  • पोर्टल हाइपरटेंशन के कारण ब्‍लीड‍िंग हो सकती है।
  • गंभीर पोर्टल हाइपरटेंशन में हेपेटोरेनल सिंड्रोम (Hepatorenal Syndrome) के कारण किडनी फेलियर हो सकता है।
  • लिवर की गंभीर बीमारी में यह स्थिति को और खराब कर देता है।

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पोर्टल हाइपरटेंशन का इलाज क्‍या है?

  • ज‍िस तरह हाई बीपी को कंट्रोल करने के ल‍िए दवाएं दी जाती हैं वैसे ही पोर्टल हाइपरटेंशन में प्रेशर कम करने के ल‍िए मरीज की स्‍थ‍ित‍ि के मुताब‍िक दवाएं दी जा सकती हैं।
  • एंडोस्‍कोपी की मदद से डैमेज नसों को इंजेक्‍शन की मदद से र‍िपेयर क‍िया जाता है या सुखा द‍िया जाता है ताक‍ि ब्‍लीड‍िंग बंद हो जाए।
  • अगर दवाओं और एंडोस्‍काेपी से इलाज न हो, तो सर्जरी की मदद भी ली जा सकती है। इसे शंट सर्जरी (Shunt Surgery) कहते हैं। शंट सर्जरी में पोर्टल वेन को बड़ी वेन से जोड़ द‍िया जाता है ता‍क‍ि इसका प्रेशर कम हो सके।
  • हेपेटाइट‍िस होने पर एंंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं।
  • अध‍िक गंभीर मरीजों में ल‍िवर ट्रांसप्लांट भी क‍िया जा सकता है।

नॉन स‍िरोट‍िक पोर्ट‍ल हाइपरटेंशन में डॉक्‍टर ब्‍लड प्रेशर घटाने की कोश‍िश करते हैं और ब्‍लीड‍िंग भी रोकने का प्रयास करते हैं। नसों के ब्‍लॉकेज को घटाने के ल‍िए बीटा-ब्‍लॉकर्स दे सकते हैं। अगर इस स्‍थि‍त‍ि में ब्‍लीड‍िंग कंट्रोल नहीं होती है, तो शंट सर्जरी भी की जा सकती है।

पोर्टल हाइपरटेंशन के इलाज में क‍ितना समय लग सकता है?

कोई तय समय नहींं है। पोर्टल हाइपरटेंशन के ज्‍यादातर मामलों में इलाज जीवनभर चल सकता है। दवाएं भी लंबे समय तक चल सकती हैं। ल‍िवर ट्रांसप्‍लांट के ज्‍यादातर मामलोंं में र‍िकवरी के ल‍िए कुछ महीनों का समय लग सकता है।

पोर्टल हाइपरटेंशन पूरी तरह से ठीक हो सकता है?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि अगर शुरुआती समय में इस समस्‍या का पता चल जाए, तो इसे ठीक क‍िया जा सकता है जैसे क्‍लॉट का इलाज करना या हेपेटाइट‍िस सी का इलाज करना। इलाज क‍ितना सफल होगा, यह बीमारी के कारण, मरीज की कंडीशन और इलाज पर न‍िर्भर करता है।

पोर्टल हाइपरटेंशन में कैसी डाइट लें?

  • पोर्टल हाइपरटेंशन के मरीजों को सोड‍ियम इनटेक कम करने की सलाह दी जाती है।
  • इसके अलावा स्‍ट्रीट फूड, जंक फूड या प्रोसेस्‍ड फूड्स का सेवन भी सीमि‍त करने की सलाह दी जाती है।
  • साथ ही अल्‍कोहल का सेवन नहीं करना चाह‍िए।
  • फाइबर र‍िच फल और सब्‍ज‍ियों का सेवन करें।

पोर्टल हाइपरटेंशन और ल‍िवर स‍िरोस‍िस का क्‍या संबंध है?

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि पोर्टल हाइपरटेंशन के ज्‍यादातर मरीजों में कारण स‍िरोस‍िस न‍िकलता है। इससे ल‍िवर को ज्‍यादा नुकसान होता है। ल‍िवर स‍िरोस‍िस का एक बड़ा कारण है लंंबे समय से चली आ रही बीमारी, अल्‍कोहल का सेवन ज‍िसके कारण ब्‍लड सर्कुलेशन में रुकावट आ सकती है।

पोर्टल हाइपरटेंशन से कैसे बचें?

  • हेपेटाइट‍िस ए और बी का टीका लगवाएं।
  • अल्‍कोहल का सेवन न करें।
  • हेल्‍दी डाइट और एक्‍सरसाइज से फैटी ल‍िवर को कंट्रोल करें।
  • नमक, तेल और म‍िर्च-मसाले वाला खाना भी सीम‍ित करें।
  • वजन को कंट्रोल करें।
  • अगर बीमारी का पार‍िवार‍िक इत‍िहास है, तो समय पर ल‍िवर की जांच कराएं।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • खून की उल्‍टी होना
  • पेट में अचानक सूजन होना
  • पेट में पानी भरने के साथ बुखार होना
  • ज्‍यादा थकान होना
  • अगर ल‍िवर की कोई समस्‍या है, तो समय पर इलाज कराएं इससे गंंभीर स्‍थि‍त‍ि से बचा जा सकता है।

न‍िष्‍कर्ष:

Gastroenterologist & Hepatologist Dr. K. S. Somasekhar Rao से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है क‍ि अगर ल‍िवर की बीमारी का सही ढंग से इलाज कराएं, तो पोर्टल हाइपरटेंशन को भी कंट्रोल क‍िया जा सकता है। पोर्टल हाइपरटेंशन के इलाज में दवाएं, शंट सर्जरी, एंडोस्‍कोपी की मदद ली जाती है। गंभीर मरीजों में ल‍िवर ट्रांसप्लांट भी क‍िया जा सकता है।

FAQ

  • लाइफस्‍टाइल का पोर्टल हाइपरटेंशर पर क्‍या प्रभाव पड़ता है?

    खराब लाइफस्‍टाइल से पोर्टल हाइपरटेंशन की स्‍थि‍त‍ि बि‍गड़ सकती है। खराब लाइफस्‍टाइल की स्‍थ‍िति‍ में अगर व्‍यक्‍त‍ि जंक फूड का सेवन करेगा, तो फैटी ल‍िवर और सूजन जैसी समस्‍याएं बढ़ सकती हैं। खराब लाइफस्‍टाइल के कारण मोटापा बढ़ सकता है और ल‍िवर में अत‍िर‍िक्‍त दबाव पड़ सकता है।
  • पोर्टल हाइपरटेंशन क‍ितनी गंभीर समस्‍या है?

    पोर्टल हाइपरटेंशन की गंभीरता इसकी स्‍टेज पर न‍िर्भर करती है। जब यह समस्‍या ल‍िवर की बीमारी या ल‍िवर सि‍रोस‍िस के साथ जुड़ी हो, तो गंभीर रूप ले सकती है। एडवांस स्‍टेज पर मरीज को ल‍िवर ट्रांसप्‍लांट की जरूरत भी पड़ सकती है। 
  • स‍िरोस‍िस के बगैर भी पोर्टल हाइपरटेंशन हो सकता है?

    हां स‍िरोस‍िस के बगैर भी पोर्टल हाइपरटेंशन हो सकता है। इसे नॉन-स‍िरोट‍िक पोर्टल हाइपरटेंशन कहते हैं। पोर्टल हाइपरटेंशन के कारणों में पोर्टल वेन थ्राॅम्‍बोस‍िस, जन्‍मजात असामान्‍यताएं, इंंफेक्‍शन शाम‍िल हैं। इस स्‍थ‍ित‍ि में ल‍िवर पूरी तरह से खराब नहीं होता है, लेक‍िन पोर्टल वेन में दबाव बढ़ सकता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 26, 2026 20:32 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr KS Somasekhar Rao

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