माइग्रेन के कारण सिर में तेज दर्द होने, थोड़ी-थोड़ी देर में दर्द उठने और जी मिचलाने जैसी कई समस्याएं होती हैं। माइग्रेन के कारण होने वाला सिरदर्द कई बार कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक बना रह सकता है। कई बार मरीज के आसपास का वातावरण उसके दर्द को प्रभावित करता है। कई बार लोगों के मन में एक सवाल आता है कि माइग्रेन आखिर होता क्यों है? क्या ये आनुवंशिक समस्या है या इसके पीछे कोई और फैक्टर काम करता है? इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए हमने बात की Dr. Bharath Kumar Surisetti, Consultant Neurologist, Yashoda Hospitals से।
क्या माइग्रेन जेनेटिक होता है?
Dr. Bharath Kumar Surisetti के अनुसार, "माइग्रेन को न्यूरोलॉजी के नजरिए से समझें तो यह एक कॉम्प्लेक्स जेनेटिक (complex genetic) बीमारी है, जिस पर पर्यावरण का भी प्रभाव पड़ता है। इसे सिर्फ पूरी तरह से वंशानुगत (hereditary) बीमारी नहीं माना जाता।"
Dr. Bharath Kumar आगे कहते हैं कि, "कई स्टडीज में पाया गया है कि माइग्रेन परिवारों में चलता है। आधे से ज्यादा मरीज बताते हैं कि उनके परिवार में किसी नजदीकी रिश्तेदार, (जैसे माता-पिता या भाई-बहन) को भी माइग्रेन की समस्या रही है। इससे यह साफ होता है कि इसमें आनुवंशिक प्रवृत्ति (genetic tendency) काफी मजबूत होती है।"
2021 में Neuropsychiatric Disease and Treatment में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, माइग्रेन ब्रेन से जुड़ी एक कॉम्पलेस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसका गहरा संबंध हमारे जींस (Genes) से है। माइग्रेन में हर मरीज में इसके लक्षण अलग-अलग होते हैं और अक्सर इसके साथ दूसरी बीमारियां भी जुड़ी होती हैं।
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माइग्रेन होने में जींस की क्या भूमिका होती है?
Dr. Bharath Kumar के अनुसार, "माइग्रेन किसी एक जीन (gene) की वजह से नहीं होता है। इसे पॉलीजेनिक (polygenic) कहा जाता है यानी इसमें कई जीन मिलकर इसके होने की संभावना को बढ़ाते हैं। ये जीन ब्रेन की एक्टिविटीज यानी न्यूरॉन की सक्रियता (neuronal excitability), आयन चैनल (ion channels) और दर्द को समझने महसूस करने वाली प्रक्रिया (pain pathways) से जुड़े होते हैं। हर व्यक्ति में माइग्रेन के अलग-अलग ट्रिगर्स हो सकते हैं।"
माइग्रेन के ट्रिगर्स क्या हैं?
Dr. Bharath Kumar कहते हैं कि, "माइग्रेन ब्रेन, स्ट्रेस, हार्मोन में बदलाव या नींद की कमी या अनियमितता जैसे कई अलग-अलग ट्रिगर्स पर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। इसी वजह से हर व्यक्ति में माइग्रेन को ट्रिगर करने के अलग-अलग कारण हो सकते हैं, जैसे-"
- मानसिक तनाव
- हार्मोन्स का असंतुलित होना
- नींद की कमी या नींद से जुड़ी अनियमितताएं
- तेज रोशनी या तेज आवाज
- बहुत तेज खुशबू या बदबू
- कई बार फूड्स के कारण
- मौसम में अचानक बदलाव
- पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन
- कैफीन और अल्कोहल का सेवन
कई बार लोग छोटी-छोटी परेशानी होने पर बहुत ज्यादा दवाइयां खाते हैं, जिसके कारण भी माइग्रेन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में माइग्रेन से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना जरूरी हो जाता है।
Mayo Clinic के अनुसार, माइग्रेन अचानक से होने वाली एक समस्या है, जिसमें कई बार कोई न्यूरोलॉजिकल लक्षण या संकेत नहीं होते हैं। इसके अलावा, ये समस्या जेनेटिक और पर्यावरणीय कारणों से हो सकती है।
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फैमिली हिस्ट्री माइग्रेन का खतरा कैसे बढ़ाता है?
Dr. Bharath Kumar के अनुसार, "क्लिनिकल प्रैक्टिस में देखा गया है कि अगर माता या पिता किसी एक को माइग्रेन है, तो बच्चों में इसका खतरा लगभग 40-50% तक हो सकता है। अगर दोनों माता-पिता को माइग्रेन है, तो यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है। लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ माता-पिता के जीन होने से माइग्रेन होना जरूरी नहीं कि बच्चे को माइग्रेन होगा ही। इस समस्या में पर्यावरण और खानपान, नींद का पैटर्न, स्ट्रेस, तेज रोशनी, तेजी आवाज और रोज की आदतों जैसे लाइफस्टाइल भी उतनी ही अहम भूमिका निभाते हैं। इनसे तय होता है कि अगर किसी व्यक्ति को माइग्रेन होता है तो वह कितना गंभीर होगा।"
Dr. Bharath Kumar बताते हैं कि, माइग्रेन का एक रेयर सब-टाइप (rare subtype) भी होता है, जिसे “फैमिलियल हेमिप्लेजिक माइग्रेन” (Familial Hemiplegic Migraine) कहते हैं। इसमें आनुवंशिक कारण साफ दिखाई देता है। इस स्थिति में खास जीन में बदलाव (mutation) पाए जाते हैं। ये बीमारी आमतौर पर ऑटोसोमल डॉमिनेंट तरीके से आगे (autosomal dominant inheritance) बढ़ती है।
WHO के अनुसार, माइग्रेन एक ऐसी बीमारी है, जिसमें सिरदर्द के दौरे बार-बार पड़ते हैं और यह समस्या अक्सर उम्रभर बनी रहती है। ज्यादातर मामलों में यह समय-समय पर यानी एपिसोडिक होता है, जो 4 से 72 घंटों तक रह सकता है। इसके साथ जी मिचलाना, उल्टी आना और रोशनी या आवाज से चिड़चिड़ापन महसूस होना आम है। माइग्रेन की शुरुआत अक्सर किशोरावस्था (Puberty) से होती है और यह 35 से 45 साल की उम्र के लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।
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सिरदर्द और माइग्रेन में अंतर
Dr. Bharath Kumar के अनुसार, "अक्सर लोग सिरदर्द और माइग्रेन को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन ये दोनों ही अलग होते हैं। माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें ब्रेन में कॉर्टिकल स्प्रेडिंग डिप्रेशन (cortical spreading depression), ट्राइजेमिनोवैस्कुलर एक्टिवेशन (trigeminovascular activation) और केमिकल बदलाव (neurochemical fluctuations) जैसी कॉम्प्लेक्स प्रक्रियाएं (Complex Processes) होती हैं। ये सभी प्रक्रियाएं आंशिक रूप से जीन द्वारा नियंत्रित होते हैं। इसी कारण से माइग्रेन सिर्फ दर्द नहीं होता है, बल्कि यह एक कॉम्प्लेक्स दिमागी स्थिति है।"
माइग्रेन के लक्षण
माइग्रेन की समस्या होने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां होती हैं। ऐसे में माइग्रेन होने पर कई लक्षण दिखते हैं, जिनको नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
- दिल की धड़कन के तेज होने
- सिर दर्द के साथ उल्टी और मतली जैसा महसूस होने
- तेज स्मेल या रोशनी में तेज सिर दर्द होने
- कमजोरी होने
- चक्कर आने
- कई बार आंखों में धुंधलापन होने
माइग्रेन का इलाज कैसे किया जाता है?
Dr. Bharath Kumar कहते हैं कि, "माइग्रेन के जेनेटिक पहलू को समझना इलाज के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अगर परिवार में माइग्रेन की हिस्ट्री है, तो व्यक्ति को जल्दी पहचान करने, माइग्रेन के ट्रिगर्स को समझने और इससे बचाव के उपाय बनाने में मदद मिलती है। इससे मरीज को यह समझने में भी मदद मिलती है कि माइग्रेन सिर्फ लाइफस्टाइल की वजह से नहीं, बल्कि एक बायोलॉजिकल (biological) समस्या है।" इन जानकारी से व्यक्ति को मानसिक रूप से भी राहत मिल सकती है।
माइग्रेन की समस्या से राहत के लिए अक्सर डॉक्टर लाइफस्टाइल में बदलाव करने, ट्रिगर्स से बचकर रहने की कोशिश करें, शरीर को हाइड्रेट रखें और डॉक्टर की सलाह के साथ सही दवाइयों के का सेवन किया जा सकता है।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
अगर किसी व्यक्ति को थोड़े-थोड़े समय में तेज सिरदर्द होने, स्ट्रेस होने पर सिरदर्द होने,जी मिचलाने, थकान होने, तेज आवाज और तेज रोशनी के कारण दर्द बढ़ने जैसी समस्याएं महसूस होने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। इसके अलावा, तेज सिरदर्द के साथ स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्या महसूस होने इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
निष्कर्ष
माइग्रेन की समस्या को एक ऐसी बीमारी के रूप में समझा जा सकता है, जिसमें नेचुरल रूप से आनुवंशिक और वंशानुगत दोनों फैक्टर होते हैं, लेकिन यह किसी वंशानुगत कारण के बजाय, जीन और पर्यावरण के फैक्टर्स मिलेजुले असर (multifactorial) से होता है। ऐसे में माइग्रेन की समस्या से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना जरूरी हो जाता है। इसके अलावा, अगर आपको बार-बार सिर में दर्द होने की समस्या बनी रहती है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह जरूर लें, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
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FAQ
माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में क्या अंतर है?
नॉर्मल सिरदर्द स्ट्रेस या थकान से हो सकता है, लेकिन माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना और रोशनी या आवाज से परेशानी होने जैसे लक्षण शामिल होते हैं।माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले मुख्य कारण क्या हैं?
माइग्रेन की समस्या जींस के अलावा, माइग्रेन के मुख्य ट्रिगर्स में मानसिक तनाव, हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी, तेज रोशनी, तेज गंध, डिहाइड्रेशन और कैफीन या अल्कोहल का सेवन शामिल हैं।'फैमिलियल हेमिप्लेजिक माइग्रेन' क्या है?
यह माइग्रेन का एक दुर्लभ (Rare) प्रकार है, जो सीधे तौर पर जींस में होने वाले बदलाव के कारण होता है। इसमें जेनेटिक कारण बहुत स्पष्ट होते हैं और यह परिवार के एक सदस्य से दूसरे में आसानी से जा सकता है।माइग्रेन में क्या नहीं खाना चाहिए?
माइग्रेन की स्थिति में व्यक्ति को कैफीन, प्रोसेस्ड मीट, खट्टे फल, चॉकलेट, अल्कोहल, अधिक नमक और मीठी चीजों से युक्त फूड्स का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके कारण व्यक्ति को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
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Apr 26, 2026 18:28 IST
Modified By : Priyanka Sharma Apr 26, 2026 18:28 IST
Modified By : Priyanka SharmaApr 26, 2026 18:28 IST
Published By : Priyanka Sharma
Reviewed By : Dr Bharath Kumar Surisetti