PCOS, जिसे हम पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) भी कहते हैं। यह एक तरह का कॉमन हार्मोनल डिजीज है, जिससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है। इस बीमारी में महिलाओं में एंड्रोजन या मेल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है और अंडाशय में छोटी-छोटी सिस्ट बन जाती हैं, जिस वजह से वे अपना काम सही तरह से नहीं कर पाती हैं। इसके मुख्य कारणों में हार्मोन में असंतुलन और खराब जीवनशैली शामिल हैं। ऐसे में यह सवाल भी महिलाओं के मन में उठता है कि क्या PCOS की समस्या आनुवंशिक हो सकती है? इस बारे में जानना इसलिए जरूरी है ताकि भविष्य में इसके जोखिम को कम किया जा सके और बचाव के लिए सही कदम उठाए जा सकें।
इस लेख में बताए गए सभी तथ्यों की पुष्टि खुद Mumma's Blessing IVF और वृंदावन स्थित Birthing Paradise की Medical Director and IVF Specialist डॉ. शोभा गुप्ता ने की है।
क्या PCOS आनुवंशिक होता है?
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NHS की मानें, तो PCOS एक आनुवंशिक बीमारी है और प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाली यह सबसे आम हार्मोनल विकारों में से एक है और दुनियाभर में करीब 8-13 फीसदी महिलाएं इससे प्रभावित हैं। इस लेख में PCOS और आनुवंशिक को बेहतर तरीके से समझाया गया है, ‘PCOS एक तरह से पॉलीजेनिक विकार है। इसका मतलब है कि यह किसी एक जीन की खराबी से होने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि कई जीनों और पर्यावरणीय कारकों से मिलकर यह समस्या होती है।" 2019 Dove Medical Press में प्रकाशित एक स्टडी से यह बात भी सामने आयी है कि अगर एक जुड़वां बहन को PCOS है, तो दूसरे को होने की संभावना बहुत अधिक हो जाती है। इस अध्ययन के अनुसार PCOS के जोखिम में लगभग 72 फीसदी हिस्सा आनुवंशिक होता है।
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क्या PCOS सिर्फ माता-पिता से मिलता है?

NHS के अनुसार यह जरूरी नहीं है कि PCOS होने के पीछे सिर्फ और सिर्फ माता-पिता का मेडिकल इतिहास जिम्मेदार हो। ध्यान रखें कि आनुवंशिक समस्या होने के कारण अगर परिवार में यह समस्या पहले से है, तो भावी पीढ़ी में इसके होने का जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन आने वाली पीढ़ी को यह बीमारी हो ही जाए, यह जरूरी नहीं होता है। डॉ. शोभा गुप्ता कहती हैं, "PCOS मल्टीफैक्टोरियल (Multifactorial) स्थिति है। इसे सरल शब्दों में समझते हैं। माता-पिता से मिले कुछ जीन PCOS के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके साथ-साथ जीवनशैली से जुड़े कारक जैसे मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस या खराब खानपान इसे ट्रिगर कर सकते हैं।"
क्या है PCOS की असली वजह: आनुवंशिक बनाम जीवनशैली कारक
| विशेषता (Feature) | आनुवंशिक कारक (Genes/Genetic Factors) | पर्यावरणीय और जीवनशैली कारक (Environmental Factors) |
| प्रमुख कारक | परिवार का इतिहास (मां, बहन या पिता की तरफ से मिलने वाले जीन)। | खराब खान-पान (जंक फूड), शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और नींद की कमी। |
| भूमिका | ये PCOS होने के खतरे को बढ़ाता है। | ये PCOS होने के खतरे को ट्रिगर कर सकता है। |
| क्या इन्हें बदला जा सकता है? | नहीं, DNA या पूर्वजों से मिले जीनों को नहीं बदला जा सकता है। | हां, अपनी आदतों और माहौल को बदलकर इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। |
| शरीर पर प्रभाव | ये तय करते हैं कि आपका शरीर हार्मोन और इंसुलिन के प्रति कितना संवेदनशील होगा। | ये मोटापे, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन की गंभीरता को बढ़ाते हैं। |
| उदाहरण | यदि मां को PCOS था, तो आपको जोखिम वाले जीन विरासत में मिले हैं। | ये मोटापे, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन की गंभीरता को बढ़ाते हैं। |
किस उम्र में PCOS की जांच की जाना चाहिए?
Cleveland Clinic की मानें तो आमतौर पर PCOS एक ऐसी समस्या है, जिसका आसानी से पता नहीं चलता है। अमूमन महिलाएं जब तक कंसीव करने की कोशिश नहीं करती हैं और प्रेग्नेंसी में समस्याएं नहीं आती हैं, तब तक उन्हें PCOS होने की जानकारी नहीं होती है। हालांकि, PCOS होने पर कुछ सामान्य लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे चेहरे पर अनचाहे बाल होना, बिना डाइट में बदलाव किए वजन का बढ़ना, गर्दन के पास की त्वचा का काला होना और अनियमित पीरियड्स होना। अगर किसी भी महिला या किशोर लड़कियों में इस तरह के लक्षण नजर आएं, तो तुरंत उन्हें इसकी जांच करवानी चाहिए। सटीक उम्र की बात करें तो करीब 11 या 12 साल की उम्र के बाद इसके लक्षण नजर आ सकते हैं यानी पीरियड्स होने के बाद से। इसके बाद से ही इसकी जांच पर जोर देना चाहिए।
PCOS की जांच कैसे होती है?
PCOS की जांच के दौरान सबसे पहले डॉक्टर मरीज की मेडिकल इतिहास और लक्षणों के बारे में सवाल करते हैं। उनके सवाल अमूमन अनियमित पीरियड्स, चेहरे पर बाल या मुहांसों से संबंधित होते हैं। इसके बाद, शरीर में एंड्रोजन हार्मोन के स्तर की जांच के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। अंत में, अंडाशय में छोटी गांठों और गर्भाशय की परत की मोटाई देखने के लिए पेल्विक अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है। यदि इन तीन में से कोई भी दो लक्षण मौजूद हों, तो PCOS की पुष्टि की जाती है।
PCOS को ट्रिगर करने वाले कारक
- वजन और डाइटः अगर किसी के परिवार में पहले से ही PCOS की समस्या है, तो उन्हें अपने बढ़ते वजन और डाइट को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए। बढ़ता वजन और खराब डाइट इंसुलिन रेजिस्टेंस को काफी हद तक प्रभावि कर सकता है, जिससे PCOS का जोखिम बढ़ता है।
- जीवनशैली की बुरी आदतेंः World Health Organization के अनुसार जीवनशैली की बुरी आदतें भी PCOS का कारण बन सकती हैं। जानकारी के लिए बता दें कि अगर कोई महिला नियमित रूप से एक्सरसाइज नहीं करती है, तो मेटाबॉलिक जटिलताएं बढ़ सकती है। इसे इस तरह समझें कि शरीर की भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया (मेटाबॉलिज्म) ठीक से काम नहीं करती है।
PCOS का प्रजनन क्षमता पर असर
डॉ. शोभा गुप्ता के अनुसार PCOS का प्रजनन क्षमता पर गहरा असर असर पड़ता है, जैसे-
- ओव्यूलेटरी डिसफंक्शनः PCOS की वजह से महिलाओं में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में अंडाशय में फॉलिकल्स (अंडे की थैलियों) परिपक्व नहीं हो पाते हैं और अंडे ओव्यूलेट नहीं हो पाते हैं। नतीजतन, पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं।
- पॉलीसिस्टिक ओवरीः PCOS के कारण अंडे रिलीज होने के बजाय फॉलिकल्स अंडाशय के अंदर छोटी, तरल पदार्थ से भरी थैलियों के रूप में रह जाते हैं। ऐसे में मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और हॉर्मोन का स्तर भी असंतुलित हो जाता है।”
- इंफर्टिलिटीः PCOS महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इसकी वजह से अंडे बनना पूरी तरह बंद हो सकते हैं, जिससे बांझपन हो सकता है।”
कब जाएं डॉक्टर के पास

हालांकि, यह सच है कि PCOS आनुवंशिक बीमारी है। इसके बावजूद, पर्यावरणीय कारक भी इसके लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। इसलिए यह कहा जा सकता है कि किसी भी महिला को और किसी भी उम्र में यह समस्या हो सकती है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि आखिर डॉक्टर के पास जाने का सही समय क्या है? Mayo Clinic से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं को अपने पीरियड साइकिल पर नजर रखनी चाहिए, जैसे-
- अगर 35 से 40 दिनों तक पीरियड्स नहीं होते हैं।
- अगर एक साल 9 बार से कम पीरियड्स होते हैं।
- चेहरे पर अनचाहे बालों का बढ़ना।
- सिर में बालों का पतला होना।
- बार-बार चेहरे पर एक्ने होना।
- अगर बार-बार मूड स्विंग होता है।
- 6 महीने से ज्यादा बार कोशिश करने के बावजूद कंसीव न करना।
- यहां बताई गई सभी स्थितियां यह तय करती हैं कि आपको डॉक्टर के पास तुरंत जाना चाहिए। ये सभी PCOS के लक्षण हो सकते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहने का मतलब यह है कि PCOS महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित करने वाली कंडीशन है। यह आनुवंशिक समस्या है और कई अन्य कारक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। यह समस्या किसी भी महिला को और किसी भी उम्र में हो सकती है। इसलिए, जरूरी है कि महिलाएं उपरोक्त बताए गए लक्षणों पर गौर करें। इस बात का ध्यान रखें कि हर बार पीरियड्स न होना सिर्फ PCOS का लक्षण नहीं होता है। यह प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाली अन्य बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। इसलिए, समय पर इसकी जांच की जानी जरूरी है।
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FAQ
क्या PCOS अचानक विकसित हो सकता है?
क्लीवलैंड की मानें, तो आमतौर पर PCOS प्यूबर्टी के आसपास विकसित होता है। हालांकि, 20 और 30 साल की उम्र वाली महिलाओं में यह कंडीशन अचानक विकसित हो सकती है। यह बढ़ते वजन, तनाव और हार्मोनल बदलाव के कारण ट्रिगर होता है।क्या PCOS हमेशा आनुवंशिक होता है?
PCOS हमेशा आनुवंशिक हो, यह जरूरी नहीं है। हां, अगर परिवार में PCOS है, तो भावी पीढ़ी में यह समस्या होने का जोखिम बढ़ जाता है।PCOS में जल्दी गर्भवती कैसे हो?
PCOS होने पर कंसीव करने में मुश्किलें आ सकती हैं। अगर कोई महिला PCOS के साथ-साथ कंसीव करने की प्लानिंग कर रही है, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने चाहिए।PCOS के साथ गर्भवती होना किस उम्र में मुश्किल है?
PCOS अपने आप में एक ऐसी समस्या है, जो महिला को कंसीव करने में अड़चनें पैदा कर सकता है। इसके साथ-साथ अगर महिला की उम्र 35 साल से अधिक है, तो उन्हें कंसीव करने में और भी चुनौतियां आ सकती हैं।
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Apr 04, 2026 12:52 IST
Modified By : Meera Tagore Apr 04, 2026 12:52 IST
Modified By : Meera TagoreApr 04, 2026 12:52 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Shobha Gupta