कोरोना वायरस

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    • क्या है कोरोनावायरस-What is Coronavirus? 

      कोरोनावायरस (Coronavirus) एक श्वसन रोग है जो SARS-CoV-2 (Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS) के कारण होता है। इसकी शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी। दरअसल, नवंबर 2019 को चीन के हुबई प्रांत के वुहान शहर में अचानक निमोनिया के कई मामले सामने आने लगे जो कि तेजी से फैल रहते थे। 31 दिसंबर 2019 को विश्व स्वास्थ्य संगठन  ( WHO)ने इसे संज्ञान में आया। पर लगभग एक सप्ताह बाद 7 जनवरी को चीनी अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने एक नए वायरस की पहचान की है जो कि अधिक संक्रामक है और चीन में लोगों को लगातार बीमार बना रहा है। तब इस बीमारी का नाम नोवल कोरोना वायरस (Novel Corona Virus) रखा गया। दरअसल,  कोरोना अंग्रेजी के क्राउन शब्द से बना है। जब कोरोना वायरस की आकृति का अध्ययन किया गया था तो ये गोल क्राउन यानी कि ताज जैसा दिखा जिसमें कि चारों तरफ रेशे लगे हुए थे। इस आकृति के कारण ही इसका नाम कोरोनावायरस पड़ा। कोरोनावायरस सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (Severe Acute Respiratory Syndrome- SARS) ग्रुप की बीमारी है इसलिए इसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे दिखते हैं। हालांकि, समय के साथ इसके लक्षण बदलते गए और फिर इस महामारी के कई नए वेरिएंट्स आए और उनके नए-नए लक्षण नजर आए। 

      कोरोना वायरस की शरुआत कैसे हुई-Where did the virus come from?

      कोरोनावायरस सभी प्रकार के जानवरों में आम हैं, और कभी-कभी वे ऐसे कई रूपों में विकसित हो सकते हैं जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकते हैं। जैसे कि कोरोनावायरस से पहले साल 2002 में SARS CoV के मामले दक्षिण चीन के ग्वांगडोंग प्रांत (Guangdong Province) में पाए गए थे। इस दौरान अधिकतर रोगियों में इन्फ्लूएंज़ा, बुखार, घबराहट, सिरदर्द और दस्त जैसी समस्याएं देखी गई थीं। उसके बाद  2012 में सऊदी अरब में पहली बार MERS (Middle East Respiratory Syndrome) Cov का संक्रमण पाया गया जिसमें कि रोगियों में  बुखार, जुकाम और श्वसन समस्याएं देखी गई हैं। 

      अब बात अगर नोवेल कोरोना वायरस की करें तो, वैज्ञानिकों को लगता है कि यह नया वायरस सबसे पहले दिसंबर की शुरुआत में इंसानों में फैला। मूल रूप से वायरस ने पहले वुहान के सीफूड मार्केट में लोगों को संक्रमित किया और वहीं से फैला। लेकिन 24 जनवरी को प्रकाशित बीमारी के शुरुआती मामलों के एक विश्लेषण में पाया गया कि बीमार होने वाले पहले रोगी का बाजार से कोई संपर्क नहीं था। साथ ही वायरस की उत्पत्ति किस प्रकार के जानवर से हुई यह स्पष्ट नहीं है, हालांकि कुछ विश्लेषण में पाया गया कि नए वायरस का जीनोम सीक्वेंस चमगादड़ (coronavirus found in bats)  में पाए जाने वाले एक कोरोना वायरस से 96 प्रतिशत तक मेल खाता है। SARS और MERS दोनों की उत्पत्ति भी चमगादड़ से ही हुई है।

      कोरोनावायरस मुख्य रूप से एक संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बातचीत करने पर उत्पन्न होने वाली श्वसन बूंदों (Air Droplets) के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।  

      कोरोना वायरस के लक्षण- Symptoms of Coronavirus 

      विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, कोरोनावायरस संक्रमण के लक्षण वायरस के प्रकार पर निर्भर करते हैं पर कुछ लक्षण हर रोगी में दिखे जैसे कि 

      -सांस लेने में दिक्कत

      -बुखार

      -खांसी

      -स्वाद या गंध की हानि

      -नाक बंद हो जाना

      -आंखों का लाल होना (पिंक आई)

      -गले में खराश

      -सिर दर्द

      -मांसपेशियों में या जोड़ों में दर्द

      -विभिन्न प्रकार के त्वचा पर लाल चकत्ते

      -उल्टी और मतली

      -दस्त और  डायरिया

      -कमजोरी

      अधिक गंभीर और दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं जैसे स्ट्रोक, मस्तिष्क की सूजन और तंत्रिका क्षति भी हुई। साथ ही डायबिटीज, दिल की बीमारियों और अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों में इसने कई अन्य गंभीर लक्षण भी दिखाए और लोगों की मत्यु हो गई। 

      कोरोना के वेरिएंट-Types of Covid-19 Variants 

      वायरस आम तौर पर समय के साथ म्यूटेट हो कर रेप्लीकेट होते हैं और इनके नए रूपों को जन्म देते हैं। कोरोना वायरस का फाउंडर वेरिएंट  Wu.Hu.1 था जिसे वुहान वायरस (Wuhan Virus) कहा गया। कुछ महीनों में इसका D614G वेरिएंट सामने उभरकर आया और विश्व स्तर पर प्रसारित हो गया। उसके बाद से अभी तक दुनिया भर में कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट सामने आए हैं। जैसे कि

      1. Alpha Variant(B.1.1.7)

      पहली बार अक्टूबर 2020 में ब्रिटेन (UK) में COVID-19 महामारी के दौरान अल्फा वरेएंट का पता चला जिसे WHO द्वारा अल्फा संस्करण के रूप में लेबल किया गया था। दिसंबर 2020 में जांच की गई। इसके प्रसार की संभावना हर 6.5 दिनों में दोगुनी हो जाती है। ये N501Y के साथ म्यूटेशन से जुड़ा हुआ है। 4 मार्च 2021 को, वैज्ञानिकों ने ओरेगन राज्य में E484K म्यूटेशन के साथ B.1.1.7 की सूचना दी। विश्लेषण किए गए 13 परीक्षण नमूनों में, एक में यह संयोजन था, जो  SARS-CoV-2 की तुलना में  40-80% तक तेजी से फैलता है।

      2. Beta Variant(B.1.351)

      18 दिसंबर 2020 को ये वेरिएंट पहली बार दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था और देश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा रिपोर्ट किया गया था। इसे WHO द्वारा बीटा संस्करण के रूप में लेबल किया गया है। शोधकर्ताओं और अधिकारियों ने बताया कि बिना किसी अंतर्निहित स्वास्थ्य स्थितियों वाले युवा लोगों में इसका प्रसार अधिक था। दक्षिण अफ़्रीकी स्वास्थ्य विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि यह वेरिएंट देश में COVID-19 महामारी की दूसरी लहर चला रहा हो सकता है, क्योंकि ये वेरिएंट वायरस के अन्य पुराने प्रकारों की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है। 

      3. Gamma Variant(P.1)

      गामा वेरिएंट (P.1 वेरिएंट ) जून 2021 में  इंग्लैंड में पहली बार मिला और डब्ल्यूएचओ द्वारा इसे गामा संस्करण के रूप में लेबल किया गया है। नए संस्करण की पहचान पहली बार उन चार लोगों में की गई थी जो 2 जनवरी 2021 को ब्राजील के अमेजोनस राज्य से यात्रा करके टोक्यो पहुंचे थे।  इसमें 17 अद्वितीय अमीनो एसिड परिवर्तन हैं, जिनमें से 10 इसके स्पाइक प्रोटीन में हैं, जिनमें तीन संबंधित म्यूटेशन शामिल हैं: N501Y, E484K और K417T। 

      4. Delta Variant (B.1.617.2)

      डेल्टा  (Delta Variant B.1.617.2) पहले भारत में पाया गया था। यही डेल्टा वेरिएंट भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण बना क्योंकि ये एक RNA वायरस कहा गया।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे तेजी से फैलने वाला और गंभीर रूप से बीमार करने वाला बताया है। डेल्टा वैरिएंट अब डेल्टा प्लस वायरस (Delta Plus Covid Variant) में बदल गया है। वैज्ञानिक और एक्सपर्ट्स इस वायरस को डेल्टा वैरिएंट से अधिक खतरनाक मान रहे हैं। कोरोना का यह डेल्टा प्लस वैरिएंट मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल भी प्रभावी माना जा रहा है। आसान भाषा में कहें तो इस वैरिएंट पर वैक्सीन का प्रभाव खत्म भी हो सकता है। हालांकि यह सभी मामलों में संभव नहीं है।

      5. Omicron Variant (B.1.1.529)

      कोरोना वायरस का B.1.1.529 (ओमिक्रोन) वैरिएंट पहली बार दक्षिण अफ्रीका में रिपोर्ट किया गया था। 25 नवंबर 2021 को ओमिक्रोन वैरिएंट के बारे में जानकारी देते हुए WHO ने इसे 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' घोषित किया था। कोविड का ये वैरिएंट अन्य वैरिएंट्स की तुलना में ज्यादा संक्रामक पाया गया है। इसका कारण यह है कि पहली बार पता चलने के सप्ताह भर बाद ही दुनिया के लगभग 30 देशों में इस वैरिएंट के मामले रिपोर्ट किए गए। हालांकि ये वैरिएंट कितना खतरनाक है या इसके लक्षण दूसरे वैरिएंट्स से कितने अलग हैं, इस बारे में अभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। भारत में ओमिक्रोन वैरिएंट का पहला मामला कर्नाटक राज्य में मिला था। इसके बाद महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और दिल्ली में भी इसके मामले पाए गए।

      इसके अलावा कुछ अन्य वेरिएंट्स और आए हैं जैसे कि 

      -एटा (Eta Variant B.1.525):  जो कि फ्रांस और अन्य 23 देशों में देखा गया। 

      -आयोटा (Iota Variant B.1.526): ये  न्यूयॉर्क में और अमेरिका में अप्रैल 2021 के महीने में देखा गया है।

      -कप्पा  (Kappa B.1.617.1): ये भारत में दिसंबर 2020 में आया और फिर मार्च 2021 में भी इसके कुछ मामले देखे गए।

      - लैम्ब्डा (Lambda Variant C.37): ये पहली बार अगस्त 2020 में पेरू में पाया गया था और WHO द्वारा 14 जून 2021 को कोविड-19 के एक और वेरिएंट के रूप में नामित किया गया है।

      कोरोनावायरस की जांच-Test for Covid-19

      1. कोविड-19 एंटीजेन टेस्ट 

      रैपिड एंटिजन  तब किया जाता है जब  मरीज का वायरल लोड बहुत ज्यादा है। रैपिड एंटिजन में देखा गया है कि अगर 100 लोगों को कोविड है तो ये 20 से 30 फीसद में ही ये कोविड को पकड़ पाता है। अब आइसीएमआर ने घर पर भी एंटीजन जांच की मंजूरी दे दी है। हालांकि अब तो एंटीजन किट (Antigen Kit) को मंजूरी मिल गई है। इस किट की मदद से बिना लैब और मशीन के 99.3 से 100 पर्सेंट तक सही कोरोना जांच हो जती है। 

      2. आरटीपीसीआर टेस्ट

      अभी तक कोरोना का सबसे प्रभावी टेस्ट आरटीपीसीआर (RTPCR) माना गया है। जिसमें मुंह और नाक से सैंपल लिया जाता है। जिससे कोरोना की जांच की जाती है। इस टेस्ट की सेंसटिविटी 70 से 80 फीसद होती है।

      3. TrueNat और CB-NAAT टेस्ट

      ट्रूनेट टेस्ट की कोरोना की जांच करत है। इसमें  50 से 60 फीसद में कोरोना के सही परिणाम आते हैं। हालांकि ये टेस्ट टीबी की जांच के लिए होती हैं। जिसका इस्तेमाल अभी कोविड में हो रहा है। लेकिन इनकी क्षमता बहुत कम होती है। यह 45 मिनट में रिपोर्ट दे सकती हैं। लेकिन क्षमता कम होने की वजह से इसका इस्तेमाल केवल इमरजेंसी में होती है।

      4. एचआरसीटी स्कैन

      कोरोना के जिन मरीजों में रैपिडि एंटीजन, ट्रूनेट और आरटीपीसीर से परिणाम सही नहीं आते हैं उनका एचआरसीटी टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट से 91 फीसद परिणाम सही आते हैं।

      कोरोना वैक्सीन- Covid-19 Vaccine

      वैक्सीन के प्रकारों जा जानने के लिए ये समझना जरूरी है कि COVID-19 टीके कैसे काम करते हैं। जैसे कि शरीर कोरोना संक्रमण से लड़ता है और तब कोरोना के टीके शरीर में संक्रमण के खिलाफ एक इम्यूनिटी पैदा करता है और संक्रमण को होने से रोकता। अगर आपको संक्रमण हो भी जाए तो ये इसकी गंभीरता को रोकता है।  विभिन्न प्रकार के COVID-19 टीके भी देखें जो वर्तमान में उपलब्ध हैं या  बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षणों से गुजर रहे हैं।

      1. वायरल वैक्टर वैक्सीन

      -AstraZeneca/University of Oxford (UK)

      - Covishield made by the Serum Institute of India

      - Sputnik V (Russia)

      2. RNA वैक्सीन

      -BioNTech and Pfizer’s 

      -Moderna (USA)

      -JOHNSON &JOHNSON (USA)

      3. इनएक्टिवेडेट वैक्सीन

      -Bharat Biotech Covaxin  (India)

      -Sinovac (China)

      4. DNA वैक्सीन

      -Zydus Cadkila (India)

      कोरोना से बचाव के उपाय-Prevention Tips for Covid-19

      -जल्द से जल्द COVID-19 का टीका लगवाएं। 

      -आपको पूरी तरह से टीका नहीं लगाया गया है और 2 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, तो आपको इनडोर और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना चाहिए।

      -घर से बाहर निकलते ही मास्क पहनें। 

      -जिन लोगों को कोई बीमारी है या वे दवाएं ले रहे हैं तो सबसे पहले टीका लगावाएं और फिर अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाएं।

      -बीमार होने पर घर के अंदर मास्क पहनें।

      -सार्वजनिक परिवहन और घर के बाहर कहीं भी रहने पर मास्क जरूर लगाएं। 

      -दूसरों से 6 फीट दूर रहें।

      -अपने घर के अंदर बीमार लोगों के साथ निकट संपर्क से बचें।

      -हो सके तो बीमार व्यक्ति और घर के अन्य सदस्यों के बीच 6 फीट की दूरी बनाए रखें।

      -भीड़ और खराब हवादार जगहों से बचें।

      -रेस्तरां, बार, फिटनेस सेंटर या मूवी थिएटर जैसी भीड़ में रहने से आपको COVID-19 के लिए अधिक जोखिम होता है।

      - घर के अंदर हों, तो संभव हो तो खिड़कियां और दरवाजे खोलकर ताजी हवा लाएं।

      -बार-बार हाथ धोएं

      -अपने हाथों को अक्सर साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं, खासकर जब आप सार्वजनिक स्थान पर हों, या अपनी नाक बहने, खांसने या छींकने के बाद।

      -खाना खाने या तैयार करने से पहले हाथ धोएं

      अपना चेहरा छूने से पहले हाथ धोएं

      -शौचालय का उपयोग करने के बाद हाथ धोएं

      -सार्वजनिक स्थान छोड़ने के बाद हाथ धोएं

      -नाक बहने, खांसने या छींकने के बाद हाथ धोएं

      -मास्क ठीक करने के बाद हाथ धोएं

      -डायपर बदलने के बाद हाथ धोएं

      -किसी बीमार की देखभाल करने के बाद हाथ धोएं

      -जानवरों या पालतू जानवरों को छूने के बाद हाथ धोएं

      -खुले में खांसी और छींक ना करें।

      -अगर आपने मास्क नहीं पहना है खांसते या छींकते समय हमेशा अपने मुंह और नाक को टीशूज से ढकें या अपनी कोहनी के अंदर छीकेंय़

      -इस्तेमाल किए गए टिश्यू को कूड़ेदान में फेंक दें।

      -हाई टच सतहों को रोजाना साफ करें। इसमें टेबल, डोरनॉब्स, लाइट स्विच, काउंटरटॉप्स, हैंडल, डेस्क, फोन, कीबोर्ड, शौचालय, नल और सिंक शामिल हैं।

      -बाहर से आई किसी भी चीज को धो कर या धूप में सूखा कर ही घर में लाएं।

      -अगर कोई बीमार है या COVID-19 पॉजिटिव है, तो बार-बार छुई जाने वाली सतहों को सैनिटाइज करें।  

      इसके अलावा कोरोना से बचाव के लिए हेल्दी डाइट, इम्यूनिटी बूस्टर फूड्स, हर्ब्स और मसाले सहित एक्सरसाइज और योग का खास ख्याल रखें। इसके अलावा अगर आपको कोरोना के कोई भी लक्षण शरीर में नजर आते हैं तो तुरंत जांच करवाएं। 14 दिनों तक क्वारंटाइन रहें। गंभीर लक्षण हो तो अस्तपताल में भर्ती में हो जाएं और तब अपना इलाज करवाएं। साथ ही डायबिटीज और दिल की बीमारियों से पीड़ित लोग अतिरिक्त सावधानी बरतें। अभी तक बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है इसलिए उनकी खास देखभाल करें। साथ ही कोरोनावायरस से बचाव वाली आदतों का सख्ती से पालन करें। 

      कोरोनावायरस के ताजा आंकड़े-Coronavirus latest updates

      Worldometer द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक इस कोरोना वायरस ने 266,140,077 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि इस वायरस से मौत का आंकड़ा 5,271,350 तक पहुंच गया है। इसी बीच  से 239,777,776 ज्यादा लोगों को इस वायरस से रिकवर भी किया जा चुका है। 

      भारत में कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट के मामले सामने आने से एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों में चिंता की लहर है। कर्नाटक में सामने आए पहले 2 ओमिक्रोन वैरिएंट के मामलों के बाद अब तक दिल्ली में 1, राजस्थान में 9, गुजरात में 1 और महाराष्ट्र में 8 यानी कुल 21 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं कई राज्यों में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी है। कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट को कुछ विशेषज्ञ भारत में कोरोना की तीसरी लहर का संभावित कारण मान रहे हैं, लेकिन ये वैरिएंट कितना खतरनाक है, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार कोरोना का ओमिक्रोन वैरिएंट पहले के वैरिएंट्स के मुकाबले 5 गुना ज्यादा संक्रामक है। अभी इस नए वैरिएंट को लेकर कई तरह की जानकारियां सामने आनी हैं, लेकिन इसी बीच इंटरनेट पर इस वायरस से संबंधित तमाम अफवाहें तैर रही हैं, जो आपके पास भी पहुंच रही होंगी। इन अफवाहों पर ध्यान न दें। किसी भी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण दिखने पर या इस वायरस से जुड़ी जानकारियों के लिए आप 011-23978046 पर कॉल कर सकते हैं। ये हेल्प लाइन नंबर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया है। कोरोना वायरस से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए नीचे विस्तृत आर्टिकल्स पढ़ें।

      Source: WHO, CDC and MoHFW