हेल्दी और रेगुलर पीरियड्स के लिए महिलाएं रोजाना करें ये 4 योगासन, सेहत को मिलेंगे कई फायदे

Yoga Poses for Regular Periods :  आजकल महिलाएं अपने अनियमित पीरियड्स से परेशान रहती हैं, ऐसे में कुछ राेजाना मददगार हाे सकते हैं।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jul 13, 2021Updated at: Jul 13, 2021
हेल्दी और रेगुलर पीरियड्स के लिए महिलाएं रोजाना करें ये 4 योगासन, सेहत को मिलेंगे कई फायदे

क्या आप भी अनियमित पीरियड्स की समस्या से परेशान हैं? महिलाओं में पीरियड्स या मासिक धर्म एक सामान्य प्रक्रिया है। यह 21-38 दिनाें के भीतर महिलाओं काे कभी भी हाे सकता है। लेकिन आजकल की खराब लाइफस्टाइल और खान-पान की वजह से ज्यादातर महिलाएं मासिक धर्म के अनियमित चक्र से परेशान रहती हैं। अनियमित पीरियड्स कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए इसे रेगुलर करना बहुत जरूरी हाेता है। ऐसे में आप चाहें ताे कुछ याेगासनाें की मदद से मासिक धर्म चक्र काे रेगुलर और हेल्दी बना सकती हैं। याेगा एक्सपर्ट रमेश कुमार से जानें नियमित पीरियड्स के लिए कौन-कौन से याेगासन बेस्ट हैं (Yoga Poses for Regular Periods)।    

Dhanurasana for Regular Periods

1. धनुरासन (Dhanurasana for Regular Periods)

राेजाना धनुरासन करने से अनियमित पीरियड्स की समस्या से निजात मिल सकता है। यह आसन पेट के बल किए जाने वाले आसनाें में सबसे महत्वपूर्ण आसन है। इस आसन में व्यक्ति का शरीर धनुष की तरह नजर आता है। इसे Bow Pose के नाम से भी जाना जाता है। धनुरासन माेटापा, डायबिटीज और थायरॉइड काे कंट्राेल में रखने में मदद करता है।  इसके साथ ही इससे कब्ज या Constipation की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। धनुरासन पीरियड्स में हाेने वाले सिरदर्द से भी राहत दिलाता है। शुरुआत में किसी एक्सपर्ट की सलाह पर ही इस याेगासन काे करें।

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  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले याेगा मैट पर पेट के बल लेट जाएं।
  • सांस छाेड़ते हुए अपने दाेनाें घुटनाें काे माेड़ें। 
  • दाेनाें हाथाें से टखनाें काे पकड़ें।
  • अब सांस लेते हुए अपने सिर, छाती और जांघ काे धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। आप चाहें ताे अपने शरीर काे अपनी फ्लैक्सिबिलिटी के हिसाब से ऊपर उठा सकती हैं।
  • इस अवस्था में आपके शरीर का आकार धनुष की तरह नजर आएगा।
  • इस स्थिति में आप धीरे-धीरे सांस लें और छाेड़ें।
  • सामान्य अवस्था में आने के लिए लंबी गहरी सांस छाेड़ें। इससे आपका एक चक्र पूरा हाे जाएगा।
  • इसी तरह आप 3-5 चक्र पूरा कर सकती हैं। इसके राेजाना अभ्यास से आपके पीरियड्स धीरे-धीरे रेगुलर हाेने लगेंगे।
Malasana for Regular Periods

2. मालासन (Malasana for Regular Periods)

अनियमित पीरियड्स की समस्या काे दूर करने के लिए आप मालासन कर सकते हैं। इस आसन काे नियमित रूप से करने पर आपके पीरियड्स रेगुलर हाे सकते हैं। मालासन दाे शब्द मल+आसन से मिलकर बना है, इसका मतलब है मल निकालने की अवस्था में बैठना। इस आसन काे करने से कब्ज और गैस की समस्या दूर हाेती है। साथ ही यह पेट और पीठ की मांसपेशियाें काे भी मजबूत बनाने में मदद करता है। इस आसन के अभ्यास से कंधे और पैर भी मजबूत बनते हैं।

  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले याेगा मैट बिछा लें।
  • इस मैट पर घुटनाें काे माेड़कर मल त्याग की अवस्था में बैठ जाएं।
  • इसके बाद दाएं हाथ की कांख काे दाएं और बाएं हाथ की कांख काे बाएं घुटने पर रखें। 
  • दाेनाें हाथाें काे नमस्कार की मुद्रा में मिला लें।
  • अब इस अवस्था में कुछ देर रुकने के बाद आप सामान्य अवस्था में आ सकती हैं।
  • इस प्रक्रिया काे 3-5 बार दाेहरा सकती हैं।
Matsyasana for Regular Periods

3. मत्स्यासन (Matsyasana for Regular Periods)

मत्स्यासन (Matsyasana) संस्कृत शब्द मत्स्य से निकला है। इसका अर्थ मछली है। इस आसन में आपके शरीर का आकार मछली के जैसा प्रतीत हाेता है। इस आसन काे Fish Pose के नाम से जाना जाता है। अनियमित पीरियड्स की समस्या काे दूर करने के लिए आप इस आसन काे नियमित रूप से कर सकते हैं। इसके अलावा यह वजन कम करने और थायरॉइड की समस्या काे दूर करने में भी लाभकारी हाेता है। इस आसन काे करने से कमर दर्द से भी राहत मिलती है। 

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  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले याेगा मैट पर पद्मासन की अवस्था में बैठ जाएं।
  • अब धीरे-धीरे पीछे की तरफ झुकें। पीठ के बल लेट जाएं।
  • इसके बाद अपने बाएं पैर काे दाएं हाथ से पकड़ें और दाएं पैर काे बाएं हाथ से पकड़ें।
  • काेहनियाें काे जमीन पर टिका दें। 
  • इस अवस्था में घुटने जमीन पर हाेने चाहिए।
  • इस स्थिति में लंबी गहरी सांस लें और छाेड़ें।
  • अपनी क्षमतानुसार इस अवस्था में रहें और इसके बाद प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।
  • आप इस याेगासन काे 3-5 बार दाेहरा सकते हैं।
Ustrasana for Regular Periods

4. उष्ट्रासन (Ustrasana for Regular Periods)

अगर आप अनियमित पीरियड्स की समस्या से परेशान हैं, ताे आप राेजाना उष्ट्रासन कर सकते हैं। उष्ट्रासन दाे शब्द उष्ट्र और आसन से मिलकर बना है। इसमें उष्ट्र का अर्थ ऊंट और आसन का अर्थ मुद्रा है। इस आसन में शरीर का आकार ऊंट के समान प्रतीत हाेता है। इसके नियमित अभ्यास से वजन कम हाेता है। साथ ही इसके अभ्यास से महिलाओं के स्वास्थ्य काे भी कई फायदे मिलते हैं। 

  • इस आसन काे करने के लिए सबसे पहले याेगा मैट पर वज्रासन यानी घुटनाें के बल बैठ जाएं।
  • इस दौरान अपने जांघाें और पैराें काे पास-पास रखें।
  • घुटनाें और पैराें के बीच थाेड़ी दूरी बनाकर रखें।
  • अब घुटनाें पर खड़ी हाे जाएं।
  • लंबी गहरी सांस लेते हुए पीछे की तरफ झुकें। पीछे की तरफ झुकते समय अपनी गर्दन पर झटका न लगने दें।
  • अपनी दाईं हथेली काे दाईं एड़ी और बाईं हथेली काे बाईं एड़ी पर रखें।
  • अपने शरीर का वजन बांहाें और पांवाें पर बराबर रखें।
  • कुछ देर इस अवस्था में रहने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं। 
  • आप इस प्रक्रिया काे 3-5 बार दाेहरा सकते हैं।

अगर आप भी अपने अनियमित पीरियड्स की समस्या से परेशान हैं, ताे राेजाना इन याेगासनाें काे कर सकते हैं। शुरुआत में आप इन याेगासनाें काे किसी एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें। अगर आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं, ताे इन याेगासनाें काे करने से बचें। शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द या चाेट लगने पर आपकाे याेगासन करने से बचना चाहिए। साथ ही अगर आपका हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, ताे भी आपकाे ये याेगासन नहीं करने चाहिए। गर्भावस्था में एक्सपर्ट की सलाह पर ही इन याेगासनाें काे करें।   

धनुरासन, मालासन, मत्स्यासन और उष्ट्रासन अनियमित पीरियड्स की समस्या काे दूर करने में काफी लाभदायक हाेते हैं। आप अपनी इस समस्या काे दूर करने और पीरियड्स काे हेल्दी बनाने के लिए इन याेगासनाें काे नियमित रूप से कर सकती हैं। यह न सिर्फ आपके पीरियड्स काे निमयित करते हैं, बल्कि इससे आपके स्वास्थ्य काे भी कई लाभ मिलते हैं।

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