हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे वाले हिस्से) को मजबूत बनाने के लिए रोजाना करें ये 4 योगासन

Hamstrings : हैमस्ट्रिंग की मसल्स को मजबूत बनाने के लिए योग या व्यायाम करना बेहद जरूरी होता। चलिए जानते हैं इसके लिए कुछ बेहतरीन योगासन 

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jul 12, 2021Updated at: Jul 12, 2021
हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे वाले हिस्से) को मजबूत बनाने के लिए रोजाना करें ये 4 योगासन

क्या आप अपने हैमस्ट्रिंग को मजबूत या स्ट्रॉन्ग बनाना चाहते हैं? जांघ के पिछले हिस्से में मौजूद मांसपेशियों को हैमस्ट्रिंग कहा जाता है। यह घुटने और हिप के बीच में होती है। घुटनों के साथ ही हैमस्ट्रिंग को भी मजबूत बनाना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए आप योगासनों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। कुछ ऐेसे योगासन हैं, जिनके नियमित अभ्यास से हैमस्ट्रिंग मजबूत बनती है और उसमें खिंचाव या दर्द की समस्या दूर होती है।

हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाएं ये योगासन (yoga Asanas to Strong hamstrings)

hastpadasana for hamstrings

1. हस्तपादासन (Hastapadasana)

हस्तपादासन आगे की तरफ झुककर किए जाने वाले आसनों में से एक बेहतरीन आसन है। नियमित रूप से इस आसन के अभ्यास से हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाया जा सकता है। इसके अभ्यास से हिप्स, हैमस्ट्रिंग और काव्स पर खिंचाव आता है। साथ ही पैरों और हाथों की मांसपेशियां भी मजबूत बनती हैं। इसके अलावा हस्तपादासन पैट की चर्बी को कम करने में भी मददगार होता है। 

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं।
  • अपने दोनों पैरों की एड़ियों और पंजों को आपस में मिलाकर रखें। इस दौरान हाथों को ढीला छोड़ दें।
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस लें। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कमर से ऊपर के भाग को आगे की तरफ झुकें। इस स्थिति में आपको घुटने और पैर एकदम सीधे होने चाहिए।
  • अब शरीर को नीचे झुकाते हुए अपने दोनों हाथों से दोनों पैरों की एड़ियों को पकड़ें।
  • सिर को दोनों घुटनों के बीच में रखें।
  • इस अवस्था में आप 10-30 सेकेंड तक रुक सकते हैं। 
  • आखिरी में सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।

इस आसन को शुरुआत में करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इसलिए आप पहले से धीरे-धीरे ही करें। अगर एड़ियों तक हाथ न पहुंच तो पैरों को पकड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसके नियमित अभ्यास से आप इसे आसानी से कर सकते हैं। 

Janusirsasana

2. अधोमुख श्वानासन (Adho Mukha Svanasana)

अधोमुख श्वानासन 3 शब्दों से मिलकर बना है- अधो, मुख और श्वान। इसमें अधो का अर्थ है नीचे की ओर जाना, मुख का अर्थ है मुंह और श्वान का अर्थ कुत्ता होता है। इसके नियमित अभ्यास से पैरों को मजबूती प्रदान की जा सकती है। अधोमुख श्वानासन हैमस्ट्रिंग में भी खिंचाव पैदा करके उसे मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा अधोमुख श्वानासन कंधों और बाजुओं को भी मजबूत बनाता है। बॉडी को टोन करने के लिए यह एक अच्छा योगासन है।

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक योग मैट बिछा लें।
  • इस पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब लंबी गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएं।
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ें और जमीन की तरफ झुकें।
  • अपनी हथेलियों और तलवों को जमीन पर रखें।
  • इस दौरान आपके हाथ और घुटने एकदम सीधे होने चाहिए।
  • इस स्थिति में हाथों, कमर और पैरों पर खिंचाव महसूस करें।

हाथों, पैरों या कमर में दर्द होने पर इस आसन को न करें। इसके साथ ही डायरिया की समस्या होने पर भी आपको इस आसन को करने से बचना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को अधोमुख श्वानासन नहीं करना चाहिए।

Tittibhasana

3. टिट्टिभासन (Tittibhasana)

टिट्टिभासन को Firefly Pose के नाम से भी जाना जाता है इसके नियमित अभ्यास से हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाया जा सकता है। यह मन और दिमाग को भी शांत करने में मदद करता है। टिट्टीभासन पेट को टोन्ड करने में सहायक होता है। यह पाचक क्रिया या डाइजेशन में भी सुधार करता है।

  • टिट्टिभासन करने के लिए सबसे पहले एक योगा मैट बिछा लें। अब इस मैट पर एकदम सीधे खड़े हो जाएं।
  • अब थोड़ा झुकें और अपने दोनों हाथों को पैरों के बीच से पीछे ले जाएं। 
  • अपने पैरों को एकदम सीधा रखें। 
  • इसके बाद अपने हथेलियों को जमीन पर रखें। हथेलियों पर जोर देते हुए पैरों सहित अपने पूरे शरीर को ऊपर ऊठाएं।
  • इस अवस्था में 10-20 सेकेंड रुकने के बाद आप सामान्य अवस्था में आ सकते हैं।
  • इस प्रक्रिया को आप 3-5 बार दोहरा सकते हैं।
  • इस आसन को करते हुए आप सांस लें और छोड़ें।

हाथ, कलाई, हथेलियों में दर्द होने पर आपको इस आसन को करने से बचना चाहिए। इसके साथ हाथ या कंधे पर चोट लगने पर भी इस आसन को करने से बचें। इस आसन में पूरे शरीर का भार हथेलियों पर होता है, ऐसे में आपको इसे सावधानीपूर्वक करना जरूरी होता है।

Janusirsasana

4. जानु शीर्षासन (Janusirsasana)

जानु शीर्षासन दो शब्दों से मिलकर बना है- पहला जानु और दूसरी शीर्ष। इसमें जानु का अर्थ घुटना और शीर्ष का अर्थ सिर होता है। इसमें सिर को घुटने पर रखना होता है। यह बैठकर किया जाने वाला एक योगाभ्यास है। इस योगासन को करने से पहले आप सूक्ष्म व्यायाम कर सकते हैं, इससे मसल्स आगे के लिए तैयार हो जाते हैं। जानु शीर्षासन करने से पैरों को मजबूती मिलती है। यह हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाने के लिए एक बेहतरीन योगासन है।

  • इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले एक योग मैट बिछा लें।
  • इस पर दोनों पैरों को सीधा करके बैठ जाएं।
  • दोनों हाथों को भी जमीन पर सीधा करके रखें। इस अवस्था में आपकी रीढ़ की हड्डी एकदम सीधी होनी चाहिए।
  • अब अपने पैरों की उंगुलियों को अपनी तरफ खीचें। 
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस लें। फिर दाएं पैर को मोड़कर बाएं पैर की जांघ पर रखें।
  • इसके बाद कमर से अपने शरीर को आगे की तरफ झुकाएं।
  • अपने दोनों हाथों से बाएं पैर के तलवे को पकड़ें।
  • अपने सिर को बाएं घुटने पर रखने की कोशिश करें।
  • इस अवस्था में कुछ देर रुकने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • इसके बाद आप ऐसा ही दाएं पैर से करें।
  • इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराया जा सकता है।
  • अगर आपके कमर या पैरों में दर्द हो, तो इस आसन को करने से बचें।

साइटिका की समस्या होने पर भी इसे नहीं करना चाहिए। घुटनों में दर्द, डायरिया की समस्या होने पर आपको इसे नहीं करना चाहिए।

आप भी अपने हैमस्ट्रिंग को मजबूत बनाने के लिए इन योगासनों को नियमित रूप से अभ्यास कर सकते हैं। शुरुआत में इस योगासनों को किसी एक्सपर्ट की सलाह और देखरेख में ही करें। अगर आपको कमर में दर्द की समस्या रहती है, इन योगासनों को करने से बचें। इसके अलावा अगर आपका हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, तो भी इन योगासनों को आपको नहीं करना चाहिए।

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