Sun Oct 18, 2026 | 03:31 AM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

क्या आयुर्वेदिक काढ़ा रोज पीना सुरक्षित है? जानें सही तरीका

आजकल बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती बीमारियों के बीच लोग अपनी इम्यूनिटी और पाचन को मजबूत करने के लिए आयुर्वेदिक काढ़े का सहारा लेने लगे हैं। यहां जानिए, क्या आयुर्वेदिक काढ़ा रोज पीना सुरक्षित है?
क्या आयुर्वेदिक काढ़ा रोज पीना सुरक्षित है? जानें सही तरीकाक्या आयुर्वेदिक काढ़ा रोज पीना सुरक्षित है? जानें सही तरीका

Is It Safe To Drink Ayurvedic Kadha Daily: आजकल सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ी है और इसी के साथ आयुर्वेदिक काढ़े का चलन भी तेजी से बढ़ा है। सुबह उठते ही काढ़ा पीना अब कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कोई इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय-तुलसी का काढ़ा पी रहा है, तो कोई वजन कंट्रोल और शुगर के डर से करेला या नीम का काढ़ा अपनाए हुए है। सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप फॉरवर्ड तक, हर जगह काढ़े को हर समस्या का आसान और सुरक्षित समाधान बताया जा रहा है लेकिन सवाल यह है कि क्या हर आयुर्वेदिक काढ़ा रोजाना पीना वाकई सुरक्षित है? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, सिरसा के रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से बात की-

क्या आयुर्वेदिक काढ़ा रोज पीना सुरक्षित है? - Is it safe to drink ayurvedic kadha daily

आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि सही सामग्री से बना काढ़ा रोज पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन गलत जड़ी-बूटियों या अत्यधिक कड़वी चीजों से बना काढ़ा लंबे समय तक लेने पर नुकसान भी कर सकता है। डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार लोग अक्सर यह मान लेते हैं कि अगर कोई चीज आयुर्वेदिक है, तो उसे रोज और लंबे समय तक लिया जा सकता है। जबकि आयुर्वेद में साफ बताया गया है कि कुछ काढ़े कम समय के लिए ही लेने चाहिए। खासकर बहुत कड़वे स्वाद वाले काढ़े शरीर में धातुक्षय यानी शरीर के पोषक तत्वों की कमी कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: पेट की गड़बड़ी को कहना है बाय‑बाय? अमरुद के पत्तों का इन 3 तरीकों से करें इस्तेमाल

कड़वे काढ़े कर सकते हैं धातुक्षय

अगर कोई व्यक्ति रोजाना करेला, नीम, गुड़मार जैसे कड़वे तत्वों से बना काढ़ा पी रहा है, तो यह शरीर की धातुओं को कमजोर कर सकता है। इसी तरह रोज काली मिर्च की अधिक मात्रा से बना काढ़ा पीना भी उचित नहीं माना जाता। आयुर्वेद में ऐसे काढ़ों को रोग विशेष में और सीमित अवधि के लिए ही लेने की सलाह दी गई है। लंबे समय तक सेवन करने से कमजोरी, थकान और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

रसायन काढ़े रोज पीने में सुरक्षित

आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि तुलसी, मुलेठी, अश्वगंधा, त्रिफला और गिलोय जैसी जड़ी-बूटियों को रसायन माना जाता है। इनसे बना काढ़ा रोजाना पीना आमतौर पर सुरक्षित होता है। ये जड़ी-बूटियां शरीर को पोषण देती हैं, इम्यूनिटी बढ़ाती हैं और धातुओं को मजबूत बनाती हैं। सही मात्रा में लिया गया रसायन काढ़ा लंबे समय तक भी नुकसान नहीं करता।

इसे भी पढ़ें: प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए सर्दियों में पिएं हल्दी, तुलसी और अदरक का काढ़ा

is it safe to drink ayurvedic kadhais it safe to drink ayurvedic kadha

सावधानियां

जिन लोगों को बहुत ज्यादा कमजोरी, लो बीपी, एनीमिया या किसी तरह की क्रॉनिक बीमारी है, उन्हें रोज काढ़ा पीने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी बिना परामर्श के काढ़ा न लें। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति पहले से दवाइयां ले रहा है, तो काढ़ा उनके असर को प्रभावित कर सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेदिक काढ़ा रोज पीना तभी सुरक्षित है, जब उसमें सही जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया हो। रसायन गुण वाले काढ़े जैसे तुलसी, गिलोय, त्रिफला और अश्वगंधा को रोजाना लिया जा सकता है, जबकि कड़वे और धातुक्षय करने वाले काढ़े सीमित समय और डॉक्टर की सलाह से ही लेने चाहिए। सही जानकारी और परामर्श के साथ लिया गया काढ़ा ही सेहत के लिए वास्तव में लाभकारी साबित होता है।

All Images Credit- Freepik

FAQ

  • काढ़ा पीने का सही समय क्या है?

    आमतौर पर काढ़ा सुबह खाली पेट या डॉक्टर की सलाह अनुसार गुनगुना पीना बेहतर माना जाता है।
  • सर्दी में कौन सा काढ़ा पीना चाहिए?

    सर्दी में तुलसी, गिलोय, त्रिफला, मुलेठी और अश्वगंधा का काढ़ा रोजाना पिया जा सकता है।
  • गिलोय काढ़ा कितने दिन पीना चाहिए?

    गिलोय का काढ़ा सेहत के लिए लाभकारी होता है और इसका सेवन व्यक्ति को अपनी जरूरत के अनुसार करना चाहिए।

Read Next

→ सफेद दाग में कौन-सा काढ़ा सबसे असरदार होता है? जानें आयुर्वेदाचार्य से

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Dec 23, 2025 11:21 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Dec 23, 2025 11:21 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Dec 23, 2025 11:21 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma