World Heart Day 2021: बार-बार हो जा रहे हैं बेहोश तो न करें अनदेखा, हो सकता है दिल की सेहत के लिए खतरा

बार-बार बेहोश होना दिल से जुड़ी बीमारी कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप का लक्षण हो सकता है, जानें इसके कारण, बचाव और इलाज के बारे में।

 
Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Sep 20, 2021
World Heart Day 2021: बार-बार हो जा रहे हैं बेहोश तो न करें अनदेखा, हो सकता है दिल की सेहत के लिए खतरा

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए शरीर के हर एक अंग का स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। दिल हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो बिना रुके हुए लगातार काम करता है। दिल की सेहत का ध्यान रखने से आप लंबी उम्र तक खुद को हेल्दी बनाये रख सकते हैं। दिल की सेहत के प्रति लोगों को जागरूक करने और हार्ट हेल्थ यानी दिल की सेहत को बढ़ावा देने के लिए दुनियाभर में 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे यानी विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। आज के समय में असंतुलित खानपान और जीवनशैली की वजह से लाखों लोग दिल से जुड़ी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। यही नहीं अब कम उम्र वाले या युवा लोगों में दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। दिल की बीमारियों के तमाम लक्षण होते हैं लेकिन अगर आपको बार-बार चक्कर आने या बेहोश हो जाने की समस्या है तो यह भी दिल से जुड़ी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है। बार-बार बेहोश होने की समस्या को चिकित्सीय भाषा में ‘सिनकोप’ कहा जाता है और अगर यह समस्या में दिल की सेहत से जुड़ी है तो इसे ‘कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप (Cardiovascular Syncope)’ कहते हैं। बेशोशी के कई कारण हो सकते हैं लेकिन ब्लड प्रेशर में बदलाव की वजह से भी यह समस्या हो सकती है। आइये गोंडा स्थित जिला अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ आर के यादव से जानते हैं कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप के बारे में।

कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप क्या है? (What is Cardiovascular Syncope?)

बेहोशी की समस्या आमतौर पर मस्तिष्क में खून की सही ढंग से आपूर्ति न हो पाने की स्थिति में होती है। जिसकी वजह से इंसान अचानक से बेहोश हो सकता है या कुछ देर बार सामान्य अवस्था में आ सकता है। मस्तिष्क में खून के प्रवाह में कमी आने की वजह से यह समस्या अक्सर लोगों में देखी जाती है। इस समस्या को कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप भी कहा जाता है। यह अक्सर तब होता है जब मरीज के शरीर में ब्लड प्रेशर लेवल बहुत लो हो जाता है। स्ट्रोक, मिर्गी आदि समस्या की वजह से भी ये समस्या मरीजों में हो सकती है। इस तरह की बेहोशी आमतौर पर होने वाली बेहोशी से अलग होती है। अगर किसी भी व्यक्ति को यह समस्या बार-बार होती है तो उसे एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह के बाद इलाज जरूर कराना चाहिए। 

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कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप के कारण (What Causes Cardiovascular Syncope?)

कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप की समस्या दिल की धड़कन और हाइपोटेंशन की वजह से ज्यादातर लोगों में देखी जाती है। इस प्रकार की बेहोशी की समस्या में अचानक से दर्द होना और बेहोश होने जैसे लक्षण देखे जाते हैं। खासकर जब कोई भी व्यक्ति लंबे समय से खड़ा हो या उसके शरीर में पानी की कमी होती है तब यह समस्या अधिक होती है। इसके अलावा कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप कई अन्य कारणों से भी हो सकता है जो इस प्रकार से हैं।

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कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप के लक्षण (Cardiovascular Syncope Symptoms)

कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप की समस्या में मरीज को अचानक दर्द और बेहोशी की समस्या होती है। डिहाइड्रेशन और लंबे समय से एक ही जगह खड़े रहने पर इसका खतरा अधिक होता है। इस समस्या में बेहोशी के अलावा दिखने वाले कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से हैं।

  • हल्का महसूस करना
  • अचानक गिर जाना
  • चक्कर आना
  • नींद या घबराहट
  • बेहोशी खासकर व्यायाम
  • दृष्टि में परिवर्तन 

कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप की समस्या का इलाज (Cardiovascular Syncope Treatment)

सामान्य तौर पर इस समस्या के लक्षण दिखने पर चिकित्सक कई तरह के परीक्षण के बाद इलाज की सलाह देते हैं। शुरुआत में इस बीमारी के कारणों को खत्म करने के इलाज किया जाता है। जिन मरीजों में यह समस्या गंभीर रूप से होती है उन्हें कई तरह के एडवांस परीक्षण से गुजरना पड़ सकता है। शुरुआत में जिन लोगों को यह समस्या होती हैं उनमें गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन जिन लोगों में यह समस्या काफी दिनों से होती हैं उन्हें कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप के कारण अपनी जान भी गंवानी पड़ सकती है। सामान्य रूप से इस समस्या का इलाज दवाओं के सेवन से ही होता है लेकिन गंभीर स्थिति वाले मरीजों में सर्जरी की भी आवश्यकता पड़ सकती है। इस समस्या में जांच के लिए चिकित्सक इन परीक्षणों की सहायता ले सकते हैं।

  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम
  • होल्टर मॉनिटर
  • इकोकार्डियोग्राम
  • टिल्ट टेबल टेस्ट
  • इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी अध्ययन
  • इम्प्लांटेबल हार्ट मॉनिटर
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इस समस्या से ग्रसित मरीजों को चिकित्सक डिहाइड्रेट होने से बचने की सलाह देते हैं। इसके अलावा मरीजों को नियमित तौर पर अपने शरीर का ब्लड प्रेशर चेक करते रहना चाहिए। ब्लड प्रेशर को संतुलत रखने से आप इस समस्या से बच सकते हैं। ऐसे लोग जिन्हें कार्डियोवैस्कुलर सिनकोप की समस्या है उन्हें लंबे समय तक एक ही जगह खड़े होने या बेहोशी के अन्य कारणों से बचना चाहिए। लक्षण दिखने पर चिकित्सक से संपर्क जरूर करें।

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