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Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

जल्दी मेनोपॉज से क्यों अल्जाइमर का रिस्क बढ़ सकता है? डॉक्टर ने समझाए कारण

Early Menopause cause Alzheimer: जिन महिलाओं को जल्दी मेनोपॉज हो जाता है, उन्हें अल्जाइमर का रिस्क बहुत ज्यादा होता है। इसके क्या कारण है, जानने के लिए पढ़ें यह लेख।

जल्दी मेनोपॉज से क्यों अल्जाइमर का रिस्क बढ़ सकता है? डॉक्टर ने समझाए कारणजल्दी मेनोपॉज से क्यों अल्जाइमर का रिस्क बढ़ सकता है? डॉक्टर ने समझाए कारण

Early Menopause cause Alzheimer: अक्सर महिलाओं को 45 साल के बाद मेनोपॉज के दौर से गुजरती है और इस दौरान उन्हें कई तरह के शारीरिक बदलावों से गुजरना पड़ता है। इस समय महिलाओं की मेंटल हेल्थ पर भी काफी असर पड़ता है। कई बार महिलाओं को 45 की उम्र से पहले भी मेनोपॉज आ जाए, तो इसका असर दिमाग या याददाश्त को भी प्रभावित करता है। जल्दी मेनोपॉज से कई महिलाओं को अल्जाइमर का रिस्क भी बढ़ सकता है, लेकिन ऐसा क्यों होता है। इस बारे में हमने गुरुग्राम के क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन (Dr. Chetna Jain Director, Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon) से बात की। उन्होंने इसे मैनेज करने के तरीके भी समझाएं।

मेनोपॉज में अल्जाइमर का रिस्क कब होता है?

इस बारे में डॉ. चेतना कहती हैं, “जिन महिलाओं को 45 साल से पहले मेनोपॉज हो जाता है, उसे जल्दी माना जाता है और इस दौरान अल्जाइमर्स का रिस्क बढ़ सकता है। इसके अलावा, जिन महिलाओं को 40 साल की उम्र से पहले मेनोपॉज होता है, उनके मेंटल और हार्मोनल सेहत पर काफी असर देखने को मिलता है। दरअसल, मेनोपॉज के साथ एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल काफी कम होने लगता है। काफी लोगों का मानना होता है कि एस्ट्रोजन कम होने का मतलब सिर्फ फर्टिलिटी से जुड़ा है, जबकि इसका मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ता है।”

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जल्दी मेनोपॉज से अल्जाइमर का रिस्क क्यों होता है?

इस बारे में डॉ.चेतना कहती हैं कि अल्जाइमर का रिस्क एस्ट्रोजन हार्मोन की कमी के चलते होता है। महिलाओं के लिए एस्ट्रोजन हार्मोन मेंटल हेल्थ के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

  1. दिमाग के लिए जरूरी - एस्ट्रोजन में न्यूरो-प्रोटेक्टिव तत्व होते हैं, जो दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं।
  2. याददाश्त की क्षमता बढ़ना - यह हार्मोन दिमाग के हिस्से में नए कनेक्शन बनाने और पुराने कनेक्शन को सेफ रखने में मदद करता है। यह हार्मोन याद रखने और सोचने की क्षमता को मजबूत करता है।
  3. दिमाग के ब्लड फ्लो में सुधार - एस्ट्रोजन दिमाग तक ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन का सही प्रवाह सुनिश्चित करते हैं।
  4. सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करना - यह दिमाग में होने वाले नुकसान और सूजन से बचाव करता है और यह अल्जाइमर के बड़े कारणों में से एक है।

कौन सी महिलाओं को अल्जाइमर का रिस्क ज्यादा होता है?

डॉ. चेतना कहती हैं, “जिन महिलाओं की ओवरीज की सर्जरी हुई है, यूटरस में रेडिएशन या कीमोथेरेपी हुई हो या फिर जिनके पीरियड्स नेचुरली 40 से पहले बंद हो जाते हैं, उन्हें अल्जाइमर या अन्य मेंटल से जुड़ी समस्याओं का रिस्क काफी ज्यादा होता है।”

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जल्दी मेनोपॉज होने पर एस्ट्रोजन हार्मोन कैसे करें मैनेज?

डॉ. चेतना ने बताया कि जिन महिलाओं को मेनोपॉज जल्दी हो जाता है, वे मेनोपॉजल हार्मोन थेरेपी करा सकती हैं। जब भी मेनोपॉज हो, तो महिला को HRT समय पर शुरू कर लेनी चाहिए क्योंकि देर से शुरू करने पर एस्ट्रोजन दिमाग पर उतना असरदार नहीं होता, लेकिन इस थेरेपी को सिर्फ और सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए। डॉक्टर महिला का पूरा चेकअप करने के बाद ही HRT की सलाह देते हैं।

हार्मोन थेरेपी न लेने पर लाइफस्टाइल में करें बदलाव

डॉ.चेतना ने महिलाओं को लाइफस्टाइल में कुछ खास बदलाव करने की सलाह दी है।

  1. रोजाना वॉक या योग जरूर करें जिससे दिमाग का ब्लड फ्लो बढ़ता है।
  2. वजन कंट्रोल में रखें क्योंकि मोटापे से अल्जाइमर का रिस्क बढ़ता है।
  3. डाइट में शुगर और प्रोसेस्ड फूड बिल्कुल न लें क्योंकि ये शरीर और दिमाग की सूजन को बढ़ाता है।
  4. जिन महिलाओं को डायबिटीज या बीपी की समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेकर इसे मैनेज करना चाहिए।
  5. दिमाग को एक्टिव रखने के लिए पहेलियां सुलझानी चाहिए।
  6. महिलाओं को अपने शौक को भी समय देना चाहिए। इससे दिमाग एक्टिव रहता है।
  7. मोबाइल स्क्रोलिंग की आदत को कम से कम करें।

निष्कर्ष

डॉ. चेतना कहती हैं कि जल्दी मेनोपॉज होना बीमारी नहीं है, लेकिन इसका असर शरीर और दिमाग दोनों पर काफी पड़ता है। इसलिए जिन महिलाओं को जल्दी मेनोपॉज होता है, उन्हें डॉक्टर से मिलकर समय पर चेकअप कराना चाहिए। इसके अलावा, महिलाओं को लाइफस्टाइल में भी बदलाव करने चाहिए ताकि अल्जाइमर का रिस्क काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Nov 07, 2025 19:37 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Nov 07, 2025 19:37 IST

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