खून की बीमारियों का समय पर पता लगाना और उनका सही इलाज करना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक जांच है ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट, जो रेड ब्लड सेल्स (RBC) को चेक करता है। ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट को आरबीसी फ्रेजिलिटी टेस्ट (RBC Fragility Test) भी कहते हैं। यह टेस्ट इस बात को समझने में मदद करता है कि आपके ब्लड वैसल्स कितनी सेंसिटिव हैं और क्या आपको खून से जुड़ी कोई बीमारी हो। यह टेस्ट खासतौर पर उन स्थितियों में किया जाता है, जहां मरीज को बार-बार एनीमिया, कमजोरी, थकान या खून से जुड़ी अन्य समस्याएं हो रही हों। यह टेस्ट सिकल सेल एनीमिया, हेरिडिटरी स्फेरोसाइटोसिस और थैलेसीमिया जैसी खून की बीमारियों की जांच में मदद करता है। आइए, इस टेस्ट की प्रक्रिया, महत्व और इससे संबंधित बीमारियों के बारे में विस्तार से बात करेंगे। इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने लखनऊ के केयर इंस्टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फिजिशियन डॉ सीमा यादव से बात की।
ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट क्या है?- What is Osmotic Fragility Test
ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट खून में मौजूद रेड ब्लड सेल्स की स्थिरता की जांच करता है। यह ब्लड टेस्ट, कोशिकाओं को अलग-अलग नमक के घोल में रखकर यह पता लगाता है कि वे कितने दबाव (osmotic pressure) को सहन कर पाती हैं। कमजोर रेड ब्लड सेल्स, कम नमक के घोल में जल्दी टूट जाते हैं, जबकि सामान्य रेड ब्लड सेल्स, ज्यादा स्थिर रहते हैं।
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ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट कैसे होता है?- Osmotic Fragility Test Process
- ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट के लिए कोई खास तैयारी की जरूरत नहीं होती है। यह एक नॉर्मल ब्लड टेस्ट है। ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट लैब या फिर डॉक्टर के क्लिनिक में भी की जा सकती है।
- नसों में ब्लड फ्लो के लिए अपर आर्म में एलास्टिक बैंड बांध देंगे, जिससे ब्लड सैंपल लेना आसान होगा।
- इस टेस्ट की पूरी प्रक्रिया नॉर्मल ब्लड टेस्ट की तरह ही होती है।
- ब्लड सैंपल को नमक के घोल में रखा जाता है।
- इसके बाद आरबीसी पर इसकी प्रतिक्रिया देखी जाती है।
- डॉक्टर इसकी जांच करते हैं कि आरबीसी में कोई असामान्यता है या नहीं।
यह टेस्ट कब किया जाता है?- When This Test is Done
- यह टेस्ट तब किया जाता है, जब किसी व्यक्ति को बार-बार खून की कमी या असामान्य रेड ब्लड सेल्स से जुड़ी समस्याएं हो रही हों। इसके अलावा, सिकल सेल एनीमिया होने पर भी यह टेस्ट किया जाता है। यह एक आनुवांशिक बीमारी है।
- हेरिडिटरी स्फेरोसाइटोसिस होने पर भी यह टेस्ट किया जाता है।
- थैलेसीमिया एक प्रकार का ब्लड डिसऑर्डर है और इसमें इस टेस्ट की जरूरत होती है।
- जब खून की कमी का कारण स्पष्ट न हो, तो यह जांच की जाती है।
ऑस्मोटिक फ्रेजिलिटी टेस्ट, खून की बीमारियों की पहचान और उनके इलाज की दिशा में एक अहम कदम है। यह सिकल सेल एनीमिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों का पता लगाने में मदद करता है। अगर किसी को बार-बार खून की कमी या असामान्य थकान हो रही है, तो इस टेस्ट के बारे में डॉक्टर से बात करें।
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