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ताम्र भस्म के सेवन से सेहत को होते हैं ये 9 फायदे, जानें इसका इस्तेमाल का तरीका और कुछ नुकसान

ताम्र भस्म के सेवन से सेहत को कई फायदे हो सकते हैँ। चलिए जानते हैं इसके फायदे और इस्तेमाल करने का तरीका-  

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ताम्र भस्म तांबे से तैयार एक आयुर्वेदिक औषधी है। आयुर्वेद में कई बीमारियों को दूर करने के लिए ताम्रभस्म का इस्तेमाल किया जाता है। गाजियाबाद स्वर्ण जयंती के आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर राहुल चतुर्वेदी बताते हैं कि ताम्र भस्म एक दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह आपको कई तरह के ब्रांड में मिल जाएंगी। ताम्र भस्म की तासीर गर्म होती है। इसलिए इसका इस्तेमाल कम को कम करने के लिए किया जाता है। यह पुराने से पुराने खांसी और कफ की परेशानियों को दूर करने में सहायक होता है। इतना ही नहीं, इसके सेवन से अस्थमा, शरीर में खून की कमी, कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने जैसी कई बीमारियों को दूर किया जा सकता है। लिवर रोगियों के लिए भी ताम्र भस्म काफी ज्यादा उपयोगी है। आज हम आपको इस लेख में ताम्र भस्म के फायदों और उपयोग करने की विधि बताने जा रहे हैँ। चलिए जानते हैं इस बारे में- 

ताम्र भस्म में मौजूद तत्व 

आयुर्वेदिक औषधी के रूप में ताम्र भस्म का इस्तेमाल काफी बड़़े पैमाने पर किया जाता है। इसमें मौजूद हेपेटोप्रोटेक्टिव, एंटी-हाइपरलिपिडेमिक, एंटी-ऑक्सी़डेंट गुण कई बीमारियों को दूर करने में असरकारी माने जाते हैं। यह सभी तत्व अस्थमा, एनिमिया, जलोदर, ट्यूमर, कैंसर, मोटापा, थायराइड, किडनी से जुड़ी बीमारी, हिचकी की समस्या, कफ इत्यादि को दूर करने में सहायक होती है। 

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ताम्र भस्म के फायदे (Health benefits of Tamra Bhasma)

1. पाचन क्रिया में सुधार

ताम्र भस्म के इस्तेमाल से उदर यानि पेट से जुड़ी बीमारियों को दूर करने के लिए किया जाता है। इसके सेवन से आप पाचन में सुधार ला सकते हैं। यह आपके पेट में मौजूद गैस, एसिडिटी को कम करके, पेट से जुड़ी तमाम परेशानियों को कम करने में सहायक होता है। 

2. यकृत विकार को करे दूर

यकृत रोग को दूर करने में ताम्र भस्म उपयोगी साबित हो सकता है। दरअसल, पेट में अग्नि मंद हो जाने से यकृत की कार्य क्षमता पर असर पड़ने लगता है। इस स्थिति में ताम्र भस्म के इस्तेमाल से यकृत विकार को कम किया जा सकता है। 

3. पित्त दोष को करे कम

शरीर में पित्त बढ़ जाने पर आप ताम्र भस्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। ताम्र भस्म पित्त दोष को कम करने में प्रभावी माना जाता है। पित्त दोष की समस्या होने पर आधी रत्ती ताम्र भस्म लें। अब इसमें 1 रत्ती स्वर्ण माक्षिका भस्म को मिलाएं। दोनों को अच्छे से मिक्स करने के बाद इसका शहद के साथ सेवन करें। इससे पित्त दोष कम होगा। 

4. हैजा रोगियों के लिए गुणकारी

हैजा रोगियों के लिए भी ताम्र भस्म का इस्तेमाल असरकारी माना जाता है। हैजा होने पर 1/4 रत्ती ताम्र भस्म लें। इसमें कर्पूर रस की 2 गोली और प्याज का रस मिक्स करें। इसका सेवन थोड़े-थोड़े अंतराल में करें। इससे हैजा रोगियों को काफी फायदा पहुंच सकता है। 

5. एनीमिया की समस्या करे दूर

शरीर में खून की कमी होने पर भी ताम्र भस्म आपके लिए असरकारी हो सकता है। हालांकि, ताम्र भस्म की तुलना में लोह भस्म एनीमिया रोगियों के लिए फायदेमंद माना जाता है। लेकिन पाचन की वजह से शरीर में खून की कमी होने पर आप ताम्र भस्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा आप लोह भस्म और ताम्र भस्म दोनों को ही एक साथ मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं। 

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6. कफ विकार को करे कम

कफ की समस्या को ताम्र भस्म के इस्तेमाल से दूर किया जा सकता है। कफ की समस्या बढ़ने पर ताम्र भस्म के साथ 1 माशा कच्चे गूलर फल के चूर्ण को मिलाएं। अब इस चूर्ण को सेवन एक साथ करें। इससे कफ विकार कुछ ही दिनों में ठीक हो सकता है।

7. भूख बढ़ाने में असरकारी

ताम्र भस्म के सेवन से भूख न लगने या फिर कम लगने की समस्या को दूर किया जा सकता है। इसके लिए लंबी काली मिर्च, शहद, अदरक का रस और ताम्र भस्म को बराबर मात्रा में मिलाएं। इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स करने के बाद इसका सेवन करें। इससे भूख न लगने की परेशानी कम हो सकती है।

8. पित्ताशय की पथरी

ताम्र भस्म के सेवन से पित्ताशय की पथरी को भी कम किया जा सकता है। इसके लिए करेले के जूस में 1 चुटकी ताम्र भस्म का नियमित रूप से सेवन करेँ। इससे पित्ताशय की पथरी धीरे-धीरे गलकर मूत्र के जरिए बाहर आ सकती है। 

9. हिचकी को करे कंट्रोल

अगर आपको हिचकी बार-बार आती है, तो इसके लिए भी ताम्र भस्म का सेवन उपयोगी माना जा सकता है। इसके लिए ताम्र भस्म के साथ नींबू का रस और लंबी काली मिर्च का पाउडर मिक्स करें। इस मिश्रण के सेवन से हिचकी की परेशानी को कम किया जा सकता है।

ताम्र भस्म के नुकसान (Side Effects of Tamra Bhasma)

ताम्र भस्म का सेवन करने से पहले एक बार चिकित्सीय सलाह जरूर लें। बिना डॉक्टर की सलाह के इसके सेवन से बचें। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि ताम्र भस्म का सेवन दिन में दो बार 30 मिलीग्राम से अधिक नहीं करना चाहिए। इससे अधिक मात्रा में ताम्र भस्म के सेवन से आपको सेहत से जुड़ी गंभीर समस्या हो सकती है। जैसे-

  • पेशाब में जलन
  • पेट में जलन और एसिडिटी
  • ब्लड प्रेशर का कम होना।
  • पीरिययड् से दौरान अधिक रक्तस्त्राव
  • नाक से खून आना
  • सिरदर्द और चक्कर आना इत्यादि।

इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को ताम्र भस्म के सेवन से बचना चाहिए। क्योंकि इससे आपको गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। साथ ही इससे गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है।

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किस स्थिति में न करें ताम्र भस्म का सेवन

  • गुदा में दरार होने पर ताम्र भस्म का सेवन करने से बचें।
  • शरीर में अधिक पित्त बढ़ने पर इसका सेवन न करें। एक बार डॉक्टर को अपनी स्थिति के बारे में जरूर बताएं।
  • पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग होने पर ताम्र भस्म का सेवन करना बंद कर दें।
  • अगर आपकी किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है, तो इसके सेवन से बचें। 
  • नाक से खून गिरना और मुंह में छाले होने पर इसका सेवन न करें। 

ध्यान रखें कि ताम्र  भस्म एक आयुर्वेदिक औषधी है। इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। जब भी आप ताम्र भस्म का सेवन करें, तो एक बार आयुर्वेदाचार्य से संपर्क जरूर करें। बिना डॉक्टरी सलाह के इसका सेवन न करें। क्योंकि अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से आपको कुछ गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

Image Credit - Pixabay and IndiaMart

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Kishori Mishra

Kishori Mishra

सब एडिटर

जागरण न्यू मीडिया (Only My Health) में बतौर सब एडिटर काम कर रही किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया में 4 साल का अनुभव है। किशोरी को हेल्थ के साथ-साथ करियर और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों की अच्‍छी समझ है। वह पिछले 4 वर्षों से इन विषयों पर लेख लिखती आ रही हैं। किशोरी ने भारतीय विद्या भवन, दिल्ली से हिन्दी जर्नजिल्म में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है।

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    Aug 24, 2021 00:00 IST

    Published By : Kishori Mishra

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