नाभि को शरीर का केंद्र बिंदु माना जाता है और यह न केवल शारीरिक ऊर्जा का केंद्र है, बल्कि इसका सीधा संबंध शरीर के कई आंतरिक अंगों और उनकी कार्यप्रणाली से भी होता है। प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धतियों में नाभि में तेल लगाने को एक लाभकारी उपाय के रूप में देखा गया है, जो शरीर के दोषों को संतुलित करने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। नाभि में ऑयलिंग करने का पॉजिटिव इफेक्ट शरीर पर पड़ता है, यह पाचन क्रिया को सुधारता है, गैस और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देता है और शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है। इसके अलावा, यह मानसिक तनाव को कम करने और बेहतर नींद लाने में मदद करता है। इस लेख में राम हंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा (Ayurvedic doctor Shrey Sharma from Ramhans Charitable Hospital) से जानिए, नाभि में कितनी बार तेल लगाना चाहिए?
नाभि में कितनी बार तेल लगाना चाहिए? - How Often To Oil Navel
डॉक्टर श्रेय के अनुसार, नाभि में तेल रात के समय लगाना सबसे लाभकारी होता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि रात को शरीर आराम की स्थिति में होता है और ऐसे में तेल अच्छे से अवशोषित होता है। जब नाभि में तेल लगाया जाता है, तो यह न केवल शरीर के दोषों को संतुलित करता है, बल्कि आंतरिक अंगों के सही कार्य को भी सुनिश्चित करता है। डॉक्टर श्रेय के अनुसार, नाभि की ऑयलिंग से पाचन क्रिया में सुधार, कब्ज की समस्या से छुटकारा और शरीर की अन्य समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। सबसे पहले, आपको नाभि और आसपास के हिस्से को साफ करना चाहिए। इसके बाद तेल का चयन शरीर के दोषों के आधार पर किया जाना चाहिए। तेल को नाभि में लगाने के बाद, हल्के हाथों से नाभि की मसाज करें। यह ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है और तेल को बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करता है।
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नाभि में डालने के लिए सबसे अच्छा तेल कौन सा है? - Which Oil Is Best For Navel Oiling
विभिन्न शारीरिक समस्याओं के लिए अलग-अलग प्रकार के तेल का उपयोग किया जाता है:
1. गैस और पेट दर्द के लिए
अगर आपको पेट में गैस की समस्या, भारीपन या पेट दर्द की समस्या होती है, तो आपको तिल का तेल में हींग मिलाकर या लहसुन मिलाकर नाभि में लगाना चाहिए। इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस की समस्या से राहत मिलती है।
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2. एसिडिटी के लिए
एसिडिटी की समस्या से निजात पाने के लिए नारियल तेल या सरसों का तेल सबसे प्रभावी रहता है। ये तेल पेट की जलन को शांत करते हैं और एसिडिटी की समस्या को कम करते हैं।
3. ड्राईनेस के लिए
अगर आपकी त्वचा ड्राई है, तो गाय का घी नाभि में लगाने से फायदा होता है। यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और शरीर को नमी प्रदान करता है।
4. वात प्रकृति के लिए
जिन लोगों को वात प्रकृति की समस्या होती है, उन्हें घी और तिल का तेल का उपयोग करना चाहिए। ये तेल वात दोष को शांत करने में मदद करते हैं।
निष्कर्ष
नाभि में तेल लगाना एक प्राचीन और प्रभावी आयुर्वेदिक उपाय है, जिसे विभिन्न शारीरिक समस्याओं के समाधान के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डॉक्टर श्रेय का कहना है कि नाभि की ऑयलिंग से न केवल पाचन प्रक्रिया में सुधार होता है, बल्कि यह कब्ज, पेट दर्द और तनाव जैसी समस्याओं से भी राहत प्रदान करता है। इसके साथ ही, शरीर के दोषों के अनुसार तेल का चयन करना बेहद जरूरी है। अगर आप नियमित रूप से नाभि में तेल लगाते हैं, तो यह आपके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
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