Fri Sep 11, 2026 | 08:22 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vikash Goyal , Cardiologist

क्या दिन में झपकी लेने से हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है? जानें डॉक्टर की सलाह

आज के तेज जीवन में नींद की कमी आम समस्या बन गई है, देर रात तक काम, स्क्रीन टाइम और मानसिक तनाव के कारण नींद पूरी नहीं हो पाती। यहां जानिए, क्या झपकी लेने से हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है?

आज के समय में देर तक काम करने, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन को लगातार देखने, घर और ऑफिस की जिम्मेदारियां, इन सब कारणों से अक्सर हमारी नींद पूरी नहीं हो पाती। नींद की कमी सिर्फ थकान ही नहीं बढ़ाती, बल्कि यह हमारे दिल की सेहत पर भी सीधा असर डालती है। ऐसे में जब नींद पूरी नहीं होती है तो लोग दिन में झपकी लेना (Nap) काफी पसंद करते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या झपकी लेने से हार्ट डिजीज का खतरा कम हो सकता है? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, पारस अस्पताल, गुरुग्राम के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, डॉ. विकास गोयल (Dr. Vikash Goyal, Senior Cardiologist at Paras Hospital, Gurugram) से बात की-

क्या झपकी लेने से हार्ट डिजीज का खतरा कम होता है? - Does Taking A Nap Reduce Heart Disease

डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि झपकी लेना यानी नैप लेना सिर्फ आराम का माध्यम नहीं है, बल्कि यह दिल के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। कई रिसर्च में पाया गया कि जो लोग रोजाना 20-30 मिनट की झपकी लेते हैं, उनके दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा कम होता है। दोपहर में थोड़ी देर आराम या नींद लेने से शरीर को समय मिलता है रीचार्ज होने का, जिससे दिल पर पड़ने वाला तनाव कम होता है। नियमित रूप से हल्की झपकी लेने वाले लोगों में ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन और स्ट्रेस हार्मोन का लेवल कंट्रोल रहता है।

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  • हार्ट डिजीज का एक प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर है। दोपहर में 20-30 मिनट की झपकी लेने से शरीर और दिमाग को आराम मिलता है। इससे नसों में तनाव कम होता है और ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।
  • कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन स्ट्रेस बढ़ाते हैं। झपकी लेने से इन हार्मोन का स्तर कम होता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
  • थोड़ी देर सोने से दिल की धड़कन नियमित रहती है। लगातार नींद की कमी से हार्ट रिद्म असंतुलित हो सकता है, जिससे अटैक या हार्ट फेल होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • जब मन शांत और शरीर तरोताजा होता है, तो यह दिल के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। मानसिक तनाव और थकान कम होने से दिल की कार्यक्षमता बेहतर रहती है।

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nap reduce heart disease

दिन में कितनी झपकी लेनी चाहिए?

डॉ. विकास गोयल के अनुसार, 20-30 मिनट की झपकी ले सकते हैं। इससे शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम मिलता है बिना नींद में गहरी लत लगने के। 1 घंटे या उससे अधिक झपकी लेने से नींद सुस्त और भारी हो सकती है, जो दिनभर की एनर्जी को प्रभावित करती है।

निष्कर्ष

दोपहर में 20-30 मिनट की हल्की झपकी लेने से शरीर और दिमाग को आराम मिलता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है और स्ट्रेस हार्मोन घटते हैं। यह दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है और हार्ट डिजीज के जोखिम को कम करने में मदद करता है। हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि झपकी रात की पूरी नींद का विकल्प नहीं है। बैलेंस लाइफस्टाइल, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट के साथ दोपहर की झपकी दिल को सुरक्षित रखने का एक सरल और प्राकृतिक उपाय है।

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FAQ

  • झपकी कितने मिनट की होती है?

    दिन की झपकी 15-30 मिनट की सही मानी जाती है। इतनी अवधि में शरीर और दिमाग को तरोताजा होने का समय मिल जाता है, लेकिन नींद की गहरी अवस्था (deep sleep) में नहीं जाता। यदि झपकी बहुत लंबी हो, जैसे 60 मिनट या उससे अधिक, तो इससे सुस्ती, आलस्य और रात की नींद में गड़बड़ी हो सकती है। 
  • दिमाग के लिए नींद कितनी जरूरी है? 

    दिमाग के सही कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद बेहद जरूरी है। वयस्कों के लिए 7-8 घंटे की नींद प्रतिदिन जरूरी मानी जाती है। नींद की कमी से दिमाग सुस्त, चिड़चिड़ा और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ हो सकता है।
  • 1 दिन में कितने घंटे नींद लेनी चाहिए?

    स्वस्थ जीवन के लिए प्रतिदिन पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। वयस्कों के लिए 7-8 घंटे, किशोरों के लिए 8-10 घंटे और बच्चों के लिए 9-12 घंटे नींद लेना उपयुक्त माना जाता है।

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Akanksha Tiwari

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Senior Sub Editor

आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Oct 06, 2025 19:12 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Oct 06, 2025 19:12 IST

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