PCOD का आयुर्वेदिक उपचार: 13 से 40 साल की महिलाओं को ज्यादा होता है पीसीओडी का खतरा, जानें लक्षण

महिलाओं में पीसीओएस या पीसीओडी रोग एक गंभीर समस्‍या है। आइए जानते हैं आयुर्वेदिक तरीकों से कैसे इस बीमीरी का उपचार कर सकते हैं।  

सम्‍पादकीय विभाग
आयुर्वेदWritten by: सम्‍पादकीय विभागPublished at: Jun 26, 2020Updated at: Jul 16, 2021
PCOD का आयुर्वेदिक उपचार: 13 से 40 साल की महिलाओं को ज्यादा होता है पीसीओडी का खतरा, जानें लक्षण

पीसीओएस (PCOS) महिलाओं से जुड़ी कई ऐसी समस्‍या है, जिसका पता देर से चलता है। महिलाएं शुरुआत में होने वाले कुछ लक्षणों को नजरअंदाज करती है, जिसके कारण उम्र बढ़ते-बढ़ते यह लक्षण पीसीओडी/पीसीओएस में परिवर्तित हो जाती है। जो उनके लिए घातक सिद्ध होती है। आज हम इस लेख में जानेंगे कि पीसीओएस या पीसीओडी क्‍या है, पीसीओडी में क्या खाना चाहिए, योग में PCOD समस्या का समाधान क्‍या है। तो आइए जानते हैं आशा आयुर्वेदा क्‍लीनिक की आयुर्वेदिक एक्‍सपर्ट डॉक्‍टर चंचल शर्मा से पीसीओडी के आयुर्वेदिक उपचार (ayurvedic treatment of pcod or pcos in hindi) के बारे में।

PCOD

पीसीओएस या पीसीओडी कौन सी बीमारी है? 

पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) या पॉली सिस्टिक ओवरी डिसऑर्डर (PCOD) एक ऐसी मेडिकल कंडिशन है, जिसमें महिलाओं में खासकर उनके प्रजनन काल में हार्मोन असंतुलन (Hormonal imbalance) देखने को मिलता है। इसमें महिला के शरीर में male हार्मोन 'एंड्रोजन' का लेवल बढ़ जाता है और ओवरीज पर एक से अधिक सिस्ट हो जाते हैं। यह समस्या आनुवांशिक रूप से भी हो सकती है और ज्यादा वज़न होने पर भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। अधिक तनावपूर्ण जिंदगी भी इसका एक मुख्य कारण हो सकता है। यह समस्या 13 से 40 वर्ष की आयु की महिलाओं में पाया जाता है। 

पीसीओडी/पीसीओएस के लक्षण: Symptoms Of PCOD/PCOS

  • अनियमित मासिक धर्म 
  • बालों का झड़ना  
  • शरीर और चेहरे पर ज़्यादा हेयर ग्रोथ 
  • पेडू में दर्द
  • मुंहासे  
  • सिर दर्द 
  • नींद की समस्याएं और मूड स्विंग आदि शामिल हैं 
  • वज़न बढ़ना आदि।  

पीसीओडी/पीसीओएस से बचाव के कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे-Pcos ayurvedic treatment

1. योग 

प्राणायाम: जब आप नियमित रूप से प्राणायाम करते है तो आप अपनी प्राण वायु का संचालन शरीर के सभी हिस्सों में करते है और शरीर में ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा रहती है।   

कपालभाति: यह चयापचय प्रक्रिया को बढ़ाता है और वज़न कम करने में मदद करता है। नाड़ियों का शुद्धिकरण करता है। पेट की मासपेशियों को सक्रिय करता है, पाचन क्रिया को अच्छा करता है और पोषक तत्वों का शरीर में संचरण करता है। मस्तिष्क और तांत्रिक तंत्र को ऊर्जान्वित करता है।

सूर्य नमस्कार: सूर्य नमस्कार करने से शरीर के हर हिस्से को फायदा होता है रोज़ाना पिछले दिन से एक बार अधिक दोहराए और जब आप बारहवीं बार तक पहुँच जाये तो रोज़ाना 12 बार दोहराएं।  

शवासन: रात को सोने के समय 2 से 3 मिनट तक शवासन करें जिससे आपको तनाव से मुक्ति होगी और नींद अच्छी आएगी। 

2. व्यायाम: 

रोज़ाना कम से कम आधे घंटे सैर करें जिससे आपका शरीर सक्रिय रहता है, और मूड भी अच्छा रहता है। 

3. एक साथ दो काम न करें: 

एक समय में एक ही काम करें अथवा जब एक काम ख़त्म हो जाए तभी दूसरा काम करें जिससे आपके शरीर के सेल्स नियमित रूप से काम करेंगे। 

4. डाइट: 

आपको हरी सब्ज़ियां और देसी गाय के दूध का सेवन करना चाहिए जिससे आपके शरीर में आयरन और कैल्शियम की कमी पूरी होगी।  

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5. गर्म पानी: 

पूरा दिन गर्म पानी या गुनगुने पानी का सेवन करें। फ्रिज की ठंडी चीजों का सेवन करने से बचें!     

6. भोजन का समय: 

बहुत से लोगो की आदत होती है दिन में थोड़ा-थोड़ा भोजन खाते रहने की लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक पहले का खाना जब तक अच्छे से पच न जाए तब तक दोबारा खाना न खाएं। इस प्रक्रिया का पालन करने से आपका पाचन तंत्र स्वस्थ रहेगा।  

7. घर के खाने का ही सेवन करें: 

हमेशा घर के खाने का ही सेवन करें क्योंकि घर का खाना पूरी तरह से साफ़ सफाई को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। 

PCOD

8. बाहर के खाने का त्याग करें: 

बाहर का चाइनीज़, इटैलियन खाना न खाएं क्योंकि यह सब मैदा से बना होता है और मैदा चिपचिपा होता है और आँतों में चिपकता है। 

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9. मौसमी फलों का सेवन करें: 

भोजन में दूध का सेवन ज़रूर करें और तरबूज, खरबूजा, लीची आदि जैसे मौसमी फलों का सेवन करें जिससे आपके शरीर में विटामिन सी की कमी पूरी हो, बेमौसमी फलों को खाने से बचे।     

10. घी का सेवन करें: 

रोज़ाना सुबह खाली पेट एक चम्मच घी का सेवन करें जो की आपके पूरे शरीर के लिए लाभदायक होता है।  

नाभि को तिल, सरसो या नारियल के तेल से पूरण करें जिससे आपका पूरा एब्डोमिनल एरिया अच्छे से काम करेगा, तिल तेल की मालिश कर नहायें जिससे आपके शरीर की वायु नियमित रहेगी। मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से पर तिल तेल की मालिश करे जिससे बहाव ठीक रहेगा। इन सभी नुस्खों का पालन करे और अगर इसके बाद भी आप पीसीओडी/पीसीओएस के लक्षण नज़र आते है तो अपने नज़दीकी आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह लें।

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