सूर्य नमस्कार करने में अक्सर लोग करते हैं ये 5 गलतियां, जानें क्या हैं ये और क्यों इन्हें करने से बचें

किसी भी योग या व्यायाम को अगर आप सही ढ़ंग से नहीं करेंगे, तो आपको इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। आइए जानते हैं सूर्य नमस्कार के दौरान की गलतियां।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Sep 11, 2020Updated at: Aug 04, 2021
सूर्य नमस्कार करने में अक्सर लोग करते हैं ये 5 गलतियां, जानें क्या हैं ये और क्यों इन्हें करने से बचें

सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक क्रम है। यह (Benefits Of Surya Namaskar) कार्डियोवस्कुलर वर्कआउट का एक प्रकार है, जो कि शरीर और दिमाग पर एक शानदार तरीके से काम करता है और स्फूर्तिदायक प्रभाव डालता है। इसके कई संस्करण हैं और उन्हें करने का विभिन्न तरीका। इन 12 पोज में कई अलग-अलग तरीके के व्यायाम है, जो कि शरीर के अलग-अलग अंगों के लिए प्रभावकारी हैं। सूर्य नमस्कार के एक चरण के दूसरे क्रम में योग आसनों में प्राणायाम से लेकर शरीर के अलग-अलग एंगल से जुड़े योग होते हैं। पर बहुत से लोग इन योगासनों को करने में गलतियां करते हैं, जिनके बारे में उन्हें कम ही पता होता है। आज हम आपको इन्हीं गलतियों से अवगत करवाएंगे।

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सूर्य नमस्कार के दौरान गलतियां (Common Surya Namaskar Mistakes)

1. सांस लेने का गलत तरीका 

श्वास पर ध्यान केंद्रित करना योग की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। तो, सूर्य नमस्कार के दौरान भी, आपके शरीर की गतिविधियां और आपकी सांसें एक ही दिशा में होनी चाहिए। ऐसे में आपको अपनी सांस लेने के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है। आपको प्राणायाम करते समय श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाना चाहिए और श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में लाना चाहिए। ये ऐसा कुछ है जो हम आम तौर पर नहीं करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये अभ्यास आपको इसे पूर्ण करने में मदद करेगा, जिससे आपको सूर्य नमस्कार करके सांस से जुड़ी परेशानियों से निपटने में मदद मिलेगी।

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2. हस्त उत्तानासन को छोड़ना

हस्ते उत्तानासन सूर्य नमस्कार के एक दौर में दो बार दिखाई देते हैं। इस आसन का उद्देश्य रीढ़ को गर्म और मजबूत करना है। यह आपकी रीढ़ की पूरी लंबाई को एक शानदार खिंचाव देता है, जिससे आप गहरी और पूरी तरह से सांस ले पाते हैं। पर अक्सर लोग इस पोज को छोड़ देते हैं। हस्त उत्तानासन को छोड़ कर, आप श्वास और गति के संतुलन को तोड़ सकते हैं। वहीं इससे आपको शरीर में आवश्यक शक्ति और खिंचाव नहीं मिल पाता है, जो कि शरीर के लिए नुकसानदेह है।

3. अश्व संचलाना करते हुए आगे नहीं बढ़ना

सूर्य नमस्कार का एक दौर, समाप्त होने से ठीक पहले, नीचे की ओर कुत्ते के पोज़ से लेकर अश्वारोही मुद्रा तक योग करना होता है। ऐसे में बहुत से लोग योग अश्व संचलाना मुद्रा में नहीं करते। वो शुरुआत तो सही करते हैं पर बीच में बीच में मुद्राओं को इस तरह से बदलते हैं, कि योगासनों का सीरिज खराब हो जाता है। इससे आपके घुटनों पर बहुत अधिक दबाव आ सकता है, जो कि बाद में मांसपेशियों के दर्द का कारण बन सकता है।

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4. चतुरंग दंडासन न करना

चार अंगों वाले स्टाफ पोज, लो प्लांक के रूप में भी जाना जाता है। इस मुद्रा को आपके शरीर को हथेलियों या पैर की उंगलियों के सहारे सीधा और ज़मीन के समानांतर होना पड़ता है। इसे न करने से आपकी निचली रीढ़ पर दबाव पड़ता है, जो कि बैसेंस नहीं हो पाता है। जब आप ऐसा करते हैं, तो निचला शरीर फर्श की ओर डूब जाता है और आपको पीठ दर्द देता है। उससे बचने के लिए, अपने पेट और शरीर की ऊपरी मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए चतुरंग दंडासन करना चाहिए।

5. योग के अलग-अलग पोज में भ्रमित न हों

कोबरा पोज और ऊपर की ओर फेसिंग डॉग पोज काफी समान हैं। आप इन में भ्रमित न हो। वहीं कुछ लोग भुजंगासन और ऊर्ध्व मुख श्वानासन एक साथ करने की गलती करते हैं। ऐसा देखा गया है कि भुजंगासन और ऊर्ध्व मुख श्वानासन करने के समान तरीके होने के कारण कुछ लोग इसे एक ही समय करने की बड़ी लगती करते हैं। ध्यान रहें कि भुजंगासन और ऊर्ध्व मुख श्वानासन दो भिन्न योग है। जिसके फायदे भी अलग है। इसलिए दोनों को एक साथ न जोड़ें, और न ही करें।

कुछ लोग सूर्यनमस्कार करने के वक्त शरीर को पूरी तरह से नीचे नहीं ले जाते हैं बल्कि हवा में लहराते हुए पहली मुद्रा में आ जाते हैं। इससे कमर पर अधिक दबाव पड़ता है और कमर दर्द की शिकायत हमेशा बनी रहती है। ऐसे में जब भी उत्तानासन करें तो सही तरीके से करें, और जल्दबाजी में न करें।

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