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ठंडी हवा की लहर में निमोनिया का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है? डॉक्टर से जानें

ठंड की लहर के दौरान निमोनिया का खतरा तेजी से बढ़ जाता है, यह एक गंभीर फेफड़ों का इंफेक्शन है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जीवन के लिए खतरा बन सकता है। यहां जानिए, शीत लहर के दौरान निमोनिया का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है?
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ठंडी हवा की लहर में निमोनिया का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है? डॉक्टर से जानें

सर्दियों का मौसम कई लोगों के लिए खुशियों का समय होता है, लेकिन इसी मौसम में निमोनिया जैसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है। जब तापमान अचानक गिरता है और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो हमारी श्वसन प्रणाली यानी रेस्पिरेटरी सिस्टम कमजोर हो जाता है और सामान्य इंफेक्शन भी गंभीर रूप ले सकता है। सामान्य परिस्थितियों में हमारे फेफड़े म्यूकस के माध्यम से बैक्टीरिया और वायरस को फंसाकर शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन ठंडी और शुष्क हवा में यह सुरक्षा कमजोर हो जाती है। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट, डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी (Dr. Pranay Sai Chandragiri, Consultant Interventional Pulmonologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad) से जानिए, ठंडी हवा की लहर में निमोनिया का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है?


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शीत लहर के दौरान निमोनिया का खतरा किन लोगों को ज्यादा होता है? - Who is at the highest risk for pneumonia during cold wave

डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी बताते हैं कि ठंडी और शुष्क हवा हमारे फेफड़ों की प्राकृतिक सुरक्षा को कमजोर करती है। ठंडी हवा श्वासनली को उत्तेजित करती है और म्यूकस की मात्रा कम कर देती है, जो सामान्य रूप से जीवाणुओं और वायरस को फंसा कर शरीर को सुरक्षा देती है। इसके परिणामस्वरूप बैक्टीरिया और वायरस आसानी से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी के अनुसार, यह प्रक्रिया बुजुर्गों और शिशुओं में और भी गंभीर हो सकती है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और फेफड़ों की सुरक्षा पहले से ही कम होती है। इसके अलावा क्रॉनिक फेफड़े या हार्ट डिजीज वाले मरीज, डायबिटीज के मरीज, धूम्रपान करने वाले लोग भी शीत लहर के दौरान निमोनिया से ग्रस्त हो सकते हैं।

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  • सर्दियों में लोग अधिकतर समय घर के अंदर या कम वेंटिलेशन वाले स्थानों में रहते हैं।
  • इन परिस्थितियों में इन्फ्लूएंजा और अन्य श्वसन वायरस तेजी से फैलते हैं।
  • इन वायरस के कारण श्वसन प्रणाली कमजोर होती है, और यह स्थिति निमोनिया को आमंत्रित करती है।

भीड़भाड़ वाले इनडोर वातावरण में सावधानी बरतना, मास्क पहनना और उचित हवादार जगह चुनना इंफेक्शन के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।

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Who is at the highest risk for pneumonia

ठंड में इम्यूनिटी कमजोर होना

सर्दियों में विटामिन D का लेवल घट जाता है क्योंकि धूप कम मिलती है। इसके साथ ही थकान और मानसिक तनाव प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा शरीर को श्वसन संक्रमणों के प्रति संवेदनशील बनाती है।

  1. डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी का कहना है कि ठंड में इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बैलेंस डाइट, पर्याप्त नींद और हल्की-फुल्की एक्सरसाइज मददगार होती है।
  2. सर्दियों में इन्फ्लूएंजा चरम पर होता है। यह वायरस न केवल श्वसन मार्ग को प्रभावित करता है बल्कि सेकेंडरी बैक्टीरियल संक्रमणों का रास्ता भी खोल देता है।
  3. डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी के अनुसार, इसलिए नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है। फ्लू वैक्सीन और pneumococcal वैक्सीन बुजुर्गों और जोखिम समूहों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती है।

निष्कर्ष

सर्दियों में निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों, क्रॉनिक रोगियों में। ठंडी हवा, कम रोशनी, फ्लू और इम्यूनिटी की कमी इसे और गंभीर बना देती है। डॉ. प्रणय साई चंद्रगिरी की सलाह है कि टीकाकरण, व्यक्तिगत सुरक्षा, गर्म रहना और समय पर इलाज अपनाकर इस गंभीर इंफेक्शन से बचाव संभव है।

All Images Credit- Freepik

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FAQ

  • ठंड में फ्लू और वायरल संक्रमण से कैसे बचें?

    मास्क पहनें, हाथ धोएं, भीड़भाड़ से बचें, हवादार स्थान चुनें और समय पर फ्लू वैक्सीन लगवाएं।
  • शीत लहर से होने वाले खतरे क्या हैं?

    ठंडी हवा से शरीर की एनर्जी जल्दी खत्म होती है, ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है और मांसपेशियों में अकड़न या दर्द हो सकता है।
  • ठंड में कौन सी बीमारियां बढ़ जाती हैं?

    निमोनिया, खांसी, जुकाम, फ्लू, अस्थमा अटैक और अन्य रेस्पिरेटरी इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

 

 

 

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  • Current Version

  • Jan 02, 2026 11:03 IST

    Published By : Akanksha Tiwari

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