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फर्टिलिटी साइकिल क्या होती है? डॉक्टर से जानें इसके फेज

फर्टिलिटी हर महिला के लिए बहुत जरूरी होती है। ऐसे में फर्टिलिटी साइकिल महिलाओं के कंसीव करने का पूरा प्रोसेस है। ऐसे में आइए जानते हैं फर्टिलिटी साइकिल क्या है? 
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फर्टिलिटी साइकिल क्या होती है? डॉक्टर से जानें इसके फेज


आज के समय में महिलाओं में इनफर्टिलिटी की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। खराब लाइफस्टाइल, डाइट और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अक्सर महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। फर्टिलिटी साइकिल अक्सर महिलाओं में हार्मोन्स के संतुलन, फर्टिलिटी, और पीरियड्स को समजने में मदद करती है। इसलिए, एक महिला के लिए ये बहुत जरूरी होता है कि वे अपने फर्टिलिटी साइकिल को अच्छी तरह समझे, ताकि उन्हें कंसीव करने में समस्या न हो। ऐसे में आइए आशा आयुर्वेदा की डायरेक्टर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार फर्टिलिटी साइकिल के फेज अलग-अलग हो सकते हैं, जिसमें महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। तो आइए जानते हैं कि फर्टिलिटी साइकिल क्या है और इसके कितने फेज होते हैं?

फर्टिलिटी साइकिल क्या होता है? - What Is Fertility Cycle in Hindi?

डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, "हर महिला के लिए फर्टिलिटी उनके जीवन में काफी महत्व रखती है। ऐसे में फर्टिलिटी साइकिल एक बायोलॉजिकल प्रक्रिया है, जिससे महिलाएं हर महीने गुजरती हैं। इस दौरान महिलाओं में एक मैच्योर अंडे के प्रोडक्शन और कंसीव करने की संभावना को बढ़ाता है। फर्टिलिटी साइकिल आमतौर पर 28 दिन की होती है। लेकिन, कुछ महिलाओं में ये प्रक्रिया 21 से 35 दिनों तक चलती है और हर महिला में अलग-अलग हो सकती है।"

फर्टिलिटी साइकिल के फेज - Fertility Cycle Phases in Hindi

डॉ. चंचल शर्मा के अनुसार, "फर्टिलिटी साइकिल के आतमौर पर 4 फेज होते हैं, जिसमें पीरियड, फॉलिक्युलर फेज, ओव्यूलेशन फेज और ल्यूटियल फेज होता है।" आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

1. पीरियड फेज

पीरियड्स किसी भी महिला के फर्टिलिटी साइकिल का पहला फेज होता है, जिसमें वे आमतौर पर 4 दिनों तक अपने योनि से खून निकलता है और इस दौरान पेट में ऐंठन, दर्द, शरीर में दर्द, मूड स्विंग आदि समस्याएं होती हैं। फर्टिलिटी साइकिल के इस फेज में हर महिला की स्थिति अलग-अलग होती है, किसी महिला को ज्यादा ब्लीडिंग होती है तो किसी को कम, किसी को ज्यादा क्रैम्प्स होते हैं तो किसी को न के बराबर।

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2. फॉलिक्युलर फेज

महिलाओं में फॉलिक्युलर फेज पीरियड्स के बाद आता है। इस दौरान महिलाओं के ओवरी में अंडा बनना शुरू हो जाता है। अंडा बनने के साथ महिला के शरीर में फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन का स्तर भी बढ़ जाता है और अंडा मैच्योर होने लगता है।

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3. ओव्यूलेशन फेज

ओव्यूलेशन फेज फर्टिलिटी साइकिल का तीसरा फेज होता है। इस फेज को फर्टिलिटी साइकिल का सबसे अहम चरण माना जाता है। इस फेज में महिलाओं के अंडाशय में अंडा फर्टिलाइज होकर बाहर आने के लिए तैयार हो जाता है। ओव्यूलेशन पीरियड में महिलाएं सबसे ज्यादा फर्टाइल होती है और बिना इस दौरान कंसीव करने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।

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4. ल्यूटियल फेज

यह फेज फर्टिलिटी का आखिरि चरण होता है, जिसमें महिलाओं का गर्भाशय प्रेग्नेंट होने के लिए तैयार हो जाता है। लेकिन, किसी कारण अगर महिलाएं कंसीव नहीं कर पाती हैं इस फेज के खत्म होने के बाद महिलाओं को दोबारा पीरियड्स आ जाते हैं, जिसके साथ ये फेज खत्म हो जाता है और दोबारा पीरियड फेज की शुरुआत होती है।

निष्कर्ष

फर्टिलिटी साइकिल के दौरान जिन महिलाओं के पीरियड्स नियमित रूप से हर महीने आता है, उनके लिए कंसीव करना और बाकी फेज को आसानी से पार करना मुमकिन होता है। लेकिन, अगर आपके पीरियड समय पर नहीं आते हैं या ओव्यूलेशन पीरियड में देरी आती है तो ये शरीर में हार्मोनल असंतुलन का संकेत हो सकता है, जो आपको कंसीव करने में समस्या का कारण बन सकता है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • फर्टिलिटी का मतलब क्या होता है?

    फर्टिलिटी, महिला और पुरुषों में बच्चा पैदा करने की नेचुरल क्षमता होता है, जिसमें महिलाओं में अंडे और पुरुषों में स्पर्म प्रोडक्शन और फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिाय होती है।
  • कौन सा विटामिन बांझपन का कारण बनता है?

    शरीर में कई विटामिन्स की कमी महिलाओं में इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है, जिसमें विटामिन डी, बी12, सी, ई और बी9 शामिल है।
  • बांझपन किसकी कमी से होता है?

    इनफर्टिलिटी की समस्या महिलाओं में किसी एक कमी से नहीं होती है, बल्कि ये शरीर में विटामिन, फोलिक एसिड और अन्य पोषक तत्वों की कमी, हार्मोनल असंतुलन, PCOS, फैलोपियन ट्यूब से जुड़ी समस्या आदि कारण हो सकते हैं।

 

 

 

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