डिलीवरी के समय ये 5 समस्याएं हो सकती हैं मां और शिशु के लिए घातक, जानें कैसे सुनिश्चित करें सेफ डिलीवरी

डिलीवरी के समय कई समस्‍याओं के चलते मां और श‍िशु की जान खतरे में पड़ सकती है, आइए जानते हैं ऐसी 5 समस्‍याएं और उनसे बचने के उपाय

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Sep 01, 2021 13:39 IST
डिलीवरी के समय ये 5 समस्याएं हो सकती हैं मां और शिशु के लिए घातक, जानें कैसे सुनिश्चित करें सेफ डिलीवरी

हर मां चाहती है क‍ि वो सेफ ड‍िलीवरी के जर‍िए स्‍वस्‍थ श‍िशु को जन्‍म दे पर कई बार ड‍िलीवरी के समय होने वाली समस्‍याओं के चलते ड‍िलीवरी का प्रोसेस लंबा हो जाता है और कुछ केस में तो मां और गर्भस्‍थ श‍िशु की जान खतरे में पड़ जाती है। ड‍िलीवरी से पहले बहुत ज्‍यादा ब्‍लीड‍िंग होना, बच्‍चे की पोज‍िशन बदलना, प्‍लेसेंटा प्र‍िव‍िआ, यूट्राइन रैप्‍चर आद‍ि कुछ समस्‍याएं हैं जो आपको परेशान कर सकती हैं। इन समस्‍याओं से बचने के ल‍िए आपको गर्भावस्‍था के दौरान और उससे पहले अच्‍छी डाइट, एक्‍सरसाइज और सही रूटीन फॉलो करना चाह‍िए। इस लेख में हम ड‍िलीवरी के दौरान या उससे पहले होने वाली समस्‍याओं पर चर्चा करेंगे और जानेंगे क‍ि इनसे कैसे बचा जा सकता है। इस व‍िषय पर ज्‍यादा जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के झलकारीबाई अस्‍पताल की गाइनोकॉलोज‍िस्‍ट डॉ दीपा शर्मा से बात की।

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(image source:cdnparenting)

1. ड‍िलीवरी से पहले ब्‍लीड‍िंग (Excessive bleeding)

अगर ड‍िलीवरी से पहले तेज ब्‍लीडिंग हो रही है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे इंफेक्‍शन, लो ब्‍लड प्रेशर, ऑर्गेन फेल होना ज‍िसके कारण मां और गर्भस्‍थ श‍िशु की जान खतरे में पड़ सकती है। प्‍लेसेंटा प्र‍िव‍िआ के कारण भी ड‍िलीवरी से पहले ब्‍लीड‍िंग हो सकती है। कुछ केस में ब्‍लड क्‍लॉट‍िंग ड‍िसऑर्डर, यूट्राइन रैप्‍चर के कारण भी ब्‍लीडिंग हो सकती है। ड‍िलीवरी से पहले ब्‍लीड‍िंग होना एक अच्‍छा लक्षण नहीं है इसल‍िए आपको गर्भावस्‍था के दौरान समय-समय पर डॉक्‍टर के पास जाकर चेकअप करवाते रहना चाह‍िए ज‍िससे शरीर में हो रहे बदलावों का पता लग सके।

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2. मैलपोज‍िशन (Malposition)

कभी-कभी ड‍िलीवरी से पहले गर्भस्‍थ श‍िशु की पोज‍िशन बदल जाती है। अगर ऐसा होता है तो डॉक्‍टर स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी करते हैं। हर गर्भस्‍थ श‍िशु की पोज‍िशन नॉर्मल ड‍िलीवरी के ल‍िए सही नहीं होती, वैसे तो पोज‍िशन डाउनवर्ड होनी चाह‍िए पर कुछ बच्‍चों की पोज‍िशन अलग भी हो सकती है। कुछ केस में गर्भस्‍थ श‍िशु गर्भनाल में लि‍पट जाता है, या उसकी पोज‍िशन ऊपर की तरफ हो जाती है तो भी ड‍िलीवरी के समय समस्‍या हो सकती है। ड‍िलीवरी से पहले पूरी तरह से बेड रेस्‍ट करने की सलाह डॉक्‍टर नहीं देते क्‍योंक‍ि इससे भी पोज‍िशन बदलने की समस्‍या आती है, आपको गर्भावस्‍था के समय थोड़ा एक्‍ट‍िव जरूर रहना चाहिए।

3. प्‍लेसेंटा प्रिविआ (Placenta previa)

placenta previa

(image source:momjunction)

प्‍लेसेंटा प्रिविआ क्‍या होता है? प्‍लेसेंटा यानी यूट्रस के अंदर बनने वाली संरचना ज‍िससे गर्भस्‍थ श‍िशु को खाना और ऑक्‍सीजन म‍िलती है। प्‍लेसेंटा, गर्भनाल के जर‍िए गर्भस्‍थ श‍िशु से जुड़ी होती है। जब प्‍लेसेंटा पूरी तरह से मां के गर्भाशय ग्रीवा को ढक लेती है तो उस स्‍थित‍ि को हम प्‍लेसेंटा प्रिव‍िआ कहते हैं। इस समस्‍या के चलते ड‍िलीवरी से पहले ब्‍लीड‍िंग हो सकती है। जो मह‍िलाएं धूम्रपान करती हैं या क‍िसी गंभीर बीमारी का श‍िकार हैं उन्‍हें ये समस्‍या हो सकती है। अल्‍ट्रासाउंड के जर‍िए प्‍लेसेंटज्ञ प्र‍िव‍िआ का पता चलता है। ज‍िन मह‍िलाओं को जेस्‍टेशनल डायब‍िटीज होती है उन्‍हें भी ये समस्‍या होने की आशंका ज्‍यादा रहती है। ये स्‍थित‍ि आने पर डॉक्‍टर तुरंत स‍िजेर‍ियन ड‍िलीवरी करने की सलाह देते हैं। 

4. डिलीवरी के समय यूट्राइन रप्‍चर (Uterine rupture)

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(image source:babydestination)

ड‍िलीवरी के समय होने वाली गंभीर समस्‍याओं में से एक है यूट्राइन रप्‍चर, कुछ केस में इस परेशानी के चलते गर्भस्‍थ श‍िशु को बचा पाना मुश्‍क‍िल हो जाता है। इसके कारण गर्भाशय छ‍िल जाता है और बच्‍चा पेट में आ सकता है, मां को इसमें ज्‍यादा ब्‍लीड‍िंग होती है। हालांक‍ि इस समस्‍या के मामले कम देखने को म‍िलते हैं। ये समस्‍या उन मह‍िलाओं में होने की आशंका ज्‍यादा रहती है ज‍िन्‍हें पहले ऑपरेशन या डिलीवरी के चलते गर्भाशय में अन्‍य सर्जरी या स्‍कार हुआ हो।यूट्राइन रप्‍चर होने पर वजाइनल ब्‍लीड‍िंग हो सकती है, गर्भस्‍थ श‍िशु के द‍िल की धड़कन अन‍ियम‍ित हो सकती है, वजाइनल ब्‍लीड‍िंग हो सकती है, मां का बीपी और हार्ट रेट अन‍ियम‍ित हो सकता है। 

5. भ्रूण का हार्ट रेट अन‍ियम‍ित होना (Abnormal heart rate of the fetal)

abnormal heart rate

(image source:squarespace)

कई बार ड‍िलीवरी से पहले गर्भस्‍थ श‍िशु का हार्ट रेट अन‍ियम‍ित हो जाता है, हालांक‍ि ये जरूरी नहीं है क‍ि हर बार इससे ड‍िलीवरी में समस्‍या हो। कई बार मां के पोज‍िशन न बदलने से गर्भस्‍थ श‍िशु का ब्‍लड फ्लो रुक सकता है, इसल‍िए डॉक्‍टर मां को पोज‍िशन बदलते रहने की सलाह देते हैं। कई बार ये समस्‍या गंभीर हो सकती है जि‍सके कारण डॉक्‍टर तुरंत ऑपरेशन कर ड‍िलीवरी करते हैं। डॉक्‍टर की सलाह के मुताबिक आप तय समय पर अल्‍ट्रासाउंड जरूर करवाएं, इससे गर्भस्‍थ श‍िशु की सेहत का अंदाज डॉक्‍टर को लगता रहेगा। 

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सेफ ड‍िलीवरी कैसे सुन‍िश्‍च‍ित करें? (How to ensure safe delivery)

safe delivery

(image source:babycenter)

  • ड‍िलीवरी होने में कुछ ही द‍िन या हफ्ते बचे हैं तो एक्‍ट‍िव रहें। आपको न‍ियम‍ित तौर पर योगा करते रहना चाह‍िए इससे लेबर पेन कम होगा और ड‍िलीवरी के दौरान होने वाली समस्‍याओं से आप बच सकेंगी। 
  • ड‍िलीवरी के दौरान स्‍ट्रेस होने से भी कई चीजें ब‍िगड़ सकती है इसल‍िए हार्ट रेट और बीपी को कंट्रोल रखने के ल‍िए तनाव कम करने के उपाय पर गौर करें और खुद को खुश और पॉज‍िट‍िव रखें।
  • ड‍िलीवरी से पहले आपको अपनी नींद पूरी करनी चाह‍िए ताक‍ि आपके शरीर में ड‍िलीवरी के समय एनर्जी हो, आपको हर द‍िन 8 से 9 घंटे की नींद पूरी करनी चाह‍िए।
  • ड‍िलीवरी की सही पोज‍िशन के बारे में नई मां को पता होना बहुत जरूरी है इसल‍िए आप ड‍िलीवरी से पहले ही अपने डॉक्‍टर से इसकी सलाह लें। 
  • ड‍िलीवरी से पहले के हफ्तों में आपको ब्रीद‍िंग एक्‍सरसाइज के तरीके भी जान लेने चाह‍िए। इससे आप सेफ तरीके से बच्‍चे को जन्‍म दे सकेंगी। ड‍िलीवरी के समय हल्‍की और गहरी सांस लेने से बॉडी र‍िलैक्‍स रहती है और मसल्‍स में ख‍िंचाव नहीं रहता। 
  • ड‍िलीवरी से पहले आपको सही न्‍यूट्र‍िशन की सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है इसल‍िए बैलेंस डाइट लें। 
  • अपनी डाइट में फल-सब्‍ज‍ियों को शाम‍िल करें, शुगर इंटेक पूरी तरह से बंद कर दें। 
  • हर द‍िन कम से कम 7 से 8 ग‍िलास पानी प‍ीएं, इससे आपकी मसल्‍स में तनाव नहीं होगा। 
  • एक स्‍टडी के मुताब‍िक जो मह‍िलाएं गर्भावस्‍था के दौरान खजूर का सेवन करती हैं वो उनकी ड‍िलीवरी अच्‍छी तरह से पूरी हो जाती है। 

आप अपनी तरफ से चाहे ज‍ितनी भी तैयारी कर लें, कुछ चीजें प्‍लान के मुताब‍िक नहीं हो सकतीं, पर तैयार रहने से आपको डिलीवरी के समय ज्‍यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। 

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