पीरियड्स के आलावा वेजाइनल ब्लीडिंग के हो सकते हैं ये 10 कारण, जानें उपाय

पीरियड्स के अलावा स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ गंभीर स्थितियों के कारण भी आपको ब्लीडिंग हो सकती है। ऐसे में इनके बारे में जानना बेहद जरूरी है।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Jan 11, 2019
पीरियड्स के आलावा वेजाइनल ब्लीडिंग के हो सकते हैं ये 10 कारण, जानें उपाय

पीरियड्स (Periods) के दिनों में महिलाओं में वजाइना (योनि) से ब्लीडिंग (रक्तस्राव) की आम समस्या है। मगर सामान्य दिनों में योनि से रक्तस्राव होना असामान्य है। कई बार पीरियड्स के दौरान भी अगर सामान्य से ज्यादा रक्तस्राव हो रहा है या ज्यादा दिनों तक ब्लीडिंग हो रही है, तो ये असामान्य हो सकता है। ज्यादातर महिलाएं इसे पीरियड्स का प्रभाव या सामान्य कारण मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कई बार बिना कारण योनि से होने वाला रक्तस्राव (Causes of Vaginal bleeding) कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है। आइए आपको बताते हैं वजाइना से होने वाला रक्तस्राव किन समस्याओं का हो सकता है संकेत।

वजाइना से असामान्य ब्लीडिंग के हो सकते हैं ये कारण- Vaginal bleeding causes

1. गर्भाशय की दीवार में सूजन

बच्चेदानी में सूजन के एक प्रमुख लक्षणों में से एक है वैजाइनल ब्लीडिंग। दरअसल, बच्चेदानी में सूजन का कारण एंडोमेट्राइटिस (Endometriosis) भी है। इस दौरान गर्भाशय के भीतरी परतों में सूजन आ जाती है और लंबे समय तक इसका उपचार ना करवाने से ये गंभीर रूप ले कर असामान्य ब्लीडिंग का कारण होता है। इसके अलावा गर्भाशय की दीवार में सूजन बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण भी हो सकती है जिसमें भी ब्लीडिंग की संभावना रहती है।

2. गर्भाशय में फाइब्रॉइड (गांठ) का होना

असामान्य ब्लीडिंग गर्भाशय में फाइब्रॉइड (गांठ) का होना का सबसे आम लक्षण है। अगर ट्यूमर गर्भाशय गुहा के भीतर या गर्भाशय की परत के पास स्थित है, तो ये पीरियड्स के अलावा भी ज्यादा ब्लीडिंग होने का कारण होता है। ऐसे में डॉक्टर को दिखा कर इसका इलाज करवाना जरूरी है। 

3. अचानक ज्यादा वजन घट जाने के कारण

असामान्य ब्लीडिंग और अचानक से वजन घटने के बीच वैसे तो कोई रिश्ता नहीं है पर कई बार देखा गया है कि वजन का आपके शरीर के हार्मोन संतुलन पर प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार, कम वजन होने से स्पॉटिंग या अनियमित रक्तस्राव हो सकता है

 4. अचानक से वजन बढ़ जाने के कारण

तनाव और डायबिटीज जैसे बीमारियों में कई बार तेजी से वजन बढ़ने लगता है और जिसके कारण असामान्य ब्लीडिंग हो सकती है। दरअसल, ये दोनों ही स्थितियां हार्मोनल डिसबैलेंस की ओर ले जाती हैं और कई बार पीसीओडी (PCOD) का कारण बनती हैं। जिसकी वजह से भी पीरियड्स के अलावा ब्लीडिंग होती है। 

5. गर्भाशय में पॉलीप्स का होना (गर्भाशय की दीवार पर ढेर सारे छोटे-छोटे उभार)

गर्भाशय में पॉलीप्स का मतलब है कि गर्भाशय की दीवार पर ढेर सारे छोटे-छोटे उभार, जो कि र्भाशय ग्रीवा यानी कि योनि और गर्भाशय के बीच की संरचना है पर विकसित होते हैं,। कुछ मामलों में, पॉलीप्स असामान्य ब्लीडिंग का कारण बन सकता है और इसे हटाने की जरूरत हो सकती है।

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6. गर्भाशय, योनि या अंडाशय का कैंसर होना

गर्भाशय में कैंसर (Uterus Cancer) ज्यादातर उन महिलाओं को प्रभावित करता है जो मेनोपॉज तक पहुंच चुकी हैं। इसका मतलब है कि उनके पास अब उन्हें पीरियड्स नहीं हो रहा है और ये अनियमित ब्लीडिंग गर्भाशय कैंसर का लक्षण है। 

7. पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक ऐसी स्थिति है जो अनियमित पीरियड्स का कारण बन सकती है, साथ ही पीरियड्स के बीच कुछ ब्लीडिंग भी हो सकता है। अन्य लक्षणों में प्रजनन क्षमता की समस्याएं, वजन बढ़ना, ऑयली स्किन और मुंहासे होना आदि शामिल हैं। अंडाशय कैंसर, अंडाशय में होता हैं। इसमें असामान्य रूप से कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाती हैं और संक्रमण का कारण बनती है। जब ये प्रक्रिया शुरू होती हैं, तो इसके एक लक्षणों में वजाइन ब्लीडिंग भी है।

8. गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग या आईयूडी डिवाइस के प्रयोग के कारण

पीरियड्स के अलावा अनियमित ब्लीडिंग का कारण गर्भनिरोधक दवाएं भी हो सकती हैं। दरअसल, ये हार्मोनल डिसबैलेंस पैदा करती हैं जिससे अनियमित रक्तस्राव तोता है। यह आमतौर पर गर्भनिरोधक का उपयोग करने के पहले 3 महीनों के दौरान ही होता है। इसके अलावा आईयूडी डिवाइस के प्रयोग के कारण भी वजाइनल ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। 

9. गर्भाशय का संक्रमण (इंफेक्शन) हो जाना

यूटरेस इंफेक्शन या डिस्चार्ज कभी-कभी मूत्र पथ से संबंधित समस्याओं से भी जुड़ा होता है। दरअसल, इस दौरान इंफेक्शन के कारण गर्भाशय में बैक्टीरिया कोशिकाओं को तेजी नुकसान पहुंचाने लगती है, जिसके चलते संक्रमण बढ़ने पर ब्लीडिंग होने लगती है। 

10. गर्भाशयम में ट्यूमर होना 

गर्भाशयम में ट्यूमर होने के कारण भी महिलाओं में असामान्य ब्लीडिंग की समस्या देखी जाती है। अगर ट्यूमर गर्भाशय गुहा के भीतर या गर्भाशय की परत के पास स्थित है, तो यह ज्यादा ब्लीडिंग का कारण हो सकता है। ऐसे में आपको इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए। 

थायरॉइड की समस्या

थायरॉइड आपके चयापचय (मेटाबॉलिज्म) को कंट्रोल करने वाले महत्वपूर्ण हार्मोन्स पैदा करता है। थायरॉइड के अनियमित हो जाने पर ऊर्जा की कमी, भूख में वृद्धि या भूख की कमी, ऐंठन, जोड़ों का दर्द, बाल झड़ना और नाखून टूटना, अचानक वजन बढ़ना या घटाना और जठरांत्र संबंधी समस्याएं जैसे दस्त आदि समस्याएं हो सकती हैं। तो यदि इन लक्षणों के साथ अगर असामान्य ब्लीडिंग होती है, तो संभवतः यह थायराइड के कारण है।

गर्भनिरोधक दवा का असर

अगर आप गर्भधारण की रोकथआम के लिये किसी बर्थकंट्रोल दवा का सेवन कर रही हैं या हाल में ही आपने कोई नए ब्रांड की गर्भनिरोधक दवा खानी शुरू की है तो भी ब्लीडिंग हो सकती है। गर्भनिरोधक दवाओं से लेकर योनि गर्भनिरोधक छल्ले तक स्‍पॉटिंग के कारण बन सकते हैं। ऐसा इसलिये क्योंकि ये सभी अपने शरीर के हार्मोन के स्तर में बदलाव कर देते हैं, और अप्रत्याशित रक्तस्राव कारण बनते हैं।

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इन बातों का रखें ध्यान

  • अगर आप ब्लीडिंग की समस्या को नजरअंदाज करती हैं और चिकित्सक को नहीं दिखाती हैं, तो गर्भाशय को नुकसान पहुंच सकता है।
  • अगर आपको 7 दिन से ज्यादा लगातार ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
  • अगर आपको पीरियड्स में दर्द हो रहा है या कुछ असामान्य लग रहा है, तो चिकित्सक से संपर्क करें।

ध्यान रहे कि अगर आपको 90 दिनों से ज्यादा समय से पीरियड्स नहीं आया है, तो डॉक्टर से मिलकर इसका कारण जानें। अगर पीरियड्स के दौरान भी आपको बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही है, तो चिकित्सक से मिलना जरूरी है।

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