जानिये क्यों होता है थायराइड रोग और कितनी महत्वपूर्ण है थाइराइड ग्रंथि

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 31, 2018
Quick Bites

  • थायराइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
  • थायरायड को कुछ लोग साइलेंट किलर मानते हैं।
  • थायराइड ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है।

आजकल की बिजी लाइफ स्टाइल और अस्वस्थ खान-पान के कारण थायराइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। थायरायड को कुछ लोग साइलेंट किलर मानते हैं क्योंकि इसके लक्षण बहुत देर में पता चलते हैं। आमतौर पर महिलाएं इस रोग का ज्यादा शिकार होती हैं। थायरायड ग्रंथि गर्दन में श्वास नली के ऊपर, वोकल कॉर्ड के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है। ये तितली के आकार की होती है। थायराइड ग्रंथि थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाती है। इस हार्मोन से शरीर की एनर्जी, प्रोटीन उत्पादन एवं अन्य हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता कंट्रोल होती है। ये ग्रंथि शरीर में मेटाबॉलिज्म की ग्रंथियों को भी कंट्रोल करती है।

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थायराइड के लक्षण

थायराइड की वजह से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है इसलिए इसकी वजह से शरीर में कई अन्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। थायराइड के सामान्य लक्षणों में जल्दी थकान, शरीर सुस्त रहना, थोड़ा काम करते ही एनर्जी खत्म हो जाना, डिप्रेशन में रहने लगना, किसी भी काम में मन न लगना, याद्दाश्त कमजोर होना और मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना शामिल हैं। इन सभी समस्याओं को आम समझकर ज्यादातर लोग इग्नोर करते रहते हैं जो बाद में खतरनाक साबित हो सकता है और कई बार तो जानलेवा साबित हो सकता है।

थायराइड ग्रंथि क्या है

थायराइड कोई रोग नहीं बल्कि एक ग्रंथि का नाम है जिसकी वजह से ये रोग होता है। लेकिन आम भाषा में लोग इस समस्या को भी थायराइड ही कहते हैं। दरअसल थायराइड गर्दन के निचले हिस्से में पाई जाने वाली एक इंडोक्राइन ग्रंथि है। ये ग्रंथि एडमस एप्पल के ठीक नीचे होती है। थायराइड ग्रंथि का नियंत्रण पिट्यूटरी ग्लैंड से होता है जबकि पिट्यूटरी ग्लैंड को हाइपोथेलमस कंट्रोल करता है। थायराइड ग्रंथि का काम थायरॉक्सिन हार्मोन बनाकर खून तक पहुंचाना है जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म नियंत्रित रहे। ये ग्रंथि दो प्रकार के हार्मोन बनाती है। एक टी3 जिसे ट्राई-आयोडो-थायरोनिन कहते हैं और दूसरी टी4 जिसे थायरॉक्सिन कहते हैं। जब थायराइज से निकलने वाले ये दोनों हार्मोन असंतुलित होते हैं तो थायराइड की समस्या हो जाती है।

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कैसे होती है जांच

किसी शारीरिक समस्या के लिए जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो सबसे पहले वो इसके लक्षणों द्वारा रोग की पहचान करता है। अगर डॉक्टर को थायराइड की संभावना समझ आती है, तो वो खून में टी3, टी4 और टीएसएच हार्मोन की जांच करता है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड के द्वारा थायराइड और एंटी थायराइड टेस्ट होता है। असल में थायरायड ग्रंथि में कोई रोग या वायरस नहीं होता है। शरीर में जब पिट्युटरी ग्लैंड ठीक तरह से काम नहीं करता तो थायरायड स्टिमुलेटिंग हार्मोन (टीएसएच) यानि थायरायड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाला हार्मोन ठीक तरह से नहीं बन पाता और इसकी वजह से थायराइड से बनने वाले टी3 और टी 4 हार्मोन्स में असंतुलन आ जाता है।

बच्चे भी हो रहे हैं शिकार

आजकल थायराइड जैसी गंभीर बीमारी का शिकार कम उम्र के बच्चे भी हो रहे हैं जिसकी वजह से उनका शारीरिक और मानसिक विकास रुक जाता है। इससे बचाव के लिए बच्चों को बचपन से ही नियमित व्यायाम, योग और प्रणायाम की आदत डालें। सिर्फ पढ़ते रहने, टीवी देखने, गेम खेलने या लेटे रहने के बजाय बच्चों को बाहर निकलने और थोड़ा खेलने के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा बचपन से शारीरिक मेहनत नहीं करेगा तो आगे चलकर उसे थायराइड, डाइबिटीज, ओबेसिटी, बल्ड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बनना पड़ सकता है।

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