क्या गर्भाशय में फाइब्रॉइड (रसौली) बन सकता है बांझपन का कारण? एक्सपर्ट से जानें फाइब्रॉइड के कारण, लक्षण, इलाज

30 से अधिक वर्ष की महिलाओं को रसौली होने का खतरा अधिक रहता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं इसके लक्षण, कारण और बचाव-

Kishori Mishra
Written by: Kishori MishraPublished at: Jan 15, 2021
क्या गर्भाशय में फाइब्रॉइड (रसौली) बन सकता है बांझपन का कारण? एक्सपर्ट से जानें फाइब्रॉइड के कारण, लक्षण, इलाज

महिलाओं के गर्भाशय में होने वाले असमान्य विकास को रसौली कहते हैं। यह एक तरह का ट्यूमर है, जो महिलाओं के गर्भाशय में होता है। इस ट्यूमर की वजह से यूटेराइन का कैंसर का खतरा भले ही ना हो, लेकिन कुछ मामलों में रसौली के कारण यूरेटाइन कैंसर देखे गए हैं। गर्भाशय में गांठ होने की समस्या 25 से 40 साल की महिलाओं को अधिक होती है। ऐसी महिलाएं जिनमें एस्ट्रोजन अधिक होता है, उन्हें रसौली और कैंसर का खतरा अधिक रहता है। कुछ मालों में रसौली के कारण पीरि़यड्स में तेज दर्द और ब्लीडिंग की शिकायत ज्यादा होती है। 

इस बारे में गाजियाबाद स्थित अनायाज क्लीनिक की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर नीरा सिंह कहती हैं कि रसौली के कारण महिलाओं को कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। महिलाओं को फायब्रॉइड की समस्या क्यों होती है। इस बारे में कहना मुश्किल है। लेकिन आमतौर पर अनुवांशिक कारणों से महिलाओं को रसौली यानी फायब्रॉइड होने की समस्या होती है। आंकड़ों  की बात करें तो हर पांच में से एक महिला गर्भाशय में रसौली की परेशानी से जूझ रही हैं। मोटापे से ग्रसित महिलाओं को रसौली होने की संभावना अधिक होती है। इसके अलावा शरीर में हार्मोंनल बदलावों के कारण भी रसौली की समस्या हो सकती है। रसौली या फायब्रॉइड को आम भाषा में बच्चेदानी की गांठ होने की समस्या भी कहते हैं। यह गांठे महिलाओं के गर्भाशय के ऊपर या फिर आसपास ज्यादा उभरती हैं। ऐसे में इस बीमारी के कारण महिलाओं में बांझपन का खतरा बढ़ जाता है। चलिए विस्तार से जानते हैं रसौली के लक्षण, कारण और उपचार क्या हैं? 

फाइब्राॅइड यानी गर्भाशय में गांठ के कारण (Causes of Fibroids in Hindi)

डॉक्टर बताती हैं कि गर्भाशय में रसौली का कारण आनुवांशिक हो सकता है। अगर परिवार में किसी भी महिला को रसौली की परेशानी है, तो हो सकता है आगे की पीढ़ी को भी यह समस्या हो। इसके साथ शरीर में हार्मोनल बदलावों के कारण भी गर्भाशय में गांठ की परेशानी हो सकती है। इसके अलावा प्रेग्नेंसी, बढ़ती उम्र, मोटापा जैसे अन्य कारणों से भी रसौली की शिकायत होती है। हालांकि, रसौली की परेशानी से डरने की जरूरत नहीं है। क्योंकि इस बीमारी का इलाज संभव है और इससे कैंसर होने का खतरा काफी ज्यादा कम है।

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इन लोगों को होता है रसौली का खतरा अधिक

  • गर्भवती महिलाओं को रसौली का खतरा अधिक रहता है।
  • अगर परिवार में किसी महिला को फाइब्रॉइड्स रहा है, तो आपको भी रसौली होने का खतरा हो सकता है। 
  • अधिक वजन होने पर रसौली का खतरा रहता है।
  • 30 वर्ष से अधिक महिलाओं को रसौली होने का खतरा अधिक रहता है।

रसौली के लक्षण (Symptoms of Fibroids in Hindi)

  • पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होना।
  • नाभि के नीचे पेट और पीठ के निचले हिस्से में काफी दर्द रहना।
  • पेट में सूजन जैसा महसूस होना।
  • एनीमिया की शिकायत होना।
  • अधिक पेशाब आना
  • पीरियड्स के दौरान अधिक दर्द होना।
  • यौन सम्बन्ध बनाते समय काफी दर्द होना।
  • पीरियड्स अनियमित होना।
  • पेट पर दबाव और भारीपन बने रहना।
  • कब्ज की शिकायत होना।
  • काफी कमजोरी रहना।
  • प्राइवेट पार्ट से अधिक खून आना।
  • पैरों में दर्द।

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रसौली की जांच (Diagnosis of Fibroids in Hindi)

रसौली की जांच के लिए डॉक्टर्स आपको निम्न टेस्ट की सलाह देते हैं। 

  • अल्ट्रासाउंड
  • लैब टेस्ट

अगर इन टेस्ट के माध्यम से ट्यूमर साफ नजर नहीं आते हैं, तो आपको अन्य टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है। 

  • मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (MRI)
  • हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy)
  • हिस्टेरोसलपिंगोग्राफी (Hysterosalpingography)
  • हिस्टेरोसोनोग्राफी (Hysterosonography) 

रसौली का उपचार (Treatment of Fibroids in Hindi)

डॉक्टर बताते हैं  कि गर्भाशय में गांठ का इलाज किस तरह किया जाए, इस बात पर निर्भर करता है कि आपमें किस तरह के लक्षण दिख रहे हैं। अगर आपको रसौली के कोई भी लक्षण दिख नहीं रहें हैं, तो इसका इलाज जरूरी नहीं होता है। लेकिन इसके लिए नियमित रूप से जांच की जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ यह रसौली सिकुड़ने लगती है। इसके साथ ही अगर रसौली के लक्षण आप में नजर आते हैं, तो आपको डॉक्टर्स निम्न इलाज करवाने की सलाह दे सकते हैं।  

  • दवा से करते हैं इलाज
  • इसके अलावा मामला गंभीर होने पर आपको डॉक्टर्स सर्जरी करवाने की सलाह दे सकते हैं।  

रसौली का घरेलू उपचार (Home Remedies of Fibroids in Hindi)

इन 5 घरेलू उपायों से रसौली की परेशानी करें दूर 

1. सुबह खाली पेट खाएं लहसुन

सुबह खाली पेट लहसुन खाना आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही अच्छा होता है। रसौली के रोगियों के लिए भी खाली पेट कच्ची लहसुन खाना फायदेमंद है। लगातार 2 महीने तक कच्ची लहसुन खाएं। इससे आपको काफी बेहतर रिजल्ट मिलेंगे। 

2. केस्टर ऑयल और अदरक के रस का करें सेवन

दिन में दो बार और रात में केस्टर ऑयल और अदरक के रस को मिलाकर सेवन करें। इससे गर्भाशय के गांठ छोटे होंगे। इसके साथ ही आपकी समस्या धीरे-धीरे खत्म हो सकती है।   

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3. सेब का सिरका 

सुबह और शाम गर्म पानी के साथ सेब का सिरका पिएं। इससे रसौली में होने वाली समस्याओं सो निजात मिलेगा। इसके साथ ही यह गर्भाशय के गांठ को बढ़ने नहीं देगा। 

4. पानी का करें अधिक सेवन 

गर्भाशय में गांठ से पीड़ित रोगियों के लिए पानी का अधिक से अधिक सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। रसौली की बीमारी होने पर अधिक से अधिक पानी का सेवन करें।

5. हल्दी भी है फायदेमंद

रसौली से ग्रसित महिलाओं के लिए हल्दी भी गुणकारी साबित हो सकता है। हल्दी का सेवन आप जितना करेंगे, उतना आपके लिए बेहतर है। हल्दी में मौजूद गुण आपके शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ को नष्ट करेंगे। हल्दी में एंटीबॉयोटिक गुण पाए जाते हैं, तो फायब्रॉइड की ग्रोथ को रोकते हैं। साथ ही यह कैंसर होने का खतरा कम करता है।  

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