क्या डेंगू को झेल चुके लोगों में है कोरोना से लड़ने की ज्यादा इम्यूनिटी? शोध में हुआ बड़ा खुलासा

शोध में डेंगू को झेल चुके लोगों में विकसित हुई एंटीबॉडी और कोरोना संक्रमण को लेकर संबंधों का अध्ययन किया गया है।

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Sep 22, 2020
क्या डेंगू को झेल चुके लोगों में है कोरोना से लड़ने की ज्यादा इम्यूनिटी? शोध में हुआ बड़ा खुलासा

भारत में मानसून आमतौर पर मच्छर जनित बीमारियों से जुड़ा होता है, मुख्य रूप से डेंगू बुखार, जो इन दिनों तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, इस साल लोगों का ध्यान कोरोनावायरल संक्रमण की ओर ज्यादा है और डेंगू की तरफ कम। पर हाल ही में आए शोध ने डेंगू के बुखार और कोरोनावायरस को लेकर एक चौंकाने वाला संबंध बताया है। दरअसल इस शोध में बताया गया है कि जिन लोगों को कभी डेंगू हुआ था, उन लोगों में बाकी लोगों की तुलना में कोरोना से लड़ने की ज्यादा इम्यूनिटी है। आइए विस्तार से जानते हैं इस शोध के बारे में।

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क्या कहता है शोध?

ब्राजील में कोरोनावायरस के प्रकोप का विश्लेषण करने वाले एक नए अध्ययन में डेंगू बुखार और कोरोनावायरस के फैलाव के बीच कुछ संबंधों की स्टडी की है। ड्यूक विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर मिगुएल निकोलिस के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन की मानें, तो डेंगू के प्रसार के साथ कोरोनावायरस मामलों के भौगोलिक वितरण में कमी दिखी। यानी कि जिन लोगों को कभी डेंगू हुआ उन लोगों को कोरोनावायरस नहीं हुआ।

अध्ययन में डेंगू वायरस एंटीबॉडी और नॉवल कोरोनावायरस का जिक्र करते हुए कहा गया है, "डेंगू के फ्लेविवायरस सेरोटाइप और सार्स-सीओवी-2 के बीच एक इम्यूनोलॉजिकल क्रॉस-रिएक्टिविटी की पेचीदा संभावना को पैदा करता है। अगर सही साबित हुआ तो, इस परिकल्पना का मतलब हो सकता है कि डेंगू संक्रमण कोरोनावायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा संरक्षण के कुछ स्तर को और मजबूत बना सकता है। निकोलिस ने रॉयटर्स को बताया कि पिछले अध्ययनों से पता चला है कि डेंगू एंटीबॉडी वाले लोगों में कोविड-19 के प्रति अलग तरह की इम्यूनिटी विकसित की है। निकोलिस ने कहा, "इससे यह संकेत मिलता है कि दो वायरसों के बीच एक इम्यूनोलॉजिकल इंटरेक्शन है जिसकी कोई भी उम्मीद नहीं कर सकता था, क्योंकि दोनों वायरस पूरी तरह से अलग परिवारों से हैं।

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शोध में टीम को डेंगू फैलने और लैटिन अमेरिका के अन्य हिस्सों में कोविड-19 के धीमे फैलाव के साथ-साथ प्रशांत और हिंद महासागर में एशिया और द्वीपों के बीच इसी तरह का संबंध मिले हैं। हालांकि, अध्ययन कई सारे सवाल और खड़े करता है। वहीं भारत जैसे देश के लिए, जहां साल 2019 में डेंगू के करीब 70,000 से अधिक मामले थे, ये एक अच्छी खबर है। इसका मतलब यह हो सकता है कि हर्ड प्रतिरक्षा हमारे लिए एक दूर का सपना नहीं है, बल्कि एक संभावित वास्तविकता है।

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हालांकि इस स्टडी के हिसाब से ये कहा नहीं जा सकता कि ये हर किसी के लिए सही हो। जरूरी नहीं कि डेंगू हो चुके हर व्यक्ति में ऐसी ही इम्यूनिटी हो। लेकिन चूंकि अध्ययन प्रतिरक्षा के स्तर के बारे में सही से नहीं बताता, ऐसे में कोरोनावायरस के खिलाफ इम्यूनिटी को लेकर हम ज्यादा कुछ कह नहीं सकते। शोधकर्ता इस प्रासंगिक सवाल का भी जवाब नहीं देते कि डेंगू द्वारा दी जाने वाली प्रतिरक्षा शरीर में कब तक रहती है। ऐसे में हम सबको कोरोनावायरस के खिलाफ सफाई और सोशल डिस्टेंसिंग की मदद से लड़ाई लड़नी होगी। तो मास्क और सैनिटाइजर को कभी न भूले और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए , सही खान पान के साथ अपनी इम्यूनिटी बिल्डअप करें।

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