Fri Sep 11, 2026 | 09:14 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

बुजुर्गों में कब्ज, अपच, गैस जैसी समस्याएं हैं आम, इन मसालों के इस्तेमाल से मिल सकता है आराम

बुजुर्ग अक्‍सर इम्‍यून‍िटी कमजोर होने या पाचन समस्‍याओं के कारण बीमार हो जाते हैं। बुजुर्गों को सेहतमंद रहने के ल‍िए क‍िचन के मसालों का सेवन करना चाह‍िए। क‍िचन के मसाले न स‍िर्फ शरीर को मजबूती देते हैं बल्‍क‍ि इम्‍यून‍िटी बढ़ाकर बीमार‍ियों से बचाव करते हैं। जानते हैं ऐसे कुछ मसालों के बारे में। 

आजकल तमाम तरीके के सप्‍लीमेंट्स और दवाएं आ गईं हैं ज‍िससे बुजुर्गों को स्‍वस्‍थ रखा जा सकता है, लेक‍िन पुराने जमाने में जब ज्‍यादा दवाएं नहीं थीं तब क‍िचन के मसाले ही हर मर्ज का इलाज बना करते थे। मेरी दादी बताती थीं क‍ि उनके जमाने में कोई सप्‍लीमेंट शब्‍द का अर्थ जानता नहीं था क्‍योंक‍ि कभी इसकी जरूरत ही नहीं पड़ती थी, बुजुर्ग हेल्‍दी डाइट लेते थे, क‍िचन के सभी मसालों को घर पर पीसकर इस्‍तेमाल क‍िया जाता था ज‍िससे सभी की इम्‍यून‍िटी मजबूत रहती थी, यही कारण है क‍ि पुराने जमाने में लोग नब्‍बे या सौ साल जीते थे। बुजुर्गों की सेहत के ल‍िए क‍िचन के मसाले फायदेमंद होते हैं। धन‍िया, सौंफ जैसे ठंडी तासीर वाले मसाले बुजुर्गों के पाचन तंत्र को स्‍वस्‍थ रखकर गैस, अपच, कब्‍ज जैसी समस्‍याओं के ख‍िलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस लेख में जानेंगे ऐसे ही कुछ मसाले और उनके फायदे जो बुजुर्गों की सेहत को बेहतर बनाते हैं।

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1. धन‍िया, छोटी इलायची, जीरा, हल्‍दी है फायदेमंद- Consume Dhaniya, Green Cardamom, Cumin, Turmeric

Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana ने बताया क‍ि अगर व्‍यक्‍त‍ि की पित्त प्रकृति है, तो हम उसे धन‍िया, छोटी इलायची, जीरा का सेवन करने की सलाह देते हैं। जीरा में कैल्‍श‍ियम होता है, यह हड्ड‍ियों की कमजोरी को दूर करता है और इसका सेवन करने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है। हल्‍दी का सेवन सभी के ल‍िए है इसल‍िए इसे सभी प्रकृत‍ि वाले लोग ले सकते हैं। हल्‍दी से इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है और ल‍िवर की हेल्‍थ बेहतर होती है।

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2. गर्म तासीर वाले मसाले- Hot Spices

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  • बुजुर्गों को सर्द‍ियों में बड़ी इलायची, अजवाइन, सूखा अदरक और काली म‍िर्च का सेवन करना चाह‍िए।
  • कब्‍ज की समस्‍या है, तो अजवाइन का सेवन सीमि‍त मात्रा में करें।
  • बड़ी इलायची के सेवन से ह्रदय स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है।
  • बड़ी इलायची को गर्म दूध के साथ लेंगे, तो अन‍िद्रा की समस्‍या दूर होगी।

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3. बुजुर्गों के ल‍िए ठंडी तासीर वाले मसाले हैं फायदेमंद- Cold Spices Are Beneficial In Old Age

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  • बुजुर्गों की सेहत के ल‍िए धन‍िया, छोटी इलायची और सौंफ जैसे ठंडे मसालों को प्राथम‍िकता देनी चाह‍िए।
  • बुजुर्गों में धन‍िया के सेवन से पाचन बेहतर होता है, जोड़ों का दर्द दूर होता है और सूजन कम करने में मदद म‍िलती है।
  • छोटी इलायची खाने से इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है और गैस, कब्‍ज से राहत म‍िलती है।
  • सौंफ खाने से पाचन संबंध‍ित समस्‍याएं दूर होती हैं और आंखों की रोशनी बेहतर होती है।

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4. लाल म‍िर्च से बचें- Avoid Red Chilli In Old Age

  • बुजुर्गों को लाल म‍िर्च का सेवन नहीं करना चाह‍िए इससे एस‍िड‍िटी हो सकती है।
  • काली म‍िर्च की सीमि‍त मात्रा ही बुजुर्गों के ल‍िए सुरक्ष‍ित मानी जाती है। इसका ज्‍यादा सेवन करने से बचें।
  • बुजुर्गों को ज्‍यादा मात्रा में लौंग, तेजपत्ता या हींग खाने से भी बचना चाह‍िए वरना गैस्‍ट्र‍िक जलन हो सकती है।

न‍िष्‍कर्ष:

बुजुर्गों की सेहत के ल‍िए धन‍िया, छोटी इलायची, सौंफ जैसे मसाले फायदेमंद माने जाते हैं। इनकी तासीर ठंडी होती है। सर्द‍ियों में बड़ी इलायची, अजवाइन, सूखा अदरक और सीमि‍त मात्रा में काली म‍िर्च का सेवन भी कर सकते हैं। लाल म‍िर्च लेने से बचना चाह‍िए।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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