मैं जब से पैदा हुई हूं, हमने कई घर बदले, कई शहर बदले पर एक चीज जो वैसी की वैसी है वो है दादी की बनाई परंपरा। मां बताती हैं कि जब उनकी शादी हुई थी, तो दादी ने एक नियम बनाया था कि बाजार से मसाले नहीं लाए जाएंगे बल्कि वो उसे घर पर ही सिलबट्टे पर तैयार करेंगी। हमारे घर में काठमांडू से एक सिलबट्टा लाया गया था और तब से उसी पर हर महीने मसाले पीसकर तैयार किए जाते हैं। पहले यह काम दादी किया करती थीं, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद मां आज भी दादी की परंपरा को निभाते हुए सिलबट्टे पर ही मसालों को तैयार करती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिलबट्टे पर पिसे मसाले सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। स्वाद की बात करें, तो मैं इतना ही कहूंगी कि एक बार अगर आपने सिलबट्टे पर पिसे मसालों का स्वाद चख लिया, तो पैकेट वाले मसालों को आप कभी नहीं चखना चाहेंगे। इस लेख में जानेंगे कि आखिर पुराने जमाने में सिलबट्टे पर पिसे मसालों को खाने की आदत सेहत के लिए क्यों फायदेमंद है?
30 सालों से खा रही हूं सिलबट्टे पर पिसे मसाले

मेरे घर में हमेशा से मैंने सिलबट्टे पर पिसे मसालों का सेवन किया है। जब मैं काम के लिए दिल्ली जा रही थी, तो मां ने मुझे सारे मसाले पीसकर डिब्बे में दिए थे। जब मसाले खत्म हो गए, तो मुझे पैकेट वाले मसाले खाने पड़े, तब समझ आया कि घर पर पिसे मसालों की बात ही कुछ और है। बचपन में मेरी दादी, मां और बुआ मिलकर मसाला बनाया करती थीं, उन दिनों पूरे घर में ताजे मसालो की खुशबू घुल जाती थी। मसालों की वह ताजी सुगंध मुझे 30 साल भी महसूस होती है।
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सिलबट्टे पर पिसे मसाले ज्यादा सेहतमंद होते हैं
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, मसालों को पीसने के तरीकों से उनके गुणों पर असर पड़ता है। अगर आप कम तापमान और नियंत्रित प्रक्रिया से मसालों को पीसकर खाएंगे, तो सेहत को ज्यादा फायदे मिलेंगे। सिलबट्टे पर मसालों को पीसने से उनमें ज्यादा गर्मी नहीं बनती जिससे उनके प्राकृतिक पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और स्वाद भी बरकरार रहता है। यानी सिलबट्टे या पत्थर पर पिसे मसालों का स्वाद ज्यादा अच्छा होता है और इनकी खुशबू भी बेहतर होती है।
कम मात्रा में ज्यादा असर दिखाते हैं घर पर पिसे मसाले

जिन मसालों को हम घर पर पीसकर तैयार करते हैं उनमें कोई मिलावट नहीं होती है। ये आसानी से पच जाते हैं। घर पर पिसे मसालों में रंग, केमिकल्स या प्रिजर्वेटिव्स नहीं होते। हल्दी, जीरा, धनिया जैसे मसालों का सेवन करके इम्यूनिटी बढ़ती है। इन मसालों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इन मसालों की कम मात्रा ही काफी होती है।
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मसाले और आटे की ठंडी पिसाई फायदेमंद है
Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana ने बताया कि मसालों के पोषक तत्व बरकरार रखने के लिए ठंडी पिसाई फायदेमंद है जैसे आटे या मसालों को घर पर या चक्की पर तैयार करना। जो मसाले फैक्ट्री में मशीनों से बनते हैं उनमें ज्यादा हीट प्रोड्यूस होती है और इससे पोषक तत्व कम हो जाते हैं, जबकि मसालों या आटे काे ताजा पीसने से उनका स्वाद और गुण बरकरार रहते हैं।
पैकेट में बिक रहे मसालों से बचना जरूरी है
पैक्ड मसालों में रंग, स्टार्च और सस्ते पदार्थ मिलाए जाते हैं। प्रोसेसिंग के कारण मसालों के पोषक तत्व कम हो जाते हैं। पैकेट वाले मसालों में प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल होता है। मसालों को पैकेट में लंबे समय तक रखने से मसालों की गुणवत्ता घट जाती है। इन मसालों का लगातार सेवन करने से पाचन समस्या या एलर्जी हो सकती है।
निष्कर्ष:
सिलबट्टे पर पिसे मसाले, बाजार में मिलने वाले मसालों के मुकाबले ज्यादा ताजे और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनका सेवन करने से सेहत बेहतर रहती है और शरीर में हानिकारक केमिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाव होता है।
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FAQ
सर्दियों में कौन से मसालों का सेवन फायदेमंद है?
सर्दियों में अदरक, दालचीनी, हल्दी, काली मिर्च, लौंग और इलायची का सेवन फायदेमंद होता है। ये मसाले शरीर को गर्म रखते हैं और सर्दी-जुकाम से बचाने में मदद करते हैं।मसालों को पीसने का सही तरीका क्या है?
मसालों के पोषक तत्वों को बचाने के लिए उसे हल्का सुखाकर फिर सिलबट्टे पर पीस लें। इससे मसालों के प्राकृतिक तेल और पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं।कौन से मसालों से इम्यूनिटी बढ़ती है?
शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए डाइट में दालचीनी, लौंग, काली मिर्च, लहसुन, हल्दी और अदरक जैसे मसालों का सेवन करें। इनमें एंटी बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।
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Current Version
Jan 30, 2026 18:59 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jan 30, 2026 18:59 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Shrey Sharma