Tue Oct 13, 2026 | 06:58 PM IST

Medically Reviewed by Rhitika Sharma , Nutrition and Dietetics

रोज चिप्स और बिस्किट खाना कहीं सेहत न बिगाड़ दे, पैकेट वाले फूड्स से बढ़ सकती हैं 5 समस्याएं 

पैकेटबंद फूड्स खाने की आदत लोगों को कई गंभीर बीमारियां दे रही है। जो लोग रोज ही पैकेटबंद खाना खाते हैं, वे जरूरत से ज्यादा नमक, फैट्स और प्रिजर्वेटिव्स ले रहे हैं। रोजाना ऐसे खाने से कौन-सी बीमारियां हो रही हैं, जानने के लिए पढ़ें यह लेख।
रोज चिप्स और बिस्किट खाना कहीं सेहत न बिगाड़ दे, पैकेट वाले फूड्स से बढ़ सकती हैं 5 समस्याएं 
रोज चिप्स और बिस्किट खाना कहीं सेहत न बिगाड़ दे, पैकेट वाले फूड्स से बढ़ सकती हैं 5 समस्याएं 

आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में पैकेट वाला खाना काफी सुविधाजनक लगता है। भूख लगी तो चिप्स का पैकेट खोल लिया, नाश्ते में पैकेज्ड सीरियल ले लिया या समय कम हो तो रेडी-टू-ईट खाना गर्म करके खा लिया। अगर यह आदत कभी-कभार है, तो दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर पैकेटबंद खाना रोज का हिस्सा बन जाए, तो परेशानी शुरू हो सकती है। रोजाना पैकेटबंद चिप्स और बिस्कुट खाने से सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं, जानने के लिए Rhitika Sharma, Senior Dietitian (Nutrition Consultant), Sarvodaya Hospital, Faridabad Sarvodaya Hospital, Faridabad, से बात की।

पैकेटबंद फूड्स से होने वाली 5 बीमारियां

Rhitika Sharma के अनुसार, “जो लोग लंबे समय से पैकेटबंद फूड्स जैसे बिस्कुट, चिप्स या नमकीन खा रहे हैं, तो वे अपने शरीर में जरूरत से ज्यादा शुगर, नमक, सैचुरेटेड फूड्स और कार्ब्स ले रहे हैं। इससे कई तरह की समस्याएं होने का रिस्क बढ़ सकता है।

BMJ Journals में प्रकाशित रिसर्च को साल 2009 से 2023 तक के उपलब्ध डेटा का विश्लेषण किया गया है। इसमें 71% स्वास्थ्य मापदंडों पर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के इस्तेमाल का सीधा और नेगेटिव प्रभाव पाया गया है। इसमें बताया गया है कि हार्ट से जुड़ी बीमारियों से मृत्यु का रिस्क 50% में वृद्धि हुई है। टाइप 2 डायबिटीज और एंग्जायटी होने का खतरा बढ़ा है। इसके अलावा, मोटापा, नींद से जुड़ी संबंधी बीमारियां और सांस से जुड़ी समस्याएं होने का रिस्क बढ़ा है।

1. मोटापा

Rhitika Sharma ने बताया कि पैकेट वाले कई स्नैक्स, बिस्कुट, केक और नूडल्स में कैलोरी बहुत ज्यादा हो सकती हैं। इसमें शुगर और फैट की मात्रा ज्यादा होने के साथ-साथ फाइबर कम हो सकता है। इस वजह से खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होने के बावजूद बार-बार खाने का मन हो सकता है। लगातार जरूरत से ज्यादा मीठा, नमक और कैलोरी खाने के कारण मोटापे की समस्या बढ़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर पैकेट वाला खाना वजन बढ़ाएगा, लेकिन रोजाना ऐसे पैकेटबंद फूड्स पर निर्भर रहने से वजन कंट्रोल करना मुश्किल बना सकता है।

2. हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क

Senior Dietitian Rhitika Sharma ने कहा, “चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट, पैकेज्ड सूप और कई रेडी टू ईट फूड में सोडियम यानी नमक की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है। जब लंबे समय तक शरीर को जरूरत से ज्यादा नमक मिलता है, तो ब्लड प्रेशर का रिस्क बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर के शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते और इस वजह से लोगों को काफी समय तक हाई बीपी की समस्या का पता नहीं चल पाता, लेकिन समय पर इलाज न मिलने की वजह से हार्ट और ब्लड वेसल्स को प्रभावित कर सकता है।”

3. डायबिटीज

Rhitika Sharma कहती हैं, “कुछ पैकेटबंद फूड्स में शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स काफी ज्यादा होते हैं। मीठे ड्रिंक्स, ब्रेकफास्ट सीरियल्स, कुकीज, केक और मीठे फूड्स में कुल कैलोरी बढ़ सकता है। इससे वजन बढ़ने का रिस्क बढ़ सकता है। वजन बढ़ने से टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क हो सकता है। अगर किसी की फैमिली हिस्ट्री डायबिटीज की है, तो उन्हें पैकेट वाले मीठे और रिफाइंड फूड्स की मात्रा पर खास ध्यान देना चाहिए।” packed food disesespacked food diseses

यह भी पढ़ें- पेट की चर्बी बढ़ना या पूरे शरीर का वजन बढ़ना, दिल की सेहत के लिए क्या है ज्यादा खतरनाक? डॉक्टर से जानें

4. हार्ट से जुड़ी बीमारियां

Senior Dietitian Rhitika Sharma के अनुसार, जब रोजाना पैकेज्ड फूड्स खाते हैं, तो उसमें सैचुरेटेड फैट्स और सोडियम हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, जबकि ज्यादा सैचुरेटेड फैट LDL (खराब कोलेस्ट्रोल) को बढ़ा सकता है और HDL को कम कर सकता है। इसके साथ, लोगों को इस बात का भी बहुत ध्यान रखना चाहिए कि अगर परिवार में हार्ट से जुड़ी बीमारियां हैं, तो पैकेटबंद खाना कम से कम रखें। इससे हार्ट हेल्थ को बेहतर रखना आसान हो सकता है।

5. पाचन और आंतों से जुड़ी बीमारियां

Rhitika Sharma कहती हैं, “कई पैकेटबंद फूड्स में फाइबर की मात्रा काफी कम होती है। वहीं, फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज में फाइबर अच्छा होता है। अगर रोज के खाने में पैकेट वाले स्नैक्स ज्यादा और नेचुरल फूड्स कम हो जाए,तो शरीर में फाइबर की कमी हो सकती है। इसका असर डाइजेशन और आंतों पर पड़ सकता है। कई लोगों को कब्ज की समस्या भी हो सकती है।”

रिसर्च क्या कहती हैं?

Advances in Nutrition के मुताबिक, इस रिसर्च में 25 प्रोस्पेक्टिव कोहोर्ट अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड लेने से डायबिटीज का रिस्क 37% बढ़ा, वहीं हाइपरटेंशन और मोटापा 32% बढ़ा है। ये सभी रिस्क फैक्टर हार्ट की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह

Senior Dietitian Rhitika Sharma लोगों को सलाह देती हैं कि पैकेज्ड फूड खरीदने से पहले पैकेट के पीछे लिखे न्यूट्रिशनल फैक्ट्स को जरूर पढ़ें, ताकि आपको सोडियम, चीनी, सैचुरेटड फैट्स और फाइबर की जानकारी मिल सके। इसलिए पैकेट के सामने लिखे हेल्दी, नेचुरल या मल्टीग्रेन जैसे शब्दों पर भरोसा न करें, बल्कि ingredients को जरूर पढ़े ताकि आपको पता चल सके कि पैकेटबंद स्नैक्स वाकई हेल्दी है या नहीं।

यह भी पढ़ें- पैकेट वाले दूध के ज्यादातर ब्रांड्स ब्लाइंड टेस्ट में फेल, जानें क्या Tetra Pack वाला दूध है ज्यादा सुरक्षित?

निष्कर्ष
Rhitika Sharma कहती हैं कि पैकेटबंद फूड को रोजाना डाइट का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। कभी-कभार बिस्कुट, चिप्स या नूडल्स खाया जा सकता है, ताकि शरीर में जरूरत से ज्यादा नमक और शुगर न जाए। लोगों को रोजाना अपनी डाइट में मौसमी फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और नट्स शामिल करने चाहिए। इससे शरीर को सभी तरह के पोषक तत्व मिल सकते हैं।

All Image Credit: Magnific

Read Next

→ इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) में कौन से फल खाएं और कौन से नहीं? एक्सपर्ट से जानें

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Aug 27, 2026 17:52 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Rhitika Sharma